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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Gaikhilayo chaahat girivardhar barjatahen nandrai .. | Part2-042 | गायखिलायो चाहत गिरिवरधर बरजतहें नंदराई ॥
धेनु बहुत बाढ़ी हें मोहन देखहूंकी क्यों धाई ॥१॥
राखेंहे रखबारे चहुंदिश ब्रजराजे न पत्याई॥
जसुमतिरानी ओर रोहिणी यह सिख सबन सिखाई ॥२ ॥
बिना लाल खेलत नहिं धूमर जब एसी सुधि पाई॥
हूंकहूंकके ऊपर धावत ले लकुटी अहोटाई ॥३ ॥
हस मुसिकाय श्यामघन सु पुरती रली मधुर बजाई ॥
त बतहाँ दास चत्रभुज सब मिल इकटक भले खिलाई ॥४ ॥ | Sarang |
Aaya queyon nadekho laal aapani pyaareeki chhabi chandani mein | NityaPad-339 | आय क्यों नदेखो लाल आपनी प्यारीकी छबि चांदनी में
पोढी यातें चन्दहु रहो लजाय || मंडल पोहोपमाल नीलांबर अंबर नासिकाको
मोतिदेखे उडुगण सकुचाय ॥१॥ आयेहैें निकटलाल रीझ रहे ललचाय वारवार
देखदेख मुखकी लेत बलाय ॥ नन्ददास प्रभुपिय अधरन बीरीलाय रसिक
बिहारिन प्यारी चौंकपरी मुसकाय ।।२॥ | Adano |
Bhayau vrajraj maharkaipoot .. leey leey naam bulawat gawat aavee | Part1-007 | भयौ व्रजराज महरकैपूत ॥ ले ले नाम बुलावत गावत आवी
सकल संयूत ॥१॥ यह सुनि स्रवण सबै उठि धाये अति आनंद भरे ॥ सुंदर
दूब अक्षत भरि दीये कुमकुम साथिये धरे ॥२॥ नाचत ग्वाल करत कुलाहल
मंगलचार करें ॥ श्रीविद्रलनग्रिरिधर प्रगटे ते सब सुखते न टरैं ॥३॥ | Devgandhar |
Shravan suni sajani baaje mandilra . aaj nishi laagat param | Part1-068 | श्रवन सुनि सजनी बाजे मंदिलरा । आज निशि लागत परम
सुहाई | अति आवेश होत तन मनमें श्रीगोकूल बजत बधाई ॥१॥ दे दै कान
सुनत अरू फूलत रावल़के नरनारी । नंदरानी ढोटा जायौ है होत कुलाहल
भारी ॥२॥ अति ऊँचे चढ़ि टेर सुनावत पसरि उठे जे ग्वाल । गैयाहो बगदाबौरे
भैया भयौ नंदके लाल ॥३॥ आनंदभरि अकुलाय चलीं सब सहज सुंदरी
गोपी । प्रदुर्भाव यशोदा सुतकौ तामें तनमन ओपी ॥४॥ चंचल साज सिंगार
चंदमुखी चंचल कुंडल हारा । हाथन कंचन थार बिराजत पग नूपुर झनकारा॥५॥
बरखत कच कुसुमन शोभित गली दरश चोंप जिय भाई । गावत गीत पुनीत करत
जग जसुमति मंदिर आई ॥६॥ धन्य दिन धन्य यह राति आजकी धन्य धन्य
यह सब गोरी । श्याम सुंदर चंदे निरखत मानों अखियाँ त्रिखित चकोरी ॥७॥
शोभा जुत आई कीरति अपने गृह मानि बधाये | याचक जन घन घन ज्यों बरखत
भान गोप तहँ आये ॥८॥ आय जुरे सब गोप ओपसों भयौ जो मनकौ भायी।
पंचामृत सीसनतें ढारत नाचत नंद नचायो ॥९॥ नाचत ग्वाल बाल रसभीने
हरद दही भरि राजैं इत निशान उत भेरि दुंदुभी हरखि परस्पर बाजें ॥१०॥
खग मृग द्रुम दिशि दिशि भवननमें देखियत हैं सरसाने । प्राननके आयें इंद्री ज्यों
यों ब्रजजन हुलसाने ॥११॥ ध्वजा वंदनमालालंकृत नंद भवनमें सोहै । व्यौम
विमानन भीर भई लखि अमरनकौ मन मोह ॥१२॥ महाराज ब्रजराज नंदपै
जो माँग्यौ सो पायौ । जाकें ऐसौ पूत भयो ताकौ न्याय जगत यश छायौ ॥१३॥
जिनको सुख सुमिरत ब्रह्मादिक थों हुलसै ब्रज गेही | कहि भगवान हित रामराय
प्रभु प्रगटे प्रानसनेही ॥१४॥ | Bihaag |
Arujhi kundal lutt besari soun peet putt banmala beach aana | Part1-330 | अरुझी कुंडल लट बेसरि सों पीत पट बनमाला बीच आन
असुझे हैं दोऊ जन ॥ नयनन सों नयना प्राणन सों प्राण अरुझि रहे चटकीली
छबि देख लटपटात श्यामघन ॥१॥ होड़ा होड़ी नृत्य करें रीझरीझ आकों भरें
तत थेई तत थेई रटत मगन मन !। सूरदास मदनमोहन रास मंडल में प्यारीकौ
अंचल लै लै पोंछत हैं श्रमकन ॥२॥ | Saarang |
Aaye merey nand nandanke pyaare. | NityaPad-369 | आये मेरे नंद नंदनके प्यारे।
माला तिलक मनोहर बानो त्रिभुव न के उजियारे ॥ आये.॥
हृदय कमल के मध्य विराजत श्रीब्रजराज दुलारे।
प्रेमसहित वसत उर मोहन, नेकहुँ टरत न टारे ॥ आये . ॥
कहाजानु को पुन्य उदेभयो मेरे घरजु पधारे।
परमानंद करत नोछावर, बारबार तन बारे ॥आये.॥ | Bihaag |
Bhogike dinn abhyang snan curr saaj singar shyam subhagatan .. | Part2-234 | भोगीके दिन अभ्यंग स्नान कर साज सिंगार श्याम सुभगतन ।।
पुनि फूलि तिलवा भोग धरके परम सुंदर आरोगावत् सब निजजन ।। १।।
श्रीधनश्याम मनोहर मुरत करत विहार नित्य ब्रज वृन्दावन ।।
परमानंददासको ठाकुर करत रंग निशदिन ।।२।। | Malkos |
Tuu tou vegachal yamini jaay ghatat |... | NityaPad-326 | तू तो वेगचल यामिनी जाय घटत |॥।
न करि विलंब मिल नंदसुवनको समज चतुरसुंदरि काहेकों बातें ठठत ॥१॥
मदनमोहन बैठे बडीवारके तूं काहेकों नटत ॥ कुंभनदास गिरिधरनलाल
स्यामतमालसों कमललतासी क्यों न लप्टत ॥२॥ | Bihagaro |
Dekhari nabal nandkishore .. lakutso tusso laptaay thaade | Part2-366 | देखरी नबल नंदकिशोर ॥ लकुटसो टसो लपटाय ठाडे
दी मनचोर ॥१ ॥ चारुलोचन हंस विलोकन चितभोर ॥
मोहन लगाबत लटक मुकुट झकोर ॥२ ॥ श्रवण ध्वनि सुननाद
मोहत करत हृदयमें ठोर॥ सूरअंग त्रिभंग सुंदर छबि निरख
तृणतोर ॥३ ॥ | Sorat |
Khelan zaan naan daihaun laal . kaalhi joe drishti luggy munn mohan | Part1-163 | खेलन जान न दैहौं लाल । काल्हि जो दृष्टि लगी मन मोहन
दीयौ चखोड़ा गाल ॥१॥ ताही तें नहीं पट पहिरावत नहीं मेलत गलमाल ।
आसकरन प्रभु जतन करत हूँ मोहन मदन गोपाल ॥२॥ | Saarang |
Yamuna poojan aaj chully nendrani juu ruchir singar karaaye | | Part1-135 | यमुना पूजन आज चली नेंदरानी जू रुचिर सिंगार कराये |
सब कोऊ लेति बलाय महरि की बाहर निकसी ढोटा जाये ॥१॥ बाजन बजत
संग मिलि गावति झुंडन सब बनि ठनि व्रजनारी । हँसिहँसि कहत सुनो रानी
जसुमति नित आनँद किये गिरिधारी ॥२॥ पूजा करि यशोमति यमुनाकी
पकवानन के डला लुटाये । पाइन लागि उलटि घर आई गोद उठाय लिये सुत
प्याये )३॥ आएछी हरद सुरँग कुँकुम कोरेन साथियें फेरि धराये ।
श्रीविदलगिरिधरनलाल की तिल चामरी बॉटि सुख पाये ॥४॥ | Saarang |
Aaj mein dekhe aliri sou douu mill podhe baatein karat .. | NityaPad-126 | आज में देखे आलीरी सो दोऊ मिल पोढे बातें करत ॥
वदननिहारत परस कपोलन हँसहँस आंको भरत ।॥।१॥
कबहुक रतिकी सुरत भईरी जीयमनो एक लाज धरत ।।
रसिकप्रीतम पियप्यारी परस्पर एकरसब्है विहरत ॥२॥। | Kedaro |
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