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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Jamuna tain houn bahut rijhaayau .. apani saunh
Part3-326
जमुना तैं हों बहुत रिझायौ ॥ अपनि सौंह दिय नंद-दुहाई, ऐसौ सुख मैं कबहूँ न पायौ ॥ मिले मातु पितु-बंधु स्वजन सब, सखनि-संण बन बिहरन आयौ ॥ आज अनंत भगबंत धरनि-धर, सुबस कियौ प्रिय जान सुनायौ ॥ भयौ प्रसन्न प्रेम-हित तेरे, कलिमल हरे जु इहिं जल नहायो ॥ अब जिय सकुच कछू मति राखहि, माँगि सूर अपनौ मन-भायौ ॥
Kalyan
Nayanbhenvas rahiri laalken nagari menk naan nisrat .. tere tanaki
NityaPad-112
नयनभेंवस रहीरी लालकें नागरि मेंक न निसरत ॥ तेरे तनकी नवरंग बानिक रसिक कुंवरके चिततें न विसरत ॥१॥ तेरो मन अरु गिरिधर प्रियको बहु विधान एको करि मिसरत ॥ कृष्णदास गिरिधर रसिकवर सुबशकरणकों सीखीहें कसरत ।। ३॥
Kedar
Etum pendree rokein rahat kaise key aavain jaany vrajabadhu tumahi bichaari
Part1-242
एतुम पेंड्रीई रोकें रहत कैसे के आवैं जाँय व्रजबधू तुमही बिचारि देखो परम सुजान ॥ खिरक दुहावन दिन दिन आयी ऐसें केसे बने गुसांई इत उत गहवर गैलौहू न आन ॥१॥ ऐसी अटपटी कित गहौजू लाड़िले कुँवर जो कबहुँ परिहे ब्रजराज के कान ॥ गोविंद प्रभुसों कहत प्यारी की सखी तुम थों नेंकु इत उतरो हमहि देहु धौं जान ॥२॥
Saarang
Laalan terehi aae aaju suhavani raati ..|
NityaPad-337
लालन तेरेही आए आजु सुहावनी राति ॥| तनमन फूली अति अंग न समात निकुंजमें करत वधाए ॥१॥॥ कोककला अतिनिपुण नागरी रूप देखत मो मन भाए।। गिरिधरपिय रसवशकीने कृष्णदास दुलराए॥२॥
Bihagaro
Keeje paan lalaho laaee doodh yashoda maiya..
NityaPad-304
कीजे पान लालाहो लाई दूध यशोदा मैया।। कनक कटोरा भर पीजे यह लीजे सुख दीजे जु कन्हैया । १॥ आछे मेवा ओद्यो सुठ नीको रुचिकर लेऊ नन्हैया ॥ बहुत यतन करके राख्यो व्रजराज लडेते तुमकारन बलभैया ॥२॥ फूँकफूँक जननी पय प्यावत सुख पावत आनंद उर न समैया | सूरदासप्रभु पष पीवत बलराम स्थाम जननी दोऊं लेत बलैया ॥३॥
Bihaag
Kankareen maari lunger lagegire .. jayakahongi kahaa
Part3-138
कांकरीन मारि लंगर लागेगीरे ॥ जायकहोंगी कहा घर उत्तर मांगेगीरे ॥| १॥ देखतननंद रिस्याय विना कहें जानेंगी || जो कोऊ केसेंऊ आनि कहे सोई मानेंगी ॥२॥ क्‍यों तुम अति अकुलात फाग जब आवेगी ॥ कीजोह जो उपजे मन में सोई भावेगी ॥३॥ ख्ेलन को ऊमद्यो सब गोकुल गामरो ॥ राजतमनो चकोर यूथ शशि सामरो ॥४॥ जायजुरे वृषभान गोपकी पोरी ॥ जो जहीं सो तहींते सब देखन दोरी |॥५॥ चंग मृदंग उपंग बांसुरी बाजे ॥ वीना वेनु रवाव किन्नरी गाजे ॥६॥ जो इतते नंदलाल ग्वाल संगलीने ॥ त्यों उतराधा नारि यूथ संगकीने ॥ ७॥ खेल मच्यो दुहुुंओर बढ्यों रंग नीको ॥ क्रीडत सुंदर श्याम भावतो जीको ॥८॥ ले पिचकाईन हाथ चले ब्रजराई ॥ त्योंकरवंसनले तरुनी सबधाई ॥|९॥ केलिकला सुखदेखि थकी सुरनारी ॥ फूलनकी बरखा जु करी अतिभारी ॥१०॥| लाज गई तनते उम्रगी ब्रजनारी ॥ देत परस्पर प्रेम सुहाई गारी ॥११॥ न्हान चले जमुना ब्रजजन संग लाई ॥ देखि तहां रघुवीर वारनें जाई ॥१२॥
Todi
Mukh kamalki hoe balbal jaauun... shobha nidhi
Part2-295
मुख कमलकी हो बलबल जाऊं।॥ शोभा निधि निरख निरख नयन युग सिराऊं॥१ ॥ करुणाकर चितवत इत तब हों ढिंगआऊं॥ चरण कमल युगल परसि मनमें सचु पाऊं ॥२ ॥ अपनो कर बोलत जब तब न कहुं समाऊं॥ आनंदनिधि उमगहिये गुणगण हों गाऊं॥३॥ सेवों निश दिवस चरण ओर फल भुलाऊं |। चरणरेणु नयन भालकंठ उरलगाउं ॥४॥ रूपसुधा अचबत दृग नेक नाही अघाऊं॥ रसिक सुखद वल्लभको जन्म जन्म दास कहाऊं।॥५ ॥
Sarang
Dalabharho laal casec uthaaben pathaavon gwal chhaakale aavein ..
NityaPad-202
डलाभरहो लाल कैसेक उठाबें पठावों ग्वाल छाकले आवें ॥ गिन देखो गांठन जानो कौन कौन मेवा वसन सुरंग हाहाकर पायन परकें पठावें॥१।॥ आपतब्रजरानी न विचारे मेरे डलापर थार ओदन बेला न समावें ॥ नंददास प्रेमी स्थाम परस पद कही बात्त काल्हतें जु कांवर भर किंकर बुलावें ॥२॥
Saarang
Manimay aangan nand key khelat douu bhaiya . gaur shyam
Part1-147
मनिमय आँगन नंद के खेलत दोऊ भैया । गौर श्याम जोरी बनी बलि कुँवर कन्हैया ॥१॥ नूपुर कंकन किंकनी रुनु झुनु बाजें । मोहि रही ब्रज सुंदरी मनसा सुत लाजें ॥२॥ संग जसुमति रोहिनी हित कारन मैया । चुटकी दे दे नचावहीं सुत जानि नन्हैया ॥३॥ नील पीत पट ओढ़नी देखत मोहि भाव | बाल विनोद आनंदर्सूँ परमानंद गावै ॥४॥
Bilawal
Bhorahi dagamgat jeet manmath chaley ..
NityaPad-142
भोरही डगमगत जीत मन्मथ चले ॥ सकल रजनी जगे नेक नहीं पल लगे अरूण आलस वलित नयन लागत भले ॥| १॥॥ कितव नागरनटचिन्ह प्रकटित करत वसन आभूषण सुरतरण दलमले ॥ चतुर्भुज दास प्रभुगिरिधरन छबि बाढी अधर काजर कुंकुम अंगअंग रले ॥२॥।
Bhairav
Bikat bikat nikat nikat bhedan mridang bajaigau .. giridharlal
Part1-342
बिकट बिकट निकट निकट भेदन मृदंग बाजैगौ ॥ गिरिधरलाल बजावत गावत सप्र स्वर्न मिलि ताधिलां ताधिलां धिलांता गिडम्रिडगिड गाजैगौ ॥१॥ उघटत शब्द तत्त ताथेईवेई यहि विधि ब्रजबनिता नाचत नवसत सिंगार साजैगौ ॥ चंचल शशि प्रभु रिझवत कर बुझबत सैन दे दे रतियुत रतिपति लाजैगो. ॥२॥
Iman
Ghar ghar tain suni gwali, syaam mukh dekhan aaeen ..
Part3-307
घर घर तैं सुनि ग्वालि, स्याम मुख देखन आईं ॥ निरखि स्याम ब्रज-नारि, हरषि सब निकट बुलाई ॥ १ ॥ सुनत नारि मुसुकाइ, बांस लीन्हे कर थाईं ॥ ग्वालनि जेरी हाथ, गारि दे तियनि सुनाई ॥२॥ सीला नामक ग्वालि, अचानक गह्ढे कन्हाई ॥ सखिनि बुलावति टेरि, दौरि आवह री माई ॥|३॥ एक सुनत गई धाई, बीस तीसक तहेँ आईं ॥ टुटि परीं चहूँ पास, घेरि लीन्ही बल भाई ।|४।| इक पट लीन्डहौ छीनि, मुरलिया लई छिड़ाई ॥ लोचन काजर ऑनजि, भाँति-सौं गारी गाई ॥५॥ जबहिं स्याम अकुलात, गहति गाढ़ें उर लाई ॥ चंद्रावलि सौं कह, गूँधि कच, सौंह दिवाई ॥६।॥ हा हा करिये लाल, कुंवरि के पाँई छुवाई ॥ यह सुख देखत नैन, सूर जन बलि-बलि जाई ॥७॥
Gouri
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