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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Balbal balkunwari radhika nandasuban jaason ratimani .. tuun | NityaPad-116 | बलबल बलकुंवरि राधिका नंदसुबन जासों रतिमानी ॥ तूं
अतिचतुर वे चतुरशिरोमणि प्रीतिकरी केंसें रहतहें छानी ।।१॥॥ वे जोधरत तन
कनक पीत पटसो तोसब तेरी गति ठानी ॥ तें पुन श्याम सहज वे शोभा अंबरमिष
अपने उर आनी ॥२॥ पुलकरोम अबहींड्े आयो निरखरूप निजदेह सयानी ॥
सूर सुजान सखीके बूझें प्रेमप्रकाश भयो वे हसानी ॥। ३॥ | Bihagaro |
Banat naheen yamuna jee koo nahivo .. | NityaPad-037 | बनत नहीं यमुना जी को नहिवो ॥
सुंदरश्याम घाटपर ठाढे कहो कोनविधि जयवो ॥|१॥
केसे बसन उतारधरें हम कैसेंजलहीसमयवो ॥
नंदनंदन हमको देखेंगे केसेंकरकेन्हहेवो ।॥२॥।
चोलीचीरहार ले भाजत सो केंसे करपयवो ॥|
अंकन भरभरलेत सूरप्रभु काल्हनयहिमगयैबो ।।३॥। | Ramkali |
Srivallabh varanon kahaa vadai | jaake rome rome | Part2-324 | श्रीवल्लभ वरनों कहा वडाई | जाके रोम रोम
प्रति प्रकटित कोटि गोवर्धनराई ॥ वाके यूथभये न्य ारे न्यारे बरनत बरने न
जाई। रामदास कमलासी दासी सो घर छांड बसाई ॥
| Bihaag |
Shree vallabhakul mandan pragate srivitthalnath ..| | Part3-043 | श्री वल्लभकुल मंडन प्रगटे श्रीविद्डलनाथ ॥|
जेजन चरणन सेवत तिनके जन्म अकाथ ॥ १॥
भक्ति भागवतसेवा निशदिन करत आनंद ॥
मोहन लीला सागर नागर आनंदकंद ॥२॥
सदा समीष बिराजेंश्रीगिरिधरगोविंद ॥ मानिनी मोद बढ़ावें निजजन के रविचंद ॥३॥
श्रीबालकृष्ण मनरंजन खंजन अंबुज नयन ॥ मानिनी मान छूडावे बंक
कटाक्षनसेन श्री वललभ जग बल्लभ करुणानिधि रघुनाथ ॥ ओर कहां लगि
बरनों जगवंदन यदुनाथ ॥५॥ श्रीघनश्याम लाल बल अविचलकेलिक
लाल ॥ कुँचित केश कमल मुख जानों मधुपन केटोल ॥६॥ जो यह चरित्र
बखाने श्रवण सुने मन लाय ॥ तिनकें भक्ति जु बाढे आनंद द्योस विहाय
॥७॥ श्रवण सुनत सुख उपजत गावत परम हुलास ॥ चरण कमलरज पावन
बलहारी कृष्णदास ॥८॥ | Gouri |
Mohan dekh siraane nayana .. | NityaPad-288 | मोहन देख सिराने नयना ॥
रजनी मुख आवत सुरभिनसंग मधुर बजावतबेना ॥१॥
ग्वालमंडली मध्यविराजत सुंदरताको ऐना ॥ आसकरणप्रभु
मोहननागर वारु कोटि छबिमैना ॥२॥ | |
Merey nandanandan paachhe paraddo hailey queyon bachoon.. sou | Part3-278 | मेरे नंदनंदन पाछे परद्ो हेली क्यों बचूं॥ सो
सिखदे मेरी हि तू सयानी वाके रंगनरचूं ॥१॥ कबहुक कर में डफ गहेरी
उठे दोहरा गाय ॥ कबह्ुक देख नयन ललचाबे सेनन हा हा खाय ॥२॥
मेरे लिये बगर मेंरी आनि करे पहचान ॥ वारवार के आबने सरबी हों जु
गई जियजान ॥३॥ नाम ओरको ले सखीरी टेरे मोहि सुनाय ॥ हों समझत
जो वह कहे सखी क्यों हीं रहे बताय ॥४॥ मोहि देख धुक पुक करेरी
गहरे लेत उसास ॥ हों जिय डरपों आपने सखी सास ननद को त्रास ॥५॥
ढिंग व्हे यों कहिजातह सखी आवन देधों फाग ॥ तब कछूबे चलि हे नहीं
नरनारिन अनुराग ॥६॥ ज्यों ज्यों होत जनाजनोंरी त्योंत्यों बाढ़े प्रेम ॥
बारबार के तामने सखी ज्योंनिपटत हैं हेम ॥७॥ नयनन नयन नहीं बनीरी
बनतबनी कछु आन ॥ हों समझों जिय आपने उत्त जगनज्नाथसुग्यान ॥८॥ | Sorat |
Ruchir ramit rachi raas .. kusumit kaanan summ drumveli nijakrit | Part1-323 | रुचिर रमित रचि रास ॥ कुसुमित कानन सम द्रुमवेली निजकृत
उडुप प्रकाश ॥१॥ युवती युगल युगल ग्रति माधी करत विनोद विलासं ॥
वेणु भृदंग मैंजीर किकिणी क्वणित मधुर शब्दमुदुहासं ॥२॥ यमुनातीर भीर
खगमृगकी मंद समीर सुवासं ॥ बरषत कुसुम इंद्रसुर धावत शंकर
त्यजतकैलास ॥३)॥ निरख नयन छवि मुरयो मन्मथ लोचन पद्मपलाशं ॥
विष्णुदास प्रभु गिरिधर क्रीड़त कथाकथित शुक व्यास ॥४॥ | Todi |
Uttar kahihon kahaa jaay piyason hoai | NityaPad-333 | उत्तर कहिहों कहा जाय पियसों होआई
आंधयेकी ॥ अर्धनिशा बीती हौंहारी तू जीती मैंजु कही तोसों कोटिक बात तेरे
भायें बूंद तयेकी ॥९॥ तासों कहा कहिये आली री ताहि न अपनी बुद्ध
सिखयेकी ।। सूरदासमदनमोहन कबके मगजोवत तु बैठी छांह छयेकी ॥२॥। | Poorvi |
Kaushalpur mein bajat badhaai.. sunder suta jaayo kaushalya prakat bhaye raghurai..1.. | Part2-257 | कौशलपुर में बजत बधाई॥ सुंदर सुत जायो कौशल्या प्रकट भये रघुराई॥१॥
जातकर्म दशरथ नृपकीनोअगणित धेनु दिवाय।॥
गज तुरंग कंचन मणि भूषण पावस ऋतुमानो ब रधाय ॥२॥
देत असीस सकल नरनारी चिरजीयो सतभाय॥
तुलसीदास आस पूरन भई रघुकुल प्रकटे आय ॥३ ॥ | Saarang |
Aaj sakhee kunjan faag udaaun. praan preetam abb | Part2-351 | आज सखी कुंजन फाग उड़ाऊं। प्रान प्रीतम अब
हि मोहे मिलिहें तो मुख मिसरी भराऊं॥१ ॥ ऐसी सुघर नार को क्ज में
ताको नाम धराऊं। रसिक प्रीतम पिय मिलो मया कर सब तन ताप
नसाऊं॥२ ॥ | Sughrayi |
Aangan kheliyai jhanak manak . larika youth sanga munn bhohan | Part1-161 | आँगन खेलियै झनक मनक । लरिका यूथ संग मन भोहन
बालक ननक ननक ॥१॥ पैयों लागों पर घर जावी छाँडी खनक खनक ।
परमानंद कहत नैंदरानी बानिक तनक तनक ॥२॥ | Saarang |
Murali sunat bhaee pati bauri .. grihagrihate kaaraj taja apane | Part1-297 | मुरली सुनत भई पति बौरी ॥ गृहगृहते कारज तज अपने
निकस चली मगदौरी ॥।|९॥ नयन सिंदूरमंग अंजत श्रवण बिजोरा साजें ॥
सीस तरोना मालगुहीं कचझुमक नाक बिराजें ॥२॥ एक छांड पयपान
कराबत अपने सुतहि चली ॥ निरखनिरख प्रफुल्लित ब्रजचंदही ज्यों वर
कुमुदकली ।।३।। | Kalyan |
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