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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Srivallabharaj kumar jhulaavat srinavaneet priye palnaan .
Part1-096
श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत श्रीनवनीत प्रिये पलनाँ । गावत गुण गोविंदके चहुँ दिस जुरि सगरी व्रजकी ललनों ॥॥१॥ ब्रज रानी लड़ावत लावत है उरमें लाल सम भूतलनाँ । मोहन विद्डजननाथ कृपा करि पाइये और बछौ बलनाँ ॥२॥
Ramkali
Dekhari dekh anand kanda.. chitt chaatak prem ghana
Part2-366
देखरी देख आनंद कंद॥ चित्त चातक प्रेम घन लोचन चकोर सुछंद॥१॥ चलत कुंडल गंडमंडित झलक ललित कपोल॥ सुधारसजनु मकर क्रीडत इन्दुदंड हिंडोल॥२॥ सुभग कर आनन समीप हरि मुरलिका यह भाय॥ मानों उभय अंभोज भाजन लेत सुधा भराय ॥३ ॥ स्यथाम देह दुकूल छ्युति छबि लसत तुलसीमाल ॥ तडित घनसंयोग मानों सेनकाशुकजाल ॥४ ॥ अलक अविरल चारुहास विलास भरुकुटी भंग॥ सूर हरिकी निरख शोभा भई मनसापंग ॥५ ॥
Sorat
Herry herire bhaiya herry herire ..dhru.. sakal kaaj pooran
Part1-056
हेरी हेरीरे भैया हेरी हेरीरे ॥ध्रु॥ सकल काज पूरन भये नैनन देखे आज । रानी जसुमति ढोटा जायो आयौ ब्रजमें राज ॥१॥ उपनंद कहें नंदसों मेरे मनकौ भाव । उठि किन बाबा नाचहू आज भलौ बन्यो है दाव ॥२॥ नाचनकों बाबा उठे संगलिये बड़े ग्वाल । मलकत थोंदा हालही निरखि हँसी व्रजबाल ॥३॥ उपनंद कहे तब नंदसों गैया सकल मैंगाई । नांदीमुख पूजा करें सब विप्रन दई बुलाई ॥४॥ बहोत भाँति बस्तर दिये जैसो जाकौ लाग । काहूकों पटुका दिये काहू दीनी पाग ॥५॥) काहूकों चादरि दई काहू दीनी खोर ॥! काहूकों दुपटा दिये करि करि पीरे छोर ॥६॥ काहूकों झगुला दिये काहू दई कवाई । काहू दीनी पावरी सब बागे दिये बनाइ ॥७॥ माधो ग्वाल सबसों कहे सुबस बसो व्रजवास । श्रीजसुमतिजू के लाड़िले हम कबहूँ न छोॉंडे पास ॥८॥
Gori
Tum podhon houn sez banaaun.. champon charan raho paatotar madhure sur
NityaPad-343
तुम पोढों हों सेज बनाउं॥ चांपों चरन रहो पाटोतर मधुरे सुर केदारो गाउं !।९॥ सहचरी चतुर सबे जुर आइ दंपति सुख नेनन दरसाऊं ॥ आसकरन प्रभु मोहन नागर यह सुख श्याम सदा हों पाउं॥। २॥। (छ राग अडानो पं) मेरे लाडिलेहो लाल अजहून नींदकरों पलनां न सोहायतो गोदले सुवाऊं॥|ध्रु.॥ आर छांडो गीत गाऊं हालरो हुलराउ ग्वालनके मुखकी कहानी सुनाउं ॥१॥ कोनधों भवन आये काहूकी नजर लगी भोर ऋषिराज रक्षा बंधाउं ॥ मेरे ब्रजड़श तुम एसी बुझो न रीस भोरहो कुंवर कान्ह झगुली सिवाउं ॥२॥
Bihagaro
Hansat gopal kahat gopan soun kinn merrie gend churai joo. suni hoe sthaam humm jaani ..|
Part2-239
हँसत गुपाल कहत गोपन सों किन मेरी गेंद चुराई जु। सुनि हो स्थाम हम जानि ॥| लई तुम मिलन मिस जूठी लगाई जु ॥१॥ ग्वालन संग खेलत हें नीके इन को लालच आई जु। बात बनावत नैंन चलावत इनमें कहा भलाई जु॥।२॥ लेहो ढंढोर कौन पें गेंदुक तुम पें लाल कहा आँई जु॥ 'कुंभनदास' प्रभु गोवर्थनधर धर इक गई द्वे पाई जु॥३॥
Dhanashri
Tanak pyaay deree paani yeh miss gayo baake geh ..
NityaPad-278
तनक प्याय देरी पानी यह मिस गयो बाके गेह ॥ समज सोच भर लाई जल अचवावन को ओक ढीली करि फेर वाईको मुख चितयो तब ग्वालन मुसकानी ॥१॥ बे जल वेसेंहू डायों फेर जल भरि लाई हों अचवाय न जानो बोली मधुरी सी बानी । चतुर बिहारी तुम प्यासे हो तो पानी पियो नातर पांओ धारीये रावरी प्यास मैं जानी ॥२॥
Saarang
Bhor hii thhaanat hoe kitt jhagaro .. aaeen gaeen sadaa ihi
Part1-222
भोर ही ठानत हो कित झगरो ॥ आईं गईं सदा इहि मारग किनहूँ न रोक्यो डगरी ॥१॥ तब मुसिकाय कही मन मोहन नंदकौ लाल अचगरी रहिरी ग्वालि जोबन मदमाती लेहुँ छीन दधि सगरौ ॥२॥ काहेकौ छोटा नैन नचावत निकट है ब्रजराजकी नगरी । परमानंद प्रभु यही विधि बिहरत रूप रासि गुण अगरी ॥३॥
Devgandhaar
Kusum sez podhe dampati karat russ batiyaan |
NityaPad-346
कुसुम सेज पोढे दम्पति करत रस बतियां | त्रिविध समीर सीरो उसीर रावटी मध खसखाने सींचे सुभग जोरावत हे पिय छतियां ॥१॥ कपोलसों कपोल दिये भुजसों भुज भिड़े कुच उतंग दिये उर राजत हे भतियां । नन्ददास प्रभु कनक पर्यकपर सब सुख विलसत केलि करत मोहन एक गत मतियां ॥२॥
Bihaag
Navrangilal vihariho .. terein kachhle baap dwemahataari
Part3-103
नवरंगीलाल विहारीहो ॥ तेरें कछ्ले बाप द्वेमहतारी ॥भ्रु०॥ नवरंगीले नवल विहारी ॥ हम देंहि कहा कहट्ठि गारी ॥१॥ द्वेबाप सबे जगजाने ॥ सोतो भेद पुरान बखानें || वसुदेव देवकी जाये ॥॥ सोतो नंदमहरकें आये ॥२॥ हम बरसानेकी नारी ॥ तुहेदेहें हँसिहँसि गारी ॥ तेरी भूआ कुंतीरानी ॥ सोतो सूरज देखि लुभ्यानी ॥३॥ तेरी बहनि सुभद्राक्वारी ॥ सोतो अर्जुन संग सिधारी ॥ द्वुपद सुतासी तेरी भाभी ॥ सोतो पांचपुरुष मिलि लाभी ॥४॥ हमजाने जू हमजाने ॥| तुम उषल हाथ बंधाने ॥ हम जानी बात पडचानी ॥ तुम कबते भये दधिदानी ।॥|५॥ तेरी मायानें सब जग ढूंढ्यो ॥ कोई छोड्योन बारो बूढ्यो | जनकृष्णा गारी गावे ॥ तब हाथ थारकों लावे ॥६॥
Bihaag
Srivallabh srivallabh shree balalabh kripa nidhan atee udaar
NityaPad-005
श्रीवललभ श्रीवल्लभ श्री बललभ कृपा निधान अति उदार करुनामय दीनद्वार आयो ॥ कृपाभर नयनकोर देखीये जु मेरी ओर जन्म जन्म शोध शोध चरण कमल पायो ॥ १॥। कीरति चहूं दीश प्रकाश दूर करत विरहताप संगम गुण गान सदा आनन्द भर गाऊं ॥ विनती यह मान लीजे अपनो हरिदास कीजे चरणकमल वास दीजे बलि बलि बलि जाऊं ॥।२॥
Bibhaas
Lalnaan laal tum sanga khelaungi .. lai gulal
Part3-279
ललनाँ लाल तुम सँग खेलौंगी ॥ लै गुलाल मुख माँडों तिहारो पिचकाईन रुँँग पेलौंगी ॥१॥ तुम मेरे मुख सौंधों लाओ अंजन दे दृग॒ लैहॉंगी ॥ क्‍यों सकुचति हो फाग के अबसर सुख ले सुख तुम दैहींगी।। २।॥| बहुत दिनन की आसा पूरन भई फगुवा मन भायो लैहौंगी ॥ वलल्‍लभ पिय सौं मिलि रस विलसौं अधर पान ते विरह विधा सब पेलॉंगी ॥३॥
Sorat
Honandlalbina naan rahuun..| mansawacha aur karmana hitaki
NityaPad-093
होनंदलालबिना न रहूं॥| मनसावाचा और कर्मणा हितकी तोसोंकहूं ॥ १॥| जोकछु कहोसोईसिर ऊपरसोहोंसबेसहूं ॥ सदासमीप रहूं गिरिधर के सुंदर वदनचहूं॥। ३।। यहतनअर्पणहरिकोंकीनो वहसुखकहालहूं।। परमानंदमदनमोहनके चरणसरोजगरहूं | ३।।
Dhanshree
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