top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Shree vallabh binn sub jug feekau ..
Part3-041
श्री वल्लभ बिन सब जुग फीकौ ॥ श्री विद्ठल पुरुषोत्तम सुमिरों काज सब सुधरे या जीय कौ ॥१॥ श्री गिरिधर गोविंद श्री बालकृष्ण गोकुलनाथ रसिक बरनी कौ ॥ श्री रघुपति जद॒पति घन सॉबल 'सरस रंग” भजन कर याही कौ ॥५॥
Hindool
Shyam jamunan beach khewat naav .. aeka sakhee aaee gharaten kahey
NityaPad-253
श्याम जमुनां बीच खेवत नाव ॥ एक सखी आई घरतें कहे मोहुकों बेठाव ॥१॥ बेठों केसे घाट ओघट हे रपट परत हैं पाय ॥| हाथ पकर बेठाय आप ढिंग रसिकन रच्यो उपाय ॥२॥
Saarang
Pragati shrivrishbhan dulari | jaijaykar hott tribhuvanmein abb
Part1-195
प्रगटी श्रीवृषभान दुलारी | जयजयकार होत त्रिभुवनमें अब ऐहेँ गिरिधारी ॥१॥ नाचौ गावी करो कुलाहल आनंद उपज्यौ भारी | रसिक सिरोमनि रसिकराय प्रभु लीजै भेट हमारी ॥२॥
Saarang
Gidgiutantantan dhitaadhitaan mandilaga baajai ..
Pustak1-342
गिडगिउतांतांतां धिताधितां मंदिलगा बाजै ॥ तांधिला घिलांधिलां धिधिकट धिधिकट धननननथुंग ग्रिडगिडथुं गिडिगिडथुं घन प्रचंड गाजै ॥१॥ थुंगधुंगथुंगभुंगथरथरतनननननन थेई थेई शब्द उघटत नटवर नट राजै ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधर प्यारी संग नृत्य करै अंग-अंग कोटि सुलक्षण मन्मथ मन लाजै ॥२॥
Iman
Kesari chheent ruchir bandanraj syathaam subhag tunn
Part3-017
केसरी छींट रूचिर बंदनरज स्यथाम सुभग तन सोहें ॥| बिचबिच चोवा लपटानों उपमाकों कहि कोहें ॥१॥ यह सुख नव वसंत के ओसर राधानागरि जोहें ॥ चन्नभुजप्रभु गिरिधरन लालछबि कोटिक मन्मथ मोहें ॥२॥
Basant
Laal podhiye joo baal ruchir sez banaai...
NityaPad-235
लाल पोढीये जु बाल रुचिर सेज बनाई।॥ सोंधे सुवास छिरक कुमकुमा चन्दन अति सुंदर सुखदाई ॥।१॥ बिरा पोहोपमाल भोग राग अति रसाल रसई रस केलि करत ब्रजजन मन भाई ॥ वृन्दावन प्रभु चन्द चांदनी किसोरी कुंवर रहस रहस हंस कंठ लगाई ॥२॥
Adano
Aaj gopal rachyau raas dekhat hott jiya hulas naachat
Part1-353
आज गोपाल रच्यौ रास देखत होत जिय हुलास नाचत बृषभान सुता संग रंग भीने ॥ गिडगिड तक थुंगधुंग तततततत थेई थेई थेई गावत केदारो राग सरस तान लीने ॥१॥ फुले बहुभाँत फूले सुभग पुलिन यमुना कूल मलय पवन बहत गगन उड्ुपति गति छीने ॥ गोविंदप्रभु करत केलि भामिनी रससिंधु झे जयजय सुर शब्द कहत आनंद रसभीने ॥२॥
Kedaro
Baal vinod gopal key dekhat mohi bhaaven . prem pulaki
Part1-149
बाल विनोद गोपाल के देखत मोहि भावें । प्रेम पुल॒कि आनंदभरी जसुमति गुन गावें ॥१॥ बलि समेत घन सामरौ आँगनमें धावै । बदन चूमि गोद लियौ सुत जानि खिलाबै ॥२॥ शिव विरंचि मुनि देवता जाकौ पार न पाबै । सो परमानंद ग्वालकौ हँसि भलौ मनावै ॥३॥
Bilawal
Gharghar gwal detahain herry . baajat taal mridang baansuri dhol damama
Part1-047
घरघर ग्वाल देतहैं हेरी । बाजत ताल मृदंग बाँसुरी ढोल दमामा भेरी ॥१॥ लूटत झपटत खात मिठाई कहि न सकत कोऊ फेरी । उनमद ग्वाल करत कोलाहल ब्रज बनिता सब घेरी ॥२॥ ध्वजा पताका तोरनमाला सबै सिंगारी सेरी । जयजय कृष्ण कहत परमानंद प्रकट्यौं कंस को बैरी ॥३॥
Sarang
Chalchal mero kahyotunman naatar pachtehe karman... abahinto
NityaPad-124
चलचल मेरो कह्योतूंमान नातर पछतेहे करमान॥। अबहींतो पिय पायपरतहें त्यज अभिमान पावेंगी अधिक सनमान ॥।१॥ बहुनायक सुखदायक सोंकरि काहूको निवह्मोहे गुमान ॥ रसिक प्रीतमसो पियजो पैयेतो सहिये कोटिक अपमान ।। २॥
Bihagaro
Jhagarin tein houn bohot khijai . kanchanhar diyein naheen maanat
Part1-085
झगरिन तें हों बोहोत खिजाई । कंचनहार दियें नहीं मानत तुही अनौखी दाई ॥१॥ बेगि तू नार छेदि बालककौ जातहै ब्यार भराई । सत संयम तीरथ व्रत कीने तब यह संतति पाई ॥२॥ दीजै बिदा जाऊँ घर अपने कालि सॉझकी आई ॥ सूरदास प्रभु गोकुल प्रगटे भक्तनके सुखदाई ॥३॥
Devgandhar
Nandasuban milli gawat bhamini .. ' adbhut or
Part2-356
नंदसुबन मिलि गावत भामिनी ॥ ' अदभुत ओर आई देखो सखी तरुन मेघमें गरजत दामिनी ॥१ ॥ नाचत उरप लेत प्रीतम संग तिरप भेद दरसत गजगामिनी ॥ उघटत शब्द संगीत सुघर पर चुबत भोंह लोचन अभिरामिनी ॥२ ॥ रवि तनया पुलिन रास महा बिलसत बूंद शरदकी जामिनी ॥ कृष्णदास स्वामी गिरिधर पिय रीझवत सुरत केलि कोमल कला कामिनी ॥३ ॥
Goud Sarang
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page