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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Govind teree gaay atibaadhi .. | NityaPad-295 | गोविंद तेरी गाय अतिबाढ़ी ॥
सुन ब्रजनाथ दूधको लालच मेलसकों नहीं लाढी ॥।१॥
आपनी इच्छा चरें उजागर शंक नकाहुकी माने ॥।
तुम्हें पत्याय स्थाम सुंदर तुम्हारो कर पहिचाने ॥२।।
ऊंचेकान करत मोय देखत उज़्क उज्कक होय ठाडी ॥
परमानंद नंदन के घरकी बालदशाकी बाढ़ी ।। ३॥ | Gori |
Giridhar sabahi anga koo baanko .. | NityaPad-288 | गिरिधर सबही अंग को बांको ॥
बांकी चाल चलत गोकुलमेंछैल छबीलो काको ॥१॥
बांकी भ्रोंह चरण गति बांकी बांको हृदय ताको ।
परमानंददास को ठाकुर कियो खोर ब्रज सांको ॥२॥ | |
Aavabat jaat houn haar purry ree .. | Part2-240 | आवबत जात हों हार परी री ॥
ज्यों ज्यों प्यारो बिनती कर पठवत त्यों त्यों तू गढ मान चढी री ॥१ ।।
तिहारे बीच परे सो बावरी हों चौगानकी गेंद भई री॥
गोविंद प्रभु सों मिले क्यों न भामिनी सुभग जामिनी जात बही री ॥२ ॥ | Bihaag |
Aaju neekau jamyo raag asawari . madangopal benu neekau | Part1-286 | आजु नीकौ जम्यो राग आसावरी । मदनगोपाल बेनु नीकौ
बाजै नाद सुनत भई बाबरी ॥ कमलनयन सुंदर ब्रज-नाइक सब गुन-निपुन कथा
है रावरी सरिता थगित ठगे मृग पंछी खेवट चकित चलति नहिं नाव री ॥ बछरा
खीर पिबत थन छाँड्यो दंतनि तृन खंडति नहिं गाव री ॥ 'परमारनेंद” प्रभु परम
विनोदी इहे मुरली-रस कौ प्रभाव री ॥ | Aasawari |
Hari sanga khelat sub faag .. yeh miss pranat | Part3-303 | हरि संग खेलत सब फाग ॥ यह मिस प्रणट
करत गोपीजन अंतर को अनुराग ॥| ६॥| डफ ओर ताल बांसुरी मह ुबर बाजत
ताल मृदंग ॥ अति आनंद मनोहर बानी गावत उठत तरंग ॥२॥ पहरे सुरंग
भात चोली कस काजर दे दोऊ नयन ॥ बनबन निरख निकस ठाडी भई
सुन माथो के वेन ।|३॥ ओर गोविंद ग्वाल संग एक ओर ब्रजनारी ॥ छांड
सकुच सब देत परस्पर अपनी भामती गारी ॥४॥ मिल दस पांच सखी
बलकृष्णहीं ले आवत चुचकाई || भर अरगजा अबीर कनक घट देत सीसत्ते
नाई ॥५॥ छिरकत साख जवाद कुंकुमा भुरकत वंदनधूर ॥ शोभित हे मानों
सांझ समें घन आए हें जलपूर ॥६।| दसहु दिशा भई परिपूरण सूर सुगंध
प्रमोद ।। सुर विमान कौतूहल भूले देखत कृष्णविनोद ॥७॥ | Gouri |
Shrilakshmangrih mahamangal bhayo pragate srivallabh | Part2-293 | श्रीलक्ष्मणगृह महामंगल भयो प्रगटे श्रीवल्लभ
पूरणकाम॥ माधवमास कृष्णपक्ष शुभलग्न उदि त एकादशी दूसरों
याम ॥१ ॥ मंगल कलश चौक मोतिनके विविध विचित्र चित्रबने धाम |
मंगलगावत मुद्ित मानिनी नखशिख रूप कामसी वाम ॥२ ॥ मिटयों
तिमिर दुख द्वंद जगतको भोरभयो मानों मिटगई याम ॥ माणिकचंद प्रभु
सदां विराजो आयवसो श्रीगोकुलगाम ॥३ ॥ | Sarang |
Moud vinod aaj ghar nand . krishnapaksh aahein nishi pragate | Part1-019 | मोद विनोद आज घर नंद । क्रृष्णपक्ष आहें निशि प्रगटे
या गोकुलके चंद ॥१॥ बंदनवार अरविंद मनोहर बीच बने पटकीर सुछंद ॥
गोपी ग्वाल परस्पर छिरकत पुलकित विहरत मत्त गयंद ॥|२॥ भवन द्वार गोमय
वर मंडित वरषत कुसुम उमापति इंदू ॥ विट्टलदास हरद दि मधु घृत रंजित पान
करत मकरंद ॥३॥ | Bilawal |
Kanak kusum atishobhit shravanan ..| ghoomat arun tarun | NityaPad-165 | कनक कुसुम अतिशोभित श्रवणन ॥| घूमत अरुण तरुण
मदमाते मुसुकात आनन ॥। १॥ गोल पाग पर कुल्हे सुरंग तामें अलक रेख बनी ॥।
गोविंदप्रभु त्रेलोक विमोहत कौस्तुभमणी ।।२॥ | Kalyan |
Podhe peeya-pyaari rung bharey.. arasparas douu reekshi | Part3-364 | पोढ़े पीय-प्यारी रंग भरे॥ अरसपरस दोऊ रीक्षि
रिझावति लै आरसी जो करे ॥ १ || तेरी री बसन सौंधे सौं भरि जु रहे री खरी ॥
तु जो मिलती सखी री दै अधरामृत मोहन प्रसन करे री ॥२॥ | Bihag |
Aaj dashahara shubhdin neekau poyto pooji hoe gopal .. | Pustak1-315 | आज दशहरा शुभदिन नीकौ पॉयतो पूजी हो गोपाल ॥
ब्रजरानी व्रजराज कुँवरकौ करो सिंगार परम रसाल ॥१॥
तब ब्रजराज अश्व सिंगारे तापर चढ़े श्रीगिरिधरलाल ||
रसिक प्रीतम पिय चले कुदाबत जहाँ बैठी वृषभान की बाल ॥२॥ | Saarang |
Maanat naahi nabal nabeli naar tou pai adhik | Part3-348 | मानत नाहि नबल नबेलि नार तो पै अधिक
प्यार श्याम छबीले ने बोली तोय ॥ कब की मनावत आली उतरू न देति
कैसैंहु मन न आवत छेल छबीले की होरी को सुख तातैं लैन पठाई मोय
॥१॥ सुनति बतीयाँ प्रीतम की प्रेम मगर क्यों न ह ोत धन तेरी छतीयाँ नींद
भरी रहो सोय ॥ इतनौं सुनति प्यारी कर लीए पिचकारी 'रसिक' पीतम
सँग मदन बिथा खोय ॥२॥ | Kanharo |
Bunny bunny khelani chully kamal cully vikas | Part3-064 | बनि बनि खेलनि चली कमल कली विकास
लस ब्रजनारी ॥ अपने अपने ग्रेष्ठ तैं निकसी एक ठौर भई सकल फूलि
मनौं बारी फूलवारी ॥१॥ तरु तमाल लाल ढिण ठाढे राजत चहुं दिस तैं
कनक बेलि गोपी भरति भाजत्ति मनौं पवन डुलाए आगे पाछे होत जोबन
बारि ॥ सूरदास” मदनमोहन अँग संग बसंत सोभित अनंग अद्भुत वारि
सँवारि ॥२५॥ | Basant |
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