top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Chalauri vrajarajke dwaar baajat badhaaiyaan ..1.. pahare busson | Part1-125 | चलौरी व्रजराजके द्वार बाजत बधाईयाँ ॥१॥ पहरे बसन
बिबिध आभूखन मंगल साज बनाईयाँ । श्रीफल दूब दहीं घृत अक्षत सोवन सींक
सजाईयाँ ॥२॥ दूहूँ द्वार दे साथिये सुंदरि बंदनवार बँधाईयोँ | नॉंचत फिरत
सबै नरनारी हरद दही लपटाईयों ॥३॥ देत दान सुखमानि नंदजु ब्रज सुंदरि
पहराईयों । जनगोविंद जानि जिय अपने मनोरंक निधिपाईयाँ ॥४॥
| Jetashri |
Hoe hoe horry khelati giridhari .. ita sub | Part3-081 | हो हो होरी खेलति गिरिधारी ॥ इत सब
बालक उत ब्रज जुबती सँग वृषभानु दुलारी ॥ १॥ आँई जुरि सब नंद पौरि
पै भीर भई अति भारी ॥ बाजति ताल मृदंग झांझ डफ गाबति दै कर
तारी ॥२॥ चोवा चंदन औरू अरणजा केसरि रंग संभारी ॥| रतन खचित
पिचकाई कर लै छिरकति हैं पिय प्यारी ॥|३॥ सुरैंग गुलाल अबीर उड़ाबति
हो हो सबद उचारी ॥ बरन बरन भये वसन सबन के भीजि रही रँग सारी
॥४॥ सब सखियन मिलि मोहन पकरे कर जु गड्ढे सुकुमारी ॥ नैंन आँजि
छीनि लई मुरली, देति भाँवती गारी ॥५॥ फगुवा देहु हमारो लालन, मोहन
मदन मुरारि ॥ मेवा बसन अभूषन दीने, देति असीस ब्रजनारी ॥६।। निरखि
बिनोद हरखति सुर पति, जिय पुहुप वृष्टि करि भारी ॥ श्री विद्ल गिरिधरन
लाल की तन मन धन बलिहारी ॥७॥ | Devgandhar |
Nand naindan naval naagar kisor barr khelati basant | Part3-148 | नंद नैंदन नवल नागर किसोर बर खेलति बसंत
बन्यों रंग अति भारी ॥ राग हिंडोल गावति नवल्न नागरी अति हिं रस
भीज रही है देति तारी ॥|१॥ लाल गुलाल रह्यो गगनलों घुमड़ि कैं केसरि कुँमकुमा भरि हो पिचकारी || ताल किन्नर मुर॒ज बीन ढफ बाज ही बिच
मोहन मुरली सप्त सुर धारी ॥२॥ सुभग जमुना तीर ठौर ब्रिंदा बिपुन बाल
सुक कोकिला कीर किलकारी ॥ गहे द्वुम डार ठाढे नंदलाल जहाँ राधिका
सब सखि मधि सुकुमारी ॥३॥ बढ्यों दुहूँ दिस खेलि अधिक सोहावनी
हँसति मुसिकाय यौं ब्रजनारी ॥ मदन मोहन गिरिधर वर पीय जु देव मुनि
करति कुसुम बरखारी ॥४॥ | Hindol |
Tein kahuun dekhyau ree aalee nandkau nandan matuki jhatakaken patak | Part1-259 | तें कहूँ देख्यौ री आली नंदकौ नंदन मटुकी झटककें पटक
गयी ॥ माँखनचोर चोर मन हर लीनौ नेकहुँ न डर कीनौ नट ज्यों उलटकें सटक
गयी ॥१॥ मारग रोक रहत खोरनमें नैंन सैन दै अटक गयौ ॥ तानसेनके
प्रभु माधुरीसी मूरति रस गोरस ले गठक गयो ॥२॥ | Todi |
Ick samey ghansyam kain mandir sunder horry kii | Part3-166 | इक समे घनस्याम कैं मंदिर सुंदर होरी की
हो बारि बँधी ॥। भीज रही सब नारि ब्रज की धौवति दाग अरगजा सुगंधी
॥ १॥ नारि ब्रज की घौवति दाग अरगजा सुगंधी ॥१॥ केसू केसर ओर
कुँमकुमा पिचकाईन भरि भरि साँधि ॥ चोवा की कीच फूलेल की रेल
जुलाल को मेह अबीर की आँधि ॥२॥ बाजत बीन मृदंग बाँसुरी छायो
है रागु धनासरी छंदी ॥ सखीयन घूमर दै दै गावति निरखि “सूर” भयों
परमानँदी ॥३॥ | Dhanashri |
Ghoonghatke vagrot otarahi chotsharasana bhronh sayak drig ... | NityaPad-114 | घूंघटके वगरोट ओटरहि चोटशरासन भ्रोंह सायक दृग ॥।
वेध्योविदित चघपल प्लकन अलकनफणि नुृशंसवलि ढिग ॥ १॥| तेकरसायल
नायक कानन सुन सुंदरी सुंदर सरको जग ॥ बचन प्रसंस असंभुज हरिधर करि
करुणा ज्यूं आभूषणको नग ॥।२॥ चितचितयो फिर दसा अनोखी अधरमधुर
सुधि भई जोहूं लग ॥| सूरदास संयोग येहि गति रतिविछुरेकी अकथ कथा
खग ।।३॥ | Adano |
Vadati naahinen gwalini jobanke gaaren .. yaa | Part3-118 | वदति नाहिनें ग्वालिनी जोबनके गारें ॥ या
ब्रजमें अंडीफिरे मनमथ उपचारें || १॥ पहरें रातोपोमचा लहंगा हरी किनारें ॥
अतिरसते निकरीफिरे अचराढिंग डारे ॥श॥ नकवेसरि गजरावने चोकी
खगवारे ॥ अंगिया खमकिखयेंवनी कुचस् भरवारें ॥ ३॥ फफुदी डोरी केझवा
सोहें फोंद फुंदारें ॥ सोने की वांकी वेंदुली सोड़े ललित लिलारें ॥४॥ दीरघ
लोचन छबिछटा कजरा अनियारे ॥ जगन्नाथ कविरायके प्रभु मोही कान्हर | Bilawal |
Momen yeh vyaapi pucker mohan penwair lehuun .. | Part3-322 | मोमन यह व्यापी पकर मोहन पेंवैर लेहूं ॥
सब सखियनमें छिपजो चलों पाछेते दौरि जाय अंजनदेहूं ॥१॥ कर गहि
पीठ गढाय कुचनसों कान पकरकें गुलचा देहूं ॥ कृष्णनीवन लछीराम के
प्रभुषें मनभायो हों फगुबा लेहूं ॥२॥
| Kalyan |
Birajat neeki kunj kutee .. madanmohan radha soun mill tahaan | NityaPad-230 | बिराजत नीकी कुंज कुटी ।। मदनमोहन राधा सों मिल तहां
रस बरजोर जुटी ॥१॥ मगन भये मन मगन मानों भवलीला सुरती ठटी ॥
कृष्णदास प्रभु की छबि निरखत गिरधर रस लपटी ॥२॥ | Saarang |
Ritubasant shyam ghar aayo tunn munn dhana sub | Part3-024 | ऋतुबसंत श्याम घर आयो तन मन धन सब
वारों॥ लेयुलाल ऊपरअंगन छिरकों पलकनिसो मगझारों ॥|१॥ चोवाचंदन
ओर अरगजा सब सखीयन पै डारों ॥ उडति गुलाल लालभयेबादर भरि
पिचकारी मारों ॥ २॥ खेलोंगी मेंचतुर पियासों आय बसंत संवारों ॥ सूरदास
अनहि तनके मुख सबभूषण भरिडारों ॥३॥ | Basant |
Jinn srivallabharup | NityaPad-349 | जिन श्रीवल्लभरूप
नजान्यो ॥ जननी उदर आय कहाकीनो जन्म अकारथ मान्यो ॥१॥ सकल
बेदविधि सकल धर्मनिधि करत जो वेद वखान्यो ॥ कहा भयोजो सकल शास्त्र
पढ़्यो नाहक फाट्यो पान्यो ॥२॥ अम्निरूप प्रभु सकल शिरोमणि देत
अभवपद दान्यो।॥ रसिकप्रीतम के चरणभजत जेते सकल प दारथ जान्यो ।। ३॥ | Bihaag |
Jhuk rahee neend shyamke nainan .. | Pustak1-359 | झुक रही नींद श्यामके नैंनन ॥
चिबुक उठाय पिया मुख निरखत शोभा कही न जाय कछु बैनन ॥१॥
आरसभरी अकुलाय अंक भर हियौ सिंचबत चैनन ॥
सूर स्वामिनी चंद उजियारे सुख समुद्र बढ़चौ मैनन ॥२॥ | Kedaro |
Page 1 of 1
bottom of page
