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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Srivallabh sukhakaari..
Part2-275
श्रीवललभ सुखकारी॥ पुरुषोत्तम लीला अवतारी ॥ काल अकाल तें न्यारे ॥ रसनिधि प्रेम भक्ति प्रतिपारे ॥छंद॥ प्रेम भक्ति पृष्टिमर्याद सीमा श्रवण कीर्तन स्मरणा॥ युगल चरण सेवानित्य अर्चन िनुक र्वेक बंदना॥ दासत्व सख्य सदा निवेदन अखिल आनंद धारी॥ गोविंद प्रभु गिरिराज उद्धरण श्रीवल्लभ सुखकारी ॥१॥ युगल रसिक शिरमोरें ॥ नवनागर नृप नंद किशोरें ॥ बेद परम रुचिराजें ॥। गिरिधर टहल महल बिचसाजें ॥छंद ॥॥ साजेंजु टहल महल निरंतर नृपति निजजन कारणें॥ शृंगार भोजन सुभग शय्या ललित गिरिवर थारणें॥ गुण गान नृत्य सुतान मानो अंग सामल गोरें॥ गोर्विदप्रभु गिरिराज उद्धरण युगल रसिक शिरमोरें॥२॥ गुणनिधि श्रीगिरिधारी | पूरण पुरुषोत्तम भक्त हितकारी॥ करुणा किये पति परम उदार॥ अवलोकित श्रीवल्लभराय रघुपति श्रीयदुपति सामलघन॥ गोविंदप्रभु गिरिराज उद्धरण गुणनिधि श्रीगिरिधरण॥३॥ ताहि. शरण जे जीवआवबे॥ गोकुलपतिकों अतिहीभावे ॥ निर्भवकर शिरथधारे ॥ चित्रगुप्त निज कागदफारे ॥छंद ॥ चित्रगुप्त कागद फारडारें डरप धारेताहिकें ॥ सुछंद निजजन नित्यमुदितमन नेकडरहि न काहिकें ॥ निजजन प्रति प्रीति निशदिन रास रसिकही भावे॥ गोर्विदप्रभु गिरिराज उद्धरण ताई शरण जे जीव आवे ॥४ ॥
Bilawal
Seetal khaskhaanau atee hii suhaanon maanon .. maanon hemant ritu
NityaPad-249
सीतल खसखानौ अति ही सुहानों मानों ॥ मानों हेमंत ऋतु गेह रूप धरे आय ता मधि बेठें बालकृष्ण सारंग मधुरे धुनि बीन सरस राग रंग बरसानों ॥१॥ छूटत फुहारे नाना बिथि हौद भरे भारे चादरन की धुनि चहूं औरनों ॥ निरतत मोर कोकिला सोर दामिनि सी प्यारी घनस्याम संग रंग भरी सावन सौं सुख सरसानों ॥२॥
Saarang
Bhor bhaye bhogi russ vilas bhayo thaado ..
Part2-233
भोर भये भोगी रस विलस भयो ठाडो ।। जागे जामनी जणाय भामिनी अंग अंग समाय स्वास शिथिल निडर देत आलिंगन गाढो ।। १।। घूमत रसमत्त गमन बह न डग परत बचन पगन छिनुं छिनुं चित चोप मोजन मांनो बाढो ।। अति रसभरे रसिक राय शोभा बरनी न जाय बलिबलि बिहारी नंददास प्रेम रंग काढो ॥। २।।
Bhairav
Palana jhoolat balgopal . gaadi baithi jhulaavat jasumati
Part1-101
पलना झूलत बालगोपाल । गादी बैठि झुलावत जसुमति अति प्रफुलित देखत व्रजबाल ॥१॥ कबहुँक रोहिनी गोद लेइकें बोले हो हो बलिहारीलाल । कबहुँक कनियाँ लेत गोपिका झुनझुना फिर लावत ख्याल ॥२॥ यह सुख नंदभुवनकौ वैभव गुप्त प्रकट ततकाल | गुन सरूप सम दारकेस प्रभु परम तत्व जे जसोदाबाल ॥३॥
Bilawal
Arihaun shyam mohini ghaali .. abahi gaee jalbharan
NityaPad-269
अरीहौं श्याम मोहिनी घाली ॥ अबही गई जलभरन अकेली नंदनंदन चितवन उरसाली ॥१॥ कहारी कहों कछु कहत न आवबे लगी मरमकी भाली ॥ सूरदासप्रभु मनहरलीनो विवशभई हौोंआली ॥२॥
Bilawal
Aaj grah nandmaharken badhaai .. praatasmain mohan mukh nirakhat
Part1-003
आज ग्रह नंदमहरकें बधाई ॥ प्रातसमैं मोहन मुख निरखत कोटि चंद छबि छाई ॥१॥ मिलि व्रजनारी मंगल गावत नंदभवन में आईं ॥ देत असीस जीयौ जसुमतिसुत कोटिक बरस कन्हाई ॥२॥ नित आनंद बढ़त वृन्दावन उपमा कहीं न जाई ॥ सूरदास धन्य धन्य नंदरानी देखत नैन सिराई ॥३॥
Devgandhar
Jembat mohanvarki chhaiyaan dupahareeki biriyaan .. mathat dohni
NityaPad-207
जेंबत मोहनवरकी छैयां दुपहरीकी बिरियां ॥ मथत दोहनी दूध एक बांटत फल चबेना एक झगरि लेत अपनी अपनी कामरके आसनियां॥ १॥ रससों बेनु बजाबे गावे सारग॑ राग तान रंग लेत मोर मुकटु सीस दीने ॥ 'रामदास' ग्वालबाल मंडल मधि बार बार वारत है सकल मिलि पहोपन दल बीने ॥२॥
Saarang
Udat bandan navabir bahu kumkuma khelat vasant
Part3-054
उडत बंदन नवअबीर बहु कुमकुमा खेलत वसंत बन लाल गिरिवरधरन ॥ मंडित सुअंग सोभा श्याम सोभित ललन मानो मनमथ बान साजि आये लरन ॥ १॥ तरणि तनया तीर रमनीक वनद्गुम लता कुसुम मुकलित सुनाना वरन ॥ मधुर सुर मधुप गुंजार करें पिक शब्द रस लुब्ध लागे दशों दिश कुलाहल करन ॥२॥ आईं वनिवनि सकल घोखकी सुंदरी पहरि तन कनिक नवचीरपट आभरन ॥ मधुर सुर गीत गावें सुधर नागरी चारु निर्तत मुदित कुनित नूपुर चरन ॥३॥ बदन पंकज अधर बिंब शोभित चार झललकत कपोल अति चपल कुंडल करन ॥ दास कुमननिनाथ हरिदास वर्यधर नंदनंदन कुंवर युवतिजन मनहरन ॥४॥
Basant
Hari yeh kaun ritithati ..
NityaPad-366
हरि यह कौन रीतिठटी ॥ दासद॒ुःखी सुखहोत विमुखन बडीलाज घटी ॥१॥ वेदपंथ श्रीभागवतकी बांधी मेंड कटी ॥ देख यह विधि सबन की मति भजनतें उचटी ॥२॥ करकुसंग सुसंग जाके विषयजायघटी || कुमति पावस कूपजलतें आवबतें उबटी ॥३॥ करणवारे कहा भूमी जातगतिनहटी॥| कहा फलकी चीठी सबकी एकहीबेर फटी ॥।४॥ चरणपर जे शहत तिनकी होत मति उलटी ॥ कहा गीता भागवतमें कही बात नटी ॥५॥। हमारी यहवेर मनसा दानहूंतें हटी ॥ रसिक कहि-कहि जीभ तुमसो छुलत छुलत छटी॥६।॥
Kedaro
Sunder shyam paalnen jhoolen . jasumati maay nikat atee baithi
Part1-096
सुंदर श्याम पालनें झूलें । जसुमति माय निकट अति बैठि निरखि निरखि मन फूलें ॥१॥ झुनझुना लैकें बजावत रुचिसों लालहिंके अनुकूलें। देखि हँसत किलकत मनमोहन देहदशा तब भूलें ॥२॥ बदन चारु पर छूटि अलक रहीं देखी मिटत उर सुलें। अंबुजपर मानहुँ अलि छोनाँ घिरि आये बहु टूलें ॥३॥ दसन दोऊ उघरत जब हरिके कहा कहूँ समतूलें । नंददास घन में ज्यों दामिनी चमकि डुरत कछु खूलें ॥४॥
Ramkali
Laalan manaayo namanat ladili pyaari tihari atishay kopbhari ..
NityaPad-322
लालन मनायो नमानत लाडिली प्यारी तिहारी अतिशय कोपभरी ॥ तुम्हारीसों अनेक यत्न छलबल सबकिये मानतो अब घटत नाहिन त्योत्यों अतिरिस होतहै खरी ॥। १॥। साम दाम भेददंड एकोनहीं चिनचुभत तापरहौं पायपरी दंततृणधरी ।॥॥ नाहिन कछू और उपाब आनबन्यो यह दाव गोविंदप्रभु आपुन चलिये तुमदेखतही वाको मानछूट जैहें तिंहिंघरी ॥२।।
Nayaki
Bunn phoole dram kokila bollie madhoop jhankaaran
Part3-062
बन फूले द्रम कोकिला बोली मधूप झँकारन लाभे ॥ सुन भयों सोर रोर बंदीजन मदन महीपति जागे ॥१॥ तिनहु दिनें अंकुर पल्‍लव जे द्वुम पेलैं लागे || मानौ रति पति रिझ जाचकन बरन बरन दिये बागे ॥२॥ नए पात नई लता पोहप नए नए रस पाणे ॥ नवल केलि विलसति मोहन सँग 'सूर” रंग नए अनुरागे ॥३॥
Basant
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