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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Khelein chaachar narnari maaee horry rung suhavanon ..
Part3-242
खेलें चाचर नरनारि माई होरी रंग सुहावनों ॥ बाजत ताल मृदंग मुर॒ज डफ वीना ओर सहनाई माई ॥१॥ उत्खिल वार रसिक गिरिधर पिय इतराधिका खिलार ॥ उनसंग ग्वाल बाल सबराजत इन संग जोपकुमार ॥२॥ उनन लई भर फेंट गुलालन इनन लई पिचकारी ॥ अति अनुराग भरे मिल खेलत अंतर भाव उघारी ॥३॥ उत्तले नाम पढत हो लें मुख इतहि देत ये गारी ॥ एक जु युवती धाय गहिलाई भर पियकों अंकवारी ॥४॥ एकन लई झटक कर मुरली एकन लीये हार उतारी ॥ एक मुख मांड आंज दोऊ नयना एक हसत देतारी ॥५॥ एक आलिंगन देतलेत एक रही जो बदन निहार ॥ एक अधघर रसपान करत एक सर्वस डारत बार ॥६॥ एक मगम रस भुज प्रीतमकी लेत आप उरधारी ॥ धन्य ब्रजयुवती भाग्य पूरन ये यह रस विलसन हारी ॥७॥ मच रह्यो गहगड सिंघ द्वारपें सकतन कछू संभारी ॥ भीजे खेल रेल पेलन में श्रीविद्डल गिरिधारी ॥८॥
Sarang
Jayati sriradhike sakal sukh saadhike tarunimani nitya
NityaPad-136
जयति श्रीराधिके सकल सुख साधिके तरुणिमणि नित्य नौतन किशोरी ॥ कृष्णतन नीलघन रूपकी चातकी कृष्णमुख हिमकिरणकी चकोरी ।। १॥ कृष्णदूग भृंग विश्राम हित पद्दिनी कृष्णदृग मृगज बंधन सुडोरी | कृष्ण अनुराग मकरंदकी मधुकरी कृष्णगुणगान रससिंधुबारी ॥ २॥| परम अद्भुत अलौकिक मेरी गति लखमनसि सांवरें रंग अंग गोरी ॥| और आश्चर्य में कहूँ न देखयों सुन्यो चतुर चौसठ कला तदपि भोरी ॥३॥ विमुख परिचित्त ते चित्त याको सदा करत निजनाहकी चित्तचोरी || प्रकृत यह गदाधर कहत कैसे बने अमित महिमा इते बुद्धि थोरी ।।४॥।
Ramkali
Uuthomere laal kaleu kije .. madhumeva pakwan mithaai sadyadudh
NityaPad-031
ऊठोमेरे लाल कलेऊ किजे ॥ मधुमेवा पकवान मिठाई सद्यदुध धोरी को पीजे ।॥१॥ टेरत ग्वाल बाल खेलनको मोर मुकट मुरली कर लीजे॥। ईतनि सुनत बेहेस ऊठ बेठे सुरयेहे देखत सुख जीजे ॥२॥
Bhairav
Srivallabh sabke hita kaaran.. ashrilakshman grih
Part2-298
श्रीवललभ सबके हित कारण॥ अश्रीलक्ष्मण गृह प्रकट भये हें दैवी जीव उद्धारण ॥१ ॥ श्रीभागबत विशद करणकों भक्ति मार्ग विस्तारन॥ कृष्णदयास करुणानिधि प्रकटे निजजनके प्रतिपालन ॥२ ॥
Sarang
Vraj mein ghardhar bajat badhaai .. nandamaharkain putra bhayo ree
Part1-004
ब्रज में घरधर बजत बधाई ॥ नंदमहरकैं पुत्र भयो री जाकौ नाम कन्हाई ॥१॥ ज्ञातिकर्म करि रीति जुगतिसों नालकपीड़ बनाई॥ अधिक दान दियो विप्रनकों अनधन द्रव्य अघाई ॥२॥ बहनि सुवासिन याचन आई दैहौं वीर बधाई ॥ तेरे घर अवतार लियौ है आपुन त्रिभुवनराई ॥३॥ एकनकौं सारी पहरावत एकनकौं पटचीर ॥ एकनकौं गढ दान देत है विप्रन कंचन हीर ॥४॥ याचक जन मिलि थाचन आये गावत नंददुवार ॥ एतौ धन देओ तुम हमकों जो नीको होय हमार ॥५॥ हरख्यौ गोकुल गाम सब हरखे हरखे सुरनर नारी ॥ माधोदास भक्त सब हरखे हरखी जसुमति महतारी ॥६॥
Devgandhar
Pyaari kamalvadan tero yaaheete dharey heen rahat hein kamal curr ...
NityaPad-111
प्यारी कमलवदन तेरो याहीते धरे हीं रहत हें कमल कर ॥। वरहीचंद देख कछु अनुसारयाहीते धरेयही रहतहें माथें पर १॥ दशनजोत अनुसार याहीतें धरत कंठ मोतिन लर || कंचन वरण तेरो याहीतें प्यारी याहीते धरे रहत पीतांबर ॥ २॥ तुब स्वर कंठ मिलत कछुयाहीते धरत बंसी अधर | गोविंदबल इम कहत प्यारी सो इनवातन नेक नरह्यो जात वीतत बासर ॥ २॥।
Kanharo
Horry khelati vraj kunjan mahiyaan .. nand naindan
Part3-362
होरी खेलति ब्रज कुंजन महियाँ ॥ नंद नैंदन सौं अति रति बाढ़ी लाड़िली बिहरति कदंब की छैयाँ ॥१॥ पौढ़न के समे के औसर और न कोऊ रघ्यों तिहिं सैयाँ ॥ 'सरस रंग” संतत यह जोरी पीतम प्यारी बिना कोऊ नहियाँ ॥२॥
Kafi
Aaj badhaai haye barsaanen . kunwari kishori janm liau haye sub
Part1-190
आज बधाई है बरसानें । कुँवरि किशोरी जन्म लियौ है सब लोकन बजे निसानें ॥१॥ कहत नंद वृषभानरायसों बहोत बात को जानें । आज भैया हम सब ब्रजवासी तेरे हाथ बिकानें ।|२॥ या कन्या के आगें कोटिक बेटनकों को माने । तेरे भलें भ्रौो सबहिनकी आनंद कौन बखानें ॥३॥ ऐैल छबीले गोप रंगीले हरद दही लपटानें | पहरे बसन बिबिध अंग भूषण गिनत न राजारानें ॥४॥ नाचत गावत प्रेम मुदित नरनारीको पहचानें । व्यास रसिक तनमन फूले अति निरख सबै खिसियानें ॥५॥
Saarang
Gopalmai kheltahaichkadori ..
NityaPad-189
गोपालमाई खेलतहैचकडोरी ॥ लरकापांचसातसंगलीने निपटसांकरी खोरी ॥|१॥ चढघर होरी झरोखा चितयो सखी लियोमनचोरी |॥। बांएहाथवलैयालीनी अपनोअंचरछोरी ॥|२॥ चारोंनयनमिले जबसन्मुख रसिकहँसे मुखमोर ।। परमानंददासरतिनागर चितेंलईरतिजोर ।। ३॥।
Bilawal
Terho tair kardab chadh doorjaatahen gaiyaan ..
NityaPad-104
टेरहो टेर कर्दब चढ दूरजातहें गैयां ॥ तुह्यारी टेर सुनत बगदेंगीपाछे पीजे घैयाँ ॥॥१॥ झटकत रई पतूखी फारत दयावत नंददुहैयां ॥ हमतें बहुत तिहारे गोधन हसत कहाहो भैया ॥ २॥ आज हमारी घिरतन-घेरी उतहीकों जातहें धैया ॥ रामदासप्रभुपर हँकत आंई हेरी देत कन्हैया ।। ३।।
Poorvi
Khele basant piyaa sanga podhi aalas yutt rung
Part3-363
खेले बसंत पिया संग पोढी आलस युत्त रंग भीनी ॥ नवल लाडिली प्रान प्रीया दोऊ नवल अंस भुज दीनी ॥ १॥ नौतन सेज रची सखीयन मिलि अति सुगंध सरसीनी ॥ नवल बीजना कर लीयें माधुरी निरखत नेह नवींनीं ॥२॥
Bihag
Aeka boll bolo nandanandan tokhelon tum sanga ..
Part3-024
एक बोल बोलो नंदनंदन तोखेलों तुम संग ॥ परसो जिन काइूकों प्यारे आन अंगनाअंग ॥१॥ बरजतिहों बीरी काइकी जसुमति सुत जिनलेहु ॥ परिरंभन आलिंगन चुंबन नेन सेन जिनदेहु ॥२॥ मेरे खेल वीच कोऊ भामिनी आयलाल कों भरिहे ॥ प्राननाथहों कहे देतिहों मोपे सहीन परिहे ॥ ३॥ प्रभु मोहि भरो भरोंहों प्रभु कों खेलो कुंज विहारी ॥ अग्रस्वामीसों कहत स्वामिनी रंग उपजेगो भारी ॥४॥
Basant
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