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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Mohyau munn aaju sakhee mohan balveer .. madhuramurali
Part3-065
मोह्यौ मन आजु सखी मोहन बलवीर ॥ मधुरमुरली सुर गाबति सकल जमुना तीर ॥१॥ कनक कपिस अति सौभित कटि तट वर चीर ॥ मानिकि हृति ओढनी साँवल सरीर ॥२॥ सखि सिखंड सिर सिंधु मुदित भेष अभीर ॥ मुकलित नव बृंदावन कूजति पिक कीर ॥३॥ “कृष्णदास' प्रभु के हित त्रिगुन बहै समीर | गिरिवरधर जुक्तीन सँग बिहरति रति रनधीर ॥४॥
Basant
Dheele dheele pug dharat dheeli paag dharkarhi dhayesehi firat aise
NityaPad-144
ढीले ढीले पग धरत ढीली पाग ढरकरही ढयेसेहि फिरत ऐसे कोनपें जु ढहेहो ॥ गाढेतो हीयके पिय ऐसी गाढी कोन त्रिय गाढे गाढे भुजन बीच गाढे कर गहे ॥ ९॥॥ लाललाल लोयन में उनीदे लाग लागजात सांचीकहो प्राणपति मेतो लाललहे॥ नंददास प्रभु पिय निशके उनीदे आये भयो प्रात कहो बात रात कहां रहे ॥ २॥।
Bhairav
Yeh dhana dharmahi tain paayau | neeken raakhi yashodamaiah narayan vraj aayee ..1..
Part1-062
यह धन धर्मही तैं पायौ | नीकें राखि यशोदामैया नारायण ब्रज आयो ॥१॥ जाधनकों मुनि जप तप खोजत वेदहू पार न पायौ । सो धन थस्थौ क्षीरसागरमें ब्रह्मा जाय जगायौ ॥२॥ जाधनतें गोकुल सुख लहियत सगरे काज सवारें ॥ सो धन बारबार उर अंतर परमानंद बिचारे ॥३॥
Kanharo
Laalan naeeju chaal chalaai .. yaa marag humm nitprati
Part1-233
लालन नईजु चाल चलाई ॥ या मारग हम नितप्रति आवत कबहुँ न दान दियौ मेरी माई ॥१॥ झुँठेई टठकि रहत अपने मन कहत सकुच शिरनाई ॥ श्रीविह्लगिरिधर दान लीजै दीजै दरश मुसिकाई ॥२॥
Bilawal
Adhar madhur mukharit mohanvans ... chalat driganchal chapal karat
NityaPad-111
अधर मधुर मुखरित मोहनवंस ॥। चलत दृगंचल चपल करत अतिबिलुलित पारिजात अवतंस ॥१॥ मानों गजराज कलभ अतिमद गलित आवत लटकत भुजधेरें प्रिया सखा अंस ॥ गोविंदप्रभुको जु श्रीदामा प्रभूति सब जयजय करत प्रसंस ॥२।।
Kanharo
Merrie gata agaadh ray moshai barni naan jaat niranjan niraakaar
Part1-071
मेरी गत अगाध रे मोषै बरनी न जात निरंजन निराकार नारायन । सात द्वीप सप्त साहेर अष्तकुल पर्वत मेरु रच्यो है सप्त धीरायन ॥१॥ तुंही तेज पवन पानी तुंही धरती आसमान । तुंही सूरज तुंही चन्द्र तुंही उड्गण तारायन । कहत 'तानसेन' प्रभु घटघटमें करत गान | अगम निगम सकल सृष्टि सुधारायान ॥२॥
Malkoos
Sharadritu shubh zaan anoopam dashmikau deen aayou ree ..
Pustak1-314
शरदऋतु शुभ जान अनूपम दशमीकौ दीन आयौ री ॥ परम मंगल दिन आज व्रजमें सब मन हरख न मायौ री ॥१॥ केसर सोंधो घोर जननी प्रथम लाल नहवायौ री ॥ नानाविधिके भूषण आभरण अंग शृंगार बनायौरी ॥२॥ पाग पिछोरा और उपरना बागौ विचित्र धरायो री ॥ परमानंद प्रभु विजया दशमी व्रजजन मंगल गायौ री ॥
Saarang
Madan matvaaron . naagar naval prem russ buss bhe keeno nand dularo ..1..
Part3-003
मदन मतवारों । नागर नवल प्रेम रस बस ब्हे कीनो नंद दुलारो ॥१॥ गये हो तुम भवन पराये हमसों नित करत तुम ठारो । सोय रही गृह भवन अकेली सीत दहत तनवारो ॥२॥ आज कियो कर जोर मीलन हित पायो हे प्रीतम प्यारो | परमानंद प्रभु या जाडेको दीजिये देस निकारो ॥३॥
Malkoos
Jhulaavat jasumati suta palna . kamalnen sukh daine badan
Part1-096
झुलावत जसुमति सुत पल्ना । कमलनेन सुख देन बदन बिधु हुलरावत ललना ॥१॥ हाटक रुचिर जटित नग खग मृग देत विविध खिलोना । बलि बलि जाय मोहन या छबि पर पूरव फल फलना ॥२॥
Ramkali
Roop dekh nayana palak laagen naheen ..
NityaPad-103
रूप देख नयना पलक लागें नहीं ॥ गोवरधनधरके अंग अंग पर दृष्टि परत चित रहत तहींतहीं ।। १॥। कहारी कहों अंग अंगकी बानिक चितचोर्‌यो माग दही ॥ कुंभनदास प्रभुके मिलनकी सुंदर बात सखियनसो कही ।॥२॥।
Nat
Aaj badhaai maaee vrishbhan key darbar . vrajajan milli mangal
Part1-178
आज बधाई माई वृषभान के दरबार । ब्रजजन मिलि मंगल गावें सजि चलीं कंचनथार ॥|१॥ ध्वजा पताका कदली रोप्यौ द्वारन बंदनवार। सबही सयानी धरी साथिये कीरति परम उदार ॥२॥ कंचन रसिक रूप अति राजत मोति लगे सुढार ।- कमलमुखी प्रफुलित भये मानों दिनकर किरन पसार ॥३॥ कुँवरिहिं देखत अति सुख उपजत बारति मुक्ताहार । गरीबदासकों दई पंजीरी बोलि कुटुंब परिवार ॥४॥
Bilawal
Kaanh keso maangat daan doodh dahee koo yeh naan sunyo kabahu kaann..
Part1-249
कान्ह केसो माँगत दान दूध दही को यह न सुन्यो कबहु कांन॥ हम नित आवत यह मारग लिये दधि काऊ भूले रोकी आन ॥१॥ कहेगी जाय ब्रज पति के आगें ढीठों देत न गिनत पहेचांन ॥ 'रसिक' प्रीतम सुन बचन न्रीया के अति उन्‍्मद भए दो गल बैयां दीनी जांन ॥२॥
Saarang
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