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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Dekhari dekh rituraj aajam sakhee sakal banful
Part3-055
देखरी देख ऋतुराज आजम सखी सकल बनफूल आनंद छायो ॥ ताल कदली धुजा उमगि अति फरहरे संग सब आपुनी फोज लायो ॥१॥ कोकिला कीर कलगान आगें करे भृंग भेरी लीयें संग धायो ॥ घुरत निशान घनघोर मोरन कीयो करत पिक शब्द गजअति सुहायो ॥ उडत बंदन बहु कुमकुमा केसारि तियनके कुचन तकि तमकरायो ॥३॥ पंचले बान चहुंओर छाये प्रथम चांपले आपु हाथन चलायो | दौर कर शोर धपधाय लरति अततििघेरि चहुओर गढमान ढायो ॥ 8॥| परी खलबली सब नारिमुर मदन की मिलन मनस्याम अंचल फिरायो ॥ जिति सब सुभट कृष्णदास बुंदा विषिन आय गिरिधरन को शीसनायो ॥५॥
Basant
Samrou suta palana jhoole | nirakhi nirakhi jasumati jiya
Part1-098
सामरौ सुत पलना झूले | निरखि निरखि जसुमति जिय फूलै ॥१॥ नैन विशाल भूकुटी मसि राजै | निरखि बदन उड्ुपति जिय लाजै ॥२॥ कठुला कंठ रुचिर पोहोंची कर | सुभग कपोल नाक विंबाधर ॥३॥ भाल तिलक लर लटकन सोहै । मंद हँसन सबकौ मन मोहे ॥४॥ माखन मिश्री मेलि चटादें | बारबार प्रमुदित उर लावें ॥५॥| गिरिधर कुँवर जननी हुलरावै । चतुर्भुलदास विमल यश गावै ॥६॥
Bilawal
Yeh kouu jaaneri vaaki chitbanmenke charitra murali maanjh
NityaPad-307
यह कोऊ जानेरी वाकी चितबनमेंके चरित्र मुरली मांझ ठगोरी॥ देखत सुनतही मोहे जात सुरनर मुनि और खगोरी ॥ १॥| हरत काम की कामताई कामिनी जो जहाँ ठाडी चल न सकत डंगोरी ॥ इन कुल कान करत तो लाज आवे जगन्नाथप्रभु यह अवलोक लगोतोल गोरी ॥२॥
Kalyan
Sukhad sez podhe shree mutter chaampat charan radhika raani ..
NityaPad-346
सुखद सेज पोढे श्री मटर चांपत चरण राधिका रानी ॥ नवल निकुंज सुखद यमुना तट सीतल पवन चलत सुखदानी ॥ १॥ विजना ब्यार करत ललितादिक फूलन रचि रचि सेज बिछाई | चंदन घसि दोऊ लेपन करि तजी ऋतु पांच ग्रीष्प ऋतु मानी ॥ स्याम सुंदरको रसबस कीने रतिपति केलि करत सुखदानी ॥। २॥
Laal key kesar bhor suhai ..
NityaPad-178
लाल के केसर भोर सुहाई ॥ शीश बन्यो है पीत दुमालो छबि निरख सुख पाई ।॥।१॥ धोती उपरना पीतरंग के उर मुक्तामणि माल ॥ कर में मुरली मुखसो बजावत इकटक रही ब्रजबाल ।।२॥ या विधि सब सिंगार किये अति पूरी मन की आस ॥ शिव ब्रह्मादिक ध्यान न आवत गावत विष्णुदास ॥। ३॥
Saarang
Uthat praat kachhu maat jashoda mangal bhog deit douu chhora .
NityaPad-029
उठत प्रात कछु मात जशोदा मंगल भोग देत दोऊ छोरा । माखन मिसरी दह्यों मलाई दूधभरे दोऊ कनककटोरा ॥१॥ कछुक खात कछु मुख लपटावत देत दूराय मिलि करत निहोरा। परमानन्द प्रभु झबक परत दूग भरत लाल भुज करत कलोला ॥ २॥
Bibhaas
Sohat rung bharey
NityaPad-247
सोहत रंग भरे दोउ उसीर महल में छूटत फुहारन गुलाब नीर ॥ वरनीय अली भुव बूंदन फबीहे मानोअलक शरद कमल ऊपर ओसकन जैसें दोऊ जन अंग लपेटहें चीर ॥१॥ गावत जहां दम्पती बजावत विशाखा बीन ठाडी हे प्रवीन सखी सभा सुरत हीर ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधर छबि निरखत सावनसों झर लायो रसकुंज पुंज धीर समीर ॥२॥
Saarang
Chalatamen laagat chhaak
NityaPad-211
चलतमें लागत छाक सुहाई ॥ संजो वटमें केसो लागत सुख बिजनसकल मिठाई ॥१॥ अति आनंद नंदजुकी घरनि धरत बनाय बनाई ॥ बालकेहेत चलो अति आतुर बेगहो पोचो जाई ॥२॥ निकसे ग्वाल कंधन पर कावर सुख लागतहें माई ॥ श्रीविट्टल गिरधर दाऊपे बेग पोहोचो जाई ॥३॥
Saarang
Harizuko gwalin bhojan laaee ..
NityaPad-198
हरिजूको ग्वालिन भोजन लाई ॥ वुंदा विपिन विशद यमुनातट सुन ज्यों नार बनाई ॥१॥ सानसान दधिभात लियोहै सुखद सखनके हेत ॥ मध्यगोपालमंडली मोहन छाक विहंसिमुखदेत॥ २॥ देवलोक देखत सब कौतुक बालकेलि अनुरागे ॥ गावत सुनत सुखद अतिमानो सूरदुरत दुःखभागे ।। ३।।
Saarang
Kunj mahal mein mangal herry ..|
NityaPad-338
कुंज महल में मंगल हेरी ॥| किसलयदल कुसुमनकी शब्यारची ता पर बिछई पीत पिछोरी ॥ १॥ ओद्योदूध कनककटोरा और पाननकी भ्रभर झोरी ।। सघन कुंजमें श्रीगिरिधर विलसत ललितादिक चितबत दृगचोरी ॥२॥ होय मनोरथ मेरे जियके दंपति पोढे एक ठोरी॥ कहे श्रीभट ओट्हवै निरखूं क्रीडा करत किशोरकिशोरी ॥ ३॥
Kedaro
Devike devaalayaten nirus devi dulhiniju aaj pann.daakon mug
Part1-313
देवीके देवालयतें निरूस देवी दुलहिनिजु आज पं।दाकों मग अरबरात मनमें ॥ कहाँ दुरे गोविंद गरुड़ध्वज महाभुज ऐसें झहत चहल नैननमें प्रान हरितनमें ॥१॥ जबहिं ट्रष्टि परे तरून तन श्रीवल्लभ तारिनमें चंद्र जैसें नृपतिनके गनमें ॥ नंददास प्रभु संग धाय आय रथ वैठी विछुरी बिजुरी मानों आय मिली घनमें ॥२॥
Todi
Arrie inn sore sanvaar odhai.. seeraten khasi payan tarr aaee seet
NityaPad-129
अरी इन सोर संवार ओढाई॥ सीरतें खसि पायन तर आई सीत सत्तावन आई ॥|१॥ अतिसे श्रमित जानि प्यारीने दीनी सोर संवारि ॥| परमानन्द प्रभु पर तनमन जोबन वार ॥२॥।
Bihaag
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