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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Mangal aarti mill vaarati vrajnari mangalanidhi manlarupaki .. | NityaPad-133 | मंगल आरती मिल वारती व्रजनारी मंगलनिधि मंलरूपकी ।।
बदनथार किरण नयन दीपजोति तामें पूरत नेह अनूपकी ॥
घंटा ताल मुदंग झालरी उपजत अवधर भूपकी ।॥
पियसुजान गिरिधरको वदनचंद देख मिटत धूपतें तपत मदन धूपकी ॥१॥ | Bilawal |
Apane lalke yun gaauun . tum jhoolau houn harkhi jhulaau prem | Part1-113 | अपने लालके युन गाऊं । तुम झूलौ हों हरखि झुलाऊ प्रेम
कलोलन जाऊँ ।|१॥ नखशिख लौं सिंगार बनाऊँ भाल डिठौना लाऊँ ॥
कुलह सुरंग सिर पीत झगुलिया हरि नखशिखलों पहराऊँ ॥२॥ चकई भौंरा
पाटके लटकन विविध खिलोंना खिलाऊँ । बार-बार पलनातैं लैकें स्तनपान
कराऊँ ॥३॥ मधुमेवा माखन मिश्री लै प्यारें कों जु चटाऊँ । श्रीविट्रठल
गिरिधरनलालकों देखि देखि सुख पारऊँ ॥४॥ | Ramkali |
Phoolankau palana jhoolat lalana harakh jasomati jhulaaven hoe. | Part1-112 | फूलनकौ पलना झूलत ललना हरख जसोमति झुलावें हो।
गहत डोर कर पाटकी मन प्रभु अति हुलसावें हो ॥१॥ बहु विधि विविध
खीलोना ले लै गाय बजाय हूलसावें हो ||२॥ नंद हरख मनभयी निरख सुख
गोपीजन मंगल गावें हो । रस यह देख देव हरखत भये सूर चरित जस गावें
हो ॥३॥ | Aasawari |
Khelan aaye hari nandgaamaten rung bheene barasaane .. | Part3-318 | खेलन आये हरि नंदगामतें रंग भीने बरसाने ॥
मृगमद मेद अरगजा चोवा सब नारी नरसाने ॥१॥ दूम ढिंग छांड भांड
केसर मुख रिझत सुख सरसाने ॥ बिन कारज कारज कर राखे शोभित
चख अरसाने ॥२॥ सोई अंजन बिष ईशद लोचन करें मदन खरसाने ॥
“कृष्णजीवन' लछीराम के प्रभु माई खेल लखजीये जलथर वाने ॥३॥ | Hameer |
Nagri nandlal sanga rung bharirajen .. | NityaPad-133 | नागरी नंदलाल संग रंग भरीराजें ॥
श्याम अंस बाहुदिये कुंबरि पुलक पुलकहिये मंदमंद हसन प्रिये कोटिमदन लाजें | १॥
तरूतमाल स्थामलाल लपटी अंग अंगवेलि निरख सखी छबि सुकेलि नुपूर कलवाजें ॥
दामोदर हित सुदेश शोभित सुंदर सुवेष नवलकुंज भ्रमरपुंज कोकिलकल गाजे ॥।२॥ | Bhairav |
Raniju tumhoonkon yeye dinn aayee .. firi firi kahat yahai | Part1-013 | रानीजू तुमहूंकों ये दिन आयी ॥ फिरि फिरि कहत यहै
चंद्रावलिं यह सुख वेगि हि पायौ ॥१॥ गोदभरी ऐसे ढोटासों तुमारी भाग
फलायौ ॥ शिरपर छत्र आनंदरायसे विधि यह हमहि दिखायौ ॥२॥ ऐसी
ऐ भई सुनो रानीजू यह घर पूत कन्हाई ॥ श् री विइ्लगिरिधर तुम जाये हम तन
दाह बुझाई ॥३॥ | Devgandhar |
Bhori bhori batian curr curr munn harleenon .. naval naar | NityaPad-308 | भोरी भोरी बतियन कर कर मन हरलीनों ॥ नवल नार
कमलवबंदन रूपके रसीले नयना कछुक जोवन मदमाते तामें काजर भरदीनो ॥१॥
मूदु मुसकाय कछु चितई छबीली नाजानो कछुक चेटक कीनो ॥ चतुर विहारी
मेरी सुधिबुधि टारी प्यारी नेक मयाकर चीनो ॥२॥ | Kalyan |
Govardhan girishung shilanpar baithe chhaak khaat dadhiodan |. | NityaPad-203 | गोवरधन गिरिशुंग शिलनपर बैठे छाक खात दधिओदन |।
आसपास ब्रज बालक मंडली मध्यवहीं बलिमोहन बैठे व खात खबावत प्रेम
प्रमोदय ॥१॥ काहको छीको नोय छोर गहि डारत वह वापर वह वाकी
कोदन ॥ बालकेलि क्रीडत गोविंदप्रभु हँस गिर जात सुबलकी गोदन ॥॥२॥ | Saarang |
Dhanya madhav maas krishna ekadasi bhatt lachhman dhaam pragat valllabh bhaye. | Part2-289 | धन्य माधव मास कृष्ण एकादसी भट्ट लछमन धाम प्रगट वल्लभ भये।
धन्य चंपारन्य धन्य धरनी सकल धन्य घटिका प्रहर धन््य अति पल भये॥१ ॥
धन्य यसपुंज पावन करन सृष्टि को प्रगट करी कृष्णलीला सहित सो किये।
धन्य गावत 'रसिकदास' बारंबार कीजिये सफल पूरन मनोरथ हिये ॥२ ॥ | Aasawari |
Vishad kadamb saghan vrindaban rachyau raas tarani tanyatat .. | Part1-323 | विशद कदंब सघन वृंदाबन रच्यौ रास तरणि तनयातट ॥
शरदनिशाः उड़पति उजियारी पूरचौनाद मुरली नागरनट ॥१॥ श्रवण सुनत
चली व्रजसुंदरि साजि सिंगार पेहेर भूषणपट ॥ अति हुलास कुमदिनी ज्यों प्रफुल्लित
निरख लाल टाढ़े बंसीबट ॥२॥| मंडल मधि नाचत पिय प्यारी गावत स्वर टोडी
तान बिकट ॥ दास सखी देखत नयनन भर वार फेर डारों कोटि मदनभट॥३॥ | Todi |
Palchhin rajani ghatat ... | NityaPad-061 | पलछिन रजनी घटत ॥।
त्योत्यों प्यारी राधा जुके नवल लाल के तिलक भाल पर कुलही चरन लोटत ॥।१॥
हां हां करत भरत अंकवारी मुसक मुसक मन मान सटत ॥
धन धन भाग गो पीजन सूर सुख रहस्य बधाई बटत ॥।२॥ | Bihaag |
Sakhiman lagyo vahithor .. | NityaPad-091 | सखीमन लाग्यो वहिठोर ॥
विव्हलभई सकलब्रजडोलत बातविसर गईओऔर ।॥।१॥।
मारगजात अचानकदेखे अखियनकीनीदोर ॥।
प्रफुल्लित कमलनिरखमुख हरिकोछबिर्सगीधेभोर ॥२॥
विरचनसक्यो कहाकरू यद्यपिबंघूबमषर सबखोर ॥
विद्यादासबिलोकविमोहीश्रीगोपालसिरमोर ॥ ३॥ | Dhanshree |
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