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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Mahari tohibadikripan mampy .. | NityaPad-191 | महरि तोहिबडीकृपन मैंपाई ॥
दृधदहीदियों जोविधातातोहि.. सोतोधरतछिषपाई ॥१॥
बालकबहुत नहीरीतेरे एकहिकुंवरकन्हाई ॥
सोहतो घरहीघरडोलत माखनखातचुराई ॥॥२॥
बृद्धबेषपूरवपुन्यनतें यह निधि भाग्यन पाई ॥
ताहूके खैवेपीवेकों एती कहाचतुराई ॥ ३॥।
सुनतबचन चतुरनागरीके जशुमतिनंदसुनाई ॥
सूरस्यामको चोरीकेमिसदेखनको यह आई ॥॥४॥ | Bilawal |
Naachat raasmein gopal sanga mudit ghoshnari .. taru tamaal | Part1-332 | नाचत रासमें गोपाल संग मुदित घोषनारी ॥ तरु तमाल
श्यामलाल कनकवेलि प्यारी ॥१॥ चल नितंब किंकिणी कटि लोल बंक
ग्रीवा ॥ राग तान मान सहित वेणु गान सीवा ॥२॥ श्रमजलकण सुभर भरे
रंग रेंनु सोहै ॥ क्ृष्णदासप्रभु गिरिधर ब्रजजन मन मोहै ॥ | Malav |
Mohan boondaavan kreedat kunj banyau aeka bhaav .. sharadnisha | Pustak1-335 | मोहन बूंदावन क्रीड़त कुंज बन्यौ एक भाव ॥ शरदनिशा
जगमग रही मोहन बेंन बजाय ॥१॥ बेंन बजावत टेरसों ठाढ़े द्म की छाँई॥
व्रजनारी व्याकुल भईं घर घरते उठि धाई ॥२॥ नंदलाल तुम्हें जानिके आईं
तिहारे पास ॥ सो चरित्र विधिनें रच्यौ रँग मिलि खेलें रास ॥३॥ | Sorat |
Aachhe baney dekho madangopal... bahut phoolphoole nandanandan tumko | NityaPad-230 | आछे बने देखो मदनगोपाल।॥ बहुत फूलफूले नंदनंदन तुमको
गूथोंगी माल ॥१॥ आये बैठे तरुवर की छैयां अंबुजनयन विशाल ॥ नेक वियार
करूं अंचलसों पाय पलोटोंगी बाल ॥२॥ आछे तब राधा माधोंसों बोलत वचन
रसाल ॥ परमानंदप्रभु यहां रहो ब्रजते और न चाल ॥३॥ | Saarang |
Dandet shrilakshman pramuditi manimaanik kanchan | Part2-297 | दानदेत श्रीलक्ष्मण प्रमुदिति मणिमाणिक कंचन
पटगाय ॥ श्रीत्रजराज कुंवर यशोदासुत करुणाकर प्रगटे हरिआय ॥१ ॥
रही न मन अभिलाष कछू अब याचक नामहतो कोउ जोय ॥ विष्णुदास
उमगे अंतरतें दे असीस तुमसे नहि कोय ॥२ ॥ | Sarang |
Khelati radha faag giridhar dheerson .. yuvati | Part3-160 | खेलति राधा फाग गिरिधर धीरसों ॥ युवती
यूथ मिले आवहीं अति रंग मच्यो बलवीरसों ॥१।॥ गारी मीठी गावहीं मिलि
युवतीन की भीरसों ॥ होरी हो हो बोलिकें मिलि कूकेंदेत अहीरसों ॥२॥
पिचकाई कर कनिककी भरि छिरकत केसरि नीरसों ॥ सुरंग गुलाल उडावहीं
लेमारत मुठी अबीरसों ॥३॥ प्रेम रंग सोंभरि रहीं तन पहरें दक्षिन चीरसों ॥
बचन विवेकन बोलहीं सब व्याकुल मनमथ पीरसों ॥ ताथेई ततथेई उचटत
धुनि मधुर मंजीरसों ॥५॥ प्रफुल्लित वुंदावन भयो बहुविध कालिंदी तीरसों ॥
मधुर मधुर धुनि बोलही अलिकेकी कोकिलकीरसों ॥६॥ ऋतु कुसुमा कर
सुखद को मानो आयो त्रिविध समीरसों || यह विध खेलत रंग रह्यो गोकुल
चंदस्याम शरीरसों ॥७॥ | Dhanashri |
Prakatbhaye prabhu shrimadvallabh dwijdeh.. | Part2-297 | प्रकटभये प्रभु श्रीमद्वल्लभ द्विजदेह॥
निजजन सब आनंदित गावत बजत बधाई सबहिनके गेह॥१॥
भूतल प्रकटयो भाव श्रुतिनको उपज्यो नंदनंदन पदनेह ॥
मिटे ताप निजजनके मनके बरखे प्रेमभक्ति रसमेह ।२ ॥
निरखत श्रीमुखचंद सबनके दूर भये सब निगम संदेह ॥
मिटगये कपट कुटिल खल मारग भस्म भये सब आ सुर जेह ॥३॥
करत कैलि कुँजन कंजन नित गिरिधर सुधि करवो जे पूरव नेह।॥
कहत दास जोरी क्योंगुणवरनों नाहिनछेह ॥४ ।॥। | Sarang |
Shrilakshmangrih aaj badhaai.. prakate srivallabh | Part2-323 | श्रीलक्ष्मणगृह आज बधाई॥ प्रकटे श्रीवललभ
सुख रासी भक्तनके सुखदाई ॥१ ॥ अद्भुतरूप कहत नहि आवबे कोटिक
काम लजाई॥ यहसुन नरनारी मंगलसज गावतआये धाई॥२॥
माधवमास कृष्ण एकादशी शुभघरी लगन सुहाई। देत दान लक्ष्मण
आनंदित जातकर्म करवाई ॥३ ॥ मात इलंमा तनमनफूली आनंद उर न
समाई।। देख थके सुरपति सुरवनिता नृत्यत अति सुखदाई ॥४॥
मायामतकों दूर करेंगे पुष्टिभक्ति प्रकटाई ॥ सगुणदास पर कृपाबहुतकर
राखलियो शरणाई ॥५ ॥ | Bihaag |
Hari vadan ughaari nihaari jasoda jyon tere nenn siraave . | Part1-019 | हरि वदन उघारि निहारि जसोदा ज्यों तेरे नेंन सिरावे ।
अविनासी आदि पुरुषोत्तम प्रेम फंदा परे आवे ॥१॥ कौन स्वरूप धर्यो हे
भक्त हीत ताहि निगम रटि गावे ॥ संकर सुरमुनि व्यास नारद सोउ पार नहि
पावे ॥२॥ को समुझे यह भाव भेद सो अभेद कैसें भावे ॥ रामक्ृष्ण प्रगटे
गिरिधारी नंदरानी जुके लडावें ॥३॥ | Ramkali |
Gulal kii dhoondhar mein mukut jhalak tesi | Part3-134 | गुलाल की धूँधर में मुकुट झलक तेसी
भूषण बसन की ॥ सोंधो अरगजा अबीर की अँधियारी अरसपरस भरन
में किलकनी दसन की ॥॥१॥ ब्रजभामिनी तामें दामिनी सी कोंधत छूटी
चुति दशन की ॥ बरन-बरन रंग की बलि-बलि वल्लभ छबीली त्रियन
पर बरखा होत कुँवर की ॥२ दान काहे को हो लागे ॥ चले जाहू अपने हो मग ॥भ्रु०)। आवत जात
सदा रहीं कबह्दू सुन्यों नहीं कान | अब कछु नईये चलाइये दूध दहीकोदान
॥१॥ सदा सदा हम दान लियो सुनही नवल कुमारि ॥ ओर गले न्हे तुम
गई दान हमारो मारि ॥२॥ ठालेठूले फिरतहो चलो हमें घरकाम || इनकी
कछुन चलाइये ख्याली सुंदर स्याम ॥|३॥ स्याम सखन सोयों कश्यो घेरो
सबनकों जाय ॥ ढीठ बहुत ये ग्वालिनी मटुकी लेहु छिनाय ॥४।॥| गोचारन
मिस विपिनमें लूटतहो परनारि॥ कहेंगी जाय ब्रजरायसों ऐसो झगरो निवारि
॥५॥ मधु मंगल क्यो कृष्णसों दान लेहु कछु छाड॥ इनसों दिनदिन कामहे
मति बलेह कछू आड ॥६।॥ सांची कहत के हसत हो हमकों होत अवार ॥
सब सखियन सेनावेनीकर गहने देहो मोती हार ॥७॥ मदनमोहन पिय
हरखियो लीयो हस्त करहार || अपने कंठले पहरियो गजमोतिन अतिचार
॥८॥ सब सस्वियन मिल मतोमत्यो कीजे कहा उपाय ॥ राधा गहने दीजिये
ओर नहीं कछुदाय ॥९५॥| ललिता विसाखा भाजियो राधा तजी है अकेली ॥
गोविंद प्रभु नवकुंज में पियप्यारी की केलि ॥१०॥ | Goud Malhaar |
Laheria saaj subhag atee sobhit tahaan raajat balkrishna bihaari. | NityaPad-070 | लहेरिया साज सुभग अति सोभित तहाँ राजत बालकृष्ण बिहारी।
लहेरिया पाग पिछोरा सुभग अति सुरंग लहेरिया कंचुकी सारी ॥१॥
सहज सिंगार किये अति सुन्दर सुगंध सहित मुख बीडी सुधारी ।
पोहोपमाल सिर कंठ बिराजत दरपन ले देखत पियप्यारी ॥२॥
घरघरतें आई ब्रजनारी जमुनाजल भर कंचनझारी।
मात जसोदा करत आरती छबि पर कुंभनदास बलिहारी ॥।३॥ | Saarang |
God liye bal mohan dou odh rajaai bethi nanandarani .. parada | NityaPad-130 |
