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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Bunn bunn mein banmali
NityaPad-252
बन बन में बनमाली बीहरत।। ललितादीक बनमाल लियें कर पेहेरावत मनुहारी ॥१॥ अंबकदंब झुकेचहुदीसतें फूल रही फूलवारी ॥ हंस चकोर मोर चात्रक पीक मधुप करत झंकारी ॥२॥ नाना बिथके द्विजबर बोलत त्रिविध पवन सुखकारी ॥ सुरदास प्रभु किये हे लीला प्राण करत बलहारी ॥३॥
Saarang
Pyaari kahat sakhnatason terein. zaan naan paayen yeye vrajasundari laavo
Part1-221
प्यारी कहत सखनतसों टेरें। जान न पायें ये ब्रजसुंदरि लावो सबहिन नेरे ॥१॥ नितही यह मग जात दान लै ये सब निपट सबेरें। मुसकि मुसकि मृदु हँसत परस्पर चंचल दंग भर हेरें ॥२॥ अति सुंदर कर कमल परसि के दृष्टि न इत उत्त फेरें ! श्रीविदलगिरिधरन चलत जब अठकि रहत मन ॥३॥
Devgandhaar
Jayati shriradhikaramanparicharadhillavisharasharativilishatharararivishararamamathathararisharathisharishamararamatharamalararashisharararathivararararararisheeeeeeeshararararararararararararathathishishish ..|
NityaPad-003
जयति श्रीराधिकारमणपरिचरणरतिवल्लभाधीशसुतविद्ठलेशे ॥| दासजनलौकिकालौकिके सर्वदा कैब चिंतोदबति हृदयदेशे ॥॥१॥ स्थापयति मानसं सततकृतलालसं सहजसुषमारुचिररूपवेशे ॥ भालयुततिलकमुद्रादिशो भासहितमस्तकाबद्धसितकृष्णकेशे ॥२॥। सहजहासादियुतवदनपंकज _ सरसवचनरचनापराजितसुधेशे ॥ अखिलसाधनरहितदोषशतसहितमतिदासहरिदासगतिनिजबलेशे ॥३॥
Bhairav
Jadupati jall kreedat juvati-sanga, sagar sakuchit
Part3-070
जदुपति जल क्रीड़त जुवति-संग, सागर सकुचित तजियत तरंग ॥ षोडस सहस सत अष्ट नारि, तिनमैं अति सोभित श्री मुरारि॥ उड़गन समेत ससि सिंधु-बारि, मनु पुनि आयौ चित हित बिचारि ॥ मृगमद, मलयज, केसरि कपूर, कुमकुमा, कलित कृत अगरू चूर ॥ छूटत काटाच्छ सर भ्रकुटि पूर, मनु धनुष निपुन संग्राम सूर ॥ चंचल मलयानिल चलत सीर, अरू जलद-बुंद छित भित्त समीर ॥ बर बदन निकट कचचुबत नीर, मकरंद निमित मधुकर अधीर ॥ तहँँ नारदादि मुनि करत गान, जग पूरत हरि जस सुचि बितान ॥ सुर सुमन सुधन बरषत विमान, जै जे सूरज प्रभु सुख निधान ॥
Basant
Jalate nicus teer sub aavahu .. jese sabitaso karjore tesengh jordikhavahu..1..
NityaPad-035
जलते निकस तीर सब आवहु ॥ जेसे सबितासो करजोरे तेसेंह जोरदिखावहु॥१॥ नवबालहम तरुणकान्हतुमकैसे अंगदिखावहु।। जलते सबबाहटेककें देखहूँ स्थामरिझावहु_ ॥२॥ ऐसे नहींरीझोमें तुमकूंऊंचेबांहठठावहु ॥ सूरदासप्रभुकहतहरि चोलीवस्तर तब पावहु ॥ ३॥
Ramkali
Aisau palana jhoolat lalana tumsi maaee jhulaavai hoe | dekhat
Part1-103
ऐसौ पलना झूलत ललना तुमसी माई झुलावै हो | देखत बाबा आनंदरायसे जिन कोऊ डीठ लगावै ॥१॥ जब तुम अपनी गाय बुलावत श्रवन सुनत सोई धावै । जब मुख चूमि देत अस्तन मुख यह सुख कहत न आवै ॥२॥ तुमारे भागिन ओर जसुमति ऐसी सुतहि खिलावै | अरु अति भाग्य सकल गोपिनके जिनकी तपत बुझावे ॥३॥ लेत बलाय कुँवर बलिजूकी लोहोरौ वीर कहावै । श्रीविइ्ल गिरिधरनलालकों तुमसी मैया भावै ॥४॥
Aasawari
Chalivraj gharghar yeh baat .. nandsut sabaskhaaleene
NityaPad-185
चलीब्रज घरघर यह बात ॥ नंदसुत सबसखालीने चोरिमाखनरत्रात ॥ १॥ कोऊकहत मेरे भवनभीतर अबहीपैठेधाई ॥ कोऊकहत मोहिदेखछोरकें उतहीगये पराई ॥ २॥। कोऊकहत किर्हिभांतिहरिकों देखों अपने धाम॥ हेरहेरमाखनदेहों आछो खायें जितनोस्थाम ॥३॥ कोऊकहतमैं बांधराखों को सकेनिरबार ॥ कोऊकहत मैदेखपाऊंभर धरू अंकवार ॥४।॥ सूरदास प्रभुकेमिलनकारन करतबुद्धिविचार॥ जोरकर बिधिकूँगनावत पूरणनंदकुमार ।। ५॥॥
Bilawal
Thaadhe kunj bhawan ..
NityaPad-313
ठाढे कुंज भवन ॥ लटपटी पाग छुटी अलकावली घूमत नयन सोहें अरुणबरन ॥।१॥ कहा कहूं अंग अंग की शोभा निरखत मन मुरझन ॥ गोविंदप्रभु या छबि निरखत रतिपति भये है शरन ॥॥२॥।
Iman
Jayati vamnakar vistaar sakumar tunn trivikrama kranti tribhuvan
Part1-219
जयति वामनाकार विस्तार सकुमार तन त्रिविक्रमा क्रांति त्रिभुवन उदारी ॥ प्रसर पदन स्वर निरभेद ब्रह्मांड वर विवर गति जनित सुर सुरि त्रिधारी ॥१॥ जयति अश्र वपु श्याम अति सोभे उपवीत वर चिर कृष्ना अजिन जटा धरि दंड धारी ॥ मेखला भुज कोपीन कर कुस पानी जप माल सर्व व्रत ब्रह्मचारी ॥२॥ जयति सक्र सुर राज दायक दया सिंधु वलि द्वार पालक गदाधर मुरारी ॥ दास 'माधो” सोई भक्त हित वषु धरे श्री जगन्नाथ नील गिरि बिहारी ॥३॥
Saarang
Khelat vasant giridharanlal .. jahaan lagyo abir gulal bhaal .. 1..
Part3-046
खेलत वसंत गिरिधरनलाल ॥ जहां लाग्यो अबीर गुलाल भाल ॥ १॥ केसरि छिरकत नवलवाल || लपटावत चोवा अतिरसाल ॥२॥ रही पागढरकि अर्धभाल ॥ देखत मनमथ अतिभयो विहाल ॥३॥ चंदन लाग्यो दुहुुंगाल ॥ तव मुरलीधर रिझवत गोपाल ॥ ४॥ श्रीगोवर्धनधर रसिकराय ॥ चनत्रभुजदास बलिहारी जाय ॥५॥
Basant
Vrajmein kaachhani bechan aaee ..
NityaPad-212
ब्रजमें काछनी बेचन आई ॥ आनउतारी नंदगृह आंगन ओढी फलन सुहाई ॥१॥ ले दौरे हरिपेट अंजुली शुभकर कुंवरकन्हाई ॥ डारतही पुक्ता फल हवे गये यशुमति मनमुसकाई ॥॥२॥ जे हरि पदारथ दाता फल वांछित न अघाई ।। परमानंद याको भागबडोहे विधिसोंकहावस्याई ॥३॥
Saarang
Aaj sakhee shyama sanga sriradha navalkunwari karat hain bihaar douu yamuna jalkeli ..
Pustak1-353
आज सखी श्यामा संग श्रीराधा नवलकुँवरि करत हैं बिहार दोऊ यमुना जलकेलि ॥ हावभाव ग्रीव लटक नयनसैन भ्रौंह मटक हासरंग प्रेम उमग ग्रीवा भुज मेलि ॥१॥ अंतरंग सखी ठाढ़ी देखत अति तृषा बाढ़ी बारबार कहत आज नीकौ बन्यौ खेल ॥ चत्रभुज प्रभु बन बिलास उपजत है अति हुलास श्रीगिरिधर गजराज बाहु युवती दलपेल ॥२॥
Kedaro
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