top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Shree jamuna puleen kii lonan baadhi jayman koun
NityaPad-220
श्री जमुना पुलीन की लोनन बाढी जेमन कों लाइ हरि छाक।॥ आड़ आज सीदोसी धर तें बैठन कों पायो इक ढाक ॥१॥ ताकी छांय गाम में बैठी तब कोऊ ग्वालन मारी हांक ॥ बोलो मल्हा नाब किन लावों स्रवन सुन्यों जब एसो वाक॥२॥ अतुर व्है जमुना तट आई देखत तुम इक टक रहे ताक॥ कुंभनदास प्रभु गोवरधनधर लेहो सँवार अपनो पाक ॥३॥
Saarang
Manharlegaye nandkumar .. barakadrishtipapicharananatan dekhan naan
NityaPad-093
मनहरलेगये नंदकुमार ॥ बारकदृष्टिपपीचरणनतन देखन न पायोबदनसुचार ॥ १॥ होंअपनेघरसुच्सो बैठी पोवतही मोतिनके हार ॥ कांकर डार द्वारव्हेनिकसेबिसरगयोतन करतशुंगार ॥ २॥ कहारीकरों क्योंमिलहें गिरिधर किहिमिस हों वशोदाघरजाऊं ॥ परमानंदप्रभुठगीरी अचानक मदनगोपालभावतोनाऊं ॥।३॥
Dhanshree
Badodevta kaanh pujaayo.. gwal gope huns ank milaayo ..1..
Part2-076
बडोदेवता कान्ह पुजायो॥ ग्वाल गोप हंस अंक मिलायो ॥१॥ कान्ह धन्य धन यशोमति जायो। धन्यथन्य देव प्रकट दरसायो ॥२॥ पूजामेट इंद्र गिरि पूजो॥ परसन हमहि सदां प्रभुहूजो ॥३ ॥ कहा इंद्र बपरो किहिं लायक ॥ गिरिदेवता सबनके नायक ॥४ ॥ सूरदास प्रभुके गुण ऐसे ॥ भक्तन अश दुशन छन के नेंसे ॥५ ॥
Bilawal
Tere nain uneede teen prahar jaage kaahe koun sowat
Part3-023
तेरे नैन उनीदे तीन प्रहर जागे काहे कों सोवत अब पाछली निसा॥ कछू अलसात बीच श्रम लागत श्रमितन जाय अधिक रिसा ॥१॥ गिरिधर पियके बदन सुधारस पान करत नहीं जानत तृसा ॥ एत्तेकहत होयजिन प्रगटित रतिरसरिपु रवि इंद्रदिसा ॥२॥ तुवमुखजोति निरखत उडपति मगन होत निरखि जलद खिसा || कृष्णदास बलिबलि वैभवकी नवनिकुंजग्रह मिलत निसा ॥३॥
Basant
Deepdan dey huttery baithe bado parvahe aaj diwari ..
Part2-058
दीपदान दे हटरी बैठे बडो पर्वहे आज दिवारी ॥ चहुं ओर पांत बनी दीपनकी रानीजु अपने हाथ संबारी ॥१ ॥ दिव्य कपूर सुर्गध आदि रचि घृतसुरभीको जोति उजारी ॥ पकवान बहुत कर थार भरे धर लड़ूवा गुंज फेंनी सुहारी ॥२ ॥ वनज करेंगे भान कुंवरिसों मनमें फूले कुंवर गिरिधारी ॥ धरघरतें व्रजनारी निकसी नवल किशोरी तरुणी बारी ॥३ ॥ ललिता प्रभृति मुख्य श्रीराधा गावत मंगल शब्द उच्चारी॥ मिल- आंईं ब्रजराज घरनिघर एकतें एक सुभग सुकुमारी ॥४ ॥ नाचत खेलत करत कोतूहल प्रेम मगन व्है आनंद भारी॥ कहो लाल कहा सोदादेहो चंद्रावलि मुख मुसकिनिहारी ॥५ ॥ पूरो तोलो रूटनखेहो सेंतमेंत नहीं लाल विहारी॥ देख-देख फूलत नंदरानी अति उत्साह नोछावर बारी ॥६॥ मन भायो दीयो सबहिनकों परम उदार गोवर्द्धनधारी ॥ रसिकप्रभु प्रिय तुम चिरजीयो सहचरी वारबार बलिहारी ॥७ ॥
Kanharo
Tunn munn dhana daarun baar .. sthaam shobha sindhu maanon
Part2-363
तन मन धन डारूं बार ॥ स्थाम शोभा सिंधु मानों अंगअंग निहार ॥१ ॥ पच रही मन ध्यान करकर लहत नाहिन तीर॥ स्थामतन जलराशि पूरण महागुण गंभीर ॥२ ॥ पीतपट फहरात मानों लहर उठत अपार ॥ निरख छबि तकतरण पैठी कहूं वार नपार ॥३ ॥ चलत अंग त्रिभंग करके भ्रोंह भाव चलाय ॥ मानों बिचबिच भ्रमर डोलत चितये चित भरमाय ॥४ ॥ श्रवण कुंडल मकर मानों नवनमीन विशाल॥ सलिल झलकत रूप आभा देखरी नंदलाल ॥५ ॥ बाहुदंड भुजंग मानो जलधि मध्य विहार ॥ मुक्तमाल मानों सुरसरी वहि चली द्यधार ॥६ ॥ अंगअंग भूषण विराजत कनक मुकुट वबिलास॥ उदधिमथन प्रकटकीनो श्री अरु सुधा प्रकास ॥७ ॥ चक्रत भई त्रिय निरख शोभा देह गति विसराय ॥ सूरप्रभु छबि रासि सागरजान्यो न कापें जाय ॥८ ॥
Sorat
Sangeet ruscushal nirt aaves vas lasati radha rasmondal
Part1-329
संगीत रसकुशल निर्त आवेस वस लसति राधा रासमंडल बिहारिनी । दिव्यगति चरण चंचल चक्रवर्तिनी कुंवरी श्याम मनोहर मनोहारिनी ॥१॥ लोचन विशाल मृदुहास मन उल्लास नंदनंदन मनसिज मोद विस्तारनी। मूदुल पदविन्यास चलित वलयावलि किकिनी रुनझुनतकार झंकारिनी ॥२॥ रूप निरुपम कांति भांति वरनी न जाती पहरि आभरन रवि षोडस सिंगारनी । मृदंग बीना ताल सुर संच संचार चारुता चातुरी सार अनुसारिनी ॥३॥ उघट मुख शब्द पियूष बरखत मनो सींची पिय श्रवन तन पुलक कुलकारिनी । कही “गदाधर” जू गिरिराजधरतें अधिक विदित रसग्रन्थ अद्भुत कलाधारिनी ॥४॥
Saarang
Saaj shungar chaleen vrajnari .. yuvatin bhirbhai atibhari ..1 ..
Part2-071
साज शूंगार चलीं ब्रजनारी ॥ युवतिन भीरभई अतिभारी ॥१ ॥ जगमगात अंगनप्रति गेहेनो॥ सबके भाव दरस हरिलेहेंनो ॥२ ॥ यह मिस देखनकों सब आंईं॥ देखत इकटक रूप कन्हाई ॥३॥ येनहीं जानत देव पुजाई॥ केवल स्यथामही सोंलो लाई ॥४॥ को मग जात कहांको बोलत॥ नंदसुवनसों चित नहीं डोलत॥५ ॥ सूरभजें हरिकों जिहि भावें॥ मिलत ताहि प्रभु तिहींसुभावें ॥३ ॥
Bilawal
Yeye kanra karat raar karoongi pukaar kansaraay darbar .. houn
Part1-256
ये कनरा करत रार करूँगी पुकार कंसराय दरबार ॥ हों दधि बेचन जात वूंदावन रोकी पराई नार ॥१॥ दि मेरौ खाय मटुकीया फोरी उर तोस्बी मोतिन को हार ॥ धोंधीके प्रभु तुम बहुनायक तुम जीते हम हार ॥२॥
Adano
Khelat vasant vitvaleshrai .. nijasevak sukh dekhat haye aaya .. srigirdhar raaja bulaay .. srigovindaya pichkari laay ..1..
Part3-040
खेलत वसंत विट्वलेशराय ॥ निजसेवक सुख देखत हे आय ॥ श्रीगिरधर राजा बुलाय ॥ श्रीगोविंदयय पिचकारी लाय ॥१॥ श्रीबालकृष्ण छबि कही न जाय ॥ श्री गोकुलनाथ लीला दिखाय ॥ रघुनाथलाल अरगजा लाय ॥ यदुनाथ लाल चोवा मगाय ॥२॥ घनश्याम लाल फेंटन भराय ॥ सब बालक खेलत एकदाय ॥ तहां सूरदास नाक्षत हैं आय ॥ परमानंद घोरि गुलाल लाय ॥|३॥ चन्नभुज केसर माट भराय ॥ छीतस्वामी बूका फेंकी जाय ॥ नंददास निरख छबि कडत आय ॥ गावे कुमनदास बीना बजाय ।॥४॥ सब गोविंद बालक छिरके आय ॥ कोऊ नाचत देहदसा भुलाय ॥ सब बालक हो हो बोले आय ॥ उडे अबीर जुलाल घुघर कहाय ॥५॥ पिचकारी इत उत्त छोड़े जाय ॥ फेंकत फूल फूले न अचाय ॥ कोऊ गावत सुर अति सोहाय ॥ बाजे ताल मृदंग उपंग भाय ॥६॥ बिच मोहो चंग मुरली बजाय ॥ कोऊ डफ ले महुवर सों मिलाय ॥ एक नाचत पण नूपुर बजाय ।॥| बाढ्यो सुख समुद्र कछु कही न जाय ॥ सब बालक रंगनि अंग चुचाय ॥ गोकुल घरघर सुखही छाय ॥ सोभा कहा कहे कबि बनाय ॥ यह सुख सब सेवक दिखाय ॥८॥ सुर कुसुमनि बरसें आय ॥ सब गावत्त मीठी गारी भाय ॥ तब अपने मनोरथ करत आय ॥ तहां कृष्णदास बलिहारी जाय ॥९%॥
Hindool
Laganako naam naan leeje sakhiri ..| laganako marag atee hii
NityaPad-101
लगनको नाम न लीजे सखीरी ॥| लगनको मारग अति ही कठिन हे पाय धरे तन छीजे ॥॥९॥| जो तू लगन लगायो चाहे शीसकी आस न कीजे ॥ परमानंदस्वामी के ऊपर बार वार तन दीजे ।। २॥।
Aasawari
Raajat nirtat peeya sanga sunder jaee ..
Pustak1-354
राजत निर्तत पीय संग सुंदर जई ॥ मंडल के बीच बीच भेख धरत तई ॥ ब्रज बिलास दृग बिलास भेद करत कई ।। निरखि यमुना चंद थक्‍यौ अनिलपद दई ॥२॥ गिरिधर संगीत निपुन भेद काछ कछई ॥॥ उरप तिरप लेत सुलप संचन सुरसई ॥३॥ धोधीके प्रभु नट नागर अद्भुत गति लई ॥ सूर सुरपति व्योंम थाके सुखद बेलि बई ॥॥४॥
Kedaro
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page