top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Gwalini niksi deit assis .. tumhari chhota aho nandrani
Part1-078
ग्वालिनि निकसी देत असीस ॥ तुम्हारी छोटा अहो नंदरानी जीवी कोटि बरीस ॥१॥ बरनवरन सारी पहराई चोली राती पीरी ॥ मायें करी खोरि कुमकुमकी हाथनमें दई बीरी ॥२॥ रानीजू तुम्हारा यह दिन आयौ मंगलचार बधाई ॥ श्रीविद्डलगिरिधरकी मैया करिकरि खुसी पठाई ॥
Saarang
Horry khelati rung rahyo hoe .. chova chandan aggar
Part3-341
होरी खेलति रंग रह्यो हो ॥ चोवा चंदन अगर कुंमकुमा बिथिनि जात बद्यो हो ॥१॥ आँखिन में जिनि डारोौ मोहन कितनी बेर कहयौ हो।| सखियन सबै सिखाई राधिका तब नंदलाल गहयौ हो ॥२॥ ये बातें अब सुधि करौ मोहन बेचन जात दल्यो हो | अबीर गुलाल अरगजा डारयो, सब नंदलाल सझो हो ॥३॥ अरस-परस पिय के सँग बिहरति तन को ताप गयौ हो ॥ बौहौत कहा अब कहत “गदाधर” लोचन लाख लह्या हो ॥४॥
Adano
Pyaari tohi shyam bulabwe jhamak chala raadhe....
NityaPad-306
प्यारी तोही श्याम बुलाबवे झमक चल राधे।॥। तोविन मोहन पान न खातहें कोन मंत्र पठ साथे ।। १॥॥ निशवासर तेरो ध्यान धरतहें विरह अग्नितन दाझे॥ सूरदास प्रभु तेरो मण जोबत तो बिन मोहन आधे ॥। २॥।
Kanharo
Grih grih aangan hott badhaai .. sriramchandra simhaasan baithe chhatra
Part1-315
गृह गृह आँगन होत बधाई ॥ श्रीरामचंद्र सिंहासन बैठे छत्र चमर ढुराई ॥१॥ मंगलसाज लिये सब सुंदरि नवसत सजिकें आई |॥ तिलक कियो जब अंकुर शिर धर आरती लौन कराई ॥२॥ जयजयकार भयीौ त्रिभुवनमें देवन दूुंदुभी वजाई ॥ सुरनर मुनिजन कोटि तेतीसों कौतुक अंबर छाई ॥३॥ चिरजीयौ अविचल रजधानी भक्तन के सुखदाई ॥ श्रीरघुनाथ चरणकमल रज रामदास निधि पाई ॥४॥
Saarang
Shree radha naval kisor dolain gujri .. vaake
Part3-168
श्री राधा नवल किसोर डोलैं गुजरी ॥ वाके नैन चपल चित चोर डोलैं गुजरी ॥ संग लिए सकल ब्रज सुंदरी अति रस रंग ढरी ॥१॥ कानन करनफूल, नकबेसर, मौतिन माँग भरी ॥ अधर प्रबाल नैन खंजन, मृग सावक तें अगरी ॥२॥ मुकत माल चौकी हमेल खग बारी पर दुलरी ॥ अँगिया बनी कटाब की निज जोबन करि सुधरी ॥३॥ सुबन पाट की ओढ़नी ओढ़नि पै इँडुरी ॥ कनक मटुकियाँ सिर धरै बाबा नंद जु के द्वार खरी ॥४॥ बिद्यापति बरनें काहा हो अंग अंग सुघरी ॥ कोकिल बन संपुट खुले मानों फूली कमल करी ॥५॥
Dhanashri
Dadhi naan bechiye hamaare kull aeye hoe tumason sou sou baar curry
Part1-255
दधि न बेचिये हमारे कुल ए हो तुमसों सो सौ बार करी नहियाँ ॥ जोपै दधि बेचिये तौ तुमते को लेवा है सुनि ब्रजराज लाड़िले ललन कितब गहतहौ बहियाँ ॥१॥ खरिक दुहायें गोरस लियें जात अप अपने भवन ताकौ दान मॉँगत कहा अब कहीये इनसईयाँ ॥ गोविंदप्रभुसों कहत प्यारीकी सखी चलौ जू नेंकु बलिजाऊँ बैठी रानी जसोमति जहिंयोँ ॥२॥
Kalyan
Nain nachawat gujri ujaregaat bhonh khasat maanon dussey jaat ..
Part1-266
नैन नचावत गुजरी उजरेगात भोंह खसत मानों डसे जात ॥ हर्यो लहेंगा केसर भीनी अंगिया सुहि सारी गोरेतन अति सुहात ॥१॥ कहारी कहों वाके अंगकी शोभा चंदहु देख मलिन व्हे जात ॥ हँस चितवन मोहे धोंधी प्रभु काहे लालन ललचाय ॥२॥
Sorath
Ritu vasant taroo lasant manhasant kamini bhamini
Part3-056
ऋतु वसंत तरू लसंत मनहसंत कामिनी भामिनी सब अंगअंग रमत फागरी ॥ चर्चरी अति विकट ताल गावत संगीत रसाल उरप तिरप लास्थ तांडव लेत लागरी ॥१॥ बंदनबूका गुलाल छिरकत तकि नेन भाल लाल गाल मृगज लेप अधरदागरी || गिरिवरधर रसिकराय मेचक मुदरी लगाय कंचुकी पर छापदीनी चकित नागरी ॥२॥ बाजत रसना मंजीर कूजत पिक मोर कीर पवन भीर जमुनातीर महल वागरी ॥ विष्णु दास प्रभु प्यारी भेटत हँसि देत तारी काम कला निपट निपुन प्रेम आगरी ॥३॥
Basant
Anat naan jaiye piya rahiye merey hii mahal .. joee joee kahoge
NityaPad-246
अनत न जैये पिय रहिये मेरे ही महल ॥ जोई जोई कहोगे सोई सोई करोंगी टहल ॥१॥ शब्या सामग्री वसन आभूषण सब बिध कर राखोंगी पहल | चतुर विहारी गिरिधारी पियाकी रावरी यही सहल ॥२॥।
Saarang
Bawri joe baansurisaun larai .. vaha unasaan prem nein masaun tumsaun
Part1-290
बावरी जो बाँसुरीसौं लरै ॥ वह उनसाँ प्रेम नें मसौं तुमसौं नाहिन आली यातें गिरिधारी लाल लै लै अधर धरै ॥१॥ जौलों मधु पीवत रहत तौलौं जोबतहै घरीघरी पलपल छिनछिन नहि बिसरै ।। सूरदास प्रभु वाके रसबस भये रहत आली तातें वाकी सरवर कहौ धौं कवन करै ॥
Saarang
Khelansyam durgayori .. sangsangdhawat dolatkaidhombahut
NityaPad-190
खेलनस्याम दूरगयोरी ॥ संगसंगधावत डोलतकैधोंबहुत अबेरभयोरी ॥१॥ पलकओटछांडतनहिंमोकूं कहाकहूं तोहिबात ॥ नंदहितात तातकर बोलत मोहिकहतहैमात ॥२॥ इतनीकहत स्थामघनआये ग्वालसखासंगचीन्हों ॥ दौरजाय उरल्नाय सूरप्रभु हरखयशोदा लीन्हों ॥। ३॥
Bilawal
Kamalanayan syathamasundar nishake jageho aalas bharey.. karnakh
NityaPad-146
कमलनयन स्यथामसुंदर निशके जागेहो आलस भरे।। करनख उर राजत मानों अर्धशशि धरे | १॥ लटपटी सिर पाग खिसत वदन तिलक टरे॥। परगजी उर कुसुममाल भूषण अंगर्भंग परे ॥ २॥। सुरत रंग उमग रहे रोम पुलक होत खरे ॥ परमानंद रसिकराय जाहीके भाग्य ताहीके ढरे ॥३॥
Bibhaas
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page