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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Aeye tum chaley jaau dhota apane mug kitt rokat vrajabadhoon baat.. | Part1-250 | ए तुम चले जाऊ ढोटा अपने मग कित रोकत व्रजबधून बाट॥
कहत कहा सोई कहीौ जू दूर भये जिन परसो गोरसके माँट ॥१।| दिन दिनकौ
पेंड्रीरी माई हम कैसेंके आवें जाय इनसों परी है आँट ॥ गोविंद प्रभु तुमें डर न
काहूकौ व्रजराज कुँवर बर जाय चरावों गोधनके ठॉँट ॥२॥ | Poorvi |
Meromai harinagarason neh.. | NityaPad-089 | मेरोमाई हरिनागरसों नेह॥
जबते दृष्टरिपरेमनमोहन तबते विसरयोगेह ॥ १॥|
कोऊ निंदो कोऊ बंदो मो घनगयोसंदेह ।।
सरितासिंधुमिली परमानंद भयो एकरसतेह ॥। २। | Ramkali |
Chalo sakhee milli dekhan jaiyen nandekelal machaai | Part3-078 | चलो सखी मिलि देखन जैयें नंदेकेलाल मचाई
होरी ॥ अबीर गुलाल कुंकुमा केसरि पिचकारिन भरि भरि ले दौरी ॥१॥
एक जु पियकी चोरा चोरी हमें लखे नहीं कोरी ॥ कृष्ण जीवन लछीराम
के प्रभुकों भरि हैं राधा गोरी ॥२॥ | Ramkali |
Srivallabh vrindaavan chand.. agyanandhi nivaaran | Part2-298 | श्रीवल्लभ वृन्दावन चंद॥ आज्ञानांधि निवारण
कारण प्रकटे आनंद कंद॥९ ॥ मुदित भये मन देवी जनके मिटे सकल
भवफंद ॥ मुग्धभये मन मायिक जनके दुष्ट मूढमति मंद ॥२॥ योग यज्ञ
जप तप ध्यान अगोचर गुण गावत श्रुति छंद॥ करत पान सेवक चकोर
लख बल बल दास गोविंद ॥३ ॥ | Sarang |
Govind karat murali gaan . adhar kardhar syaam sunder saptaswar | Part1-349 | गोविंद करत मुरली गान । अधर करधर स्याम सुंदर सप्तस्वर
बंधान ॥9५॥ बिमोही व्रजनारि पशु खग सुनत धर रहे ध्यान ॥ चल अचल
सबकी भई यह गति अनूपम आन ॥२॥ सुनत तजी समाधि मुनिजन थके
व्योम विमान ॥ कुंभनदास सुजान गिरिधर रची अद्भुत तान ॥३॥ | Kedaro |
Aisee bansi vraji vanghanmein vyaapirahi dhwani | Part2-293 | ऐसी बंसी ब्राजी वनघनमें व्यापिरही ध्वनि
महामुनिनकी निनकी समाधि लागी॥ भयो ब्रह्मनाद उठत अहल्लाद जहां तहां
रल बूंद भये सब त्यागी ॥१ ॥ रास आदि अनेक लीला रस भाव
पूरित मूरति मुखारविंद छबि धरें बिरह अनंग जागी॥ तब वेणुनाद द्वार
अब श्रीलक्ष्मणभट भूष कुमार दैवोद्धार अर्थ त्यागी ॥२ ॥ | Sarang |
Leeje laal chhaak | NityaPad-205 | लीजे लाल छाक
हों लाई । भर भर डला सीस पै धरके जसुमति मात पठाई ।॥।१॥ मूंग भात घृत
कढी सलोनी रोटी लीटी अधिक सिकाई ॥ उरदके बडा दहीमें बोरे आदो नीबू
सरस खटाई ॥२॥ शाक सुरन बेंगन बथुवा अरु मेथी सरस मूदु चौराई ॥
पूरी पापडी रुचिर रुचिर कचोरी पापड बड़ी पकौडी भुजाई ॥३॥ लुचई मोदक
मगद जलेबी गुंजा मठडी अधिक पठाई ॥ माखन खीर खांड बासोंदी दधि
शिखरण ओटूयो दूध मलाई ॥।४॥ भोजन बिंजन सब हि मनोहर बीरी सोंधे
सरस बंधाई ॥ अ्री विट्वल गिरिधरन' आरोगत भक्तनके सुखदाई ॥५॥। | Saarang |
Bimal jass brandavan key chandkau . kahaa prakaash saum surajkau sou | Part1-165 | बिमल जस ब्रंदावन के चंदकौ । कहा प्रकाश सौम सूरजकौ सो
मेरे गोविंदकी ॥१॥ कहत यशोदा सखियन आगें वैभव आनंदकंदका । खेलत
फिरत गोप बालिक सँग ठाकुर परमानंदकौ ॥२॥ | Gori |
Yeh gati naachat naach naee .. voondaavan main raas bilas sukh | Part1-327 | यह गति नाचत नाच नई ॥ वूंदावन मैं रास बिलास सुख
बाढ़ृत सई ॥१॥ भाँति भाँति राग गावत अलाप कैई ॥ उरप तिरप मान
लेत तत थेई ॥२॥ स्याम सुंदर करत क्रीड़ा प्रेम घटा छई ॥ कुंभनदास प्रभु
गिरिधर छिनु छिनु प्रीति नई ॥३॥ | Shri |
Aliri curr shungar sayankal chully vraj baal piya darshave koo matt dwirad genn .. | Part3-007 | आलीरी कर शुंगार सायंकाल चली ब्रज बाल पिय दर शवे को मत्त द्विरद गेन ॥
मानों शिशुमार चक्र उदय होत गगन
मध्य श्रुव नक्षनत्न की परिक्रमा देन ॥१॥
मानों वसंत ऋतु आई अंग-अंग छबि छाई दंपति समाज मोवे कही न परत बेन ॥
“मुरारीदास' प्रभु प्यारी चित्र विचित्र गति सेवक निरखि पिया छबि अद्भुत ऐसी को कर रची मेन ॥श॥। | Iman |
Jepasht maas sudi punyo shubhdin karat snan | Part2-340 | जेपष्ट मास सुदि पुन्यो शुभदिन करत स्नान
श्रीगोवर्धनधारी ॥ शीतल जल हाटकघट भरि भरि रजनी अधिवासन
सुखकारी ॥१॥ विविध सुगंध पोहोपकी माला तुलसीदलदे सरस
संवारी॥ कर ले शंख नहवावत हरिकों श्रीविट्ठल प्रभुकी बलिहारी ॥२ ॥
तेसेई निगम पढत द्विज आगें तेसोई गान करत द्वजनारी॥ जेजे शब्द
चार्योदिश व्हेरहों यहबिधि सुख वरखत अतिभारी ॥३ ॥ करि सिंगार
परम रुचिकारी शीतलभोग धरत भर थारी॥ दे बीरा आरती उतारत
गोबिंद तन मन धन दे वारी ॥४ ॥ | Todi |
Aajabane nandanandari navchandan anga argaja laayen .. rurkat | NityaPad-238 | आजबने नंदनंदरी नवचन्दन अंग अरगजा लायें ॥ रुरकत
हार सुढार जलज मणि गुंजत अलि अलकन समुदायें ॥१॥ पीत वसन तन
बन्यो पिछोरा टेढी पाग टोरालटकायें।। अक्षयतृतीया अक्षयलीला
अक्षयगंगादास सुखपायें॥२॥ | Saarang |
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