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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Naval basant beach vrindaavan mohan raas rachaayon ..
Part3-032
नवल बसंत बीच वृन्दावन मोहन रास रचायौं ॥ सुर बिमान चढि देखन आए निरखि निरखि सुख पायौं ॥१॥ नॉचत्ति लाल पत्र नूपुर बाजैं मुरली सन्द सुहायों || ताल मृदंग, झांझ, ढफ बाजति सब इक तार मिलायौं ॥२॥ साँवल, स्याम, गौर हैं प्यारी मिलि रससिंधु बढायों ॥ गोपी ग्वाल परसपर नाँचति अदभुत रंग जमायोौं ॥३॥| कहा कहां लीला राधा बरकी किनहुं अंत न पायौं ॥ या लीला पै वार वारनैं 'रामदास' जस गायौ ॥४॥
Basant
Muralison abb preeti karauri .. merrie kahee maan munn rakhau
Part1-281
मुरलीसों अब प्रीति करौरी ॥ मेरी कही मान मन राखौ उत रिस दूर हरौ री ॥१॥ तुमहिं सुनी मुरलीकी बातें दीन होय इतरानी ॥ काहे न ढेर श्याम ता ऊपर क्‍यों न होय पटरानी ॥२॥ हम जानी यह गर्व भरी है साथूं न यातें और ॥ रिक्लि लिये हरिकों तपके बल वृथा करौ तुम सोर ॥३॥ सुरश्याम बहुनायक सजनी यह मिली एकआय ॥ तुम अपने नेंमही रहौगी नेंम न करते जाय ॥४॥
Ramkali
Raas mein naachat lalbihari nachwat hain sub vrajaki naari .. taa
Part1-328
रास में नाचत लालबिहारी नचवत हैं सब व्रजकी नारी ॥ ता थेई ता थेई तत ता थेई थेई थुंगनिथै-गनि तटकित तारी ॥१॥ श्रीराधा एक तरजत मिलबत लेत अलाप सप्त स्वर भारी ॥ कृष्णदास नट नाट्य रसिकवर कुशल केलि श्रीगोवर्द्धधघारी ॥२॥
Saarang
Praatsamay uthh chalhu nandan grih balram krishna mukh dekhiye |.
NityaPad-023
प्रातसमय उठ चलहू नंदन गृह बलराम कृष्ण मुख देखिये |। आनंदमें दिन जाय सखीरी जन्म सुफल कर लेखिये ॥।१॥ प्रथम काल हरि आनंदकारी पाछे भवन काज कीजिये ॥ रामकृष्ण पुन बनहिं जायगे चरण कमल रज लीजिये ॥२॥ एक गोपिका ब्रजमें सयानी स्थाम महातम सोईजाने ॥। परमानंद प्रभु बद्यपि बालक नारायण कर माने ॥।३॥॥
Bibhaas
Aho piya laal ladenti koo jhoomka saras sur
Part3-232
अहो पिय लाल लडेंती को झूमका सरस सुर गावत मिल व्रजबाल अहो कल कोकिल कंठ रसाल ॥ लाल बल झूमका हो ॥ध्रु०॥| नवजोबनी शरद शशि वदनी युवती यूथजुर आईं || नवबसत साज सिंगार सुभग तन करन कनक पिचकाई ॥ एकन सुवन यूथ नवलासी दामिनि सी दरसाईं ॥ एक सुगंध संभार अरगजा भरन नवल को आई ॥ १॥ पहरें बसन विविध रंग रंगन अंग महारस भीनी ॥ अतरोटा अंगिया अमोलतन सुख सारी अति झीनी ॥ गजगत्ति मंदमराल चाल झलकत किंकिणी कटिछीनी ॥ चोकी चमक उरोज युगल पर आन अधिक छबिदीनी ॥२॥ मृगमद आड ललाट श्रवण ताटंक तरणि चुति हारी ॥ खंजन मान हरण अखियां अंजन रंजित अनियारी ॥ यह वानिक बन संग सखी लीनी वृषभान दुलारी ॥ एक टक दृष्टि चकोर चंद ज्यों चितये लाल विहारी ॥३॥ रुरकत हार सुढार जलज मणि पोत पुंज अति सोहें ॥ कंठसरी दुलरी दमकनि चोका चमकन मम मोहें ॥ वेंसर थरहरात गजमोती रतिभूली गति जोहें ॥ सीस फूल श्रीमंतर जटत नग वरण करण कबि कोहें ॥४॥ नवल निकुंज महल रस पुंज भरे प्यारी पिय खेलें ॥ केसर ओर गुलाल कुसुम जल घोर परस्पर मेलें ॥ मधुकर यूथ निकट आबत झुक अति सुंगध कीरेलें ॥ पीतम श्रमित जान प्यारी तब लाल भुजा भर झेलें ॥५॥ बहुविध भोग विलास रास रस रसिक विहारण रानी ॥ नागर नृपति निकुंज विहारी संग सुरतरति मानी ॥ युगल किशोर भोर नहिं जानत यह सुरत्र रेनविहानी ॥ प्रीतम प्राण प्रिया दोऊ विलसत ललितादिक गुणगानी ॥६॥
Sarang
Dekhi dekhi drigan dampati kau sukh maaee kaisen aaj
Part3-381
देखि देखि दृगन दंपति कौ सुख माई कैसें आज झुलति डोल ॥ गौर स्याम यह सहज सुभग वपु पहरें पीत पट नील निचोल ॥१॥ वरण बरन भूषन नग जटित जगमगात तामें अधिक अमोल ॥ “कल्याण! के प्रभु गिरिधर राधा प्यारी कों झुलावत परसत पाणिरी कंठ कपोल ॥२॥
Sarang
Harike janaki atee thakurai.
NityaPad-361
हरिके जनकी अति ठकुराई। देवराज ऋषिराज महामुनी देखत रहे लजाई ॥। दृढ विश्वास कीयो सिंहासम तापर बैठे भूष। हरिगुण विमल छत्र शिर राजत शोभा परम अनूप ॥ निस्पृह्द देशको राज करे ताको लोक परम उच्छाह ॥ कामक्रोध मद लोभ मोह तहां भये चोरते शाह ॥ बने विवेक विचित्र पोरीया ओसर कोउ न पावे ॥ अरथ काम तहां रहत दूर दूर मोक्ष धर्म शिरनावे ॥। अष्टसिद्धि नवनिधि द्वारे ठाडे कर जोरे उर लीनी ॥ छडीदार वैराग्य विनोदी छटको बाहर कीनी ॥ हरिपद पंकज प्रेम परत रुचि ताहीसों रंग राते ॥ मंत्री ज्ञान ओसर नहीं पावत करत बात सकुचाते ॥ माया खल व्यापे नहीं कबहु जोयारीते जाने ॥ सूरदास यह नरतन पायो गुरु प्रसाद पहेचाने ॥
Kanharo
Madan-mohan kunwar vrishabhaanu-naindini subhag nava
Part3-130
मदन-मोहन कुँवर वृषभानु-नैंदिनी सुभग नव कुंज में खेलति होरी ॥ गोप कुमार सैंग एकु दाई बने उत सकल ब्रज- बधू एकु जोरी ॥ १॥ बाजति बीना, मृदंग झांझ, ढफ, किन्नरी, चैत, झूमकि गान करति गोरी ॥ उड़ति बंदन नव अबीर बहु अरगजा अरु बिनिधि रैंगन गुलाल झोरी ॥श॥ तब ही सब सखी जन मतौ करि धाँई गिरिधर गही नील, पीत पट सौं गाँठि जोरी ॥ एकु सखी स्याम के सीस बैंनी गुही, एकु दृण आँजि मुख माँड़ि रोरी ॥ ३॥ तब हि ललिता दौरी झटकि कैं मुरली गहि सब हिं नँद-लाल सौं करि ठठोरी ॥ एकु नव कुँमकुमा कनक गागरि भरि ऑनि कै दोऊन के सीस ढ़ोरी ॥४॥ तब सबन अपुनो फगुवा माँगि लीनौं, दई मुरली अरू गाँठि छोरी ॥ “दास गुपाल' बलि जाई यह छबि निरखि रहो हरि चरन मन दृढ़ मोरी ॥५॥
Bibhas
Aavat jaatahin tou haar pariri .. jyon jyon pyaaro vinatikar
NityaPad-123
आवत जातहीं तो हार परीरी ॥ ज्यों ज्यों प्यारो विनतीकर प्रठवत त्यौंत्यौं तूं गढमान चढीरी ॥१॥। तिहारे बीच परेसोई बावरी हों चौगानकीगेंद भईरी ॥ गोविंदप्रभुकों वेगमिल भामिनी सुभग यामिनी जातवहीरी ॥२॥।
Bihagaro
Chalo sakhee sotan key ghar jeye.. maan ghatey tou kahaa
Part2-347
चलो सखी सोतन के घर जेए॥ मान घटे तो कहा घटे तेरो पीय के दरसन पेए॥९ ॥ इह जोबन अंजली को पानी समय गये पछितेए ॥ 'धोंधी' के प्रभु रस बस कर लीये तन की तपत बुजेए ॥२॥
Suha
Tohi milanakon bahut
NityaPad-324
तोहि मिलनकों बहुत करतहैं मोहनलाल गोवर्धनधारी ॥ उत्तर बेगदेहो किन भामिनी कहिधों कहा यह बात तिहारी ॥। १॥ देखीरी तूंजो झरोखनके मग तन पहरे झूमककी सारी ॥। तनमनवसीरी प्राणप्यारेके निभिष जिय ते होत न न्‍्यारी । २॥ कहिरी सखी कहां होय आऊं बेगबताय सुठौर विचारी ॥ कुंभनदासप्रभु वे बैठेहैं जहां देखियत ऊंची चित्रसारी ॥३॥
Kedaro
Laalan naahinne ree kaahake basake.. bawri
NityaPad-276
लालन नाहिंने री काहके बसके।। बावरी भईरी त्रिया उनसों मन अरुझायो बेतो सदाई अपने रसके ।।|१ ॥| निरखपरख देख जियको भरम गयो कामिनीबृंदन के मनन कसके ॥ त्दपि कछु मोहनी गोविंदप्रभुपै युवतीसभामें बदत यशके ॥२॥
Nat
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