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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Parambadhai shrilakshman sukhdaataa prem bhakti | Part2-300 | परमबधाई श्रीलक्ष्मण सुखदाता प्रेम भक्ति
आकार ॥ हुलसी माय बाप अति हुलसे तापगये तन दरशन सार ॥१॥
फूले भक्त जान निज रूपहि नाथ किये निरधार ॥ सुरनर मुनि गंधर्व गुण
गायक नाचत कछु न संभार ॥२ ॥ शिव विरंचि सनकादिक नारद शेषहू
करत बिचार ॥ बलबल दास चरण अभिलाषन या सुख वारन पार ॥३ ॥
ए राग सारंग 0 (६९) श्रीलक्ष्मण बर ब्रह्मधाम काम मुरति पुरुषोत्तम
प्रकट भये श्रीवल्लभ प्रभु लीला अबवतारी॥ रसमय आनंदरूप अनुपम
गुण अन्थभरे बचनसुधा सींचत नित्य निजजन सुखकारी ॥१ ॥ भजन पंथ
कमल भानु अमल भाव दान करत ब्रजपति रस रास केलि विहरत
मनुहारी ॥ नवल लाल पिया गिरिधर दृढकरि कर गहत ताहि जे जन इन
शरन आये चरण छत्र धारी ॥२ ॥ | Sarang |
Chaitra shukl naumi dinn janm .. nagar ayodhya bajat | Part2-260 | चैत्र शुक्ल नौमी दिन जन्म ॥ नगर अयोध्या बजत
बधाई दसरथनंदन ब्रह्म !१ ॥ राम लक्ष्मन भरत श्बुघ् घ्न चार व्यूह निज
धर्म ॥ पूरन जब अवतार लेहि तब इह बिथ जानो मम ॥२ ॥ रस मर्यादा
पुष्टि श्री्रजपति पुरुषोत्तम यह भेद ॥ द्वारकेस बलि कौसल्यासुत निज गुन
गावत बेद ॥३ ॥ | Saarang |
Tum neeke duhi jaanat gaiya .. | NityaPad-296 | तुम नीके दुहि जानत गैया ॥
चलिये कुंवर रसिक नंदनंदन लागों तुम्हारे पैया ॥।१॥
तुमहिं जानकें कनिकदोहनी घरते पठई मैया ।
निकटही यह खरिक हमारो नागरलेहुं बलैया ॥॥२॥
देख परम सुदेश लरकन चित चोर्यो सुंदर रैया ।।
कुंभनदासप्रभु मान लई रति लाल गोवरधन रैया ॥ ३॥ | Gori |
Khelat basant vrajraj aaj pyaari radhaju key | Part3-068 | खेलत बसंत ब्रजराज आज प्यारी राधाजु के
संग ॥ उत जुबती इत ग्वालबाल संग करत रति केल भुव अभंग ॥१॥
गावत चाचर बाजत डफ ढोलक बीना ताल उपंग ॥ झांझ मुरज भेरी सहनाई
महुवर मुरली मृदंग ॥२॥ युलाल अबीर ले भरि-भरि झोरी घोरी केसर
रंग ॥ हो हो हो हो बोले डोलत सोंधे भीने अंग ॥३॥ छिरकत फिरत
सबे मिल मच्यो अरगजा पंक ॥ उत नवलासीन मारी गारी होरी को देत
नीसंक ॥४॥ थाई लई भुज भरी सांवरो मानो चंदन लपटे भुजंग ॥ पीय
सारंग रस सलिल मिल गई बाढी प्रेम तरंग ॥५॥ खेलत बाम बडभागिन
पियसंग अति अनुराग उमंग ॥ बिष्णुदास श्री गुपालजु को कौतुक निरखी
लजत कोटी अनंग ॥६॥ | Basant |
Bosuri baajat madanmohanju kii tant jamunaake teer ree .. shravan | Part1-282 | बॉसुरी बाजत मदनमोहनजू की तंट जमुनाके तीर री ॥ श्रवन
सुनत मेरी सुध बुध बिसरी कहा करूँ मेरी बीर री ॥१॥ एक डरतौ मभोहे सास
नर्नेंदकौ दूजी लोक लाज कुलभी र री ॥ कृष्णदास गिरिधर नहिं मानत नहिं जानत
मेरी पीर री ॥२॥ | Khat |
Arrie chhaakahaari charpanch aavat madhya vrajarajalalaki... | NityaPad-201 | अरी छाकहारी चारपांच आवत मध्य ब्रजराजललाकी॥।
बहुप्रकार व्यंजन परिप्रण पठवन बडे डलाकी ॥१॥
ठठक ठठक टेरत श्रीगोपालें चहुंधा दृष्टिकरें ॥
बाजत वेणु ध्वनि सुनचली चपलगत परासोलीके परें ॥२॥
परभानंदप्रभु प्रेममुदितमन टेर लई कर ऊंची बांह ॥
हँस हँस कस-कस फेंटा कटिनसों बाँटत छाक वन ढाकन मांह ॥३॥ | Saarang |
Podhe hari jheenon pataden oat.. sanga shrivrishbhan tanaya | NityaPad-340 | पोढे हरि झीनों पटदें ओट॥ संग श्रीवृषभान तनया
सरसरसकी मोट॥।१॥ मकर कुंडल अलक अरुझी हार गुंजा ताटंक | नीलपीत
दोऊ अदलबदलें लेत भरभर अंक ॥।|२॥ हृदय हृदयसों अधर अधरसों नयनसों
नयन मिलाय ॥ भ्रोह भ्रोहसों तिलक तिलकसों भुजन भुजन लपटाय ॥३॥।
मालती और जाई चंपा सुभग जाति बकूल ॥ दासपरमानंद सजनी देत चुनचुन
फूल ॥४॥ | Kedaro |
Aaj bathdhaavo shrilakshmanrayaken ilamajayo | Part2-307 | आज बथधावो श्रीलक्ष्मणरायकें इलंमाजायो
श्रीवल्लभलाल ॥ध्रु॥ माधोमास एकादशी कृष्णपक्ष ओर रविवार ॥
प्रकट भये कुमार पूरणब्रह्म लियो अवतार॥१ ॥ तैलंगकुलको तिलक
भूषण लसत भाव अपार॥ अंगअंग शोभा अमितरसना कहत न
आवेपार ॥२ ॥ पढत द्विजबर वेद आंगन बजत दुंदुभिद्वार ॥ सूत मागध
भाट बंदी करत वंश विस्तार ।३॥ रचे पल्लव रचे तोरण बांधी
बंदनवार ॥ मंगल कलश भराय पूरे मोतिन चौक सुढार ॥४ ॥ पहेर भुषण
वसन नवअंगसाज कंचन थार॥ चली त्रियगण गीत गावत पग
नूपुरझनकार ॥५ ॥ आय निरखें नयन उत्सव परम अविसुकुमार कुमार ॥ करि
प्रणाम असीस दे मुख भेट धरत फलसार ॥६॥ सदन अतिबढी
सखीहोत जयजयकार॥ देत दान बुलाय विप्रन अन्न धन गाय
अपार ॥७ ॥ सुरंग सारी पट अमोलिक और मणिगणहार॥ हरखकें
पहराय युवती लक्ष्मण भूषउदार॥८॥ चोवाचंदन छिरक केसरनीर
घनसार॥ नाचत सब नरनारि आंगन गावत जयजयकार ॥|९ ॥ देवीजन
सब हरखत घरघर करत मंगलचार॥ दास निजजन निरख शोभा जात
तहां बलिहार ॥१० ॥ | Gouri |
Gadhaten gwalini ootari sheesh mahikau maant .. aadau kanhaiya | Part1-225 | गढ़तें ग्वालिनि ऊतरी शीश महीकौ माँट ॥ आड़ौ कन्हैया
ढै रह्यौ रोकी व्रजवधू बाट ॥ नागरि दान दै ॥१॥ कहाँकी हौ तुम ग्वालिनी
कहा तिहारो नाम ॥ बरसानेकी ग्वालिनी प्यारी राधा मेरी नाम ॥ मोहन जान
दै ॥२॥ बूंदावनकी कुँजमें अचरा पकरयौ दौर ॥ नाम दानकौ लेत हौ लाला
चाहत हौ कछु और ॥३॥ तुम अकेले हम अकेली बात नहीं कछु जोग ॥
तुमतो चतुर प्रवीन हौ कहा कहेंगे लोग ॥४॥ सँगकी सखी सब दूरि निकसि
गईं हम रोकी बनमाँझ || घरतौ दारुन सास है अब होन लगी है सॉँझ ॥५॥
तुम ओढ़ी है कामरी हम पेहेरयौ है चीर ॥ उमड़ि घुमड़ि आई बादरी अब कहा
बरसावत नीर ॥६॥ प्रेम मगन ग्वालिन भई हरिकौ दरशन पाय ॥ मुख तें
बचन न आवही सो लगी ठगौरी जाय ॥७॥ लै म्ठुकी आगें धरी परी श्याम
के पॉय ॥ मन भावै सो लीजिये बचै सो बेचन जाँय ॥८)॥ सुख बाढ़यो
आनैँद भयौ रही श्याम गुन गाय ॥ सुंदर शोभा देखिकें सूरदास बलि जाय॥९॥
| Bilawal |
Sikhwabat ketee raati gaee. chandra | NityaPad-331 | सिखवबत केती राति गई। चंद्र
उदै बर दीसनि लाग्यो तू नहिं और भई॥ सुनि हो मुगध ! कह्यो नहिं मानति
जामी हदे कई। 'परमानंद प्रभु को नहिं मिलती तौ प्रतिकूल दई ॥ | Kalyan |
Merey ghar chandan atee komal leeje hoe sunder varr naayak .. | NityaPad-320 | मेरे घर चंदन अति कोमल लीजे हो सुंदर वर नायक ।।
हों अबला बहु जतन प्राणपत कनक पात्र लाई तुम लायक ॥। १॥।
उत्तम घस गुलाब केसरसों विविध सुगंध बीच मिलायक ।।
बहो जुबतिन मनहरण रसिक बर नं दकुमार सुरत सुखदायक ।॥। २।।
सुन विनति नंदनंदन पिय बहोत भांत मधुर मृदु वायक ॥
कृष्णदास' प्रभु कृपा नेन जल छूटे लूटत मदनके सायक ।॥।३॥। | Kanharo |
Yeh prasaad houn paaruun sreejmunaji .. | NityaPad-010 | यह प्रसाद हों पारऊं श्रीजमुनाजी ॥
तुम्हारे निकट रहा निशवासर रामकुष्णगुन गाऊं।।१॥
मजन करूं विभलजलपावन चिंताकलेस बहाऊं ॥
तिहारी कृपातें भानुकी तनया हरिपद प्रीत बढाऊं ॥२॥
बिनती करोंयही बर मागों अधमन संग बिसराऊं ।॥।
परमानंदप्रभु सबसुखदाता मदनगोपाल लडाऊं ॥३॥ | Ramkali |
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