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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Mero mukhnikoke terori pyaari ..
NityaPad-161
मेरो मुखनीकोके तेरोरी प्यारी ॥ दर्पनले देखो मुगनयनी सांची कहो वृषभान दुलारी ॥ १॥ तुमहो नंदजूके छैलछबीलै हमहैं गुजरियां दासी तुम्हारी । कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर चरणकमल पर राधाजु बारी ॥२॥
Bilawal
Dhoryon satuake sanga jewat bejarki rotty nandlal .. tenty saak sandhaano modak laaee
NityaPad-215
धोर्यों सतुआके संग जेवत बेजरकी रोटी नंदलाल ॥ टेंटी साक संधानो मोदक लाई डलियन भर ब्रजबाल ॥१॥ मेवा अमरस गोरस बूरा दधि ओदन पकवान रसाल । 'कृष्णदास' प्रभु कुंज भवनमें निरख अखियां भई निहाल ॥२॥
Saarang
Hamaro deho manohar cheer ..
NityaPad-037
हमारो देहो मनोहर चीर ॥ कांपत दशनसीततन व्यापत हिमअतियमुनानीर ॥ १॥ मानेंगी उपकार रावरो करहु कृपाबलबीर।। अतिदुखत वपुपरसत मोहनप्रचंड समीर ॥२॥॥ हमदासी तुम नाथहमारे विनतीकरत जलभीतर ठाढी ॥ मानो विकसिकुमुदिनी शशिसोअधिक प्रीतिबाढी ।।३॥ जोतुमहमहीनाथकर मानोयहमागेंहमदेहु ॥ जलतेनिकसिआयबाहिरव्हेबवसन आपुनेलेहु ॥४॥ करधर सीसगई सन्मुखहरि मनमें करआनंद ॥ होय कृपालसुरप्रभु सबविधअंबर दीने नंदनंद ॥॥५॥॥
Ramkali
Herry herire bhaiya heriheri .. dhru. .. heride kinn gaavahi bhalrau
Part1-055
हेरी हेरीरे भैया हेरीहेरी ॥ ध्रु. ॥ हेरीदे किन गावही भल्रौ बन्यौ है काज ॥ रानी जसुमति ढोटा जायौ आयोौ ब्रजमें राज ॥१॥ पट पीरो प्यौसारकौ रानी जसुमति पहिरै ताहि ॥ दामिनिके भोरें गयी मोमन धोखों आहि ॥२॥ नेतिनेति जासों कहै ध्यान न आवै रूप ॥ सो या बाबा नंदके परयो देखियत सूप ॥३॥फूले फिरत गुवालिया विप्रन बूझत थाई ॥ कहा कूँवरकी नामहै हमसों कही सुनाई ॥४॥ नामनकी गिनती नहीं सबहिनके सिरताज ॥ पहलौ तो सुनिलेहु भैया जाको नाम गरीब निवाज ॥५॥ बूढ़ी बाँस सब खबें क्षीर प्रवाह बढ़ायौ ॥ चाटत चरन गोपालके मानों इनहींकौ जायौ ॥६॥ सब ग्वालन मिलि मतौ मत्यौ करें मनमें आनंद । आवौ पकरि नचाइये व्रजपति बाबानंद ॥७)| ऊँचे मानकौ चोंतरा बैठे हैं सिरदार ॥ देखत भोरौसी लगै वाकौ चित्त उदार ॥८॥ लघु भैया पौंयनपरे सकुचतहैं व्रजराज) उठि किन दांदा नाचही पूत भयौहैं आज ॥९॥ नाचत बावानंदजू संग लिये. सब ग्वाल ॥ मलकत थोंदा हालही देखि हँसी व्रजबाल ॥१०॥ एक ओर अज ग्वालिया एक ओर सब पोंनि ॥ पहरावत मधु मंगल या व्रजकी महतोंनि ॥११॥ फूलि कहा वृषभानजू पूरब पून्य सगाई ॥ कीरत कन्या होइगी तो दैहों कुंवरकन्हाई ॥१२॥ भैयाभैया कहि टेरियों कहा बड़े कहा छोट॥ ठकुराई तिँ लोककी दुरी अहीरन ओट ॥१३॥ यह पद गायी हेतसों गंग ग्वाल सुखपाय । रौंमरींम रसना करों तो मोपै बरन्‍्यौ न जाई ॥१४॥
Gori
Bahut bair key bhookhe hoe laal jenvo kachhudak leho balaiya ..
NityaPad-303
बहुत बेर के भूखे हो लाल जेंवो कछुड़क लेहो बलैया ॥ जो तू कह्यो न माने हों अपने हलधर जू की मैया ।१॥ दोरी जाय कंठ लपटाने तू कह मैया मेरो कनैया || गोद बैठ हरि जेबन लागे परमानंददास बलि जैया ॥ २॥
Kanharo
Aliri teree latkanmein atakyau peeyakau munn nainku naan ita uta atakyau ..1..
Pustak1-318
आलीरी तेरी लटकनमें अटक्यौ पीयकौ मन नैंकु न इत उत अटक्यौ ॥१॥ देख रूप ठगी तबतें मन अनत न गोंहन हटक्यौ ॥ एते पर तू मान करत है क्‍यों हु न मानत विधु रथ उत्त अटक्यौ ॥ रसिक प्रीतम प्रीय दूत्तीके बचन सुनि मान तुरत ही सटक्यों ॥२॥
Saarang
Shyam sunder bunn khelat sakhan sanga bibidh kell ..
NityaPad-190
श्याम सुन्दर बन खेलत सखन संग बिबिध केल ॥ कालिंदनी तट बांधी फेंट पट करत जुध भुज ज़ु परस्पर पेल ॥१॥ काहुकी मुरली चोरत काहुकी संग षष्ठी काहुको छीको नाडो काहुकी चोरत सेली ।। गोविंद पिय रस भरे निर्तत सखाके ग्रीवा भुज मेली ॥२॥
Saarang
Mein naheen jaanyo maaee bahu nayakko neh.. maas
Part2-355
में नहीं जान्यो माई बहु नायकको नेह॥ मास अषाढकी घटा घुमड आईं रिमिजझिमि बरखत मेह ॥१ ॥ काहु त्रियन संग नेह जोरके काहु के आवत प्रात उठ गेह॥ धोंधी के प्रभु रसबस कर लीने बडभागिन जुवति ऐह ॥२॥
Goud Sarang
Kaahu jogiyaki najar laagi merau baari kaanh rovai | ghar
Part1-116
काहू जोगीयाकी नजर लागी मेरौ बारी कान्ह रोवै | घर घर हाथ दिखावै यशोदा दूध पीवै नहीं सोबे ॥१॥ चार डॉडी सरल सुंदर पालने झुलावें । पालनें नहीं सोवे मोहन गोद लियें हुलरावें ॥२॥ मेरी गली जिन बोलौरे जोगी अलख अलख कहि आवै । राई ल्ोंन उतारि यशोदा सूरकौ प्रभु सुहावे ॥३॥
Aasawari
Raas rachyau bansibat key tata .. nrityat prem bharey piya pyaari
Part1-356
रास रच्यौ बंसीबट के तट ॥ नृत्यत प्रेम भरे पिय प्यारी चंद बदन पर छूट रही लट ॥१॥ सुंदरश्याम सुभग कर मुरली अधर धर उघटत थेई थेई रट ॥ मोर मुकुट कुंडल की डोलन मुरकि परचौ लखि मेन महाभट ॥२॥ ब्रजबनिता छबि देख बिमोहीं बार देत आभूषण औरे पट ॥ लीलाललित महामुनि मोहे श्रीविद्डलगिरिधर नागर नट ॥३॥।
Bihagaro
Kunwari radhika tuu sakal saubhagya seema yaa badan parr
Part1-196
कुँवरि राधिका तू सकल सौभाग्य सीमा या बदन पर कोटिशत चंद बारौं | खंजन कुरंग शतकोटि नैंनन पर बारनें करत जीयमें न विचारों ॥१॥ कदली शतकोटि जंघन ऊपर सिंध कोटि कटे पर न्यौछावर उतारीं । मत्त गज कोटिशत चाल पर कुंभ शतकोटि इन कुचन पर बारडारों ॥२॥ कीर शतकोटि नासा ऊपर कुंद शतकोटि दसनन ऊपर कहि न पारों । पक्‍्व कंदूर बंधूक शतकोटि अधरन ऊपर बारि रुचि गर्व टारों ॥३॥ नाग शतकोटि बेंनी ऊपर कपोत शतकोटि ग्रीवा पर बारि दूर सारों । कमल शतकोटि कर जुगल पर बारनें नाहिन कोऊ लोक उपभा जो धारी ॥४॥ दास कुंभन स्वामिनी सुन नख सिख अंग अद्भूत सुठान सुं कहाँ लगि सेम्हारों ॥ लालगिरिधरन कहत मोहि तोहिलों सुख जोलों वह रूप छिन छिन निहारों ॥५॥
Goud Saarang
Aur abir phulel argaja kesari bheenin saaree ..
Part3-275
और अबीर फुलेल अरगजा केसरि भीनीं सारी ॥ हो डो होरी बोलति भाँमिनि कामिनि रूप उजियारी ॥१॥ बाजति ताल मृदंग मुरली ढ़फ मुरज कठतारी ॥ मुरि-मुरि झुरि-मठ खेलति पिय संग नैंकु हुं होति न न्‍्यारी ॥२॥ रँग-रँग भीनीं रसिक रसीली सखियन में सुकुमारी ॥ “मदन मोहन” पिय फगुवा दीनो नैननि मुसकनि भारी ॥३॥
Maru
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