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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Balapan gayo abb aayo joban rome rome prafullit tunn ..
Part3-002
बालापन गयो अब आयो जोबन रोम रोम प्रफुल्लित तन ॥ मदन नृपति की फोज आवत सखिर भयो डुलास युवतिन मन ॥१॥ ठोर ठोर फूले द्रम कानन कोकिल लागे कुलाहल करन ॥ कामीजन उर दाह करन को सेना सन आये लरन ॥२॥ भरो चलो प्यारी अपने प्रीतमको धरो आयुध आभरण ॥ समर संग्राम जीतेंगे सूर प्रभु चाहत तिहारी शरण ॥३॥
Malkoos
Aaj mohan rachee rasrus mandali .. udit pooran nisha naath
Pustak1-350
आज मोहन रची रासरस मंडली ॥ उदित पूरण निशा नाथ निरमल दिशा देख दिनकर सुता सुभग पुलिन स्थली ॥१॥ बीच हरि बीच हिरणाक्ष माला रची तरुलता पिच्छ मानों कनक कदली रली || पवन वश चपल द्रुम डुलनसी देखियत चारु हस्तक भेद भाँत भारी भली ॥२॥ चरण विन्यास कर्पूर कुंकुम धूरि पूरि रही दिश विदिश कुंजनबनकी गली ॥ कुंद मंदार अरविंद मकरंद मिलि कुंज पुंजन मिले मंजु गुंजत अली ॥३॥ गान रस तनक बाण बेध्यो विषपान अभिमान मुनि ध्यान जिय दलमली ॥ अधर गिरिधरनके लाग अनुराग मिल जगत विजई भई मुरलिका काकली ॥४॥ रसभरे मध्य मंडल बिराजत खरे नंदनंदन वृषभानजूकी लली ॥ देख अनमेष लोचन गदाधर युगल लेख जिय आपने भाग्य महिमा फल्ली ॥५॥
Kedaro
Dekhi pratibib gopal khijaavai. leey laduva melat baake mukh
Part1-149
देखि प्रतिबिब गोपाल खिजावै। ले लडुवा मेलत बाके मुख खेलन संग बुलावै ॥१॥ बोलि बोलि उठि चलैरे भैया हट करि करि पकरावै। अपने कंठकौ हार उततारि लै बाके कंठ पहिरावै ॥२॥ मधुर बचन कहि हित करि नीके तोतरे बोल सिखावै | आभूषन सब अपने अँगके लै करि बाहि दिखावै ॥३॥ अरी मैया हो कहा करूँ यह खेलन संग न आवै । मेरी कही न मानें बातें योंही मोहि बिरावै ॥४॥ तू करगहि हटठकरि किन याकों मेरे संग पठावै । सुतके बचन सुनत नेंदरानी आनंद हिये बढ़ावै ॥५॥ बालकेलि रस महा मुग्धके सबहिनके मन भावै | रसिक प्रीतम सुमिरत निशिवासर गावत अति सुख पावे ॥६॥
Bilawal
Mohanlal biyaru keeje .. vyanjan meethe khaate khaare ruchison
NityaPad-300
मोहनलाल बियारू कीजे ॥ व्यंजन मीठे खाटे खारे रुचिसों माँग जननीपै लीजे ॥१॥ खोबवा मिश्रित और बासोंधी ता ऊपर तातोपय पीजे ॥ सखन सहित मिल जेंवत रुचिसों झूंठन आसकरणकाूं दीजे ॥२।।
Kanharo
Nirtat gopal laal adbhut nutt bhesh dharein gaan karat vrajasundari raas rangini ..
Pustak1-356
निर्तत गोपाल लाल अद्भुत नट भेष धरें गान करत ब्रजसुंदरि रास रंगिनी ॥ अति कोमल बन्यौ कूल बहुभाँति फूलेफूल जल स्थिर रहत तहाँ तट तरंगिनी ॥१॥| सरद सर्वरी छिटकत मधुप जूथ सुर मिलाबत बिहँसत पीय संग चपल दृष्टि कुरंगिनी ॥ गिडगिडता गिडगिडता तांतां कटि तकिट तारावली झंझंझननननन बाजे मृदंगिनी ॥२॥ ततथेई ततथेई उच्चारत उरप तिरप टूटे हारि बिलसत पीय बाम भाग कुचउतंगिनी ॥ कृष्णदास स्वामिनी मनोज भेष राधिका रसिक कंठ लाय लई सुख देत अंगिनी ॥।३॥
Kedaro
Shrivrishbhaanraayaken pragati atee sukumari sriradha naam pramudit
Part1-195
श्रीवृषभानरायकें प्रगटी अति सुकुमारी श्रीराधा नाम प्रमुदित मन गावत व्रजबनिता बजत बधाई रावल गाम ॥१॥ ऐसौ प्रभु हम कबहुँ न देख्यौ जैसो प्रभु ऐसी ही नाम । नाचत गावत करत कुतूहल दै असीस पूरे हैं काम ॥२॥ इतने ही में निरखिकें आईं सजनी हियरे महा अवाऊँ । श्रीविहलगिरिधारी कृपानिधि नितही इनकी बलि बलि जाऊँ ॥३॥
Saarang
Bhayo yeh srivallabh avtaar ..
Part2-268
भयो यह श्रीवल्लभ अवतार ॥ प्राच्री दिशतें शरदसचंद्र ज्यों लक्ष्मण भूष कुमार ॥१॥ श्रीभागवत गूढ रस प्रकटन कारण कीयो विचार ॥ आज्ञादई निज वज्ञपुरुषकों ताते वह अनुहार ॥२ ॥ हरि लीलामृत सिंधु संपूरित भक्तहेतु अवतार ॥ श्रीगोपीजन वल्लभ करत जु नित्य विहार ॥३ ॥ दक्रजपति पद सेवन मारग जन कारण कियो प्रचार ॥ जिहिं अवसर अनुसरत जीव कछु अर्पत बदन कमल स्वीकार ॥४ ॥ बाजे बाजत बीन दुंदुभी झांझ मृदंग और तार॥ नाचत गावत प्रेम मगन मन निजजन ठाडे द्वार॥५॥ जननी मुदित उछंग लिये सुत मुख देखत वारंवार ॥ अति सुख पावत हियो सिरावत बडभागिनजु उदार ॥६ ॥ श्रीलक्षमण नव वधु स्वजन पेहेराये सब परिवार ॥ भूदेवनकों दिये दान बहु निगम विहित जज देह सार ॥७ ॥ जाके गुणगणशेष सहस्त्र मुख कहेत न आवे पार ॥ यह फल देहु सदा रसिकनकों श्रीवललभ जगत उद्धार ॥८ ॥
Devgandhar
Mileki phool nayanahi kahey deit tere..|
NityaPad-313
मिलेकी फूल नयनाही कहे देत तेरे॥| श्याम सुंदर मुखचुंबनपरसे नाचत मुदित अनेरे ॥ १॥ नंदनंदनपै गयो चाहतहै मारग श्रवणनघेरे कुंभनदास गिरिधरन मिलनकूं करत चिन्ह दशफेरे ॥२॥
Iman
Kaanh kachhuchaal baithi rahat .. moe tunn chitey hansepai naan hanse
NityaPad-328
कान्ह कछुचाल बैठी रहत ॥ मो तन चिते हंसेपै न हंसे कह्यो चाहत कछू न कहत ॥|९॥ मैं जानी तनते जियको गयो चाहतहै वृषभाननंदिनी बैठीरी प्रीतिकी सकुच गहत ॥। इते तेरे रसको रामदास प्रभु इतें औरको देख्यो चहत ॥।२॥।
Bihagaro
Phoolan koo mukat banyo phoolanko pichhora
NityaPad-264
फूलन को मुकट बन्यो फूलनको पिछोरा तन शोभित अति प्यारी बर फूलन को शूंगार | कंठफूल वागो फेंटा फूलगादी गेंदुबा फूल हँस जेठे हें स्थामा स्थाम शोभा को नहीं पार ॥ फूलन के आभूषण वसन विराजत फूलन के फोंदा फूल उरहार । नंददास प्रभु फूले निरखत सुधि भूले शुकदेव नारद शारद रटत बार बार ॥।
Saarang
Horry khelati mohan, udati gulal abir ..
Part3-268
होरी खेलति मोहन, उड़ति गुलाल अबीर ॥ बनि बनि चलीं सकल ब्रज-वनिता पैहैरि विविधि पट चीर ॥१॥ अगर जबाद कुँमकुमा केसर चरचैं श्याम सरीर ॥ मृदु मुसिकानि परसपर सुंदरि दसन झलक मुख हीर ॥२॥ प्रैंम-पतंग पिचकाई छूटत, औ जमुना कौ नीर ॥ 'सूरदास' प्रभु सरबसु वारौं हरि हलधर के बीर ॥३॥
Sarang
Yeh tou bhaagya purush merimai ..
NityaPad-077
यह तो भाग्य पुरुष मेरीमाई ॥ मोहनकों गोदी में लीयें जेंबतहेव्रज़राई ॥१॥ चुचकारत पोछत अंबुज मुख उर आनंद न समाई ।। लपटेकरलपटात थोंद पर दुध लार लपटाई ॥२॥ चिबुक केश जब गहेत किलकके तबयशुमति मुसकाई || मागत सिखरण देरी मैया बेला भरके लाई ॥ ३॥ अंग अंगप्रतिअमितमाधुरी शोभा सहज निकाई ॥ परमानंद नारदमुनि तरसत घर बैठेनिधिपाई ।॥।४॥
Dhanshree
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