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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Paachhen | NityaPad-333 | पाछें
ललिता आगें स्यामाप्यारी ताआगें पिय मारगमें फूल बिछावत जात ॥। कठिन
कली बीन करत न्यारी न्यारी प्यारीके चरण कोमल जान सकुंचत गढवेहू
डरात ॥१॥ अरुझी लता अपनेकर निरवारत ऊंचे ले डारत द्रुम पल्लव
पात ॥ सूरदासमदनमोहन पियकी आधीनताई देखत मेरे नयन सिरात ॥२॥। | Poorvi |
Latkat chalat dohni lerry ..| | NityaPad-295 | लटकत चलत दोहनी लेरी ॥|
अनोखी तू गाय दुह्वावनवारी कौन पौरीमें पैठन देरी ॥१॥।
बनते आवबत भई न बिरिया बासर श्रम तज नेक चितेरी ॥
तोहि न दोष नयेहितकी गति कठिन हिलगकी ऐसी हैरी ॥२॥
तुव दृग चंचल अंबुज बदनी दरसन हानि निमिष नसहेरी ॥
चततुर्भुजप्रभु गिरिधरन चंदने तुब चित चोर्यो मूदु मुसकेरी ॥३॥ | Gori |
Podhi pyaari piya key sanga sabai busson bharey | Part3-363 | पोढी प्यारी पिय के संग सबै बसन भरे
रंग ॥ खेलि फाग अनुराग बढ्यो दोऊ आलस बस सब अंग ॥१॥ हँसति
परस्पर अतिरस बिहरति आंखें भरत ि उमंग ॥ परमानंद दंपति छबि ऊपर
बारों कोटि अनंग ॥२॥ | Bihag |
Jhoolat hansasuta key coole .. | Part3-373 | झूलत हंससुता के कूल ॥
सघन निकुंज पुंज मधुपन के अद्भुत फूले फूल ॥ १॥|
ललित लता लपटी ललितादिक बरषत आनंद मूल ॥
घन दामिनि ज्यों राजत मोहन निरख गई मति भूल ॥२॥
रमा आदि सुरनारि सहचरी नाहिं कोऊ समतूल ॥
विष्णुदास गिरिधरन छबीलो सर्वस्व तहां अनुकूल ॥ ३॥
| Devgandhar |
Nirakhat roop nagari naar.. mukhpar munn atak | Part2-358 | निरखत रूप नागरि नार॥ मुखपर मन अटक
लटक्यो मान त नाहीं हार॥१॥ स्याम तनकी जलद आभा चंद्रिका
झलकाय ॥ बारबार विलोकथकरहे नयनहीं ठहराय॥२॥ स्थाम
मरकतमनि महानग सखा नृत्यत मोर ॥ देख धरपर हरख ऊपर नाहि न
आनंदथोर ॥३ ॥ कोऊ कहत सुर चाप मानों गगन भयो प्रकाश ॥ थकित
त्रजललना जहांतहां हरख कबहुं उदास ॥४॥ निरख जोजिहिं रंग राची
तांहि रही भुलाय ॥ सूरप्रभु गुण रास शोभा रसिकजन सुखदाय ॥५ ॥ | Sorat |
Nandlalason maaee arujh rahyo munn mero kyon sur jaaoonri ... | NityaPad-090 | नंदलालसों माई अरुझ रहयो मन मेरो क्यों सुर जाऊंरी ॥।
श्रवण बेन रूप नयन मन मनसा नाहिंने चेन रोम रोमरही मूरति कितन गुरुजन
दुर्जन धरे नाऊं ॥१॥ जंत्र मंत्र टोना टमना सो कछून कीनो हों उपाऊं ॥। खेम
रसिक प्रभुपे अबकेसेंछूटन पाऊंकोनसो देव मनाऊं ॥।२॥ | Ramkali |
Latkat chalat yuvati sukhdani .. sandhya samey sakhamandal mein | NityaPad-175 | लटकत चलत युवति सुखदानी ॥ संध्या समे सखामंडल में
सोभित तन गौरज लपटानी ॥।१॥ मोरमुकुट गुंजा पियरो पट मुख मुरली गुंजत
मृदु बानी। चत्रभुज प्रभु गिरिधर आये बनते ले आरती वारती नंदरानी ॥२॥ | Saarang |
Jaya jaya jaya srivallabhanandan. | NityaPad-007 | जय जय जय श्रीवल्लभनंदन।
सुर नर मुनि जाकी पदरजवंदन ॥। १
मायावाद किये जू निकंदन।॥।
नाम लिये काटत भवफंदन ॥२॥।
प्रकट पुरुषोत्तम चरचत चंदन ॥
कृष्णदास गावत श्रुतिछंदन ॥। | Bhairav |
Khelein horry faag chalo milli dekhan jaiye ..bhru 0.... | Part3-154 | खेलें होरी फाग चलो मिलि देखन जैये ॥भ्रु ०॥॥
सुनियतहें दरबारमेंहो नंदरायकें आज || ठोरठोर आनंद बढ्यो अति भलो
बन्योहे साज ॥१॥ द्वादश भूषन साजिकें नवसत करो सिंगार ॥ कज्जलले
करसोंसवे रसआंजत नेन सुढार | अपने अपने झुंडसों निकसीहें व्रजनारि|॥
तजि लाजें बस लाडिली कह्ि गावति मीठी गारि ॥३ ॥ आवत देखे दूरितें
गोपिन नंद कुंवार ॥ हुलस्यो मन बहुप्रेम सों तन बाढ्यो अतिमार ॥७॥
संगसख्रा सब बोलिके उतते आये स्याम ॥ इत तरुनी मधि राधिका कंठघरे
वनदाम ॥५॥ चारथों नेन मिले जबे तब बाढ्यो सरस अनुराग ॥ मानो
नवराजीवके ढिंग पीबत भ्रमर पराग ॥६॥ पंच शब्द बाजे बजें बिच्रबिच बेनु रसाल ॥ सुंदरमुख निरखत सबे ले केसरि मींडत भाल ॥७॥ सुरंग
गुलाल उडायकें अंबर कीनों लाल ॥ मानो आधे सूरके वीररूपे दे ढाल
॥८॥ अतिसुख केलि विलाससों चले जमुनाजल नहान ॥ पहोपन बरखत
देवता हुलसत चढ़े विमान ॥९॥ | Dhanashri |
Betty bhaee bhaan hanji nandke farjand .. hanji wahwa jee | Part1-134 | बेटी भई भान हांजी नंदके फरजंद ॥ हांजी वाहवा जी
वाहवा। किरतको कन्या भई जसोदाके कान्ह हांजी ॥१॥ मिटे दुश्ख दंढ
भयो व्रजके आनंद हांजी । हरद दही दूध घृत रंगे सब ग्वाल हांजी ॥२॥ हम
तो ढाढ़ी ब्रजके तुम ब्रजके सिरदार हांजी । आये नंदराय दान देत लाय लाय
हांजी ॥३॥ नंदराय भानराय जीयो महाराज हांजी । ढांढ़िमांझ जनम जनम
जाचुं व्रजराज हांजी ॥४॥ | Bihaag |
Chandanko bangla atee shobhit bethe tahaan govardhandhari.. | NityaPad-239 | चन्दनको बंगला अति शोभित बेठे तहां गोवरधनधारी॥
शोभित सबे साज चहुं ओरन संगराजत वृषभान दुलारी ॥। १॥
अति सुंदर जारी झरोख्रा अतिही विचित्र बनी चित्रसारी॥
रत्नजटित सारोटा बिराजत श्रीनवनीत प्रीया सुखकारी ॥।२॥
चहूं ओर ब्रजबनिता निरखत रतनजटित नोछावर वारी ॥
परमानंद प्रभुके हित कारन सभग सेज रच रुचिर सवारी ॥ ३।। | Saarang |
Dekho pyaari kunj bihaari mooratibant basant .. | Part3-059 | देखो प्यारी कुंज बिहारी मूरतिबंत बसंत ॥
मोरी तरून तरूुलता तनमें मनसिज रस वरसंत ॥१॥ चलि चूरन कुंतल
अलिमाला मुरली कोकिल नाद ॥ देखत गोपीजन वनराई मदन मुदित उनमाद ॥श। अरून अधर नवपल्लव सोभा विहसन कुसम विकास ॥ फूले
विमल कमलसे लोचन सुचित मन उल्लास ॥३॥ सहज सुवास स्वास
मलयानिल लागत परम सुहाये ॥ श्रीराधा माधवी गदाधर प्रभु परसत
सुखपाये ॥४॥ | Basant |
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