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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Ghaiya peevat sunder sthaam .. | NityaPad-294 | घैया पीवत सुंदर स्थाम ॥
मथ मथ देत मात यशोदा रुचिसों लेत घनस्याम॥।१॥
जल अचवाय बदन फिर पोंछयो आभूषण सब धरे उतार ॥।
सूक्षम भूषण रहे अंग प्रति सो छबि निरख जननी बलहार ॥२॥
दूध भात फिर दियो रोहिणी रुचिसों खात मनोहर बाल ॥
जल अचवाय बीरी दई जननी यह छबि निरखत रसिकनिहाल ॥३॥ | Gori |
Gwalinjodekheghar aaya .. | NityaPad-186 | ग्वालिनजोदेखेघर आय ॥
माखनखाँय चुरायस्यामतब आपुन रही छिपाय ॥ १॥|
ठाडीभई मथानीकेढिंग रीतीपरीकमोरी ॥
अबहीगई आईइनपायन लेगयोको करचोरी ।। २॥
भीतरगई तहांहरिपाये स्थामपरेगहिपाय।।
सूरदासप्रभुग्वालिन आगे अपनोनामसुनाय ॥।३॥ | Bilawal |
Laal tum khelo horry bhar muthee daar gulal .. | Part3-325 | लाल तुम खेलो होरी भर मुठी डार गुलाल ॥
चोबा चंदन ओर अरगजा अबीर लिये भर झोरी ॥१॥ बाजत ताल मृदंग
अधोटी वीन बजावत ध्वनि थोरी ॥ सूर श्याम रस वश कर लीने राधा
नवल किशोरी ॥ शा | Kalyan |
Jaya jaya sriyamuna anand kandini.. darashparash | Part2-338 | जय जय श्रीयमुना आनंद कंदिनी॥ दरशपरश
त्रिविध ताप जात दुःख निकंदिनी॥१९॥ अंगअंग छबितरंग शोभा
सिंधुनी ॥ ताहीके अध कुठार जाकें वंदिनी ॥२ ॥ अक्षय आनंद गोर्विंद
अगम गामिनी ॥ हरिदास तट निवास जन्म जन्मनी ॥ ३ ॥ | Bilawal |
Madan gopal hamaare aavat anand mangal gaaoongi .. | NityaPad-278 | मदन गुपाल हमारे आवत आनंद मंगल गाऊंगी ॥
जल गुलाब के ढोरी अरगजा पायन चंदन लगाऊंगी ॥१॥
सीतल चंदन सुखद के साजति कुच भुज बीच बसाऊंगी ॥
'कुंभनदास' लालगिरिधर को जो एकांत कर पाऊंगी ॥२॥ | Saarang |
Naval nagari naval | NityaPad-262 | नवल नागरि नवल
नागर किशोरमिलि कुंजकोमल कमल दलन सज्या रची ॥ गौर सांवल अंग
रुचिरता पर मिले सरस मानों नीलमणी मृदुल कंचन खच्ती ॥१॥ सुरति निवीबंध
हेतु पीयमाननी कुच भुजन में श्रम जल कलह मोहनमची ॥ सुभग श्रीफल
उरज पान परसत रोस हुंकरगर्वजुत भृंगभामिनी लची ॥२॥ कोककोटिक
कला हरत मन पियको विविध कलमाधुरी रतिकाम नाहिन बची ॥ प्रणय में
रसिक ललितादिक सखी सब पीवत मकरंद सुखरास अन्तर बची ॥३॥ | Saarang |
Leuun vabalaay ladile teree bhojan koo kitt karat awaar garein | NityaPad-086 | लेऊं वबलाय लाडिले तेरी भोजन को कित करत अवार गरें
लगाय कीयो मुखं चुंबन अति आतुर व्हे परोसत थार।। १॥
नंदबाबा संग जेंबत मोहन करत वाल केलिसुखसागर
गोविंद प्रभु गिरिराज धरन पिय ब्रज सुखदाई नंदकुमार ॥२॥ | Dhanshree |
Tereri badan kamalpar nandanandan chully murali nadkarat gunjar .. | NityaPad-119 | तेरेरी बदन कमलपर नंदनंदन चली मुरली नादकरत गुंजार ॥
ललित त्रिभंगी तेरे रोमरोम रमरमे कर राखों उर हार ।| १॥
जा सुखकों सनकादिक इच्छत सो तेरे बसभए मुरार ॥
कल्यानके प्रभु कमलापति मिलवेको किनहुंन पायो पार ॥। २॥॥ | Kanharo |
Deree dey hamaron sudhe daan .. kahanjat herry kataraae rakhyon | Part1-249 | देरी दे हमारों सुधे दान ॥ कहांजात हेरी कतराए राख्यों
मान ॥१॥ ढिंग आवे तो करों भलाई ऐतो बुलाय करी सयान ॥ रसिक
प्रीतम ग्वालन उर लाई कीयो महारस पान ॥२॥ | Saarang |
Preeti curry kaahu sukh naan laho. preeti patang curry deepkason | NityaPad-098 | प्रीति करि काहु सुख न लह्ो। प्रीति पतंग करी दीपकसों
आपुन आप दह्ों ॥१॥ अलिसुत प्रीति करी जलसुतसों सम्पुट मांझ गह्मो ।
सारंग प्रीति करी सारंग सो सन््मुख बान सहो ॥२।।| हमहु प्रीति करी माधोंसों
जात कछु न कद्मो। उधो सुर प्रभु ब िनु देखे नैननि नीर बह्ो ।। ३॥ | Aasawari |
Banathan aaee sakal vrijalalana khelankoju basant .. | Part3-013 | बनठन आई सकल वृजललना खेलनकोजु बसंत ॥
श्रीपंचमी परम महोत्सव परम मनोहर गोकुलकंत ॥१॥
शुभदिन सुभग सरोज प्रफुल्लित गुंजत भंवर सुबास ||
खेल मच्यो नंद आर्गन अद्भुत ब्रजजन नंदकुमर सुखरास ॥२॥
केसर की चमची मनि वोकमें केसकुसुम सुरंग ॥
अबीर गुलाल उडावति गाकत प्रगट्यो अंगअनंग ॥३॥
नीजकरसोंकरदेत पियनकोशोभा कहा कट्ठटि आवे ॥
सुरदास प्रभु सब सुख क्रिंडत ब्रजजन अंगलगावे ॥|४॥ | Basant |
Jamuna tata kunjanmein giridhar aarogat kharbuja buraa .. | NityaPad-213 | जमुना तट कुंजनमें गिरिधर आरोगत खरबूजा बुरा ॥
ललितादिक गावत और बजावत लेकर बीन पखावज तंबुरा ॥१॥ भामिनी
मेवा भर डलियनमें लाई पहरे चटकीलो चुरा ॥ 'कृष्णदास प्रभु बनठन सुंदरि
आई गुंथि कुसुम सिर जुरा ॥२॥ | Saarang |
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