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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aaj manmohan piya thaade singhdwar mohat vrajajan munn |. tesiya | NityaPad-059 | आज मनमोहन पिय ठाडे सिंघद्वार मोहत व्रजजन मन |। तेसिय
मोहन सिर पाग बनी तेसी कुल्हेसुरंग तेसिय बनी मालवन ॥। १॥| तेसीये कंठमणी
तेसोई मोतिनहार तेसीये पीतवरणी ख़ुलीहें स्थामतन ॥ गोविंदप्रभुके जु अंग
अंग पर वारफेर डारो कोटि मदन ॥।२॥ | Nat |
Dampati rangbhareho baithe kunjamahalate | NityaPad-311 | दंपति रंगभरेहो बैठे कुंजमहलते
निकस ॥ राग कल्याण अलापत रस भरे लेत परस्पर रंगबितान तरे ॥१॥ लेत
अतिजत भेदकर किन्नर एक सारीगम तीन सुढार ढरे॥ गोविंदप्रभु बलबल पिय
प्यारी बांह धरें दोड अति सुघर खरे ॥ २॥॥ | Iman |
Naeeri rituko aagam bhayo sajani jabaten bidaa bhayo hemant . | Part3-003 | नईरी ऋतुको आगम भयो सजनी जबतें बिदा भयो हेमंत ।
विरहनिके भागिनतें सजनी आवतत चल्यो हे बसन््त ॥ १॥
तन सीहाय ज्रीय चले भर भाव चल्यो ताहीको कंत ॥
चन्नभुज प्रभु पिय तारी बजावत या जाडेको आयो अम्त ॥२॥ | Malkoos |
Gawat gopi madhu mudubani . jaake bhawan basat tribhuvanpati | Part1-064 | गावत गोपी मधु मुदुबानी । जाके भवन बसत त्रिभुवनपति
राजा नंद यशोदारानी ॥१॥ गावत वेद भारती गावत नारदादि मुनिज्ञानी ।
गावत गुन गंधर्व काल शिव गोकुलनाथ महातम जानी ॥२॥ गावत चतुरानन
जगनायक गावत शेष सहस्र मुखरास । मन क्रम वचन प्रीति पद अंबुज अब गावत
परमानंददास ॥३॥ | Kanharo |
Yeh dinn horry koo sou tuu jinn maan karey .. | Part3-360 | यह दिन होरी को सो तू जिन मान करे ॥
मेरो कह्मो तू मान हठीली काहेंकू गर्व करे ॥ १ ॥ उठ चल हिल मिल गिरधर
पीयसों तो सब काज सरे॥ तेरे ही बस हैं ब्रजपति अब तेरोई ध्यान धरे ॥२॥
| Bihag |
Aaj gopal paahune aaye nirkhe nayan aghaayarin .. | NityaPad-082 | आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन अघायरीं ॥
सुंदरवदन कमलकी शोभा मोमन रह्ोहे लुभायरी ॥१॥|
के निरखूं के टहलकरूं एको नहिं बनत उपायरी ॥|
जैसे लता पवन वश द्रमसूं छूटत फिर लपटायरी ॥॥२॥।
मधुमेवा पकवान मिठाई व्यंजन बहुत बनायरी ॥
रागरंग में चतुर सूरप्रभु केसे. सुख उपजायरी ॥। ३॥ | Dhanshree |
Merey curr menhadi luggy haye lutt urajhi | NityaPad-334 | मेरे कर मेंहदी लगी है लट उरझी
सुरजाय जा ॥ सिर की सारी सरक गई मोहन अपने हाथ उढाय जा ॥| १॥ भाल
की बिंदी मोरी गिर जो परी है हा हा करत लगाय जा ॥ नीलाम्बर प्रभु गुण ना
भूलूंगी बीरी नेंक खवाय जा ॥ २॥ | Bihaag |
Abb dwaar merey brain bajaave gaave ghanshyam.. sennan | Part2-355 | अब द्वार मेरे ब्रेन बजावे गावे घनश्याम॥ सेंनन
बेनन अर्थ जनावत मेरो लेले नाम ॥१॥ में अपनी कुलकान डरत सखी
लाज तजी सब गाम॥ रामदास प्रभु मिल बसकीनी कहत कहा करूं
भाम ॥२ ॥ | Goud Sarang |
Nandgrih baajat kahaan badhaai | juri aaee sub bheer auganmein janme | Part1-048 | नंदगृह बाजत कहाँ बधाई | जुरि आई सब भीर ऑगनमें जन्मे
कुँवर कन्हाई ॥१॥ सुनत चल्ीं सब व्रजकी सुंदरि कर लिये कंचन थाल ।
कुमकुम केसरि अक्षत श्रीफल चलत ललित गति चाल ॥२॥ आज भैया यह
भली भहईहै नंदजू तुम घर ठोटा जायो । हृदौ कमल फूल्यौ जो हमारी सुनत बहोत
सुखपायौ ॥३॥ दान मान विप्रन बहु दीने सबकी लेत असीस । पोहोप वृष्टि
करत परमानेंद सूरजु कोटि तेतीस ॥४॥ | Sarang |
Giridhar peevat doodh shiraay. | NityaPad-305 | गिरिधर पीवत दूध शिराय।
बैठे अटा घटा देखन को छतना हाथ लगाए।॥ १॥
हरित भूमि प्रफुलित द्रमबेली रही तरुवर लपटाय |
तापर धरी सदल रस मंजरी कृष्ण दास बल जाय ॥२॥ | Malhaar |
Bhorahi kaanh karat moson jhagrau .. saban chhaandi karat hathh | Part1-235 | भोरही कान्ह करत मोसों झगरौ ॥ सबन छाँड़ि करत हठ
मोसों नित उठि रोकि रहत है डगरीौ ॥१॥ गोरस दान सुन्यो नहीं देख्यों किन
लिखि दियौ दिखाओ कगरौ ॥ बिना बोंहनी छूवन नहीं दैहों यह सब छीनि खाउ
किन सगरो ॥२॥ चुंबत मुख उर लावत पकरत टेव न गई झुकतही अगरौ॥
परमानंद सयानि ग्वालिनि छाँडि नहीं धरतहों पगरी ॥३॥ | Bilawal |
Raam mukh dekhiyat sunder gaat.. | Part2-265 | राम मुख देखीयत सुन्दर गात॥
दशरथ अर कोंसल्या माता निरख बदन सच ुपात ॥१ ॥
बदन चंद राजीवदल लोचन मनिमय कुंडललोल॥
अलकतिलक मृगमद रुचिराजत सुंदरचारु कपोल ॥२॥
बालकदिसा कंठमुक्ता मनि नागचूड सम हाथ॥
करतल हाथ धनुषशर राजत सुघर अयोध्यानाथ ॥३ ॥
विश्वामित्र सकल सुरनर मुनि ठाड़े देत असीस॥
परमानंद प्रभु अविचल कौरत महाराज जगदीश ॥४ ॥ | Bilawaal |
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