top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Sakhee nandako nandan saanvaro mero chita chor jaayari .. roop anoop | NityaPad-172 | सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी ॥ रूप अनूप
दिखायके सखी गयो है अचानक आयरी ॥।१॥ टेढी चलनि मधुर चंचल गति
टेढे नेन चलायरी ॥ टेढी हीं कछु व्हे रहे हे सखी मधुर बेंन बजायरी ॥२॥। कानन
कुंडल मोर मुकुट छबि सोभा बरनी न जायरी ॥ चतुर्भुज प्रभु प्रानको प्यारो सब
रसिकनको रायरी ॥।३॥। | Bhairav |
Chandan paher naav hari baithe sanga vrishbhan dulari hoe .. | NityaPad-235 | चंदन पहेर नाव हरि बैठे संग वृषभान दुलारी हो ॥
यमुना पुलिम फूल शोभित तहां खेलत लाल बिहारीहो ॥१॥
त्रिविध पवन बहत सुखदायक सीतल मंद सुगंधा हो ॥
कमल प्रकाश कुसुम बहु फूले जहां राजत नंदनंदाहो ॥ २॥
अक्षय तृतीया अक्षय लीला संग राधाका प्यारी हो ॥
करतबिहार सबे सखीसों नंददास बलिहारी हो ॥३॥ | Saarang |
Gwalin tein merrie gendchurai.. khelat aana purry | Part2-235 | ग्वालिन तें मेरी गेंदचुराई॥ खेलत आन परी
पलकापर अंगियां मांझ दुराई ॥१॥ भुज पकरत मेरी अंगियां टटोबत
छवत छतियां पराई ॥ सूरदास मोहि येही अचंबो एक गई इयपाई ॥२ ॥ | Dhanashri |
Nandju houn dhaadhi vrishbhan gopkau laine badhaai ayauju. raavalmein | Part1-122 | नंदजु हों ढाढ़ी वृषभान गोपकौ लेन बधाई आयौजू। रावलमें
मैं सुनी बधाई जसुमतिने सुत जायौ ॥१॥ सुरपति नरपति नागलोकपति भयौ
जु जयजयकार । वरखत कुसुम देवता सब मिल नंदराय दरबार ॥२॥ उदित
भयौ कुल यह चंद्रमा पूरी मनकी आस । जिन जो माँग्यौ सो तुम दीनों भयौ
त्रिभुवन उल्लास ॥३॥ तुम तौ परम उदार नंदजू दीने रतन भंडार । दान
देंनकों अपने मनमें नांहिन करत विचार ||४॥ जाचक भये सब भूष नंदजू
वहोरि न मॉँगत दान । कीरति ओर कहाँ लगि बरनों भयेजु तेरे समान ॥५॥
सतयुग त्रेता दापर कलियुग भयौ न ऐसी दाता । तुमारे जसको पार न पावत तीन
लोक विख्यात्ा ॥६॥ कल्पवृक्ष तिनके घर भीतर कामधेनुसी गैया | जिनकी
कौन चलावै भैया जा घर गोकुलकौ रैया ॥७॥ जन्म जन्मकी आशा मेरी पूँजी
गोकुलके राजा | पायौ दरशन तुमारे सुतकौ मनवॉछित भये काजा ॥<॥
एकवेर रज चरन कमलकी ले धारौ मेरे माथा । क्ृष्णदास वल्लभकुलकौ ढाढ़ी
कीमौ जन्म सनाथा ॥९॥ | Dhanashri |
Atee baney dou madanroop seey birajat useer mahal chhootat fuhaare neeke prem russ | NityaPad-251 | अति बने दोउ मदनरूप से बिराजत उसीर महल छूटत फूहारे नीके प्रेम रस
पुंज ॥ कुसुमन की शब्यारची बिबिध सुगंधखची सहचरी चहुं और सखी सघन
बन कुंज ॥१॥ खासे खसखाने तामें गुलाब नीर बरखत मानों पियप्यारी
हरखत जहां भंवर गुंज ॥ बिबिध फूलवारी फूली मदन मत्त पंग मुलि ब्रजाधीश
मधुपावलि गुंजत गुंज ॥२॥ | Saarang |
Yeh deewaari varas deewaari tumakon nitya nitya aavabo.. | Part2-041 | यह दीवारी वरस दीवारी तुमकों नित्य नित्य आवबो॥
नंदराय नंदरानी यह ढोटा पूजें अति सुख पावो॥१॥
पुजवो मनोरथ सब ब्रजजनके देव पितर पुजावों॥
श्री विद्ुल गिरिधरन संगले गोधन पूजन आबो ॥२ ॥ | Sarang |
Vrindaavan rahasya dhaam 'virahat varr shasama shyam angang kotikam sriradha patrani .. | NityaPad-265 | वृन्दावन रहस्य धाम 'विरहत वर शसामा श्याम अंगअंग कोटिकाम श्रीराधा पटरानी ॥
हसन लसन गृह विलास अधर सधर माधुरी विलोक रहेसि भूलि मंद गति बानी ॥१॥
फूलन की शेज फूलन की हीये हार फूलन के वर शृंगार ॥
फूली अंग न समानी 'फूलन के तने वितान फूल बनी है बात कूलेहे सघन वन मीन काल जानी ॥२॥।
प्यारी जस गह्मो बीन उमड्यो जानो मनशेन कमल नैन चैन पायो रहे शिरहे लखानी ॥
दुलेहेनी दुलहलाल प्रेम प्रीती रुची रसाल अति विचित्र दुती रसाल 'निरखत राजधानी ॥३॥। | Kanharo |
Pratham saneh kathin merrie maaee .. drishtipare | NityaPad-297 | प्रथम सनेह कठिन मेरी माई ॥ दृष्टिपरे
वृषभान नंदिनी अरुझे नयन निरवारे नजाई ॥ १॥। बछरा छोर खिरकमें दीने आपन
झमकत रीझी आई ॥ नोबत वृषभ गई मिल गैयां हँसत सखीकहा दुहत
कम्हाई ॥।२॥ चारों नयन मिले जब सन्मुख नंदनंदनको रुचि उपजाई ॥।
परमानंददास वे नागरी नागरसों ममसा अरुझाई।। ३॥ | Gori |
Sunauri aaj mangal badhaayau haye .. nandmahar ghar raani jasoda | Part1-017 | सुनौरी आज मंगल बधायौ है ॥ नंदमहर घर रानी जसोदा
छोटा जायो है ॥१॥ घोष घोष प्रति गलिन गलिन प्रति आनंद दरसायौ है ।
घरघरते नर-नारी मुदित जुरि जूथन धायो है ॥२॥ ले लै साज समाज सब
ब्रजराजपै आयो है ॥ गावत गीत पुनीत परम रुचि लगत सुहायौ है ॥३॥
धरति साथीये तोरन बॉधति दधि छिरकायौ है ॥ नाचत कूदत करत कुलाहल
मुरज बजायो है ॥४॥ नंदराय सतकार सबनकौ किया मनभायौ है ॥
वेदोगति गोदान द्विजनकौं अनगन थ्ायौ है ॥५॥ गर्ग पराशर अन्वाचार्य मुनि
जातकर्म करायो है ॥ वासुदेव श्रीकृष्ण सुवनकौ नाम धरायौं है ॥६॥
व्रजवासिनके पाँय परत सब शीश नवायौ है ॥ बारंबार निहारि कमलमुख हियौ
सिरायो है ॥७॥ धनि धनि रानी जसोमति तुम व्रज सुबस बसायौ है !बहुत दिनाकी आसा पूरि वांछित फल पायौ है ॥८॥ दिन दिन अधिक अधिक
तिहारे गृह उत्सव आयी है ॥ मनि मानिकके भूषन अंबर जाचक जन लुटायौ
है ॥९॥ हरखे देव सुमन वरषे नभ निशान बजायौ है ॥ परमानंद नंद
नंदनको सुयश सुनायौ है ॥१०॥ | Ramkali |
Aaj sir raajat topi laal | rupanidhan sthaamghan | NityaPad-169 | आज सिर राजत टोपी लाल | रूपनिधान स्थामघन
सुन्दर उर राजत बनमाल॥ १॥ वनतें आवत कमल फिरावत गावत गीत रसाल।
रामदास प्रभुकी छवि निरखत मोह रही व्रजबाल ।। २।। | Hameer Kalyan |
Subhagshungar nirakhmohanko ledarpankar piyahidikhaaven | | NityaPad-156 | सुभगशुंगार निरखमोहनको लेदर्पणकर पियहिदिखावें |
आपनमेकनिहारियेबलजाऊं आजकी छबि कछूकहत न आवें॥ १॥
भूषणवसन रहेफबिठांईठांई अंगअंगछबि चितहिचुरावें॥।
रोमरोमप्रफुल्लित ब्र जसुंदरि फूलन रचिरचि मालबनावें ॥२॥
अंचलवार करत न्योंछाबर तनमन अति अभिलाष बढावें ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरकोस्वरूप सुधापीवतनयनपुट तृप्तिनपावें ॥। ३॥ | Devgandhar |
Aalee hoju akeli albeli kunjan mein phool tou chameli chunvekon | Part1-277 | आली होजु अकेली अलबेली कुंजन में फूल तो चमेली चुनवेकों
जाय जूटीरी । बीच मिले नंदलाल कीनो मोसों ऐसो ख्याल भइरी बेहाल मोत्तीमाल
ले छुटीरी ॥१॥ करन सों करगहे बंगरी फुटीरी कामगेल बनमें लुंदीरी ॥
नंददास प्रभु पिय मिलेरी डगर आये पहले प्रीत हुती अब जाय तुदीरी ॥२॥ | Khamach |
Page 1 of 1
bottom of page
