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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Dwaaren aaye gunijan thaade.. | Part2-284 | द्वारें आये गुणिजन ठाडे॥
प्रकटे पुरुषोत्तम श्रीवललभ सबहिन आनंद मंगल बाढे॥
श्रीलक्ष्मण भट दान देनकों पट भूषण मणि माणिक काढे ॥
सगुणदास आस सब पूजी मानो बरखत इन्द्र अषाढे ॥२॥ | Bilawal |
Goras bechtahi joo thhagi .. kahaa kairai aapan buss nohi mansa | Part1-253 | गोरस बेचतही जु ठगी ॥ कहा कैरै आपन बस नॉही मनसा
अनत लगी ॥१॥ खेलत बीच मिले नंदनंदन कार्लिदी के तीर ॥ चितयो
नेंक कमलदल लोचन मनमोहन बलवीर ॥२॥ और सखी बूझन लगी करत
कौनकौ मोल ॥ परमानंद दासकौ ठाकुर मीठे तेरे बोल ॥३॥ | Gori |
Aaj atee sobhit haye nandlal . navchandanko lape kiyo haye taa parr | NityaPad-243 | आज अति सोभित है नंदलाल । नवचंदनको लेप कियो है ता पर
मोतिन माल ॥ १ ॥ खासाको कटि बन्यो पिछोरा कुलह जु सुतरु सोहे भाल।
कुन्द मालती कंठ विराजत बीच बीच फूल गुलाल ॥२॥ सारंग राग
अलापत गावत मधुर मधुर सुरताल ॥ गोविन्द प्रभुकी या छबि निरखत मोहि रही व्रजबाल ॥३॥ | Saarang |
Makhan mohi khawad ree maiya ! buddy baar bhaee haye bhookhe humm | NityaPad-031 | माखन मोहि खवाड़ री मैया ! बडी बार भई है भूखे हम
हलधर दोऊ भैया ।। बडी कृपन देखी तू जननी ! देति नहीं अध घैया ।
'परमानंददास' की जीवनि ब्रज-जन केलि करैया। | Devgandhar |
Manaavan ayeri manaavan jaanyo haye praneshwar prananke pyaare ... | NityaPad-126 | मनावन आयेरी मनावन जान्यो हे प्राणेश्वर प्राणनके प्यारे ॥।
कोन कोन गुन रूप बरनों प्यारे तिहारे उनतन नयना न्यारे ॥१॥
मेरी सी मोसों ओरनकी ओरनसों एसे व रंग ढंग प्यारे तिहार े।।
नंददास प्रभु एक रस क्यों म रहो केसे के प्राण पत्थारे ॥। २।। | Kanharo |
Nenkarhomaankhandeuntumko thadimathatjanani dadhiaturloni | NityaPad-179 | नेंकरहोमांखनदेऊंतुमको ठाडीमथतजननी दधिआतुरलोनी
नंदसुबनकों ॥१॥ मैबलजाऊं स्थामघनसुंदर भूखलगी तुम्हें भारी ॥।
बातकहूंकी बूझतस्यामहि फेरकहत महतारी ॥ २॥
कहतबात हरिकछूनसमझत झूँठेईभरत हुंकारी ॥
सूरदासप्रभुकेगुण तुरतहिविसरिंगई नंदनारी ॥। ३॥। | Bilawal |
Raghupati apano bachan pratiparyatho .. tori lunk bunk gadh gadhapati | Part1-305 | रघुपति अपनो बचन प्रतिपार्यथो ॥ तोरी लंक बंक गढ़ गढ़पति
घर घर को कर डास्यौ ॥१॥ कहुँ शिर कहुँ भुज कहूँ धड़ लोटत मानों मद
मतवारी ॥ रहौ माँसको पिंड प्रान लै गयौ बाण अनियारी ॥२॥ जाके डर
बरुन इंद्र कुबेर यम डरत सुभट रण भारी ॥ सो रावण रघुनाथ छिनकमें कियौ
गीधकौ चारो ॥३॥ छाँड़ि रमसकल सुखसागर बाँध्यो जल अति खारी )|
हल युनि सब सुयश बखानत दुष्ट दशानन मास्यो ॥४॥ रावण मार लंक
गढ़ गे कियौ सबकी निस्तारी | दियौ बिभीषण राज सूर प्रभु कर सुर लोक
ञ्जा ॥५॥ | Maru |
Akeli bunn bunn | NityaPad-211 | अकेली बन बन
डोल रही ॥ गाय चरावत कहां रहे हरि काहु ने न कही ॥१॥ बड़े सवारे निकसे
घरतें पठयहे माय दई ॥ मुख लागी हेहे लालनकों दुपहरी घाम सई ॥२॥
इत नो बचनसुनत मनमोहन नागर वृथा लई।॥। परमानंद दासको ठाकुर गोकुल
रतनबई ॥३॥ | Saarang |
Bhringiri bhaj sthaam kamalpad jahaan naheen nishiko traas ... | NityaPad-366 | भृंगीरी भज स्थाम कमलपद जहाँ नहीं निशिको त्रास ॥।
जहां विभा धनुसमान प्रभा नखसो वारिज सुखरास ॥। १॥
जहाँ किंजल्कभक्ति नवलक्षण ज्ञानकर्म रस एक ॥|
निगम सनक शुक शारद नारद मुनिजन भृंग अनेक ॥ २॥
शिव विरंचि खंजन मनरंजन छिनछिन करत प्रवेश॥।
अखिल लोक तिहिं वास सुकृत जल प्रकटित स्याम दिनेश ।।३॥|
सुन मधुकर भ्रम तज कुमुदिनी गण राजीववरकी आस ।।
सूर प्रेमसिंधुमें प्रफ़ुल्लित चल जहां करे निवास ॥।४॥। | Kedaro |
Khelati khelati paudhi shyama navallal giridhar | Part3-361 | खेलति खेलति पौढी श्यामा नवललाल गिरिधर
पिय सँग ॥ चोवा चंदन अगर कुँमकुमा झारति फिरति सकल अँग अँग ॥१॥
बाजति ताल मृदंग अघोंटी बीना मुरली तान तरँग ॥ 'कुंभनदास' प्रभु यह
बिधि क्रीडति जमुना पुलिन लजावति अनँग ॥२॥ | Basant |
Yeye bansi naad sur saadhiken bajaai prabin kaanh saat sur sodhaken | Part1-279 | ये बंसी नाद सुर साधिकें बजाई प्रबीन कान्ह सात सुर सोधकें
मधुर धुनि ॥ घरी घरी घूमत सुध न रही कछु कल न परै मेरे तन मन ॥१॥
ब्याकुल भई कल नांहि परत सुनत तत छिन गई हों मधुवन ॥ धीरजके प्रभु जनम सुफल भई निरखत श्रीनंदनं दन ॥२॥ | Bhairav |
Foolanason benny guhi phoolan kii | NityaPad-264 | फूलनसों बेनी गुही फूलन की
अंगीया फूलन की सारी मानों फूली फुलवारी ॥ फूलनकी दुलरी हमेल हार
फूलन के फूलन की चोको चारों ओर गजरारी ॥१॥ फूलन के तरोना कुंडल
फूलन के फूलन की किंकिली सरस संवारी ॥ फूलन के मेहेल बने फूली
श्रीराधा प्यारी फूले नंददास जाय बलिहारी ॥२॥ | Saarang |
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