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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Ayodhya baajat aaj badhaai .. | Part2-258 | अयोध्या बाजत आज बधाई ॥
गावत मंगल करत कुलाहल प्रकट भये रघुराई ॥१ ॥
दशरथ मन आनंद भयोहे विहंसी सबे लुगाई ॥
सुरविमान चढ कौतुक आये बरखा पोहोप कराई ॥२ ॥
रघुपति तिलक त्रिलोक चितामणि सबहिनके सुखदाई ॥
जनसों कछ कहत नहीं आवे प्रेमभक्ति निधिपाई ॥३ ॥ | Saarang |
Karo kaleu ramkrishna mill kahat yashoda maiya .... | NityaPad-026 | करो कलेऊ रामकृष्ण मिल कहत यशोदा मैया ।॥।
पाछें वछ ग्वाल सब लेकें चलो चरावन गैया ।!१॥
पायस सिता घृत सुरभिनको रुचिकर भोजन कीजे ॥
जगजीवन ब्रजराज लाडिले जननीकों सुख दीजे ॥२॥
सीसमुकुट कटि काछनी पीत बसन उर धारो।।
कर लकुटीले मुरली मोहन मन्मथ दर्पनिवारो ॥३॥
मृगमद तिलक श्रवण कुंडल मणि कौस्तुभ कंठ बनावो ॥
परमानंददासको ठाकुर ब्रज़जन मोद बढावो |।४॥ | Bhairav |
Mohan vadan vilokat alian upajatahe anurag .. | Part3-045 | मोहन वदन विलोकत अलियन उपजतहे अनुराग ॥
तरनि त्तप्त तलफत चकरो शश ि पीबत पीयूष परागण ॥१॥ लोचननलिन
नयेराजत रति प्रेमधुकर भाग ॥ नानों अलिआनंद मिले मकरंद पिवत रस
फाण ॥२॥ भमरीभाग भृकुटी पर चंदन वंदन बिंदु बिभाग ॥ तातकि सोम
संक्यो घनघनमें निररित्र तज्यो वैराग ॥ ३॥ कुंचितकेश मयुर चंद्रिका मंडित
कुसुम सुपाग ॥ मानों मदन धनुष सरलीने बरखतड़े बन बाग ॥8॥
अधराबिंबते अरून मनोहर मोहन मुरली राग ॥ मानो सुधा पयोध घोरबर
ब्रजमपर वरखनलाग ।|५॥ कुंडल मकर कपोलन झलकत श्रमसी करके
दाग ॥ मानों मीन कमलबर लोचन सोभित सरदत डाग ॥६॥ नासातिल
प्रसून पदवीतर चिबुक चारू चित खाण ॥ दारदयों दशन मंद मुसिकाबनि
मोहत सुरनर नाग ॥७॥ श्रीगोपाल रस रूप भरेये सूर सनेह सुहाग ॥
नानों सोभा सिंधु बढ्यो अति इन अखियन के भाग ॥८॥ | Basant |
Mangal thyos chhathikau aayou . anande vrajraj yashoda manahen | Part1-087 | मंगल थयोस छठीकौ आयौ । आनंदे ब्रजराज यशोदा मनहें
अधन धन पायौ ॥१॥ कुँवर न्हवाई जसोदा रानी कुलदेवीके पाँय परायो ।
बहुत प्रकार विजन धरि आगें सब विधि भलौ मनायौ ॥२॥ सब व्रजनारी
बधावन आईं सुतकौ तिलक करायों । जयजयकार होत गोकुलमें परमार्नेद यश
गायो.. ॥३॥ | Saarang |
Laalan manaayo namanat ladili pyaari tihari atishay | NityaPad-121 | लालन मनायो नमानत लाडिली प्यारी तिहारी अतिशय
कोपभरी ॥ तुहारीसों अनेक यत्न छलबल सबकिये मानतो अब घटतनाहिन
त्योंत्यों अतिरीस होतहैं खरी | १॥॥ सामदाम भेददंड एकोनहीं चितचुभत तापरहो
पायपरी दंततृणधरी ॥ नाहिन कछू और उपाव आनबन्यो यह दाव गोविंदप्रभु
आपुन चलिये तुम देखतही वाको मानछूट जेहें तिंहिंघरी ।॥२॥ | Nayaki |
Shyam sanga radhika rasmondal bunny .. beach nandlaal vrajbal | Part1-351 | श्याम संग राधिका रासमंडल बनी ॥ बीच नँदलाल ब्रजबाल
चंपक बरण जनु घन त़तड़ित बिच कनक मरकत्त मणी ॥१॥ लेत गति मान
तत थेई हस्तक भेद सारीगमपधनी ए सप्नस्वर मंदनी ॥ नृत्य रस पहिर पट नील
प्रकटित छबि बदन जनु जलद में हिमकिरन की चाँदनी ॥२॥| रागरागणी
तानमान संगीत मध्य थकित राकेश नभ शरदकी यामिनी ॥ मिलत हरिवंश प्रभु
हंस कटि केहरी दूर कर मदन मत्त गजगामिनी ॥३॥ | Kedaro |
Bhor bhaye yashodaju boley jaago merey giridharlal ... ratna | NityaPad-021 | भोर भये यशोदाजू बोले जागो मेरे गिरिधरलाल ॥। रत्न
जटित सिंघासन बैठो देखनकों आंयी ब्रजबाल ॥। १॥ नियरें आय सुफेंती खेंचत
बोहोर्यो हरि ढांपत बदन रसाल ॥ दूध दहीं माखन बहु मेवा भामिनी भरभर
लाई थाल ॥२॥ तब हरखत उठ गादी बेठे करत कलेऊ तिलकदे भाल ॥ देवी
आरती उतारत चतुर्भुजदास गावें गीत रसाल ॥३॥ | Bibhaas |
Podhe naval laal giridhari .. rangmahal mein rachit sukh sajya | NityaPad-128 | पोढे नवल लाल गिरिधारी ॥ रंगमहल में रचित सुख सज्या
संग सोभित व्रखभान दुलारी ।|१॥ लाल जरी दही को बागो बन्यो अंग लाल
कुल्हे शोभित अति भारी ॥ सुधन चरण बनी अति गाढी झलमलात बीच बीच
जरतारी ॥।२ ॥ अतलस को लहेंगा प्यारी कटि कंचुकी झुंमक सारी ।। मधुरे सुर
गावत केदारो मीठी तान लेत सुखकारी ॥।|३॥ परदा परे मनोहर द्वारे दीपक
जोत सरस उजीयारी ॥ चतुर्भुजदास निरक दम्पति सुख तनमन धन कीनो
बलिहारी ।।४॥ | Nayaki |
Khelat raas dulhani dulhu .. sunnhoo naan sakhee sahit lalitaadik | Part1-337 | खेलत रास दुलहनि दूलहु ॥ सुन्हु न सखी सहित ललितादिक
निरख निरख नयनन किन फूलहु ॥१॥ अतिकल मधुर महामोहन ध्वनि उपजत
हँंसमुत्ता के कूलहु ॥ थेई थेई बचन मिथुन मुख निरसत सुरमुनि देह दशा किन
भूलहु ॥२।॥ भूदु पदन््यास उठत कुंकुमरज अदभुत बहत समीर दुकूलहु ॥
कबहुँ श्यामश्यामा दोऊ नृत्यत्त कच कुचहार छुवत भूजमूलहु ॥३॥ भूकुटी
बिलास हास रसबरखत हित हरीवंश प्रेमरस झ ूलहु ॥ अति लावण्य रूप अभिनय
गुण नॉहिन कोटि काम समतूलहु ॥४॥ | Gouri |
Horry khelat vraj-khorini main, vraj-baalaa bunny bunny banwari .. | Part3-170 | होरी खेलत ब्रज-खोरिनि मैं, ब्रज-बाला बनि बनि बनवारी ॥
डफ की धुनि सुनि बिकल भई सब, कोउ न रहति घर घूँघटवारी ॥
जाहि अबीर देत आँखिनमैं, ताहीकौों छिरकत पिचकारी ॥
सौंधे तेल अबीर अरगजा, तैसि जरद केसरि चटकारी ॥
उड़त गुलाल, लाल भै बादर, रँँगि गे सिगरे अटा-अटारी ॥
सूरदास, वारी छवि-ऊपर, कल न परति छिनु बिनु-गिरिधारी ॥ | Dhanashri |
Agokul dhanya humm aam ekadashi .. | Part2-277 | आगोकुल धन्य हम आम एकादशी ॥
प्रकटे श्रीवल्लभ सुखरासी॥
श्रीगोकुल गोवर्धनवासी ॥ शा ! तेजी निवासी ॥टेक ॥
कुंजन कुंज निवास यमुना पुलिन ब्रेण ।
अकुलाय नव ब्रजसुंदरी तब सुखद रास रचाइयो॥
सातदिन गिरिधर्यों कमलकर गर्व सुरपति हरणजू॥
दासजनके हेत प्रकटे फेर गिरिवरधरणजू॥१ ॥
श्रीलक्ष्मणगृह नवनिधि आई॥ श्रीवल्लभ द्विज रूप कहाई ॥
जायो पूत इलंमामाई ॥ हरखत फूली अंग न समाई ॥टेक ॥
फूली अंग न समाय जननी करत आनंद बधावने॥
गोरसकीच भई अजरमे दूध दधि सिरनावने॥
पहरभूषण मुदित सहचरी वसन नानावरणजू॥
दासजनके हेत प्रकटे फेर गिरिवरधरणजू॥२॥
श्री लक्षमणगृह होत बधाईं। श्रवण सुनत ब्रजबध्ू उठधाईं ॥
सहज शूंगार किये मन भाये |
बोलत जयजय शब्द सुहाये ॥टेक ॥
जयजय शब्द सुनायबोलत गीत झूमक गावहीं ॥
थार कंचन हाथलीने जुरजुर बदन आवहीं॥
मुदित दे करतार नाचत बाजत नूपुर चरणजू॥ दासजनके हेत प्रकटे फेर
िरिधरवरणजु ॥३॥ श्रीलक्षमणगृह नवनिधि आई॥
अद्भुत शोभा वरणी न जाईं॥
कंचन कलश ध्वजा फहराई॥ दीपदान कर जुगत बनाई ॥टेक ॥
बनाई जुगत धर दीपमाला जोतफेली गन ज धेनु धन गृह वसन भूषण देत कंचन नगनजु।
मुदित व्है नरनारि जुर देत असीस चले घरनजू॥ दासजनके हेत प्रकटे फेर गिरिवरधरनजू ॥४ ॥ | Bilawal |
Podhe premke paryak .... | NityaPad-341 | पोढे प्रेमके पर्यक ।॥।
सुरतरसमें मग्ननदोऊ लेत भरभर अंक ॥१॥
कोककला प्रवीन विहरत उठत भावतरंग ॥
कृष्णदासप्रभु गोवर्धनधर जीत मुदित अनंग ॥२॥ | Bihaag |
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