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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Taja munn hari vimukhanko sanga..
NityaPad-367
तज मन हरि विमुखनको संग॥ जाके संगहै कुबुद्धि उपजत परत भजनमें भंग ॥ १॥। खरकूं कहा अरगजा लेपन मर्कट भूषण अंग ॥| कागहि कहा कपूर चुगायेत श्वान न्हवाये गंग ॥२॥ कहा भयो पयपान कराये विष नहिं तजत भुजंग ॥ सूरदासप्रभु कारी कामर चढत न दूजोरंग ॥ ३॥
Kedaro
Balanhaaye taisen laalan nahaiyen..
Part2-038
बलन्हाये तैसें लालन नहैयें॥ उबटे अंग कित फिरतहो धाये कमल नयन बलजेैयें॥१॥ नन्‍हाओन तातोपानी सीयरो समोय कनक कुंडी भरि सिरैयें॥ कर श्रृंगार नवल बानिक बन जोईभावे सोई खेयें॥२॥ वबारने गई महतारी कुंवर पर गाय खिलाबन बाबा संगजैयें ॥ मानदास कुलदेवता मनावत फूली महेरि आनंद न समैयें ॥३ ॥
Devgandhar
Dekhat vann vrajnath aaj atee upajatahe anurag ..
Part3-044
देखत वन ब्रजनाथ आज अति उपजतहे अनुराग ॥ मानों मंदन वसंत मिले दोऊ खेलत डोलत फाग ॥१॥ द्रमगन मध्य पलाश मंजुरी उठत अगिन की न्यांई ॥ अपने अपने मेल मनोहर होरी हरखि लगाई ॥२॥ केकी कीरकपोत ओर खज करत कुलाहल भारी ॥ जनपद लज्ना तजी परस्पर देत दिवावत जारी ॥३॥ झीली झांझ निर्झर निसान डफभेरि भमरणगुंजार ॥ मानो मदन मंडली रची पुरवीथनि विपिन विहार ॥४॥ नवदल सुमन अनेक वरन वर विटपन भेखधघरे ॥ जनोराजत ऋतुराज सभामें हँसि बहुरंगन भरे ॥५॥ कुंजकुंज कोकिल कलकूजत वानी बिमलवंढी ॥ जानों कुलवधू निलज भईहें गावत अटनचढी ॥६॥ कुसमितलता जहां देखत अलि तहींतहीं चलिजात || मानों विटप सवन अवलोकत परसत गनिकागात ॥ ७॥ लीने पुष्प पराम पवनकर फिरतचहंंदिशधाये ॥ तिहिं ओसर संयोगिनि विरहनि छांडत कर भर भाये ॥८॥ और कहांलों कहों कृपानिधि वृंदाविपिन समाज ॥ सुरदास प्रभु सब सुख्र क्रीडत कृष्ण तुमारेराज ॥९॥
Basant
Moson horry khelan aayo .. latpati paag atpate
Part3-334
मोसों होरी खेलन आयो ॥ लटपटी पाग अटपटे पेचन नयनन वीच सुहायो ॥१॥ डणर डणगर में वगर वगर में सबहि के मन भायो ॥ आनंद घन प्रभु कर दृग मीडत हँस हँस कंठ लगायो ॥२॥
Kanharo
Horry khelat kumar kanhai .. chova chandan
Part3-318
होरी खेलत कुमर कन्हाई ॥ चोवा चंदन अगर कुमकुमा धरणी कीच मचाई ।|१॥ अबीर गुलाल उड़ाय ललितादिक शोभा वरणी न जाई ॥ अरस परस छिरके चु श्याम को केसरि भरी पिचकाई ॥२॥ नख सिख अंग परम रूप माधुरी भूषण वसन बनाई ॥ गिरिवरधर की यह छबी निरखत कुभंनदास बलि जाई ॥३॥
Bihaag
Banate baney maaee giridhar aavat ..|
NityaPad-178
बनते बने माई गिरिधर आवत ॥| सीसदुमालो अति छबिपाबत मनमथ कोटि लजावत ॥१॥ गायनके पाछे चले आवत भ्रोहन भैद जनावत नंददास प्रभु करख लियो चित ग्रह अंगना न सुहाबत ।२॥।
Gori
Ramchandra pada bhajvelaayak..
Part2-261
रामचन्द्र पद भजवेलायक॥ अभयकरण भवतरण तपोधन युगयुग साखिवेदके वायक ॥१ ॥ चितवत चरण सदा सुखदायक पापताप नहिं सुखके मायक॥ भक्तनकी रक्षाकेकारण अनुदिन लिये रहत करसायक ॥२ ॥ गौतमनारि ग्राह गजतारक भक्त विभीषणकेजु सहायक ॥ सेवा अल्प सुमेरसी मानत करुणासिंधु अयोध्या नायक ॥३ ॥ जेपद रटत मुनिनारद शारद शेषसहस््र मुर्त पार न पायक ॥ जानकी रमण हरि सर्व शिरोमणि अग्नदास उर आनंददायक |।४ ॥
Kanharo
Karlidi key coole manohar khelat yuvati sanga .. rasvinod
Part1-346
कार्लिदी के कूल मनोहर खेलत युवती संग ॥ रासविनोद नंदनंदन पिय भीजे रतिरस रंग ॥१॥ तान बंधान सप्त स्वर मिलवत वीणावेणु उपंग ॥ बाजे अनेक कहॉलों बरनों किन्नरि ताल मृदंग ॥२॥ गुणनिधान हरि लेत नृत्य में अवघर तान तरंग ॥ श्रम जलकण भर बदन प्रियाकौ पौंछ सुधारत मंग ॥३॥ सुघरराय गोवर्द्ध/ नायक भामिनी सौभग अंग ॥ कृष्णदास प्रभु विश्व विमोहन देव सती द्रत भंग ॥४॥
Kanharo
Leeje laalan apani chhaak ..|
NityaPad-200
लीजे लालन अपनी छाक ॥| जबतें तुम वन आये तबते रहत चढ्यो चितचाक ॥। १॥ देखलेहु नीकेकर सगरे कीने बहुविध पाक ॥ भोजनको बैठे सीतल छायामें उनहीकी ढाक ॥।२॥ होहूं ढिंग बैठों ज्योऊँ तो मेरे चरणकोउतरे थाक ॥ ज्यों भावे त्यों खेलकरो तुम मेरे आगें निशांक ।।३॥ पूरो सकलमनोरथ मेरे हो आई इह ताक ॥॥ रसिकप्रीतम कबके बिछुरे तेंहों आई हो नाक ॥।४॥
Saarang
Srivallabh tanmandhan srivallabh sarvasva mein payeshrivallabhprabhu chintamani merey ||
NityaPad-004
श्रीवल्लभ तनमनधन श्रीवल्लभ सर्वस्व में पायेश्रीवल्लभप्रभु चिंतामणि मेरे || श्रीवल्लभ मम ध्यान ज्ञान श्रीवल्लभ विनभजु न आन श्रीवल्लभ हें सुखनिधान प्राण जीवन केरे ॥१॥ श्रीवल्लभ मोहिइष्टदेव सदा सेवूं श्रीवललभ चरचो चरणकमल श्रीवल्लभजूके चेरे।। छीतस्वामिगिरिवरधर तेसेई श्रीविद्वलेश श्रीवललभकी बल बल जाऊं वेरेवेरे ॥२॥।
Ramkali
Kunjabhavanmein podhe douu..
NityaPad-340
कुंजभवनमें पोढे दोऊ॥ नंदनंदन वृषभान नंदिनी उपमाको दूजो नहिं कोऊ ॥१॥ लाल कुसुमकी सेज बनाई कोककला जानतहै सोऊ॥ रसमें माते रसिकमुकुटमणि परमानंद सिंघद्वारें होऊ॥२॥
Bihaag
Aaj dashahara shubh dinn neekau .. giridharlal jaware bondhat
Part1-315
आज दशहरा शुभ दिन नीकौ ॥ गिरिधरलाल जवारे बॉँधत बन्यौ है भाल कुंकुमकौ टीकौ ॥१॥ आरती करत देत नौछावर चिरजीयौ लाल भामतोौ जीकौ ॥ आसकरन प्रभु मोहन नागर त्रिभुवनकौ सुख लागत फीकौ ॥२॥
Saarang
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