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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Suran kahee surpatike aagein.. sanmukh hott sakuch hamein laagen..1 ..
Part2-088
सुरन कही सुरपतिके आगें॥ सन्मुख होत सकुच हमें लागें॥१ ॥ सकुचत कित सो बात सुनावो॥ नीकें करमोकों समुजाबो ॥२॥ नीकी भांत सुनों सुरराई॥ क्रजमें ब्रह्म प्रकट भये आई॥३॥ तुम जानत जब धरनि पुकारी॥ पापहि पाप भई अतिभारी ॥४॥ पोढे शेष संग श्रीप्यारी॥ ते ब्रज भीतर रहे व धारी ॥५॥ ब्रह्ममकथा कहि आदि पसारी॥ तिनसों तुम अधिकारी ॥६ ॥ सूरदास प्रभु गिरिवरधारी॥ यह सुन इंद्र डर्यो मन भारी ॥७॥
Bilawal
Praat samay uthh sowat sutako badan ughaarat nand .. rahi naan sakey
NityaPad-022
प्रात समय उठ सोवत सुतको बदन उघारत नंद ॥ रहि न सके अतिसे अकुलाने नयन निशाके इन्द ॥१॥ शुभ्र सेज मध्यते मुख निकरे गड़ तिमिर मिट मंद । मनहुं पयोनिधि मथन फेन फट दई दिखाई चंद ॥।२॥ सुनत चकोर सूर उठ धाए सखीजन सखा सुछंद ।। रही न सुधि शरीर अधीर मन पीवत किरन मकरंद ॥३॥
Bibhaas
Chandan mahel mein podhe piya pyaari baat karat mill hasat paraspar ..|
NityaPad-235
चन्दन महेल में पोढे पिय प्यारी बात करत मिल हसत परस्पर ॥| चन्दन सेज संबारी चरच कर चन्दन पंक चहुं दिस छिरकत निरखतनेंन अति आनंद भर ॥१॥ चन्दन पंखा सख्री ढुराबत रूप निहारत अतिही चोंप करि ॥ सुरदास मदन मोहन चन्दनके महल पोढे बारवार तुन तोरत सहचारि ॥ २।।
Adano
Doodh ghiyo munn mohan pyaare ..|
NityaPad-304
दूध घियो मन मोहन प्यारे ॥| बलबल जाऊं गहरु जिन कीजे कमलनयन नयनन केतारे।॥१॥| कनक कटोरा भर पीजे सुख दीजे संग लेहो बलभद्र भैयारे।। परमानंद मोहि गोधनकीसों उठत ही प्रात करुं घैयारे ॥ २।।
Kanharo
Lalki rupmadhuri nayannirakh neck sakhiho mansij manharan
NityaPad-117
लालकी रूपमाधुरी नयननिरख नेक सखीहो मनसिज मनहरन हससांवरों सुकुमार नखशिख अंग उमग सौभाग्य सीमानकीहो ॥|१॥| लटपटी सुरंग पाग ढरकरही वामभाग चंपकली कुटिल अलक बीच बीच रखी ॥ आइयत दृगअरुण दंपति लोलकुंडल मंडित कपोल अधर अरुण दंपतिकी छबि क्योंहूँ नजात लखी ॥।२॥ अद्भुत भुजदंड मूलपीन अंस सानुकूल कनक कपिश दुकूलन शिख दामिनी दरषी | उरपर मंदारहार मुक्ता लखरसुढार मत्तद्विरद गति त्रियनकी देह दशा करषी ॥।३॥ मुकुलितवय नव किशोर वचन रचन चितके चोर मधुरितु पियसाय नूतमंजरी चरखी |। नटबर हरिवंश गान न रागिनी कल्याण तान सदन देख स्व॒रन कल इतेपर मुरलीका वरखी ।।४॥।
Kalyan
Hari sanga hoe hoe hoe horry khelat radha gori ..
Part3-321
हरि संग हो हो हो होरी खेलत राधा गोरी ॥ तरुणी समूह तरणि तनया तट मंडित मोहन जोरी ॥ १॥ नब ऋतुराज समाज सहित बहुरंग लता द्रमफूले || मोर मराल मधुप कोकिल कल कूजत आनंद मूले ॥२॥| बानिक विपिन विलोक युगलवर हर्षित हें हिय मांही ॥ रच्यो खेलन व फाग रसिकवर कल्प तरूवर छांही |।३॥ बाजत वेणु मृदंग चंगमुख चंग अना गततिलावें ॥ नायक निपुण कनक बरणी तरूणा तारी देदे गावें ॥४॥ एक सखी बन वेष स्यामको संग सखा सब सोहें ॥ चेत गीत बहुभांत बेनकल सुनत श्रवण मनमोहें ॥|५॥ अति अद्भुत युगटोल परस्पर बोल वदत मनभाये ॥ कोटि अनंग अंग पावत सुन जेर सग्रंथन गाये ॥६॥ विविध सुंगध अरणजा दुंहुंदिश रंग बढ्यो अति भारी ॥ परम प्रवीण सुघर घातन मोहन बृषभान दुलारी ॥|७॥ रुपे सुभट रणधीर उभयदल छल बल टरत न टारे ॥ छिरकत भरत बचावत विहसत रूप यौवन मदभारे ॥८॥ नयनन सयनन विवश किशोरी लाल गहे भर कोरी || सहचरी गण भरभर पिचकाई हो हो हो कर दोरी ॥९॥ मृगमद साख जवाद कुंकुमा सुभग सीसतें नावे ॥ नायक नाम पलट पिय को प्रभु डांगन वसन बनावे ॥| १ ०॥ मोहि रहे ब्रजराज सांवरे अंग बनी रंगसारी ॥ राजत दीठ बचावत भाजत निजतन निर्खत नारी ॥१ १॥ टेढी पाग पीतपट शोभित ग्रीव गौर भुजदीने ॥ कीरति कुंवर बनी राधापति त्रिय नंद सुत कीने ॥१२॥ ललितादिक सींचत सुख नयनन भूषण पलट बनावे ॥ रीझरीझ तृण तोर मुदित मुख मोर हंसें कछु गावें ॥१३॥ शारद सकुच निरख दंपति सुख वर्णन कों मति थोरी ॥| स्याम निकुंज बिहारिण प्यारी प्रीतम नवल किशोरी ॥१४॥
Kalyan
Aalee ree bharati mohan jita tita mokaun
Part3-126
आली री भरति मोहन जित तित मोकौं गौंहँन लाग्यों डोलै ॥ मॉडति बदन अबीर मुँठी लै औचक आय अन बोले ॥१॥ हों दृष्टि बचाई चलति हट सौं पट गह्डि घुंघट खोले ॥ गिरिधर उर : धरि सब रस लीनों बस. कींनीं बिनु मोलें ॥२॥
Bilawal
Nandkau laal vraj paalane jhoolai | kutil alkawali tilak
Part1-090
नंदकौ लाल ब्रज पालने झूलै | कुटिल अलकावली तिलक गोरोचना चरण अंगुष्ठ मुख किलकि फूल ॥१)॥ नैन अंजनरेख भेख अभिराम सुठि कंठ के हरि किकिनि कटि मूले । नंददासनि नाथ नंदनंदन कुँवर निरखि नागरि देह गेह भूले ॥२॥
Ramkali
Ahoaho shrivrindavipun suhavani aur bansivataki chhaany hoe ..
Part1-251
अहोअहो श्रीवृंदाविपुन सुहावनी और बंसीवटकी छाँय हो ॥ प्यारी राधा दधि लै निकसी कन्हैया रोकी आय हो ॥ वृषभान लड़ैती दान दे ॥१॥ अहो प्यारे सबे सयाने साथके और तुमहूँ सयाने लाल हो ॥ लिख्यो दिखाबौ राबरे कब दान लीयो पशुपाल हो ॥ नँदरायलला घर जान दे ॥२॥ अहो प्यारी लै आये तो लैईंगे और नई न करिहे आज हो ॥ मोहि नित पेहेराय पठावही और बीरा दे व्रजराज हो ॥ वृषभान. ॥३॥ अहो प्यारे देश हमारे बापकौ जाकी बॉह बसे नेंदराय हो || घास रखाई सौंवरे तेरी सुखी चरें जहाँ गाय हो ॥नंद.॥४॥ अहो प्यारी देश तिहारे बापकौं सो तौ सो मैं दीनी साथ हो ॥ सब संकलप्यौ ता दिना जादिन पियरे कीये हाथ हो ॥ वृषभान. ॥५॥ अहो प्यारे यहाँ हम लायो है कहा और कहा भरे हम बैल हो ॥ आड़े है ठाढ़े भये मेरी रोकी महीकी गैल हो ॥ नंदराय.॥।६॥ प्यारी अँग अँग रूप सोहावनी और भरे हैं रतन बहु भाव हो ॥ जावक लेख्यौ पारख्यौ तुम निकसी गरियारे आय हो ॥वृषभान.॥७॥ अहो प्यारे कहाँ दुँदुभी घंटा बजें और को नायक यहाँ आय हो ॥ कहाँ लौं उत्तर देउगे तुम मुख ललिताके चाय हो ॥नैंदराय. ॥८॥ अहो प्यारी नूपुर किंकिनी बीछिया और घंटा धुनि नाना भाय हो ॥ नायक रूप लदेनियाँ सो जोबन लादें जाय हो ॥वृषभान.॥९॥ प्यारे इहाँ हैं हॉकन कौं कहा तुम कहत बनाय बनाय हो || यह उत्तर कहाँ लौं देठगे तुम हो दानीनके राय हो ॥नंदराय.॥१०|| अहो प्यारी हम हैं हाकिम गायके तुम छलबल निकसी आय हो ॥ भैया सुबल सयानो साथको या बनको बटतौ खाय हो ।॥वृषभान. ॥११॥ अहो प्यारे गुजराती डॉकोतीया सो लेत ग्रहन में दान हो ॥ जो उनमेंके हौ सावरे वृषभान बाबा राखें मान हो ॥नैंदराय.॥॥१ २॥ अहो प्यारी जनम जनमकी हों कहा कहूँ तुम सुनो सुबल सब साथ हो ॥ अशुभ लछिन ते शुभ करों तुम नेंकु दिखावी हाथ हो ॥ वृषभान. ॥१३॥ अहो प्यारे नव ग्रह कहीये दानके जाकी विधि जानें प्यौसार हो ॥ एक सोनों संक्रांततों और ऊँट भरे ननसार हो ॥नैंदराय.॥१४॥ प्यारी हों दानी बहु भाँतिकौ और जो कोई दानजु देय हो ॥ जोई जोई विधि करि देउँगी सोई सोई विधि करि लेय हो ॥ वृषभान. ॥१५॥ प्यारे ततोई तनकारे भये और लै लै ऐसौ दान हो ॥ क्यों छूटौगे भारतें काहू तीरथहू नहीं नहात हो ।नेंदराय.॥१६॥ प्यारी गौरज गंगा न्हात हों और जपत गायन कौ नॉँऊ हो ॥ परम पुनीत सदा रहों कछु लेत नहीं सकुचाँउ हो ॥बृषभान.॥१७॥ अहो प्यारे दानलै दानलै लाड़िले कछु गाय बजाय रिझाय हो ॥ जैसी विधि हम देखिहें और तैसौई देहि मैंगाय हो ॥नंदराय.॥१८॥ प्यारी नट है नाच्यो साँवरी और विरद पढ़े जैसें भाट हो ॥ महूवरि में हेरी दई अरू मेंटि कुँवर मेरी नॉटहो ॥वृषभान.॥१९॥ प्यारे एक सखी दग चोरिकें और जोरि दई दृढ़ गॉठि हो ॥ दंपति रति पेहेचॉनिके और गये मनमथ दल नॉटि हो ॥ नंदराय.)२०)| प्यारी वे सखीयनमेंकों चली वे तो चले हैं सखनकी ओर हो॥ पट दोउ छबिके छटा तन रहे हैं छबीले छोर हो ॥ वृषभान.॥२१॥ प्यारे घूँघट में अति झलमले और अति आवेसी नैन हो ॥ मुरि चितए त्योंही रहे थकि रहे रसीले बैन हो ॥नेंदराय.॥२२॥ प्यारी को लकुटी आड़ी करै और कौन कहि सके बात हो ॥ रसही रस बस है गये और सुफल भये सब गात हो ॥ वृषभान.॥२३॥ प्यारे युवती अनेक सुहावनी और अति रस बढ़यौ बिहार हो ॥ चतुरन मन दोऊ मिले और दास बली बलिहार हो ॥नेंदराय.॥२४॥
Gori
Tum pahilen tou dekho aaya maniniki shobha laal paachhento
NityaPad-121
तुम पहिलें तो देखो आय मानिनीकी शोभा लाल पाछेंतो मनायलीजें प्यारेहो गोविंदा।। करपर धरकपोल रहीरी नयननमूद कमलविछाय मानों सोयो सूखचंदा ।। १॥ रिसभरी भ्रोंह तापर भ्रमर बेठे अरबरात इंदु तर आयो मकरंद अरविंदा ॥ नंददासप्रभु एसी काहेंकुं रुसैये बल जाको मुखदेखेते मिटत दुःखद्वंदा ॥ २॥
Udaano
Sakal kalaa praveen arrie ehaan vrindavan rung .. sarigampathani
Part1-331
सकल कला प्रवीन एरी एहाँ वृंदावन रंग ॥ सारीगमपथनी अलाप करत रस उपजत तान त्तरंग ॥१॥ निर्तत गत जत लेत ग्रग्रततत किटधिमकधिलांग थोंग बाजत मृदंग ॥ गोविंदप्रभुके जु अंग अंग पर वारों कोटि अनंग. ॥२॥
Saarang
Sundari hoe hoe horry rangbhari khelai rasik rasikani
Part3-260
सुंदरी हो हो होरी रंगभरी खेलै रसिक रसिकनी फाग ॥ सुंदरी एकु तें एकु सुंदर बनीं फूल्यौ कुसुमन मानौं बाग ॥१॥ बागौ धरायै श्री अंग लटकति सीसें पांग ॥ केसर छिरके वललभ पिय प्रगट करति अनुराग ।। २॥ अरगजा भरि-भरि पिचकाई चलावैं परम पराग ॥ अबीर उड़ाबै रंग भरे खिलाबैं महा बड़भाग ॥३॥ सब मिलि बाजे बजाव हीं धमार गाबैं बहु राग ॥ खेलैं गोकुल में समाज सौं पूरे भागन जाम ॥४७॥ यह बिधि खेलैं परसपर पूरन प्रगट्यौ सुहाग ॥ “वल्लभ दास” सुख निरखैं ही चरन कमल चित लाग ॥५॥
Sarang
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