top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Baat kahat aapasamen baadar .. indra pathaaye curry humm aadar ...1 .. | Part2-086 | बात कहत आपसमें बादर ॥ इंद्र पठाये करि हम आदर ॥।१ ॥
अब देखियत कछु होत निरादर ॥ वरख वरख घन भये मनकादर ॥२॥
खीजत मेघ कहत सबहीसों॥ वररित्र कहा कीनों तबहीसों ॥३ ॥
महा प्रलयको जल कहां राखत॥ डारदेहो वब्रजपर कहा ताकत ॥४॥
क्रोध सहित वरषन फिरलागे॥ ब्रजवासी आनंद अनुरागे ॥५ ॥
ग्वाल कहत धन्य धन्य कन्हैया ॥ वाम भ ुजा गिरि लियो उठैया ॥६॥
सूरश्याम तुम सर कोऊ नाईं ॥ वरषत घन गिरि देख रिस्याईं ॥७ || | Bilawal |
Mohan deho busson hamaare .. | NityaPad-033 | मोहन देहो बसन हमारे ॥
जाय कहों ब्रजपतिजूके आगें आगें करतअनीतललारे ॥१॥
तुम ब्रजराजकुमारलाडिले औरसबहिनके प्राण पियारे॥
गोविंदप्रभु पियदासीतिहारी सुंदरवरसुकुमारे ॥। २॥॥ | Ramkali |
Yashomati munn abhilash karey . kaba mero mohan ghaturuvan | Part1-145 | यशोमति मन अभिलाष करे । कब मेरो मोहन घटुरुवन
रैंगे कब द्वैक पग धरनी धरे ॥१॥ कब दतियाँ दै दूधकी देखों कब तोतरे मुख
बचन उचरे। कब अरु नंदबबा कहि टेरे कब मैया कहि मोहि रैै ॥२॥ कब
मेरी अंचर गहि मोहन दे दै कहि मोसों झगरे ! कबधों तनक तनक कछु खेहै अपने
कर ले मुखहि भरे ॥३॥ कब हँसि बात कहैगो मोसों यह सुख सब दुख दूरि
करे । श्याम अकेलौ अँगना छाँडिके आप गई कछु काम घरै ॥४॥ आयोौ
तृणा अघवाय उज़यौ तब गरजत गगन सहित गहरे ) सूरदास सब लोक सुनत
ध्वनि जो जहाँ सो तहाँ अति भय भरे ॥५॥ | Ramkali |
Pranpyari prannath douu sanga mill karat bhojan saghan kunjamen russ bharey .. | NityaPad-211 | प्राणप्यारी प्राणनाथ दोऊ संग मिल करत भोजन सघन कुंजमें रस भरे ॥
कनक पात्रन मध्य बिविध बिजन सजे: सरस पकवान ओदन आद घृत बरें ॥१॥
खीरनवनीत दघि दुध सिखरन आद: दार ओदन कडी बड़ी पापरधरे ॥
रसिक को दास तहां करत मनुहार बहो: लेत दोऊ कोर छबि निरखत मनमथ टरें ॥२॥
देख चल सखी दोऊ ऊसीर के मेहेलमें करत भोजन अंस भुजन दीये ॥
परसपर देत दोऊ कोर मुख मधुर अति हसत ऊरलसत रति रसन किये ॥३॥
फेलरह्यो मधुर सौरभ सघन कुंजमें: फुल रहे फुल बहो रंग किये ॥
रसिक को दास कहां कहे देखे बने रसिक दोऊ रस भरे बसो हीये | ४॥ | Saarang |
Sohilo aaj suhavano badhaai baaje shrilakshaman | Part2-290 | सोहिलो आज सुहावनो बधाई बाजे श्रीलक्षमण
भटके द्वार ॥ ध्रु.॥ युवती जन सब आवहीं हाथन कंचनथार ॥ हरद दूब
अक्षतरोरी धर गावें मंगलचार॥१॥ कदली रोपें द्वारपेंहो बांधी
बंदनवार॥ गजमोतिनके चौक पुराये मंगल कलश संवार ॥२॥ शोभा
सदन कहा कहूं सखी वरत्यो जयजयकार॥ प्रकट भये वललभ पूरण
निधि बदन अग्नि अवतार ॥३ ॥ होत मधुर ध्वनि बेदकी हो बैठे द्विजवर
आय ॥ वैदिक कर्म करायकें हो विधिसों दीनीगाय ॥४ ॥ बंदी मागध
सूतको हो करत बहुत सनमान॥ जोजाके मनजेसो वांछित तेसो ताको
दान ॥५ ॥ नरनारी पहरायकें हो सबकी लेत असीस॥ श्रीलक्ष्मण भटके
लाडिलेहो तुमजीवों कोटीवरीस ॥६ ॥ धन्य धन्य माय एलंमागारु फूली
अंग नमाय॥ लियेलालकों गोदमें हो मुख निरखत न अघाय ॥७ ॥
पोहोप वृष्टि सब सुरकरेंहो गंधर्व गावें गान ॥ नृत्य करें सब अप्सराहो देखें
चढे विमान ॥८ ॥ नाचें भक्त सुहावनेहों तन मन मोद न माय ॥ श्रीवल्लभ
पद कमलकीहो निजजन बलिबल जाय ॥९ ॥ | Dhanashri |
Aaj atee anand haye barasaane | vrishbhan kunwariki barasganth | Part1-183 | आज अति आनंद है बरसाने | वृषभान कुँवरीकी बरसगांठ
सुठि सब व्रजजन सरसाने ॥१॥ गांव गांवतें हितु कुटुंबी जे जियमें तरसाने ।
सुनि आई लाई नौछावर निरख निरख हरसाने ॥२॥ बंदी मागध विप्र गुनिजन
गावत मंगल गाने । 'कृष्णदास” इच्छा मन पूजी लेत देत अरसाने ॥३॥
| Dhanashri |
Kreedat kalindi jall maanhin.. navsatsaj singar | Part2-340 | क्रीडत कालिंदी जल मांहीं॥ नवसातसाज सिंगार
कौये तहां श्रीराधा गलबाहीं॥१ ॥ आसप ास शोभित ब्रज बनिता मधि
राधा नन्दलाल ॥ जल सीकर डारत चहुंदिशतें मुदित निरख गोपाल ॥२ ॥
आनंद मगन भये सब खेलत करत कुलाहल भारी ॥ गोविंद प्रभुकी यह
लीला निरख निरख बलिहारी ॥३ ॥ | Todi |
Aaj dadhi dekhon tero chaakh .. kahiri moll kitey bechegi satya | Part1-243 | आज दधि देखों तेरो चाख ॥ कहिरी मोल किते बेचेगी सत्य
बचन मुखभाख ॥१॥ जो माँगेगी सोई दैहों संग सखा सब साख ॥ जो न
पत्याय ग्वालिनी हमकूँ कंटसरी लै राख ॥२॥ लै जु चले घर दाम देंनकों चितये
नयन कटाक्ष ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्द्धनधर सर्वसु दीयौ तताक्ष ॥३॥ | Saarang |
Benny gunthi kahaa kou jaane merrie see teree saun raathe | | NityaPad-265 | बेनी गुंथि कहा कोउ जाने मेरी सी तेरी सौं राथे |
बिच बिच फूल सेत पित राते और कहा सिखई सौं राधे ॥ १ ॥
बैठे कुंवर सँवारत वारत कोमल कर कक ही सौं राधे ॥
“हरिदास के स्वामि नख सिख तैं सँवारी कोमल कर नख ही सौं राधे ॥२॥ | Kanharo |
Horry khelat nandanandan shree vrishbhan kisori .. | Part3-265 | होरी खेलत नंदनँदन श्री वृषभान किसोरी ॥
इत सखियन के वृन्द जुरे हैं उत सखा मंडली जोरी ॥१॥ आये एकत
है सब कोउ नंदमहर की पोरी ॥ मन््मथ मदमाते नरनारी लाज पास गई
तोरी ॥२॥ खेल मच्यौ भारो होरी को अबीर मगुलाल उड़ावे | मृगमद चोवा
चंदन छिरकत सीस अरगजा नाबे ॥३॥ प्यारे लाल भामिनी ऊपर करिके
गुलाल अंध्यारी | केसर कुमकुम की मुख ऊपर छूटत है पिचकारी ॥४॥
अद्भुत छबि बाढ़ी तिहि औसर सोभा बरनि न जाई | अरुून घटा मानो
कामनि ऊपर अमृत बरखन आई ।॥|५॥ तब जुरि मिलि आई सब वनिता
मन में अति सुख पाई | भरि-भरि पिचकाई ले दोरी लागत खरी सुहाई
॥६।| गावति गारी मीठी-मीठी जेसी ए मन भावे ॥ अमृत पगे से अक्षर
बोले कोकिल कंठ लजावे ।।७॥ तब प्यारी राधा प्यारे को छिरक््यो रुचिसों
गुलाल| मदनमंत्र मानौ डारिबे गोरी मोडे मोहन लाल ॥८॥ तब ललिता
लालन को ओचका पकरि लिये भर कोरी | सजल जलद संयुत दामिनी
छबि तिष्टि ओसर चोरी ॥।९॥ मांड्यो मुख नेननि आँज करिले दर्पण दरसावे ।
एक हंसत है तारी देके एक वदन निरखि सुख पावे ॥१०॥ तब राधा जू
फगुवा माँग्यो दीजे मोहन लाल । मन भायो श्री प्रिया कौ दियो पंकज
नैन बिसाल ॥११॥ श्री वललभ पद पदम प्रताप ते कछुक गान गुन पायो
अति “विचिन्र' गिरिधरन लाल कौ ख्याल होरी कौ मायौ ॥१२॥ | Sarang |
Aaj bhalau dinn laagat maaee .. jaayo poot nandjukon raani | Part1-014 | आज भलौ दिन लागत माई ॥ जायो पूत नंदजूकों रानी
आनंद उर न समाई ॥१॥ गृहगृहतें निकसी व्रजसुंदरि शोभा कही न जाई।॥
झुंडन गावति चलीं रायगृह लीयें संग बधाई ॥२॥ पौढी महरि लियें सुत अपनौ
. कैसी लगत सुहाई ॥ श्री विडलगिरिधर चिरजीयौ जुरि सब देखन आई ॥३॥ | Devgandhar |
Biharat naari hansat nand nandan... aank mein bhari | Part2-341 | बिहरत नारि हँसत नंद नँंदन।॥ आंक में भरि
भरि लेत आनंदन ॥१॥ निरमल देह छूटत तन चंदन॥ अति स ोभा
त्रिभुवन जन बंदन ॥२ ॥ कंठन पीठि नारि अरु सोभा॥ वे उनको वे उन
को गोभा ॥३ ॥ वह अंक में भरि चलत अगाध हि॥ अरसपरस मेटत से
मन साध हि॥।४ ॥ कोऊ भजे कोऊ पाछें धावें ॥ जुबतिन सों कहि ताहि
मगावें ॥५ ॥ ताको गहि अथाह जल डोरें।॥ है व्यास लता रूप
निहारें ॥६ ॥ कंठ लगाय लेत पुनि ताही।॥। दैत आलिंगन रीक्ि
बा ॥७॥ 'सूर स्याम' द्रज जुबतीन भोगी॥ जाकों धावत सिव मुनि
गी॥ | Bilawal |
Page 1 of 1
bottom of page
