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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Atee vichitra phoolanaki chaukhandi baith jahaan rasik giridhari ...
NityaPad-256
अति विचित्र फूलनकी चौखंडी बैठ जहां रसिक गिरिधारी ॥। रायवेलि मालती माधवी चंपक बकुल गुलाब निवारी॥|१॥ जाई जुई केवरो केतकी सौरभ सरस परम रुचिकारी ॥ पाटल जुई सेवती मल्ली बोरसरी रचि रुचिर संवारी ॥२॥ नवरसरंग परस्पर उपजत बनी संग राधासुकुमारी | चतुर्भुददास कुसुम शैयापर करत बिलास दोऊ पियप्यारी ॥३॥
Lalidya
Arrie tum kaun hauri phulwa beanon haaree ..
Part1-277
अरी तुम कौन हौरी फुलवा बीनन हारी ॥ नेहलगन कौ बन्यौ बगीचा फूल रही फुलवारी ॥१॥ मदनमोहन पीय यों बूझत हैं तू कोहै सुकुमारी ॥ ललिता बोली लालसों यह वृषभान दुलारी ॥२॥ या बनमें हम सदा बसतहैं हमही करत रखवारी || बिन बूझें तुम ५,लवा बीनत जोबन मद मतवारी ॥३॥ ललित बचन सुन लालके सब रीझ रहीं व्रजनारी ॥ सूरदास प्रभु रस बस कीनी बिरह बेदना टठारी ॥४॥
Jangalo
Janmi shrivrishbhan dulari . bhaadon maas sukhad shubh mangal aathe
Part1-192
जन्मी श्रीवृषभान दुलारी । भादों मास सुखद शुभ मंगल आठे सुदि उजियारी ॥!१॥ प्रीति रीति जननी तनयाकी सुधानिधि बदन निहारी । रूप अवधि सुंदरता सीमा मानों साँचे ठारी ॥२) बरनि न सके सकल अंग शोभा निरखि शारदा हारी । तीन लोक छबि या तन ऊपर बारि फेरि सब डारी ॥३॥ प्रेम मुदित अति अति आतुर है धाई सब व्रजनारी । ऑगन भवन भीर कामिनिकी गाबत सब सुकुमारी ॥४॥ जसुमति सुनि अवतार कुँवरिको मन आनंद बढ़योौ अति भारी । पट नौछावरि बहु विधि कीनी मोती रतन भरि थारी ॥५॥ विधि अति निपुण सुकृत माखनसी अपने हाथ सँभारी । गोकुल प्रभु गोपाललालकी दै हैं प्राणन प्यारी ॥६॥
Saarang
Mathaniyan aana utaar dharee | daan atapati maungat dhota duhuun
Part1-219
मथनियाँ आन उतार धरी | दान अटपटी मौँगत ढोटा दुहूँ करजोर खरी ॥१॥ जब नँदलाल चीर गहि झटक्यौ मनमें बहुत डरी | कुंभनदास प्रभु दधि बेचनकी बिरियाँ जात ठरी ॥२॥
Devgandhaar
Doll jhulat hain giridharan jhulaavat baalaa .. nirakh
Part3-365
डोल झुलत हैं गिरिधरन झुलावत बाला ॥ निरख निरख फूलत ललितादिक श्रीराधावर नंदलाला ॥१।॥ चोवा चंदन छिरकत भामिनि उडत अबीर गुलाला ॥ कमल नयन को पान खवाबत पहरावत उरमाला ॥२॥ वाजत ताल मृदंग अधोटी कूजत वेणु रसाला ॥ नेंददास युवती मिल गावत रिझवत श्रीगोपाला ॥३॥
Hameer
Krishna ekadashi aru guruwar .. srivallabh
Part2-282
कृष्ण एकादशी अरु गुरुवार ॥ श्रीवल्लभ प्रभु प्रकट भये। भक्त जननके मनोरथ साथे॥ देखत तनके ताप गये ॥ढाल॥ गये त्रिविध ताप भये सब भक्त जगत शिरोमणी॥ श्रीनाथजीकी कृपा दृष्टितें प्रगण भये श्रीवललभ मणी॥ कलिके जीव उद्धारन कारन चिता धरी भूतल आय कें ॥ कृष्णदासके प्रभु प्रगट भये कृपावलोकन पायकें ॥१ ॥ लग्न महूरत माधोमासे॥ शुभदिन सत श्रीवल्लभ प्रकाशे॥ पुरुषोत्तम अवतार मनोहर ॥ उदयो कोटि किरनले दिवाकर ॥ढाल॥ कोटि आए भानु अलौकिक शोभा कही न परे रावरे ॥ सनकादिक शुक शिव शेष नारद शारद बरन भये बावरे ॥ निगम आगम कोऊ पार न पावे नेति नेति कही गावहीं॥ कृष्णदासके प्रभु प्रकट भये जाकुं मुनीश्वर ध्यावहीं ॥२ ॥ श्रीवल्लभ नाम लेत हें जेजन ॥ पावन होतहें देवीनके मन॥ प्रकट भये भूतलपर श्रीवललभ ॥ खंडन कियो मायामत सुल्लभ ॥ढाल ॥ कीयो खंडन सबही सुलभकर दैवीनके कारज सरे।॥ तैलंगकुल दीपक बिराजत त्रिभुबनमणि दिवाकरे। शोभा शिरोमणि प्रकट पुरुष प्रमाण भूतल आबीया॥ कृष्णदासके प्रभु आयप्रगटे ब्रजसुंदरी मन भावीया ॥३ ॥ भूतल वल्‍्लभ प्रगटे महाराज ॥ शिवविरंचि बंदित चरन रज॥ पार न पावत करत वेदधुनि॥ बशगावत त्रिभुवनमें सहामुनि। नि॥ ढाल |! मुनीराज गावत यश अनूपम रूप बरनत न आवहीं॥ जेही नेति कही निरंतर गावत ध्यान कबहुंक पावहीं॥ पाणि जोरत देव मुनिजन तिहूलोक दुंढुभी बाजहीं॥ कृष्णदासके प्रभु आय प्रगटे देवी जीवन शिर गाजहीं ॥४ ॥
Bilawal
Pragatyau rituraj, laaj chhaandi sakal saaj samaaj
Part3-271
प्रगट्यौ ऋतुराज, लाज छाँड़ि सकल साज समाज गोपिका गोविंद सँग स्ब्रेलति ब्रज होरी ॥ वे गुन सब एकु सारि नौंतन कीने सिंगारि मधि गौर स्याम सुभग सरस बनी जोरी ॥१॥ बाजत बीना उपंग बाँसुरी सुर बीन चंग मिलवत-धुनि संग-संग मुरली धुनि थोरी ॥ लेति उरप तिरप मान, सुलफ सुगति सौं बंधान, निरतति पिय सँग सुजान, गुन निधान मोरी ॥२॥ गावति अति सरस गान, राग रागिनी सुतान, मोहन नागर सौं मिलि मुद्दित मन किसोरी ॥ आलिंगन चुंबन हँसि, झकझोरति दोऊ बिबसि, निरखति सुख सस्वी सकल, प्रेम-सरस बोरी ॥३॥ छिरकत कुँमकुमा रंग, चोवा चंदन सु अंग, डारत बंदन अबीर गुलालन भरि झोरी ॥ भए द्योस अति सुगंध मधुप गुंज प्रेम पुंज लंपट रस प्रेम लुब्ध भ्रमति गोकुल की खोरी ॥४॥ बाढ़चौ अनुराग फाग, खेलति सब ब्रज सुहाग, उमडयौ सुख-सागर पथ आरज महि थोरी ॥ लीला रस मणन झेलि, अखिल केलि रंग रेलि, वर विलास “नंददास' हिय मैं रहो री ॥५॥
Nat
Preetamako kachhu dosh nahiri yeh tou sheet berry hamaro ..
Part3-006
प्रीतमको कछु दोष नहिरि यह तो शीत बेरी हमारो ॥ प्रीतमको मगर जोवन कारण राखन नहहि देत बदन उघारो॥१॥ शीतल पवन अकेली जानके पठक्‍त आलस करन संघारो ॥ ब्रतको तजी आक्रत निंद्रासों मिलि ठगत रे ठगारो ॥२॥ कहुंगी जनाय जाथ आज मिले मोह प्रीतम प्यारो ॥ चतन्रभुज प्रभु नेह ट्रोली जाड़ेकी कीजे मुंह कारो ॥ ३॥।
Malkoos
Palana jhoolat balgopal . bali gaee inn badan oopar chaaru
Part1-095
पलना झूलत बालगोपाल । बलि गई इन बदन ऊपर चारु “मैन बिसाल ॥१॥ कंठ हँसुली उरही बघना बनी मोतिन माल । करही पौहोंची अतिहि सुंदर जटित हीरा लाल ॥२॥ कुटिल केश सिर बिराजत लटकि आई भाल । मनहुँ अलिछोंना कमल पर निरखि मोहि बाल ॥३॥ चरन नूपुर कोंधनी कटि कुंडल झलकत गाल । अद्भुत रूप निहारि हरिकौ होत रसिक निहाल ॥४॥
Ramkali
Aavat kunjanaten ponhopiri ..| piya alsaat jumbhaat rasbhare
NityaPad-144
आवत कुंजनतें पोंहोपीरी ॥| पिय अलसात जुूंभात रसभरे ललन खबाबवत बीरी ॥ १॥ सुरत शिथिल अंग अंग शिधिल अति भुजभर स्थामा रसकी रसीली ॥। विट्वपबिपिन विनोद करो मिल नई ललितादिक नीली ॥२॥
Bhairav
Sughar piyakon baaipen utaaro rylon .| naagar natwar
NityaPad-053
सुघर पियकोन बाईपें उतारो राइलोन ।| नागर नटवर तनकचितवनमें वसेवाहीके भोन | १॥ जासुखकों सनकादिक तरसत मुनिजन धरिहें मॉन ।। रसिक प्रितमचारी जामवसे अनहोनी भड़होन ।।२॥।
Lalit
Ghosh nagri mandal madhya naachat giridhari laal lait gati anek
Part1-336
घोष नागरी मंडल मध्य नाचत गिरिधारी लाल लेत गति अनेक भाँति चरन पटकनी गिडगिडता गिडगिडता ताताततततततथेई थेईथेई बीच बीच अधर मधुर मुरलिका मटकनी ॥१॥ भुजसों भुज जोर जोर लेत तान नवकिशोर गावत श्रीराग मिलि ग्रीव लटकनी ॥ सूरदास प्रभु सुजान नंदनंदन कुँवर कान्ह मदनमोहन छबि निरखत काम सटकनी ॥२॥
Shri
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