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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Radhika rasik gopal kii bhaanbati .. gahe curr tala kamal | Part1-355 | राधिका रसिक गोपाल की भाँबती ॥ गहे कर तल कमल
केलि लीला सहित सेज सुख रति रंग लटकती आबती ॥१॥ सघन वृंदाबिपिन
तरुन तनिया तीर सरदको चंद्रमा सरस प्रफुलामती ॥ पहरि आभरन चीर
सरस सुकुमार तन सौरभ रुचिर पाईन लगावती ॥२॥ भ्रौंह नृत्यत मदनरूप
जोबन सिखर सिंधु गोवरधनधरन मन उपजावती ॥ कहै कृष्णदास प्रभु चतुर
तें चतुर अति संग मिलि सुरति पीय मधुर कल गावती ॥३॥ | Kedaro |
Raaja main daani suniken aayou .. munn ichcha curry chalyau dooriten | Part1-216 | राजा मैं दानी सुनिकें आयौ ॥ मन इच्छा करि चल्यौ दूरितें
घटदरसन मैं पायो ॥१॥ भली भई विप्र तुम आये आवतही सुख छायो ॥
जो माँगौ सो देहुं तुर्तही कहिये मनकौ भायौ ॥२॥ रिद्धि सिद्धि सकल गृह
मेरे भूमिके कारन धायौ ॥ अपनी सूर सर्वसु लै दीनी तब पाताल पठायौ ॥
| Dhanashri |
Maan naan keejiye peeya saun nagri naveli naar | Part3-358 | मान न कीजिए पीय सौं नागरी नवेली नार
यह होरी के दिनन को ॥ अबीर गुलाल केसर चोवा चंदन घनसार मृगमद
मलय कपूर सुवासन धरे हे बिबिधि रैंग तो बीनु लागति सब फीको ॥१॥
अधर बिंब ललित प्रवाल करि सिंगार मृगनैनी दसनन हूती तेरी नब जोबन
अंग-अंग जगमग जोति रसिक प्रीतम को ॥ चले क्यों न भिरिधरनलाल
सो हिलिमेलि आली और अनेक सब सुनि री नागरी भोजन पाछे का
अचवन घृत को ॥२॥ | Kanharo |
Phuli dwamveli bhantibhanti .. navavasant sobha kaheen | Part3-046 | फुली द्वमवेली भांतिभांति ॥ नववसंत सोभा कहीन
जात ॥ अंगअंग सुख विलसत सघन कुंज ॥ छिनछिन उपजत आनंदपुंज
॥ १॥ देखि रंगरंगे हरखेनेन || श्रवनन पोषत पिक मधुपवेन | सुख दायक
नासाअति अमोद ॥ रसना बहुस्वादन बहुविनोद ॥२॥ कुसुमन कुसुमाकर
सुहाय ॥ त्रिविध समीर हृदो सिराय ॥ दास चत्रभुज प्रभु गुपाल ॥ वनविहरत
गिरिधरन लाल ॥३॥
| Basant |
Khelat hain hari anand horry || kartal taal bajabant | Part3-061 | खेलत हैं हरि आनंद होरी || करतल ताल बजाब॒त
गावत्त रामकृष्ण की जोरी ॥१॥ ऋतु कुसुमाकर कामदेव पिय माखन दूध
दही की चोरी ॥ जाके भवन कछु नहि पावत ताके चले उठि भाजन फोरी
॥२॥ देखत गोपी सुंदर लीला घूंघट और हँसि मुख मोरी ॥ 'परमानंद'
स्वामी बहु रंगी सब थों सुख देखि कर पौंरी ॥३॥ | Basant |
Useer mahalmein raajat douu jan . sees tiparo sohe lalke shwet saaree fabi rahee | NityaPad-252 | उ सीर महलमें राजत दोऊ जन । सीस टिपारो सोहे लालके श्वेत सारी फबी रही
प्यारी तन ॥१॥ आसपास ब्रजयुव॒ति ठाडी करत विंजना बारत तन मन ।
*चतुर बिहारी' दंपति अद्भुत छबरि बरन सके एसो को है कविजन ॥२॥ | Saarang |
Sharad ujiyari cassie neeki laagai nicus kunjaten thaadhe ... | Part1-355 | शरद उजियारी कैसी नीकी लागै निकस कुंजतें ठाढ़े ॥।
बरन बरन फूल फूलनके आभूषण सोधे भीजे बागे ॥।१॥ गावत राग रागिनिसों
मिलि मन मिल्यौ जति केदारो रागे ॥ हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी
क्रछुक रजनी जागे ॥२॥ | Kedaro |
Gwalin goras naikun charwau .. tyaunari tein otti jamaayo | Part1-249 | ग्वालिन गोरस नैकुं चरवाउ ॥ त्यौनारी तें ओटि जमायो
ताकी किजे भाउ ॥१॥ किते बकत बेकाम बिकाजे ओरन देत जनाउ ॥
मदन गुपाल मोल दे लेंहें तू काहे कों रिसाउ ॥२॥ कहा करें संकित मुसिकानी
रस लंपट बज राउ ॥ 'परमानद' नंद नंदन सौं नयो नेह नयो चाउ ॥३॥ | Saarang |
Srivallabh jembat russ rung bheene . atee rangbhini | Part2-327 | श्रीवल्लभ जेंबत रस रंग भीने । अति रंगभीनी
सन्मुख ठाड़ी थार हाथ में लीने ।। १।। करि-करि सेनन अंग दिखावत
लालन मन बज कीने । रामदास अचवाय प्रभुको बीरा करमें दीने ।। २।।
| Sarang |
Kripa avalokani daan dey ree mahadani vrishbhan kumari .. | Part1-241 | कृपा अवलोकनि दान दे री महादानी वृषभान कुमारी ॥
त्रेषित लोचन चकोर मेरे तुव बदन इंदु किरन पान दे री ॥१।| सब विधि
सुघर सुजान सुंदरि सुनि बिनति तू कान दे री ॥ गोर्विंदप्रभु पिय चरण परस
कह्यौ याचककों तूमान दे री ॥२॥ | Saarang |
Sunder shyam chhabilo dhota daar gayo mope madan thagori .. | NityaPad-162 | सुंदर श्याम छबीलो ढोटा डार गयो मोपे मदन ठगोरी ॥
निर्तत गावत वेनु बजावत संग सखा हलथर की जोरी ॥१॥| कबहुंक गेंदन मार
नचावत ग्वाल भजावत हें चहु ओरी ॥ चंचल बाजत चावत धावत कबहुंक
आय होत ईक ठोरी ॥ २॥ कुंदनलाल लाल लो चन छबि-शीश पगा ओढे पीत
पिछोरी ॥ सूरदास प्रभु मोहन मागर कुहांरि करूँ क्िनी जगजोरी ॥।३॥ | Bilawal |
Raadhe tere nayankendhombat paare.. | NityaPad-103 | राधे तेरे नयनकेंधोंबट पारे।।
अखियन डोरे चटक रहे हे घूंमत जो मतवारे ॥१॥
अंजन दे पियको मनरंजत खंजन मीनमृग हारे ॥
सूरदासप्रभु के मिलवेकों नाचत ज्यों नटवारे ॥ २॥ | Nat |
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