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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Chaliyaiju nenku kautuk dekhan rachyau haye rasmondal raadhe heen aaee tumhen laine ..
Pustak1-333
चलियैजू नेंकु कौतुक देखन रच्यौ है रासमंडल राधे हीं आई तुम्हें लेन ॥ मृगमद घसि अंग लगाये मुकुट काछनी बनाये मुरली पीतांबर विराजत यह छबि मोपे कही न परै बैन ॥१॥ सब सखी मिलि नायें गावें ताल मृदंग मिलि बजावें नृत्य करें मध्य मूरति मैन ॥ सूरदास मदनमोहन हँसत कहा हो जु पाएँ धारिये जो पै सुख दीयो चाहों नेन ॥२॥
Malav
Maanon yaake babaki cherry .. garidet shank nahin maanat aavat
Part1-244
मानों याके बाबाकी चेरी ॥ गारीदेत शंक नहिं मानत आवत मारग घेरी ॥१॥ छबलग लाज वासकी कीजै कौन गुँसाइन तेरी ॥ परमानंद प्रेम अंतर्गत परसनके मिस हेरी ॥२॥
Saarang
Daan dey rasikani chully que‍yon jaat haye .. sunau tum gwalini
Part1-242
दान दे रसिकनी चली क्‍यों जात है ॥ सुनौ तुम ग्वालिनी आज मेरी बात पियें दधि दूध बिन लालन अघात है ॥१॥ नैननकी सैनन सौं मीन लज्जित भये पहरि तन नीलपट कंचुकी गात है ॥ चरन नूपुर बजे माँग मोतिन सजे भरे जोबन जोर अंग न समात्त है ॥२॥ बैन मुखसों बोल नैंक घूँघट खोल सुनि ग्वालिनी मनहि मुसक्यात है ॥ कुचन अंचल ढॉँक लगी मोतिन पॉति भरे रस कलश दोऊ मदन ललचात है ॥३॥ नेंक रस चाखिहों कुचनके कलशकौ कृपा करि नेंक अब कहा कछु बात है ॥ स्याम सुंदर कह्यो दास कुंभन लह्यो सोंह ब्रजराजकी दान दधि खात है ॥४॥
Saarang
Lalanmukhaki lunai kaisehun varani naan jaaee ...
NityaPad-310
लालनमुखकी लुनाई कैसेहुँ वरनी न जाई ॥। भालतिलक कुंडल अलकबीच बीचचंपकली अरुझाई ।। १.॥ अरुण नयन तरुण मदमाते वरषे करण अधरामृत मंदहासकी जुन्हाई ॥ सुभग कपोल मृदुबोल गोविंदप्रभुके जूअंगअंग सुंदर मणिराई । २॥
Iman
Kahun akele paae preetam leey bethi way gopi god sikhwat chori miss aavogeh ..
NityaPad-074
कहुं अकेले पाए प्रीतम ले बेठी वे गोपी गोद सिखवत चोरी मिस आवोगेह ॥ सांमग्री धरि राखी छिनक पर भावे सो लीजिये यह तुमारी देह ॥ १॥ जनकोऊ ओर छिए यह बडो ताप दिए अकेले ही भोजन करो वरसावो मेह ॥ रसिक प्रीतम हम उराहने के मिस आवेंगी जसुमति के आगे तुम मन में मति दीजो छेह ॥२॥
Todi
Kamalmukh shobhit sunder venu ..| mohan taal bajawat gawat
NityaPad-107
कमलमुख शोभित सुंदर वेनु ॥| मोहन ताल बजावत गावत आवत चारे धेनु ॥ १॥। कुंचित केश सुदेश बदनपर जनु साज्यो अलिसेन ॥ सहि नसकत मुरली मधुपीवत चाहत आपने एन ॥२॥ भृकुटी चारु चापकरलीने भयो सहायकमेन ॥ सूरदासप्रभु अधरसुधा लग उपज्यो कठिनकुचेन ॥॥३॥।
Gori
Gahare curr yaar amal paani ..
Part3-384
गहरे कर यार अमल पानी ॥ चल बरसाने करे मिजमानी ॥ तेरी भांग मिरचकी मैं जानी ॥१॥ तोही करेंगे होरीको रसिया ॥ हम होयेगी तेरी अग॒वानी ॥ पुरुषोत्तम प्रभु की छबि निरखत ॥। तेरे मनकी हमने जानी ॥२॥॥
Hori-Kafi
Podhemai lalan sez sukhakaari ..
NityaPad-126
पोढेमाई ललन सेज सुखकारी ॥ र॒त्नजटित सारोटा बैठी चांपत चरण वृषभान दुलारी || १॥ चरणकमल कुच कलशनपर धरें अंग अंग पुलकित ब्रजनारी।। कर कर बिरी खवावत पियकों मधुरवचन बोलत मनुहारी ॥। २॥। कंठ लगाय भुजदें सिरहानें अधर पान मुखकरत पियारी ॥ रीझउगार देत गोविंदप्रभु सुरत तरंग रंगरह्मों भारी ॥ ३॥।
Bihaag
Aaj subhagdin vasantapanchami jasumati karati badhaai ..
Part3-011
आज सुभगदिन वसंतपंचमी जसुमति करति बधाई ॥ विविध सुंगध उवटिकें लालकों ताते नीर न्हवाई ॥१॥ बांधीपाग बनाय सेतरंग आभूषन पहराई ॥ तनक सीसपर मोर चंद्रिका दिसदाहिनी ढरकाई ॥२॥ ग्रहग्रहतें ब्रजसुंदरि सबमिलि नंदपोरिपे आई ॥ अंबमोरके पुष्पमंजुरी कनिककलश बनाई ॥३॥ चोवाचंदन अगरकुंकुमा केसरि रंग मिलाई ॥ प्रमुदित छिरकत प्रान पियाकों अबीर गुलाल उड़ाई ॥४॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ गावत गीत सुहाई ॥ तन मन धन नोछावरि कीनों आनंद उर न समाई ॥५॥ श्रीगिरिवरधर तुम चिरजीवो भक्तन के सुखदाई ॥ श्रीवललभ पदरज प्रतापतें हरीदास बलिजाई ॥६॥
Basant
Tarani tanaya teer laal gawat baney adhar curr muralika ratna
Part1-328
तरणि तनया तीर लाल गावत बने अधर कर मुरलिका रत्न हाटक खची ॥ तेरे हित रसिक शिर मौर गिरिवरधरन सुनहुँ चरचरी ताल राग सारंग सची ॥१॥ और अद्भुत देख लेत अब घर तान आन आन गति भई भृगभू हैं नची ॥ स्वर सु मिलवत यूथ मधुप मधुपनि मिले तुव मान उघट कित रहत सुंदरि बची ॥२॥ सखी बचनामृत श्रवण पुट पानकर चली नवरंग वर रूप मन्‍्मथ मची ॥ क्रृष्णदास निनादकौ जु वैभव निरख गगन सुरपति सहित सुभग लज्जित सची ॥३॥
Saarang
Tuu dekhi sutaa vashbhaanaki . mriganainni sunder shobhanidhi angang
Part1-192
तू देखि सुता वषभानकी । मृगनैंनी सुंदर शोभानिधि अंगअंग अद्भुत ठानकी ॥१॥ गौर बरन बहु कांति बदन की शरद चंद उनमानकी। विश्व मोहनी बालदशामें कटि केहरि सुबँधानकी ॥२॥ बिधिकी सृष्टि न होई मानों यह बानिक औरे बानकी । चतुर्भुज प्रभु गिरिधर लायक ब्रज प्रगटी जोट समानकी _॥३॥
Saarang
Viharatavan saras basant syaam .. jubtijuth gaaven
Part3-047
विहरतवन सरस बसंत स्याम ॥ जुबतीजूथ गावें लीला अभिराम ॥्रु०॥ मुकलित नूतन सघन तमाल ॥ जाईजुही चंपक मुलाल ॥ पारजातही मंदारमाल || लपटात मत्त मधुकरन जाल ॥ १॥ कुटज कदंब सुदेश ताल ॥ देखिवन रीझे मोहनलाल ॥ अतिकोमल नौतन प्रवाल ॥ कोकिल कल कूजत अतिरसाल ॥२॥ ललित लवंग लता सुवास ॥ केतुकी तरूणी मानों करतहास ॥ इंह विधि लालन करें बिलास ॥ वारनें जायजन गोविंददास ॥३॥
Basant
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