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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Gawat giridharan sanga param mudit raas rung oorap tirap lait taana | Part1-343 | गावत गिरिधरन संग परम मुदित रास रंग ऊरप तिरप लेत तान
नागर नागरी ॥ सारीगमपधनी ऊघटत गति सप्त सुरन लेत लाग डाट सुलप अति
उजागरी ॥१॥ चर्बित तांबूल देत ध्रुवताल गतिहीं लेत गिडगिडता थुंगथुंग
अलाग लोग री ॥ सुरति केलि रति बिलास बलि बलि बलि कुंभनदास आनंद
नंदन राधावर सुहाग री ॥२॥ | Iman |
Thaadhi gopi nipat sayani laai chhaak bhalee | NityaPad-219 | ठाढी गोपी निपट सयानी लाइ छाक भली
बीरियां ॥ भूख लागी अब ही देखत री चढि कदम की डरीयाँ ॥।१॥ बैठी पार
आइ हों कब की आई नाव यह घरीयां ॥ दीजे बांट छाक घर घर की जब झारी
भर धरीयां ॥२॥ ग्वाल सखा सब कहत स्याम सों जेवो पायन परीयां ॥ छीत
स्वामी गिरिधरन श्री विड्डल बहुत निहोर करीयां ॥३ | Saarang |
Karo kaleu kanhar pyaare .. terat gwal baal sub thaade aaye | NityaPad-028 | करो कलेऊ कान्हर प्यारे ॥ टेरत ग्वाल बाल सब ठाडे आये
कबके होत सवारे ॥१॥ मांखन रोटी दियो हाथ पर बल जाऊं हों खाओ
ललारे॥ खेलो जाय ब्रजहीके भीतर दूर कहूंजिन जाओं बारे ॥२॥ टेर उठे
बलराम स्यामकों आवहु जांय धेनु वनचारें ॥ सूरस्थाम कर जोर मातासों गाय
चरावन करत हाहारें ॥३॥ | Bibhaas |
Baal vinod kharey jiya bhawat | mukh pratibimb pakribe | Part1-150 | बाल विनोद खरे जिय भावत | मुख प्रतिबिंब पकरिबे
को हरि हुलसि घुटुरुबन धावत ॥१॥ कमलनैन माखनके कारन करि करि सैन
बतावत । शब्द जोरि बोल्यो चाहत मुख प्रगट बचन नहीं आवत ॥२॥ कोटि
ब्रह्मांड खंडकी महिमा शिशुता माँहि दुरावत । परमानंद स्वामी मनमोहन जसुमति
प्रीति बढ़ावत ॥३॥ | Bilawal |
Rung bheenin horry hoe khelaungi shyam saun .. chova | Part3-224 | रंग भीनीं होरी हो खेलौंगी श्याम सौं ॥ चोवा
चंदन औरू अरगजा छिरकौंगी बिसराम सौं ॥|१॥ हों तौ पियारे कौ न््यारौ
न करि हों राखौंगी आदर मान सौं ॥ कृष्ण जीबन लछीराम' कें प्रभु
सौं मेरो काम जु अपने राम सौं ॥२॥ | Kafi |
Peet pichhori kahanjo bisari | NityaPad-279 | पीत पीछोरी कहांजो बिसारी
ये तो लाल ढिंगनकी ओढेहे 'काहुकी सारी ॥१॥
हों वाहि घाट पिवावत गैया जहां भरत पनिहारी ॥
भीरभई मैया सब बिडरी मुरली भली जो संवारी ॥२॥
हों ले भज्यो और काहुकी वे ले गई जो हमारी ॥
परमानंद बलबल बतियनपर तन तोरत महतारी ॥३॥। | Saarang |
Vrindavan kreedati nand nandan sanga brashbhan dulari .. | Part3-070 | वृंदावन क्रीडति नंद नंदन संग ब्रषभान दुलारी ॥
प्रफुलित कुसुम कुंज द्रम वेली कोकिल कूजति मधुप गुँजारी ॥१॥ चोबा
चन्दन अगर कुँमकुमा मृगमद केसरि सुगंध संवारी ॥ अति आनंद परसपर
छिरकति हाथन लै कनक पिचकारी ॥|२॥ बाजति ताल मृदंग झांझ ढफ
बीन रबाब मुरली धुनि प्यारी ॥ अबीर गुलाल उडावति गावति नॉँचति
हंसति दै दै कर तारी ॥ ३॥। चिरजीयौों सकल सुखदाइक लाल गोवरधनधारी ॥
श्रीबल्लभ पदरज प्रताप तें “हरिदास' बलिहारी ॥४॥
| Basant |
Haa haa leho aeka core .. bahut bair bhaihe dekho merrie or ..1.. | NityaPad-027 | हा हा लेहो एक कोर ॥ बहुत बेर भईहे देखो मेरी ओर ।।१॥
मेल मिश्रीदूध ओटबो पीयो व्हेहे जोर ।। अबहो खेलन टेरहें तेरे गवाल भयो
भोर॥२॥ जागे पंछी द्रुम द्रुम सुन प्रातकरन लगे सोर॥ खेलवेकों उठ भाजोगो
मान मेरो निहोर ॥३॥ लेहूँ ललन बलाय तिहारी छोर अंचल ओर ॥ बदन चंद
विलोक सीतल होत हृदय मोर ॥।४॥ बैठ जननी गोद जेंबन लागे गोविंद थोर ॥
रसिक बालक सहज लीला करत माखनचोर ।॥।५।। | Bhairav |
Bhaee vrishbhaanken sutaa | ruparasi anga anga madhuri maanon kanak | Part1-187 | भई वृषभानकें सुता | रूपरासि अंग अंग माधुरी मानों कनक
लता ॥१॥ सब अंग निपुन बनी अति मृदु छबि कंचनहूते गोरी । आसकरन
वब्रजराज नंदसु त बनी अनूपम जोरी ॥२॥ | Saarang |
Uttar naan deit mohani maun dhara baithi piyavachan sunat nekhu naan | NityaPad-122 | उत्तर न देत मोहनी मौन धर बैठी पियवचन सुनत नेकहु न
मटकी ॥ तूं कब चलेंगी आली रजनी गईरी सब शशिवाहन धरनी
धुकलटकी ॥१॥ घरेंरी पाणिकपोलन में करेंकलोल भुव नखलिखत तेरे कहा
जात घटकी ॥ मुग्धवधु रीस काहेको करत हठ परम भामती तू नागरनटकी ।।२॥
धुवसमान फिर आयेरी सप्तरिषि अबही वारहेंतमचोररटकी ॥ मानदासबल
राधिका कुंवरी चल नीकी शोभा लागे तेरे नीलांबर पटकी ॥।३॥। | Kedaro |
Manmohan sanga lalana viharat basant saras rituaai .. | Part3-015 | मनमोहन संग ललना विहरत बसंत सरस ऋतुआई ॥
लेलेछरी कुंवरि राधिका कमलनेन पैंधाई ॥ १॥
द्वादसवन रतनारे देखियत चहुंदिस केसू फूले ॥
मोरेअंव ओर द्वुमवेली मधुकर परिमल भूले ॥२॥
सिसिर क़तुमें अति गयो सीत सब रविउत्तर दिस आयो ॥
प्रेम उमगि कोकिला बोली विरहनि विरह॒ज गायो ॥३॥
ताल मृदंग बांसुरी वीना डफ गावत मधुरी वानी ॥
देत परस्पर गारि मुद्धित न्हे तरुनीबालसयानी ॥४॥
सुरपुर नरपुर नागलोक जलथलक्रीडा रस पाबे ॥
प्रथमवसंत पंचमी लीला सूरदास गुनगावे ॥५॥ | Basant |
Mein janiju jahaan rati maani tum aayeho laalan jaba chiraiyan | NityaPad-045 | में जानीजु जहां रति मानी तुम आयेहो लालन जब चिरैयां
चुहचुहानी ॥ मुखकी बात कहा कहिये ठानी बात नहीं पहचानी ।।१॥
एते पर अखियां रसमसानी और पगिया शिधिलानी ॥
भाल यावक दृग अधरनअंजन देखियत प्रकट निसानी ॥२॥
डगमगीचाल मरगजीमाल अंगचिन्ह उबटानी ॥
सूरदासप्रभु गुणनिधानहो अंतरगतकी में जानी ॥३॥ | Lalit |
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