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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Baaron mean khanjan aaleeke doogan parr bhramar munn .. atihasi loney | NityaPad-110 | बारों मीन खंजन आलीके दूगन पर भ्रमर मन ।। अतिहसि लोने
लोने अतिही सुढार ढारे अति कजरारे भारे विनही अंजन ।।१॥ श्वेत असित
कटाक्षन तारे उपमाको मृगही कुंजन ॥ परमानंदप्रभु रसवश करलीने प्यारीजूके
मनके रंजन ॥२॥। | Nayaki |
Chalo bhaiyaho nandmahar ghar baajat aaj badhaai . jaayo poot | Part1-043 | चलो भैयाहो नंदमहर घर बाजत आज बधाई । जायो पूत
यशोदारानी गोकुलमें निधि आई ॥१॥ कोऊ वन जिन जाऊ गायले आवो
चित्र बनाई । करो कुलाहल नाचौ गावो हरद दही लपटाई ॥२॥ छिरकत
चोबा चंदन वंदन हरद दूब वेराई । माखन दूध दहीकी कादों भादोंमास
मचाई ॥३॥| नाचत गोपी मंगल गावति घरघरतें सब आई । विहँसित बदन
नैन तन पुलकित उर आनंद न समाई ॥४॥ बाजत ताल पखावज आवज
बिचबिच बैन सुहाई । जयजय ध्वनि सब बोलत डोलत पुनि कुसुमन
बरखाई ॥५॥ परम उदार सकल ब्रजवासी घरघर बात लुटाई । जाचक धन
ले भये अजाची व्यास चरन रज पाई ॥६॥ | Sarang |
Bhojanko baithe laal dulha dulhani lahani sanga mill | Part2-331 | भोजनको बैठे लाल दुलहा दुलहानि लहनि संग मिल
कौर देत ललिता सहचरी | पकवान बहो भांत छाब भरे धरे आन पांचों
भातन थाल वेगन बडी करी ॥१ ॥ खोबा बासोंदी संजाब मेवा मीठा धरे
आम कोन कहि सके डला बेला भरिं धरी । अति हि अघाय दोऊ अचवत
है रतन जटित कंचन झारी जमुना जल भरी ॥२॥ सुंदर बीरी बनाय
अरोगावत ललिता मुसक्यात जात प्रिय सखी पास खरी। गल बहियां
मेल खरे भक्तनके ताप हरे सुघर रसिकराय रस रेल करी ॥३ ॥ | Aasawari |
Kunj mahal mein russ bharey khelat piya pyaari .. | NityaPad-317 | कुंज महल में रस भरे खेलत पिय प्यारी ॥
तेसोई तरनितनयातीर तेसोई शीतल सुगंध मद
बहत पवन तेसीये सघन फूली जुई निवारी ॥१॥
प्रफुल्लित वनराजीव तेसेई अलिगुंज श्रवणनको अति सुखकारी ॥
गोविंद” बल बल जोरी सदाई विराजो गावत तान तरंग सुघर भारी ॥२॥ | Bihaag |
Krishnachandra | NityaPad-326 | कृष्णचंद्र
आवेंगे मेरे आजरीमाई बहुत दिननकी अवधि आज ॥ तनमन जोबन आनंदित
वदनहास नयन सेनबैन मधुर थार मध्यकरकें पहलें मिलहोरी भेटसाज ॥।१॥
गृहगृहतें सख्री बाल लेंहुरी अति प्रवीन वीनाकरधर हरिसंग करहों रतिसुख
समाज ॥ मकरंद नंदसुतकिशोर रिझवोंगी गानतान आनआन आछेहूं कृष्ण रागरंग
रिझायकें लेहोरी एक छत्रराज ॥२।। | Bihagaro |
Sreejmunaji tihaaro pulin mohi bhaaven .. | NityaPad-012 | श्रीजमुनाजी तिहारो पुलिन मोहि भावें ॥
सुरब्रह्मादिक ध्यान धरतहें सो सुपने नहिं पावें॥९॥
बिच बिच कुंजसदन अतिसुंदर श्यामाश्याम सुहावें ॥
चहूंदिस सकलफूल अति फूले गुहि गुहि कंठ धरावें | २॥
कुसुमनके बीजना जो संवारे सखियन बांह दुरावें ।
सूरदास प्रभु सबसुखसागरदिनदिन सोभा पावें ॥३॥ | Ramkali |
Gwal pagaa key pada.. | NityaPad-254 | ग्वाल पगा के पद॥
जै छेल छबीले रंगरंगीले ग्वालपगा आज धर्यो मस्तकपर।॥
छोर छबीलो पीतरंगको सूंथन कटि तेसो ओढे पीताम्बर॥ १ ॥
मोतीयन कुसुममाल उरस्थल कुंज महल बेठे राधावर।।
सीतल सरस सुवास लेत तहां कुंभनदास प्रभु ग ोवरधनधर।॥२॥ | Saarang |
Jaani rituraj sub sukh curran kaaj vrajraj | Part3-254 | जानि ऋतुराज सब सुख करन काज ब्रजराज
के लाल कौं रुचि नवीनी ॥ उपजी अंग-अंग मानु प्रफुल रंग-रंग सब
सखन लिये संग करमनी प्रबीनी ॥ १॥ साजि दल जोरि सब लै चले कुंज
कों सखिन के संग प्यारी रंग भीनीं ॥ खेलि होरी करैं बिबिधि बानिक | Sarang |
Nand key nandan aalee ! mohi keenhin bawri . | Part3-215 | नंद के नंदन आली ! मोहि कीन्हीं बावरी ।
कडा करों क्यों हूँ, चित्त, रहत नाहिं ठाँई री ॥ बिहरत हरि जहाँ आलि !
तहाँ तु हूँ आई री ॥ बासर अरू निसिहं आलि, मोहि यह चाई री ॥
जमुना तें भरिबे जल, जान यहै दाँई री ॥ गुरू-जन अरू पुर-जन सौं,
और नहिं उपाई री ॥ मुख गावै काफि राग, मुरलिका बजाई री। धुनि-
सुनि मैं तनु भूली, अति ही सुखदाई री ॥ चंदन चूरी कपूर, फेंटनि सु
भराई री ॥ सौंधे भारि पिचकारी , मारत सौ धाई री ॥ आतुर छै चली,
और जाई कि न जाई री ॥ चित न रहत कहूँ ठौर, और नहिं सुहाई री ॥
मिलिये प्रभु-सूरज-कौं, सकुच सब गँवाई री ॥ लाज डारि, गारि खाई,
कुल ही बिसराई री ॥ | Kafi |
Pragat bhaye tailang kull deep.. shrilakshman bhata | Part2-284 | प्रगट भये तैलंग कुल दीप॥ श्रीलक्ष्मण भट
अति आनंदित सुत मुख निरखत आय समीप ॥|१॥ मात इलंमा कूख
उदय भयो ज्यों उपजत मुक्ताफल सीप॥ सगुणदास मुख कहत न आ वबे
यज्ञ प्रसयों नव खंड सप्त द्वीप ॥२ ॥ | Bilawal |
Aaj giriraj sub saaji saajain .. naval navroop dhari daras kaajain .. 1.. | Part3-063 | आज गिरिराज सब साजि साजैं ॥ नवल नवरूप धरि दरस काजैं ॥ १॥
नवल नंदलाल सकल ब्रज बाल लीनै सँग खेलि रस फागु सुख सरस लीनौ ॥
नवल हरिदास छबि निरखि अति हरखि मन करखि “कल्यान” रस रँँग भीनौ ॥२॥
| Basant |
Syaam chaley lalach mein lapataane .. | NityaPad-056 | स्याम चले लालच में लपटाने ॥
कोन त्रिया ऐसी तुम पाई नेना लख ललचाने ॥१॥
लंपट लोभी उड़त भंवर ज्यों मदन जाल अर ुझाने ॥।
जगन्नाथ कवि राय के प्रभु के लच्छन हम सब जाने ॥ २॥ | Malkos |
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