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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Malra mathaa kheechako londa. jebat nand aroo | Part2-236 | मलरा मठा खीचको लोंदा। जेबत नंद अरू
जसुमति प्यारो जिमाबत निरखत कोद॥१ ॥
माखन बरा छाछके लीजे खीच मिलाय संग भोजन कीजे ॥२ ॥
सखन सहित मिल जाबो बनको हे खेल गेंदकी कीजे।
सूरदास अचवन बीरी ले खेलनको चित ॥३ ॥ | Aasawari |
Nekchitechalerilalan sakhee lejugayechitchor . | NityaPad-182 | नेकचितेचलेरीलालन सखी लेजुगयेचितचोर ।
कबकी ठाडी चितवत प्रीतमकोप्रुसकानी मुखमोर ।।१॥
होंदेधिभथनकरत ही भवन में उड्कचले ब्रजराजकिशोर ।
लटपटीपाग केशविलुलित सखी नाजानो कहांतेउठआये भोर ॥२॥
सब निशजागे डगमगत धरतपग खिसखिसपरत पीतपटछोर |
गोविंदप्रभुकी लखीनजातगति ऐसीवह चतुरनागरी कोर ॥।३॥ | Bilawal |
Banaa sir sahero banyo atiniko... | NityaPad-254 | बना सिर सहेरो बन्यो अतिनीको।॥
पीत पिछोरा उर चंदनकी खोर दुल्हेजान ललीको ॥१॥
मंगलजस गावत युवतिजन आरती करत मनहीको ॥
परमानंद यशोदामैया देत बधैयवा सबहीको ॥।२॥
| Saarang |
Chitavani rokehu naan rahee .. syamasundar sindhusanmukh | Part2-357 | चितवनि रोकेहू न रही ॥ स्यामसुंदर सिंधुसन्मुख
सरित उमग वही ॥१ ॥ प्रेमसलिल प्रवाहमोही कबन थाहलई॥ लोल
लहर कटाक्ष घूँघटपट कगार ढई ॥२॥ थके पलकन धीरनावक परत
नाहि गही ॥ मिली सूर समुद्र स्थामहि फिर न उलट वही ॥३ ॥ | Sorat |
Milbo nenanhiko neeko | | NityaPad-318 | मिलबो नेननहीको नीको |
नंदके लाल हमारे जीवन और जगत सब फीको ॥
वेद पुरान भागवत गीता गूढ ज्ञान पोथीको ॥
खाटी छाछ कहा रुचिमाने सूर खबैय ा घी को ॥।
| Bihaag |
Podhe sthaam raadhe sanga .. | NityaPad-346 | पोढे स्थाम राधे संग ॥
सुरंग पलंग सुरंग बिछोना कसना कसे सुरंग ॥१॥
सुरंग सरस रजाड़ नीकी ओढी है दोउ
अंग।॥ रहे हें लपटाय दोउ मिल रसिक निरखत ढंग।।२॥। | Bihagaro |
Kesarison bhijyovano bharchohe gulal .. kahankahun | Part3-024 | केसरिसों भीज्योवाणो भरचोहे गुलाल ॥ कहंकहूं
कृष्णागर सोहेतन मोहे मन अतिही सुंदरवर बने मंदलाल ॥ १॥ सरस फुलेल
अरणजा भीने कच ढरकि रही जो पाग अर्धभाल || जगतराय के प्रभु मुखहितं
बोलछवि उरसि वनी सोहे सुमन माल ॥१२॥ | Basant |
Sumiri munn gopallal sunder atee roop-jaal. mitty haye janjal | NityaPad-171 | सुमिरि मन गोपाललाल सुंदर अति रूप-जाल। मिटि है जंजाल
सकल निरखत सँग गोप - बाल ॥१॥ मोर - मुकुट सीस धरैं बनमाला
सुभग गरैं। सब कौ मन हरें, देखि कुंडल की झलक गाल ॥ २॥ आशभूषन अंग
सोहैं, मोतिनि कौ हार पोहैं। कंठसिरी दृूग मोहै गोपी निरखति निहाल ॥।३॥
“छीत-स्वामी' गोवर्धन - धारी कुंवर मंद सुबन । गांइनि के पाछें-पाछैं
पग धरत हैं लटकीली चाल ॥।४॥। | Bhairav |
Kaba huun way aihein tum bolo merey hoe munn maani . | NityaPad-055 | कब हूं वे ऐहें तुम बोलो मेरे हो मन मानी ।
उनने छल यह कीनो मोसों। अनत जाय रति मानी ॥ १॥
रसिकदास प्रभु हैं बहु नायक।
महाकपट की खानी ॥ २॥ | Pancham |
Aajaskhiri pratasamendadhimathave uthakulai .. | NityaPad-182 | आजसखीरी प्रातसमेंदधिमथवे उठअकुलाई ॥
भरभाजन प्रणिखंभ निकटधरि नेतलियोकरजाई ॥१॥
सुनतशब्दहरितासमीप हँसउठआयेहरुबवाई॥।
मोहीबालविनोदमोद अतिनयनननुृत्य दिखाई।॥। २॥
भूलीतन प्रतिबिंबविलोकत रीझीसहजसुभाई ।।
चितवनचित्तहरेंछबि चंचलचितेरही चितचाई ॥३॥|
माखनपिंडलयोदोऊकर तबग्वालिन रहीमुसकाई ।|
सूरदास प्रभुसर्वस्वको सुखसकेन हृदयसमाई ।।४॥॥ | Bilawal |
Neck yahi lijaiho pyaari merrie baanh .. | NityaPad-335 | नेक यहि लीजैहो प्यारी मेरी बांह ।।
मेरी ओटतू जान मपरिहे लेचलहूं तरुतरुकी छांह ॥ १॥
नीलवसनविधुवदन दुरायो जौलोहिमकर- किरण प्रकटभई नाहिं॥
व्रजपति कुसुमरावटी पोढे निकटही बटसंकेत माहि ॥२॥। | Kanharo |
Jaa dinsant paahune aavat. | NityaPad-369 | जा दिनसंत पाहुने आवत।
तीरथ कोटि स्नान करन फल एसो दर्शन पावत।
प्रफुल्लितबदन रहत निशदिन प्रति चरण कमल चित्त लावत।
मनकर्म वचन ओर नहिजाचत सुमरत ओर सुमरावत्त ।
मिथ्यावाद उपाधि रहित व्हे विमल विमल जसगावत।
सूरदास प्रीतिकर तिनसो हरिकी सुरत करावत। | Kanharo |
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