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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Dekhari rohanimaiah kaisehain baldaaubhaiya yamunaketir mohi jhujhuvaavtaayori ..
NityaPad-198
देखरी रोहणीमैया कैसेहैं बलदाऊभैया यमुनाकेतीर मोहि झुझुवावतायोरी ॥ सुबल श्रीदामासाथ हँसहँस बूझतवात आप डरपे औरमोहि डरपायोरी ॥ १॥ जहींजहीं बोले मोर चिते रहत याही ओर भाजोरे भाजोरे भैयावह देखो आयो।। आप गये तरुचढमोहि छाड्योवाही तर धरधर छातीकरे दोर्‌यो घरआयो ॥२॥ उछंगसो लिये लगाय कंठसों रहे लपटाय बारीरेवारी मेरोहियो भर आयो।॥ परमानंद रानी द्विजबुलाय वेदमंत्र पढाय बछियाकी पूँछगहि हाथहि दिवायो ॥३॥
Saarang
Pyaari tere loyan lonein..
NityaPad-103
प्यारी तेरे लोयन लोनें॥ रसके आलवाल रंगीले बिशाल ऐसे पाछें भये न आगें होनें ॥ १॥॥ रूपके रिझ्ञोने जब मुसक चलत कोने कामके हेरी टटाबक टोनें ॥ नंददास नंदनंदनके नयनतें नेक नाहिं नेहोने ॥२।।
Nat
Paalane jhoolat giridharlal . janani jasoda baithi jhulaavat
Part1-096
पालने झूलत गिरिधरलाल । जननि जसोदा बैठि झुलावत निरखत बदन रसाल ॥१॥ बालक लीला गावत हरखित देत करनसों ताल । कुंभनदास बडभागिनि रानी वारत मुक्तामाल ॥२॥
Ramkali
Murali dhuni bhaivanmein aachho banyohai bihaari lalho ..
NityaPad-357
मुरली धुनि भईवनमें आछो बन्योहै बिहारी लालहो ॥ अपने धामते सुन निकसी मिल उमगचली ब्रजबालहो ।। १॥॥ एकतरुणी नवनेह रंगी ताहे जननी दिखावे त्रास॥। सरिता उमगी क्योंथंभे जाहि हरि दरसन की प्यास ॥२॥ एक न निकसन पावही वाको हरिसों अधिक सनेह ॥ ज्यों भुजंग तज कंचुकी अटक रही गृहदेह ॥|३॥ जैसें घाम सूरजमिले ऐसे भई लालमें लीन ॥ शोभासागर सांवरो ब्रजयुव॒तिन केदृगमीन॥।४॥ कहां कहों इनकी दशा रची स्यामकें रंग।। श्रीकृष्णरूप दीपकभयोतामें उड़-उड परत पतंग ॥।५।। द्रमवेली सरसीसबे जहां वरखत कुसुमसुवास ॥। कंजकली फूलीअली भयो उदयकर रविप्रकाश ॥६॥ कहि भगवान हित राम रायप्रभु राजत सखीन समेत ॥ मानो घन घेगरयो दामिनी तामें मोरमुकुट छबि देत॥७॥
Gori
Suna sajani yeh saanchi baani baare tein nagdhar kahavaayau ..
Part1-282
सुन सजनी यह साँची बानी बारे तें नगधर कहवायौ ॥ धन्य धन्य कवि ता पितु माता जिन कहि कहि उपमां वह गायो ॥१॥ इन्दुबदन तन श्याम सुभग घन तड़ित बसन सत भाव उटायो ॥ अलक भृंग पटतरकों साँचे कर मुख चरण कमल कर गायौ ॥२॥ ये उपमा इनहींकों छाजे अब मुरली अधरन परसायौं ॥ सूर अंग यह आहि हमारी मुरली सबै अकेलें पायी ॥३॥
Bilawal
Aapan chaliye
NityaPad-323
आपन चलिये लालन कीजिये न लाज ॥ मोसी जोतुम कोटिक पठवो प्यारी न मानत आज ॥१॥ हौंतो तिहारी आज्ञाकारी मोसों कहाकहत महाराज ॥ नंददासप्रभु बडेंरे कह गये आपकाज महाकाज ॥। २॥
Kedaro
Horry khele saanvaro manmohan jaako naaun .. fashu
Part3-181
होरी खेले साँवरो मनमोहन जाको नाँउ ॥ फाशु सकल ब्रज रमि रह्ों रस भीजि रहो सब गाँउ ॥१॥ नट भेष बनाई कें हो बिप्र भए गोपीनाथ जिन कै नैन कौतिक हारे ब्रज लरिका के नाथ ॥ २॥ नव तरुनी नव रूपबंत हरि जाकी बाखरि जात ॥ चितवत्ति अति अनुराण सौं अरू कहति भेद की बात ॥३॥ गोपी कहति अह्ो बिप्र जू हम बूझति हैं तुम सौं ॥ हमारी प्रीति हरि सौं लागी कछु हरि हू की हम सौं ॥४॥ कहति हों बाके जिय की तुम सौं नाहिन ताकौं ढेत ॥ जो कछू करत तुमारे कारन हरि चाहति सर्दां संकेत ॥५॥ राधा मंत्र जपत चले हरि जहँ कीरति वृषभानु ॥ कहि न सकत चाहत कछ्यों दानन मनि कन्या दानु ॥६॥ कर गहि ढफ नव लाड़िली हो जावति सखियन संग ॥ कहि “भगवान हित राम राइ? प्रभु नैन की गति पंग ॥७॥
Sarang
Laal tum seekhe hoe curran dagaa.... rajani anat jaay sukh
NityaPad-162
लाल तुम सीखे हो करन दगा।॥। रजनी अनत जाय सुख बिलसत धरचदो है शीश पगा ॥॥१॥ ओढे कवाय लालचन्द्र छीपावत अब तुमरी बिध जानी || कुंभनदास प्रभु गोवर्द्धन धर रहत नहीं कछु छानी ॥। २॥
Ramkali
Neck pathey giridharjookon maiya ..
NityaPad-295
नेक पठे गिरिधरजूकों मैया ॥ रही विन स्थाम पत्याय न काहूसूंघत नाहिनेअपनीलैया ॥।१॥॥ ग्वालवाल सब सखा संगके पचिहारे बलदाऊभैया ॥ हूंकहूंक हेरत सबही तन इनहीं हाथ लगी मेरी गैया ॥। २॥। सुन त्रिय वचनकोरहाथहीं दुहूँ दिश चितवन कुंवरकन्हैया ॥ परमानंद बशुमति मुसकानी संगदियो मोकुलको रैया
Gori
Aaj falan bharthau palana falan bharthau palana jhoom rahee
Part1-113
आज फलन भरथौ पलना फलन भरथौ पलना झूम रही जता चहुँ ओर आज फलन भस्बौ पलना ॥टेका। बैठि रानी जसोदा झुलावे रानी ललना खिलावे रानी पलना झुलावे ॥ झुक झूले श्री बालकृष्णलाल आज फलन भर्तबौ ॥१॥ शिश पाग चंद्रिका सोहै चंद्रिका सोहे लट लटकन तिलक सुभाल आज फलन भस्थौ ॥२॥ शिशफूल करनफूल झलकै करनफूल झलकै नासा मोती सिरपेच आज फलन भर्बौ ॥३॥ श्री कंठ धुकधकी माला सोहै धुकधकी माला सोहै हीराहार हमेल आज फलन भस्यौ ॥४॥ गुंजामाल कमल वनमाला कमल वनमाला चोटी मुदरी रसाल आज फलन भस्बौ ॥५॥ श्री विद्लनाथ संग मिलि खेले संग मिलि खेले 'निजजन” को समाज आज फलन भरयौ ॥६॥
Aasawari
Ladili laal sez uthh baithe sakhijan mangalbhog dharaave .
NityaPad-030
लाडिली लाल सेज उठ बैठे सख्ीजन मंगलभोग धरावे । कंचनजडित थारमें मोदक ले कर ललिता हरि ढिंग आवे ॥ १॥ देत परस्पर कोर बदन में नैन उनीदे अति अरसावे | मृदु मुसिकात मोद बढावत दास निरख के बल-बल जावे ॥ २॥
Bibhaas
Jhoom sub aaee gopi lapat rahee nandlal ..
Part3-149
झूम सब आई गोपी लपट रही नंदलाल ॥ मानो स्याम घन में चपलासी ज्यों सोमित ब्रजबाल ।| १॥ नेनन सेनन बेनन गारी दे अंचर और ऐंचत गाल ॥ सुघर खिलार नवल धीरज प्रभु कर पाई हो ख्याल ॥२॥
Singhadoo
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