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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Vanaten aavat natwarlal .. jhoomat aavavat matt gayand
NityaPad-171
वनतें आवत नटवरलाल ॥ झूमत आववत मत्त गयन्द सम छबि निरखत व्रजबाल ॥ १॥ सीस टिपारो बन्यो अनुपम मल्‍लकाछ कटि राजे । पग नूपुर धुनि रुनझुन बाजे हँसत कमल कर साजे ॥।२॥ सुरभिवृन्द चहुँ दिस रही ठाडी सिंघ पोर आनंदे।॥। सूरनिरखी मुख अति प्रफुल्लित मात जसोदा नंदे ॥ ३॥।
Hameer Kalyan
Aaj firat duhaai nandaki . yeh sridama kahat sabanso baat
Part1-199
आज फिरत दुहाई नंदकी । यह श्रीदामा कहत सबनसो बात परम आनंदकी ॥१॥ कुँवरी भई वृषभान नृपतिगृह जीवनी गोकुलचन्दकी । नागरी चिस्जीयो यह जोरी राधा 'परमानंद” की ॥२॥
Khamaj
Dekhari dekh kundal loll.. chaaru shravananrihit
Part2-359
देखरी देख कुंडल लोल॥ चारु श्रवणननृहीत कीनो झलक ललित कपोल ॥१ ॥ बदन मंडल सुधा सुरवर निरख मन भयो बोर॥ मकर क्रीडत गुप्त प्रकटत रूप जल झक झोर ॥२ ॥ नयन मीन भुजंगिनी भ्रू नासिका स्थल बीच॥ सरस मृगमद तिलक शोभा लसतहैं लगी कीच ॥३ ॥ मुख विकास सरोज मानों युवती लोचन भंग ॥ बिथुरी अलकें परी मानों प्रेम लहर तरंग ॥४॥ स्याममुख छबि अमृत पूरण रच्यो काम तडाग॥ सूरप्रभु अंग निरख शोभा द्रजयुबती बडभाग ॥५ ॥
Sorat
Kaanaa dharey ray mukat khele horry ||
Part3-382
काना धरे रे मुकट खेले होरी || इत श्याम लई पिचकारी रंग भर उत्त श्यामा केसर घोरी ॥१॥ हाथन लाल गुलाल फेंट भर मारत हैं भर भर झोरी ॥ चंद सखी भजि बालकृष्ण छबि तेरे बदन कमल पर चित चोरी ॥२॥
Hori-Kafi
Kanak kusum atishobhit shravanan .. ghoomat arun tarun
NityaPad-060
कनक कुसुम अतिशोभित श्रवणन ॥ घूमत अरुण तरुण मदमाते मुसकात आनअन ॥।१॥ गोल पाग पर कुल्हे सुरंग तामें अलक रेख बणी ॥ गोविंद प्रभु त्रैलोक विमोहत कौस्तुभमणी ॥।२॥
Kalyan
Rahau rahau dhota yeh kariye naan larikai .. marag mein loga
Part1-259
रहौ रहौ ढोटा यह करिये न लरिकाई ॥ मारग में लोग इतउत्तकों करिहें घहर चबाई ॥१॥ और हों जाती भवन आपने बेगिही सास बुलाई ॥ तेरी सासकों हम कहेंगे जो हमनें बात लगाईं ॥२॥ अहो कुँवर रे लड़ैते ग्वालिनि हँसि हँसि जाई ॥ श्रीविडलगिरिधर मायेतें गागरि दई डरा ॥३॥
Bihagaro
Houn baar daro jagat vraj ees sees adha
NityaPad-243
हों बार डारो जगत ब्रज ईस सीस अध टेढी पगीयन उपर ॥ तन टूटत बलि जाय जुवति जन जहां तहां देखियत चटक कर ॥१॥ तन चंदन ओर स्वेत पीछोरी अरगजा भीजी रह्यो सुन्दर बर ॥ कल्याण के प्रभु गिरिधरजु की माधुरी निरखि मदन मनहर ॥२॥
Bilawal
Kahaan loun alaken deho oat.. chanchal chapal surang
Part2-347
कहां लों अलकें देहो ओट॥ चंचल चपल सुरंग छबीलो आनि बन्यों मृग जोट ॥ १ ॥ खंजन कमल मीन अति लाजत उपमा दीजे कोट ॥ 'सूरदास' प्रभु कहां लो बरनो नाहि न रूप की टोट ॥२॥
Suha
Lahekan lagiri basant bahaar maano banwari lagyo bahakn ||
Part3-001
लहेकन लागीरी बसंत बहार मानो बनवारी लाग्यो बहक॑न || ना जानो जब कहा करेंगे लागे है पलास द्रुम डहकन ॥१॥ मदनभर केकीडूक काढत बरणवरण द्वुम पुष्पलानमे महेकन ॥ आनंद घन तुम कित हो बिस्म रहे इत कोकिला लागे कुह्ुकन ॥२॥
Malkoos
Rasik siromani khelein horry nandrayaki pauriho ..
Part3-156
रसिक सिरोमनि खेलें होरी नंदरायकी पौरीहो ॥ एकओर बलिराम कृष्ण भये एक ओर सब गोरीहो ॥१॥ अपनी अपनी भीर बांटिले मेली परस्पर होडी ॥ बंसनमार होति हे अतिशय गोप चलेपगु छोडी ॥।२॥ ब्रजललना सब हँसि बोलीहें हम जीते तुम हारे ॥ अबही ओर छोडिहें नाहीं सुनो रसिक पर प्यारे ॥३॥ चंद्रभगा चंदन लीनेकर कृष्णगही पिचकारी ॥ राधादौरि भरे सुंदरबर खेल मच्योहै भारी ॥७॥ सुरविमानगन मोहि रहेहें जयजय शब्द उचारी ॥ कहा वैभव बरनोंया ब्रजको बलभद्रजन बलिहारी ॥५॥
Dhanashri
Tumre bhaagi sunau merrie gopi bhayo aisau laal hamaaren. abb
Part1-031
तुमरे भागि सुनौ मेरी गोपी भयो ऐसौ लाल हमारें। अब चिरजीवो भागि सबनके खेलो मेरे तुम्हारे ॥१॥ हों सुख देखों तुम सुख देखो प्यावो दूध मल्‍्हावो । मेरे लालकी तुम सब भाभी उबटि न्हवाय बैठावो ॥२॥ तुम लेहु गोद लगावो छाती भुख चुमो और खिलावो । श्रीविहलगिरिधरनलाल को गंगा करन सिखावों ॥३॥
Asawari
Shrilakshmangrih prakat bhayahen srivallabh parmanand
Part2-316
श्रीलक्ष्मणगृह प्रकट भयहें श्रीवललभ परमानंद रूप॥ ब्रह्मवाद उद्धारण कारण गोपीपद पति रति पतिभूष॥९ ॥ महाभाग्य पूरण दैवीजन जिनके हित अवतार लियो ॥ प्रकट अमल देखत निजजनको मायामतको तिमिर गयो ॥२ ॥ अपने दीन जान करुणामय वचनामृत पोखे संतत सब। नंदरायकी फेरि दिखाई गिरिधरकी लीलाहीजे तब ॥३ ॥
Kanharo
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