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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Balibali charitra gokul raay | davanal koo paan keeyau | Part1-145 | बलिबलि चरित्र गोकुल राय | दावानल को पान कीयौ
पीबत दूध सिराय ॥१॥ पूतना के प्रान शोषे रहै उर लपटाय । कहत जननी
दूध डारत खीजत कछुब न खाय ॥२॥ धस्वो गिरिवर दाहिने कर धरत बाँह
पिराय । शकट भंजन धरत कुच युग कठिन लागत पाय ॥३॥ तृणावर्त
आकाशतें पटक्यौ हन्यौ मुष्ट फिराय । डरत ललना झूलत पलना खरे देत
झुलाय ॥४॥ बकासुर की चोंच फारी सुदिस दृष्टि दिखाय । कीर पिंजरा देत
अँगुरी श्याम लेत भजाय ॥५॥ बिना दीपक भवन ढूारें श्याम धरत न पाय।
अधघासुर मुख पैटि निकस्यो बछ बाल छुड़ाय ॥६॥ लिख्यो द्वारें नागकारो
श्याम देखि डराय | सहस फन पर निर्त कीनों सप्त ताल बजाय ॥७॥ घोषनारी
संग मोहन रच्यौ रास बनाय । कहत जननी ब्याह की तब हँसत बदन ढुराय॥८॥
यमलार्जुन तोरि तारे ह॒दे प्रेम बढ़ाय । कहत तात प्रकास पल््लव देह देत
दिखाय ॥९॥ वृषभ भंजन हनत केशी हन्यो पुच्छ फिराय । डरत सखान
समेत मोहन देखि व्याई गाय ॥१०॥ हरे ब्रह्मा बाल बच्छ कृत हेत दोरी माय।
बच्छ ग्वाल समूह सब मिलि फिरि ब्रज रच्यो है आय ॥११॥ कहा कहूँ जो
एक रसना बुद्धि और उपाय । सूर प्रभु हरि रसिक नागर अंगरअंग नित
भाय ॥१२॥ | Ramkali |
Banyau morr mukut natavarabapu sthamsundar kamal nayan bonki shronh lalit bhaal ghungharvaari alke .. | Pustak1-345 | बन्यौ मोर मुकुट नटवरब॒पु स्थामसुंदर कमल नयन बॉँकी श्रोंह ललित भाल घुँघरवारी अलके ॥
पीतबसन मोतीमाल हियें पदक कंठलाल हँसन बोलनि गावन गंडन श्रवण कुंडल झलकें ॥१॥
करपद भूषण अनूप कोटि मदन मोहनरूप अद्भुत बदनचंद देख गोपी भूली पलके !|
कहि भगवान हितरामरायप्रभु ठाढ़े रासमंडलमें राधासों बाँह जोटी कियें हियैं प्रेमललकें ॥२॥ | Kanharo |
Bhalein bhor aaye nayana laal | apano putt peet chhaand nilambar | NityaPad-050 | भलें भोर आये नयना लाल | अपनो पट पीत छांड नीलांबर
लै बिलसे उरलाई लई रसिक रसीली बाल ॥|१॥| रति जयपत्र लिखत दीने ऊर
स्थामघन विनगुण माल ॥ नंददासप्रभु सांची कहिये फिरफिर प्यारे हमारे
नंदलाल ॥२॥ | Lalit |
Baithe laal kalindike teeraa.. | NityaPad-221 | बैठे लाल कालिंदीके तीरा॥
ले राधे गिरिवर दे पठयो यह प्रसादी वीरा।।१॥
समाचार सुनि ये श्रीमुखके जे कही स्थाम शरीरा॥
तेरे कारण चुनचुन राखे जे निरमोलक हीरा॥२॥
सुंदरस्थाम कमलदललोचन पहिरेहै पटपीरा।।
परमानंददासको ठाकुर लोचन भरत अधीरा ॥३॥ | Saarang |
Mohi balahai douu thorko .. aeka bharoso haribhaktanako doojo | NityaPad-352 | मोहि बलहै दोऊ ठोरको ॥ एक भरोसो हरिभक्तनको दूजो
नंदकिशोरको॥। १॥ मनसा वाचा और कर्मणा नाही भरोसो औरको ।। छीतस्वामी
गिरिधरन श्रीविद्ठल वल्लभकुल सिरमौरको ॥ २॥ | Bihaag |
Saanvaro dekhat roop lubhani . chaley ree jaat chityori motan taba tey sanga | NityaPad-275 | साँवरो देखत रूप लुभानी । चले री जात चितयोरी मोतन तब ते संग
लगानी ॥१॥ वे वहि घाट पिवावत गैया हों इतते गई पानी । कमलनैन उपरेंना
फेर्यो 'परमानन्द' हि जानी ॥२॥ | Hameer |
Piya pyaareeke charan palotat.. | NityaPad-345 | पिय प्यारीके चरन पलोटत।।
ललितादिक बीजनां ले आई ताही देखकें घूंघट ओटत ॥१॥
चंदन लेप करत दोऊ अंगन आलिंगन अधरन रस घोटत ॥
नंददास स्थाम स्थामा दोऊ पोढे नवनिकुंज कालिंदीके तट ॥२॥ | Bihaag |
Slelati hari gwal-sanga fagu raing bhaari .. | Part3-326 | स्लेलति हरि ग्वाल-सँग फागु रैंग भारी ॥
इक मारत इक तारत, इक भाजत इक गाजत, इक धाबत इक पावत,
इक आवत मारी ॥ इक हरषत, इक लरखत, इक परखत घातहिं कों,
लोचन सु गुलाल डारि, सौंधें ढरकाबै || इक घूमत संग संग, इक न्यारै
है बिहरत, टरत दाँव दीबेकौं, वै जो नहिं पावै | इक गांबत इक भावत,
इक नाचत इक रांचत, इक कर मिरदंग ताल, गति-गति उपजाबै ॥ इक
बीना इक किन्नरि, इक मुरली इक उपंण, इक तुंबुर इक रबाब, भांति सौ
बजाबै॥ इक पटहा इक गोमुख, इक आउझ इक झललरि इक अमृतकुंडलिकौं,
इक्त डफकर धारें ॥ सूरज-प्रभु बल-मोहन, संग सखा बहू गोहन, खेलत
वृषभानु-पौरि लिये जात टारै ॥ | Kalyan |
Morco sir mukat banyo morr heakey maalaa .. dulhanasi | NityaPad-172 | मोरको सिर मुकट बन्यो मोर हीकी माला ॥ दुलहनसि
राधाजु दुल्हेहो नंद लाला।। १॥ बचन रचन चार हास: गावत ब्रजबाला ॥। धोंधीके
प्रभु राजतहें मंडल गोपाला ॥२॥ | Bhairav |
Lagan inanayananki vaaki .. dekhenhinduhkh vinedekhenhindu:khapirhot | NityaPad-093 | लगन इननयननकी वाकी ॥ देखेंहींदुःख विनेदेखेंहींदु:खपीरहोत
दुहुधाकी ॥९॥ टारी न टरतजाय बिनदेखेजिहीफबतहेंसाकी ॥ रसिकराय
प्रीतममनअटक्यों कहूं लगत नहींटांकी ॥२॥ | Dhanshree |
Ranganrang hoe hoe horry khenle ladillo vrajrajko .. saanvaregaat kamaldal lochan naayak prem samajko ..1.. prathamahin ritu vasant | Part3-095 | रंगनरंग हो हो होरी खेंले लाडिलो ब्रजराजको ॥ सांवरेगात कमलदल लोचन नायक प्रेम समाजको ॥१॥ प्रथमहीं ऋतु वसंत
बिलसे हुलसे होरी डांडो रोप्यो ॥ मानो फाग प्राणजीवन धन आनंदित
सब ब्रज ओप्यो ॥ २॥ मृगमद मलय कपूर अगरकेसर ब्रजपति बहुघोर धरे ॥
सरस सुगंध संवार संग दीये रंगन कंचन कलश भरे ॥ ३॥ प्रेमभरी खिलवारन
के हित सुखके साज सिंगार कियें ॥ भाग्य अपार जसोदा मैया बारबार
जलवार पियें ॥४॥ भईहै रंगीली भीरद्वारन प्रीतम दरशन कारनें ॥ अब
बन ठन निकसे मंदिरतें कोटि मदन कीये बारनें ॥५॥ फेंट भराय लई जननीपें
आज्ञालई ब्रजईंशतें ॥ नंदराय तब रत्न पेंचरचि बांध्यो गिरिधर शीशत्तें
॥६॥ तापर मोर चंद्रिका सोहे ग्रीव ढरन लहकात हैं ॥ मदनजीत को बानो
मानो रूपध्वजा फहरातहें ॥७॥ तेसेई सखा संग रंग भीने हरख परस्पर
मन मोहे ॥ वरणवरण युवतिन के कमल मानों अंबरदिन मणि संगसोहे
॥८॥ आनंद भर बाजे बाजत हैं नाचत मधु मंगल रंगकिये ॥। हरिकी हसन
दशनन की किरण नयनन की ढरन मन मोहि लिये ॥%॥ कोऊ द्वारे कोऊ
चढ अटा कोऊ खिरकिन वदन सुहाये ॥ गोकुलचंद्रमा देखनकों मानो चंद्र
विमानन चढचढ आये ॥१०॥ अबीर गुलाल उडाय चले देखत जेसें सब
कोऊ हरखे ॥ छिरकत फिरत छेल नवरंगी कहा कह्िये रस नव घन वरखे
॥११॥ राधा दृष्टि परत नहीं मोहन निरख नयन मन घूमेंहों ॥| सनन््मुख व्हेय
पिय कल्प तरूवर महाभाग्य रस फल झूमेडो ॥| १ २॥ प्रमदा गण मणि स्यामा
रसिक शिरोमणि सों रवेलन आई ॥ दुहूंदिश शोभा उमग रंग मच्यो मान
वेणु ध्वनि लाई ॥१३॥ नयनन बेन न खेलत वधू गेंदुक नवलासिन
मारमची ॥ कमल नयन कर ले पिचकाई मृग नयनन सेनन भ्रैंहनची ॥ १ ४॥
छिरकी छेल छबीली भांतन मनहरणी जोबन बारी ॥| सब अंग छींट बनी
पिय वसनन फुलीं छबि फुलवबारी ॥ १ ५॥ पहोप पराग उडाय दाव रचि अछन
अछन नेरे आई ॥ दौर दामिनीं घनघेरग्यो पिय बात बनीं सब मन भाई
॥१६॥ कोऊ मुख मांडत दे गलबइयां कोऊ पोंछत आछी छबिसों ॥| अलकन
ओहन मूल रंगरह्ो शोभा कहियन जाय कविसों ॥१७॥ कोऊ रचिरुचि
पान खबावत पुलकित अधरन परस किये ॥ कोऊ भुज गड्डि डहकाय मागत पिय नयनन चेन दिये ॥१८॥ राधा नागरि स्याम सुंदरपर प्रीत उमग
केसर ढोरी ॥ महामनोहर ताको राजा अभिषेक किये कहें हो हो होरी
॥१९॥ सरस्वती सहित महामुनि मोहे यह शोभा दंपति हेरे || कहि भगवान्
हित रामराय प्रभु हस चितवन बसी मन मेरे ॥२०॥ | Bihag |
Baraati sub parr jaauun vaari..dhruv.. rajghatson | Part2-329 | बराती सब पर जाऊं वारी॥ध्रुव॥ राजघाटसों
पुरुषोत्तम आये सेरगढसों त्रिपुरारी। जेबल पूरणमल्ल सोभित हैं
यादवेन्द्रकी बलिहारी | गुसांईदास गुन भारी ॥१ ॥ पद्मा रावल पुरुषोत्तम
जोशी जगन्नाथ महतारी। रामदास गोविन्द दुबे सोहे अरु कृष्णदाम
अधिकारी बुला मिश्र रुच्चिकारी ॥२ ॥ जीयादास रामानंद पंडित विष्णु
बेणीदास गण भारी । भगवानदास कबि भाट जु लघु पुरुषोत्तम मनुहारी ।
जाय गोपाल बलिहारी ॥३ ॥ | Hori |
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