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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Kaanh russ bheeni gwalini oye goras taja
Part3-237
कान्ह रस भीनी ग्वालिनी ओए गोरस तज कुलकान ॥ नाघर में कलना अंगना वाको मन जो लाजके पान ॥|१॥ जोबन रूप रिझोने नयननमें वाकी परीचितवन की वान ॥ डफ मुरली सुन गई कोरतज पानी कोउत्तर ठान ॥२॥ खेलत मोहन गहिका जरदे हँसी पीत पटतान ॥| जगन्नाथ कवि राय के प्रभुसों फाग खेल खिलरान ॥३॥
Sarang
Pichhora khasako ritibaandhen ..
NityaPad-288
पिछोरा खासाको ऋटिबांधें ॥ वे देखो आवत नंदनंदन नयन कुसुमशर सांधें ॥१॥ श्याम सुभगतन गोरज मंडित बांह सखाके कांधें ॥ चलत मंदगति चालमनोहर मानोंनटवा गुणगांथें ।२॥| यह पद कमल अवही प्राप्त भये बहुत दिनन आरार्थे ॥ परमानंदस्वामी के कारण सुरमुनि धरत समाधें ॥३॥
Que‍yon bethi raadhe sukumari ..
Part2-246
क्‍यों बेठी राधे सुकुमारी ॥ बूझतहे ब्रज जानके महेरी क्यों जेंबत बाबाकीथारी ॥ १ ॥ आज हमारो गोरी व्रत ताकी विध ताहीपे पाउं ॥ सुंदर सुभग सलोनो ढोटा ताको पूज बहों हाथजीमाउं ॥२ ॥॥ ऐसो ढोटा नंदरायको ताकों अबही ले आउं॥ तुम जानोरी सयानी मैया बेग चलो हों चरन शिरनाउं ॥३ ॥ सुनरी जसोमति कुंवर आपुनो बेगपठेहों नोतन आई॥ परमानंद स्वामी सब जानत देख देखतें सब निध पाई ॥४ ॥
Saarang
Edou surat sez sukh
NityaPad-342
एदोऊ सुरत सेज सुख सोये।॥ करत पान मकरंद प्रिया प्रिय अधर पानरस जोये॥। १॥ तनसों तनमन सों मन मिलवत मेंन पानरस भोहे।। कृष्णदास प्रभु सुखनिधि विलसत मदन मान सब खोए॥२॥
Bihaag
Gaayo naan gopal manlaayo narsalila sunee naan subodhini nasadhu sanga payohai ..
NityaPad-350
गायो न गोपाल मनलायो नरसाललीला सुनी न सुबोधिनी नसाधु संग पायोहै ॥ सेव्यौं नस्वादकरी घरीआधीधरी हरी कबहु न कृष्णनाम रसना रटायोहै।। वल्‍लभ श्रीविट्ठलेशप्रभुकी शरणजाय दीनहोय मतिही न सीस न नवायोहै ॥ रसिककहें वारवार लाजहु न आवे तोहि मनुष्यजन्म पायो पै कहांलो कमायो है॥।२।।
Bihaag
Jaag houn bal gaee mohan .. tere kaaran sthaam sunder naee murali laee ..
NityaPad-023
जाग हों बल गई मोहन ।। तेरे कारन स्थाम सुंदर नई मुरली लई ॥ ग्वाल बाल सब द्वार ठाडे बेर बनकी भई ॥| गायनके सब बंद छूटे डगर बनकूं गई ॥२॥ पीत पट कर दूर मुखतें छांड दे अलसई ।। अति आनंदित होत यशुमति देखि युति नित्य नई ॥ ३॥। जागो जंगम जीव पशु खग ओर द्वज सबई ।। सूरके प्रभु दरस दीजे होत आनंद मई ॥।
Ramkali
Bali raaja haye munn kau moto . shukra-guru kii baat naan maani hari
Part1-219
बलि राजा है मन कौ मोटो । शुक्र-गुरु की बात न मानी हरि सों परयो न खोटौ ॥ जो .बोल्यो सो प्रतिपालन कीनों | मति कहूँ न इति-उति डोलै । ताकौ प्रण राख्यो हरि-नागर जो बोले सो बोले ॥ देखो बलि राजा के कारन वामन-नतु वर लीनो । पद-त्रय-मिस छल पहुँच्यो पाताल मापि पीठ दृढ़ कीनों ॥ बलि राजा बड़भागी कहियतु जाके हेत अवतरन कीनों । 'परमानंद' देव-दुख निबरधो भकक्‍तनि कों सुख दीनों ॥
Saarang
Dhanya dhanya madhav maas ekadashi krishnapaksh wahan..
Part2-280
धन्य धन्य माधव मास एकादशी कृष्णपक्ष वहां।। धन्यदिन पहर घरी पलमहूंरत प्रकट्या परमदयाल वहां ॥टेक॥ प्रगदया प्रान अधार श्रीवल्लभ भक्तहित बपु धारियों॥ देवीजीव उद्धार कारण करुणासिंधु विचारियो॥ अंगअंग फुल श्रीलक्ष्मणभट भये पूरण कामजू॥ बल विष्णुदास विनोद घर घर गोकुलगामजू॥१ ॥ चंदन भवन लिपाये ॥ बूं कक छिरकाब कराये ॥मोतिन चौक पुराये ॥ कंचन कलश ध्यजा ॥टेक ॥ कंचन कलश ध्वजा फेहेरावत बंदनवार बंधाइयो ॥ करबिछोना महा अद्भुत जरी वितान तनाइयो॥ कहाकहूं कछू कहत न आबे होत जगमग धामजू॥ बल विष्णुदास विनोद घर घर होत गोकुलगामजू॥२॥ घरघरतें आवत ब्रजनारी ॥ बालक वृद्ध तरुण सुकुमारी ॥ नवसतसाज शूंगारी॥ हाथन पूजा कंचन थारी ॥टेक ॥ हाथन पूजा कंचन थारी गावत आवत गीतजु ॥ ला नुंडन चहूंदिशतें अंतर उपजी प्रीतजु॥ बहुत आदर दिये भीतर बोललई सब भामजु॥ बल विष्णुदास विनोद घरघर होत गोकुलगामजु ॥३॥ दानदेत श्रीलक्ष्मणभट॥ द्वारें आय जुरे गुणीजन ठट ॥ बागो पाग पिछोरा पेचकट ॥ कंचन मणि माणिक बहु पट ॥टेक ॥ कंचनमणि माणिक भूषण पट देत अति आनंदसों ॥ बेदध्वनि मुनि करत हरखत गावत गुणीजन छंदसों॥ चिरजीयो बाग कृष्णानन जाको श्रीवल्लभनामजू॥ बल विष्णुदास विनोद घरघर गोकुलगाषजु ॥४ ॥
Bilawal
Chaley anat dhoke aaye merenso tou sankuch rahehi banegi..
NityaPad-313
चले अनत धोके आये मेरेंसो तो संकुच रहेही बनेगी।। तिहारे मिलेकी फूलपीर आबे बाकी मोहि अवधि आस तारे भोरलों गनेगी ॥१॥ तुम बहुनायक सबसुखदायक दोऊधा को सोचकिये प्रीततो तनेगी ॥ जाही को सुहाग भाग ताहीको लहनो जगन्नाथप्रभु प्यारे रसमें सनेगी ॥२॥
Iman
Aashaa curr rahee haye kumari virah vyatha tunn bhaari .
Part2-328
आशा कर रही है कुमारी विरह व्यथा तन भारी । विनवे चंद्रावली प्यारी करो सहाय ललिता सुकुमारी ॥१९ !॥ समुझावत | स्थामा विवेकी सखी री तो सम ओर न पेखी | हों चंद्रावली देखी यासों को कहे कौन विसेखी ॥२ ॥
Aasawari
Latkat chalat yuvati sukhdani sandhyaasmein sakhamandal mein
NityaPad-279
लटकत चलत युवती सुखदानी संध्यासमें सखामंडल में शोभित तनगोरज लपटानी ॥१॥ मोरमुकुट गुंजा पीरोपट मुखमुरली गुंजत मृदुबानी ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधारी आयेबनतें ले आरती वारत नंदरानी ॥२॥
Gori
Sasak sasak rahee apane bhawan mein chaar masco keeyo bihaar |
Part3-003
ससक ससक रही अपने भवन में चार मासको कीयो बिहार | नंद सुवन ब्रजराज सांवरो मोह्यो परम चतुर ब्रजनार ॥१॥ कब आवेंगे मेरे घरमें बिधनासों मांगु अचरा पसार । कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर जाडो चल्‍यो दोउ कर झार ॥२॥
Malkoos
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