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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Sriyamuna janakon sukhakarani, sharan lait daivi jeevan koo tinn
NityaPad-013
श्रीयमुना जनकों सुखकरनी, शरण लेत दैवी जीवन को तिन के कोटि दोष को हरनी ॥१॥ पुष्टिभक्ति में बाधक जो कछु ताकों मेंट भक्तिरस भरनी, दास" कहे सरन हों आयो महा कलिकाल सिंधु तें तरनी ॥२॥
Bhairav
Faag anurag bharey khelati haye giridhari ick
Part3-333
फाग अनुराग भरे खेलति है गिरिधारी इक जुबति मधि राधा सुकुमारी ॥| फैंटन अबीर भरे संग सखा रंग भरै लिये हाथन रँँग भरी कनक पिचकारी ॥ १॥ बाजति मृदंग ताल भेरि दुंदुभि रसाल बीना बैनु ढठफ सहनाई धुनि सुखकारी | उत्त सब गोपी जन परम मुदित मन हँसि-हैँसि रस भरी गावति मीठी गारी ॥२॥ आई जुरे दोऊ टोल आनँद हिये कलोल छिरकति गोप गन देस्व्रि-देस्ि ब्रजनारी | झोरी भरि लै गुलाल उड़वती ब्रजबाल मचि रही गगन चहूं दिस अँधियारी ॥ ३॥ ताही समें प्यारी धाँई पकरे मोहन जाई गहि छल-बल आऑजि अँखियाँ अनियारी ॥ अंग- अंग लपटाई लाल उर लाय लये, यह छबि निरखति 'दासजन' बलिहारी ॥४॥
Jejvanti
Pragadaya emaa srivallabhadev..
Part2-289
प्रगदया एमा श्रीवललभदेव॥ श्रीलक्षमण भट गृहे बधाईयां॥ मंगल सुहेलरा॥१॥ गावें एमा गीत रसाल॥ सबे सुहागिनि आईयां॥२॥ ब्राह्मण एमा वेद पढाय॥ देत असीससुहाइ़यां ॥३॥ मोतिन एमा चौक पा । बंदनवार बधाईयां॥४॥ घरघर एमा मंगलचार ॥ ध्वजा कलश ॥५ ॥ देवन एमा दुंदुभी बजाय॥ पोहोप अंजुली वरखाईयां॥६॥ दीने एमा बहु विधदान॥ नरनारी पहेराईयां ॥७॥ धन्य धन्य एमा एलंमागारु॥। आशा सबेपुजाईयां ॥८ ॥ सबदिन एमा सुखसंपत्ति राज॥ हरि-जीवन मनभाईयां ॥९ ॥
Dhanashri
Payehoju zaan laal tum payehoju zaan .. tumason cone
NityaPad-148
पायेहोजु जान लाल तुम पायेहोजु जान ॥ तुमसों कोन बलैया बोले निपट कपटकी खान ॥।१॥ औरनसो तुम हसत खेलतहों हमसे रहत मुखतान॥ सूरदासप्रभु अपनी गरज को हियतपरमसुजान ।। २॥।
Bilawal
Saji-saji aaeen sakal kavrajanari. kasi
Part2-247
सजि-सजि आईं सकल कब्रजनारी। कसि कंचुकी बेंदी अंजन दृग ओढ़ि विविध रंग सारी ॥१ ॥ बाजूबंद बेरखी चूरी कर कंकन फोंदना री। पहोंची गूजरी बाँह बिजोटी मूंदरी अँगुरियन न्यारी ॥३॥ करनफूल अवतंस फूल नथ ढलकत मनि मुक्तारी। अलकावली दामिनी-फूलनि बेनी गूंथि सँवारी॥३॥ हँसुली पोत तिमनियाँ दुलरी हिये हार सिंगारी। गुँज माल बेजंती माल बिच लटकत बहु झोंरा री ॥४ ॥ कटि किकिनी पग नूपुर अनवट बाजत चलत सुढारी । गज-गमनी अबनी मृगनेनी गावत है करतारी ॥५ ॥| मुखहि तंबोल अधर घर लाली कहा कहें रूप छटा री । हँसन-रेख झलकत दसनन बिच मानो चमक चपला री॥६॥ बनी रंगीली गनगौर श्री राधा बिलसन कुंज बिहारी। भेटी जाय धाय गिरिधर सों श्री वृषभान-दुलारी ॥७॥ धन्य सुहाग भाग तेरो भामिनि कहा बरनों रसना री। 'कृष्णदास' प्यारे की प्यारी तोपे सर्वस्व वारी ॥८ ॥
Saarang
Gawat dhamaar aaee vraj kii sukumar naar ..
Part3-339
गावत धमार आई ब्रज की सुकुमार नार ॥ चित्र अंकित डफ संवार तृण टकोर अंगुरी ढार बजबत रिझवार ग्वार ॥ ६॥ सुन निकसे सुघरराय अर्भ कलीने बुलाय शंख शूंग चंग उपंग महुवर बंसी सहनार ॥ घुघरु घंटा घडियाल कंस ताल कठ ताल दुंदुभी मृदंग राग रंण होत नंद द्वार ॥२॥ चोवा मृगमद गुलाल मुख मंडित किये गोपाल केसर के सुत न पुंज कंचन कर सीसवार ॥ पिचकाई करन लाई धारा छूटत सुहाई सहचरी समीप आय छिरक रही हार हार ॥३॥ अति विचित्र बाल मित्र विरह्त मिल युवति युथ गावत हैं सुर संयुत होरी के गीत गार ॥ मुरारी दास प्रभु गोपाल फगुवा दीनो संभार दे असीस उलट चली रूप माधुरी निहार ॥४॥
Adano
Nirtat russ dou bhaai rung | sulap sanch gati lait gragrat kitt dhiki
NityaPad-170
निर्तत रस दोउ भाई रंग | सुलप संच गति लेत ग्रग्रत किट धिकि द्विम-द्रम बाजत मुदंग ।। ९॥॥ कनक बरन टिपारो सिर कमल बरन काछिनी कटि बनजधातु अति विचित्र सोहे स्याम अंग ॥ गोविन्द प्रभु त्रैलोक विमोहत देखत ठगेसे ठाडे रहे कोटि अनंग ॥२॥।
Todi
Halrau hulawat maiya hallery merey baare kanhaiya halrau . houn
Part1-101
हालरौ हुलावत मैया हालरी मेरे बारे कन्हैया हालरौ । हों बारी या बदन इंदुकी आछौ आछौ अलसानरौ ॥१॥ मेरे माई कमल नयन पर कपट किये आई होई । बाल गोविंद बेग तुरतही बकी बिगोई ॥२॥ सुनी देवता देख. पावन अति तू पति है याकुलकौ"। पुनि पूजी है देवकुल तो कुँवरि देहे मो बलकौ ॥३॥ यह सुख सूरदास इन नैनन दिशा दश डुनो होई । दुतियाकौ शशि ज्यों बढ़े शिशु निरख ज॑ंन निज सोई ॥४॥
Bilawal
Shyamahin dosh kahaa kahi deejai .. kahaa baat bhurlison kahiye
Part1-288
श्यामहिं दोष कहा कहि दीजै ॥ कहा बात भुरलीसों कहिये सब अपने सिर लीजै ॥१)॥ हमहीं कहत बजाबहु मोहन यह नहीं हम जानी॥ हम जानी यह बॉँस बेंसुरिया को जाने पटरानी ॥२॥ बारेतें मुख लागत लागत अब हैं गई सयानी ।। सुनहीं सूर हम भोरी भारी बाकी अकथ कहानी ॥। ३॥
Dhanashri
Kahaa ochhihvaijaihejat ..
NityaPad-153
कहा ओछीहवैजैहेजात ॥ सुनयशुमति तुमबडरनआगेंजोछिन एक बितात ॥१॥ अतिनीको सतभावभलाई जो यातनतेकीजे ।। मायबापको नामलिवाबत लोकमांझ यशली जे । २॥ सासननद और पारपरोसनहँस बहु भांतकह्यो ॥ तौहूमोहि तिहारेघरबिन नाहिन परत रह्मो ॥३॥ बोललेहोसंकोचकरो जिनजबतुमसुतहि न्हवावो ॥ श्रीविद्डलगिरिधरलालको मोहीपेंउबटाबो ॥।४॥
Devgandhar
Baithe kusum bangla laal .. juee karen gulab madhuri
NityaPad-260
बैठे कुसुम बंगला लाल ॥ जुई करेण गुलाब माधुरी बिचबिच कमल रसाल ।॥॥१९॥ फूलनहीकी रचीहे शय्या फूलनही माल ॥ फूलनही को गेहेंनों पहेरें सुंदवर गोपाल ॥२॥ क्रीडत पोहोप भवन नंदनंदन शोभाबढी अपार ॥ दास रसिक तहां बीरी खवाबवत प्यारों देत उगार ॥३॥
Saarang
Hari russ voondaavante aayo.
NityaPad-371
हरि रस वूंदावनते आयो। भगवदीय जन पीवनके कारन श्रीव्रजनाथ पठायो ॥ वांटिलियो अपनी अपनी रुचि जो जाके मन भायो । सूरदास प्रभु रसिक बिनोदी सो रस रसिकन पायो ॥
Bihaag
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