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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Dekhyau ree kahun nandkishore .. shyam burren aroo peet pichhaura | Part1-246 | देख्यौ री कहुँ नंदकिशोर ॥ श्याम बरन अरू पीत पिछौरा
अंचल ढरके गौर ॥१॥ बरबट दान दहीकौ माँगत वृंदावनकी ठौर ॥ कहिहों
जाय रायजूके आगें करिंहे औरसों और ॥२॥ बरजि जसोदा अपुने ढोटाकों
अँचराके किये कोर ॥ परमानंद प्रीतकौ ग्राहक त्रिभुवनकौ सिस्मोर ॥३॥ | Saarang |
Laalan chhaando hau bariaai .. daan aapnon leejai laalan hoe | Part1-241 | लालन छाँड़ो हौ बरिआई ॥ दान आपनों लीजै लालन हो
व्रजराई ॥ यह अब कहा कहाबै अँचरा ऐँचत हो जु करत बोली ठोली भाँड़े सेती
ऐती टठकुराई ॥१॥ जो कछु कहौगे सोई देहुँगी कान्ह गहि और लीजै अपनों
. गाम कौन सहै तिहारी दिनदिनकी अधिकाई ॥ गोविंदप्रभुके नयननसों नयना
मित्रे चितिय चली मुसिकाई लालनकौ मन लियौ है चुराई ॥२॥ | Saarang |
Aatthen bhaadon kii ujiyari .. raavalmein vrishbhan gropaken pragati | Part1-178 | आतठें भादों की उजियारी ॥ रावलमें वृषभान ग्रोपकें प्रगटी
राधा प्यारी ॥१॥ झ्रुत ि स्वरूप सब संग कर लीने ब्रजपति हेत बिचारी ।
दासगोपाल बल्लभजू की स्वामिनी बस कीने गिरिधारी ॥२॥ | Bilawal |
Shritrajrajke dhaam badhaai baajahi .. badhaai .. thadhuni suni | Part1-052 | श्रीत्रजराजके धाम बधाई बाजही ॥ बधाई ॥ थधुनि सुनि
उठी अकुलाय मेघन ज्यों गाजही ॥मेघन!॥१॥ जहाँ तहाँ ते चली धाय अटकि
नंदपौरपें ॥अटकि॥ वे गावत मंगल गीत ऊँचे स्वर घोरपें ॥ ऊँचे ॥२॥
नौतन सहज सिंगार कीये अंग अंगमें ॥कीये।! बसन लहेरीया भाँति बहु रंग
रंगमें ॥बहु।३॥ धूम मची सिंहद्वार हेरी दे दे गावही ॥हेरी॥ प्रेम उमग
व्रजनार गिने नहीं काउही ॥गिने|४॥ कोऊ नाचे कोऊ गाय कोऊ कर
तारीदे ॥कोऊ॥ कोऊ शिर्तें दधिमाट फोर कर डारीदे ॥फोर॥५॥
बाबानंद नचावत ग्वाल नाचे बड़भूपही ॥नाचे॥ सब तन यों रसवेस भये एक
रूपही ॥भये॥६।॥ याचक गुनी अनेक जुरे नंदधाममें ॥ जुरे। मनवांछित
फल देत हीरा मणि दानमें ॥हीरा॥७॥ देत असीस जियौ व्रजराजकौ लाड़िलो
।ब्रज॥ चंद सूरजकों तेज त्पै सुख बाढ़िलौ ॥तपे॥८॥ ओीवल्लभके
चरण शरण सुख पावही ॥शरण॥ तोपे रसना रसिक रसाल सदा गुन गावही
॥सदा॥ ९॥ | Kafi |
Vijay dashahara parav bado haye aaj .. | Pustak1-314 | विजय दशहरा परव बड़ो हे आज ॥
ब्रजबनिता सब मंगल गावत बाजन रह्यो ब्रज गाज ॥१॥
भरि बहुत अंगना तीबारी महेल अटारी छाज ॥
बड़े परवकों यह बडो सुख देखनकी नहि लाज ॥२॥
दशविध भक्तभोग ले आई गोपन आनंद काज ॥
द्वारकेश प्रभु बोलके बीरा देत समाज॥३॥ | Kanharo |
Atee chhabi deit dumalo sees. | NityaPad-066 | अति छबि देत दुमालो सीस।
मनमथ मान हरे हसि चितवत बने है गोकुलके ईस ॥१॥
ठाडे सिंघयोर अपने रंग संग सखा दस वीस |
“चत्रभुज' प्रभु गिरिधरन लाल लखिं जीयो कोटि वरीस ।।२॥ | Aasawari |
Hari-sanga khelan fagu chaleen ree .. chova, | Part3-316 | हरि-संग खेलन फागु चलीं री ॥ चोवा,
चंदन, अगरु, अरगजा, छिरकतिं नगर चलीं री ॥ राती पीरी अंगिया पहिरे,
नव तन झूमक सारी ॥ मुख तमोर, नैननि भरि काजर, देहिं भावती गारी ॥
रितु बसंत आगम रतिनायक, जोबन-भार-भरी री ॥ देखत रूप मदन-
मोहन कौ, नंद-दुवार खरीं री ॥ कहि न जाई गोकुल की महिमा, घर-
घर बीथिनि-माहीं | सूरदास सो क्यौं करि बरने, जो सुख तिंहु पुर नाहीं ॥
५ (के राग - श्री हठी ईड) खेलति फागु फिरति रस फूल ॥ स्यामा
स्याम प्रेम बस नाँचति गावति सरस हिंडोरे झूले ॥ १ ॥ ब्रिदाबन की जीबनि
दोऊ नट नागर बंसीबट मूलै ॥ “व्यास स्वामिनि! की छबि निरखति नैन
कुरैंग फिरति रस भूले ॥२॥। | Shri Hatee |
Raniju jeevou doolhau terau vrajjeevan jaayau .. gokulkau | Part1-031 | रानीजू जीवौ दूल्हौ तेरौ ब्रजजीवन जायौ ॥ गोकुलकौ
कुलमंडन पूत हम पायौ ॥१॥ देखि दृगकमल जब श्यामगात सुहायौ । ले
करि निज गोद मोदसों हुलरायो ॥२॥ पूरबकृत पुन्यपुंज भागि बड़े तें पायौ।
कूखिकी बलिहारी जाऊँ जस कल्यान गायो ॥३॥ | Asawari |
Nayanan lagiho chatpati .. | NityaPad-225 | नयनन लागीहो चटपटी ॥
मदनमोहनपिय निकसे द्रवारहबे शोभित पाग लटपटी॥१॥
दूरजाय फिर चितये री मो तन नयन कमल मनोहर भूकुटी ॥
गोविंदप्रभुपिय चलत ललित गति कछुक सखा अपनी गटी ॥२॥ | Saarang |
Chhipi jini jaiyo hoe banwari .. khelani aaneen | Part3-327 | छिपि जिनि जैयो हो बनवारी ॥ खेलनि आँईं
हैं ब्रज नारी ॥ बहुत सुगंध, लाईं अंग लावनि निकसी चतुर खिलारी ॥१॥
बा दिन तुम सौं बोली नाँही लै सुगंधि आँखिन में डारी ॥ म्हों मांडे बिनु
जानि न दैहौं, 'सूर” प्रभु सौंह तिहारी ॥२॥ | Iman |
Thaadhau hoe vraj-khori dhota kaun kau .. latihi | Part3-315 | ठाढ़ौ हो ब्रज-खोरी ढोटा कौन कौ ॥ लटिहि
त्रिभंगी इक पद (री) मनमथ-णौन कौ ॥ मोर मुकिट कछनी कसे (री)
पीतांबर कटि-सोभ | नेन चलावे फेरिकै (री) निरखिरि होत मन लोभ ॥
भौंह मरोरे मटकिकै (री) रोकत जमुना-घाट ॥ चितै मंद मुसुकाइकै (री)
जिय करि लेई उचाट ॥ हँसत दसन चमकाइके (री) चकचौंधी-सी होति ॥
बग-पंकति नव जलद मैं (री) उर माला गज मोति ॥ पिचकारी रतननि-
जरित (री) तकि-तकि छिरकत अंग ॥ टेसू कुसुम निचोइकै (री) अरू
केसरिकौ रंग ॥ फैंट शुलाल भराइकें (री) डारत नैननि ताकि ॥ एतेपै
मन हरत है (री) कहा कहों गति वाकि ॥ पुनि हो हो करि मिलत है (री)
नाना रंग बनाई ॥ नंद-सुबन के रूपपे (री) सूरदास बलि जाई ॥ | Gouri |
Iktak rahee naari nihaar.. kunjaban sristham | Part2-364 | इकटक रही नारि निहार॥ कुंजबन श्रीस्थाम
स्यामा बैठे करत विहार॥१॥ नयनसेन कटाक्षसों मिलकरत
रंगबिलास॥ नाहिन शोभा पारपावत वचन मुख सृद॒हास ॥२ ॥ तरुण
श्रीवृषभान तनया तरुण नंदकुमार॥ सूरसो क्यों वरन आवे रूपरस
सुखसार ॥३ ॥ | Sorat |
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