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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aho hari hamhari tumjite ..
NityaPad-034
अहो हरि हमहारी तुमजीते ।। मागरनटपट देहो हमारे कांपतहै तनसीते ॥१॥ कानन कुंडल मुकुट बिराजत कान्हकुंवरकेहौंवारी ॥ हाहाखातपैयांपरतहो अबहौं चेरितुम्हारी ।|२॥| तब तेरो अंबर देहों री सजनी जलतेंहोयसबन्यारी ॥ सूरदासप्रभु तिहारे मिलनकों तुम जीते हम हारी ॥॥
Ramkali
Nandrani badey bhaag tihaare .. jaaki kookhi bhayau aisee suta
Part1-009
नंदरानी बडे भाग तिहारे ॥ जाकी कूखि भयौ ऐसी सुत जीवन प्रान हमारे ॥१॥ कहा कहूँ या सुखकी बातें उठत चौगुने चाय || सब मिलि हम तुमहीपैं आवति फिरि फिरि पकरत पाय ॥२॥ अपने अपने मन्को चीत्यौ करत सकल व्रजनारी ॥ श्रीविद्ननगिरिधरन लाल पर पानी पीवत वारी ॥३॥
Devgandhar
Poochhat janani kahaan tey aaye | aaj gayo srivallabh key ghar
NityaPad-168
पूछत जननी कहां ते आये | आज गयो श्रीवल्लभ के घर बहोतक लाड लडाये ।।१॥ विविध भांति पट भूषन ले ले सरस सिंगार बनाये। सीस पाग सिरपेच जु बांधे मोरचन्द्रिका लाये ॥ २॥ बहोत भाँति पकवान मिठाई विंजन सरस बनाये। पायस आदि समर्पे मोहि मेरी लीला गाये॥। ३॥ प्रेम सहित वलल्‍लभमुख निरखत और न कछु सुहाये। रसिक प्रीतम जु कहत जननी सों आज अधिक सुख पाये ॥।४॥
Aasawari
Akshayatritiya akshayalila navrang giridhar paherat chandan ..
NityaPad-234
अक्षयतृतीया अक्षयलीला नवरंग गिरिधर पहेरत चन्दन ।। वामभाग वृषभाननंदिनी बिचबिच चित्रकिये नववंदन ॥१॥ तन सुख छींट इजार बर्नीहे पीतउपरना विरह निकंदन ॥ उर उदार वनमाल मल्लिका सुभग पाग युवतिन मनफंदन।॥।२॥ नखशिख रत्न अलंकृत भूषण श्रीवललभमारग जनरंजन ।। कृष्णदासप्रभु गिरिधर नागर लोचन चपल त्नजावत खंजन ॥३॥|
Saarang
Karbalaten hari haari parey | nautan sanga naveen jalad chadhi
Part1-151
करबलतें हरि हारि परे | नौतन संग नवीन जलद चढ़ि मानों दै शशि आनि अरे ॥१॥ तब गिरि कमठ सुरासुर सर्पहिं धरत न मनमें नेंक डरे । तिन भुज भूषण भार परत कर गोपिनके आधार धरे ॥२॥ इंदु बदन मानों मधि काढ़्यों बिहँसत मानों प्रकाश करे । सूरदास गोविंद उदधि में निरखत मुख हूतें न टरे ॥३॥
Bilawal
Sakhee sugandhjal ghorke chandan
NityaPad-239
सखी सुगंधजल घोरके चंदन हरि अंग लगावत।॥ बदनकमल अलकें मधुपनसी टेढी पाग मन भावत॥१॥ कोउ बिंजना कुसुमनके ढोरत कुसुमभूखन लेले पहरावत॥ मृदुबेलि सीयरीतर क्रीडत ब्रजाधीश गुन गावत॥ २॥
Saarang
Arrie yeh kohairi jaahi daan joe daihai govardhanke gwende |
Part1-232
अरी यह कोहैरी जाहि दान जो दैहै गोवर्धनके ग्वेंड़े | खेतन हार न गाम मड़ैया कान्हर डोल; “डरे ॥१॥ बाप देत कर कंसराजाकों पूत जगाती डोलत मेड़े ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर नीके जानति चले जाहु किन पेड़े ॥२॥
Bilawal
Srivrindavan mein yamuna sohe, jinake guna aru sobha nirakhat
NityaPad-013
श्रीवृंदावन में यमुना सोहे, जिनके गुण अरु सोभा निरखत मदनमोहन पिय मोहे ॥ १॥॥ सदा संयोग रहत इनही को हरिरस सो अति पागी, 'रसिक' कहे इनके सुमिरन तें हरिचरणन अनुरागी ॥२।॥।
Bhairav
Praatasmein harinam leejiye anandamangalmein dinn jaay ..
Part1-079
प्रातसमें हरिनाम लीजिये आनंदमंगलमें दिन जाय ॥ चक्रपाणि करूणामय केशव विध्नविनाशन यादवराय ॥१॥ कलिमलहरण तरण भवसागर भक्तचिंतामणि कामधेनु ॥ एसो समर्थ नाम हरीको वंदनीक पावनपद रेनु ॥२॥ शिव विरंचि इंद्रादि देवता मुनिनन करत नामकी आस ॥ भक्‍्तवत्सल हरिनाम कल्पतरू वरदायक परमानंददास ॥३॥
Bibhaas
Daaren thaadhe hain dviv waman .. sunat vachan hiraden sukh upajyo
Part1-217
दारें ठाढ़े हैं द्विव वामन ॥ सुनत वचन हिरदें सुख उपज्यो भयौ कहाँ ते आवन ॥१॥ चरण धोय चरणोदक लीनौ कहौ विप्र मन भावन॥ तीन पैंड धरती हों मार्गों परनकुटी एक छावन ॥२॥ अहो विप्र कहा तुम माँग्यौ बहुत रत्न देहूँ गामन ॥ सूर सुबल हरि सर्वसु लीनों दीयी पीठ पग पावन ॥३॥
Saarang
Jyon jyon nupur baajen tyon tyon dharni dharein poy . bich bich
Part1-163
ज्यों ज्यों नूपुर बाजें त्यों त्यों धरनी धरें पॉय । बिच बिच मनिमय जरायकें राखे पाट पुहाय ॥१॥ दुलरी कंठ दुकानन दुर हीरा ढिंग बनाई । पीतांबरकौ झगा बनायो चौकी पीटि रुराई ॥२॥ किलकि किलकि हँसि कंठ कबहूँ डर लागत लपटाय । सुरनर मुनिजन कौतिक भूले हदे आनंद न समाय ॥३॥ पाछे लागे फिरत मुदित है नंद यशोदा माय । रामदास यह चरन हदे धरि विमल विमल यश गाय ॥४॥
Saarang
Ree kouu shyam sakhee ree saanjhi poojan aave ree .. curr singar
Part1-278
री कोऊ श्याम सखी री सांझी पूजन आवे री ॥ कर सिंगार चोली आभुखन डलियन कमल धरावे ॥१॥ भान भुवन राधाजूके गुन गावत गावत आवे ॥ नागरीया मिल नैन दोऊनके देख देख मन भावे ॥२॥
Jangalo
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