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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Bhaadon sudi panchami pragat bhaee sabahinaki sukhdai joo . shree | Part1-172 | भादों सुदी पंचमी प्रगट भई सबहिनकी सुखदाई जु । श्री
चन्द्रभान गोप गृह निधि सुखमा कूख सुहाई जु ॥१॥ गाम दिठोरा घरन घरन
प्रति मोतिन चौक पुराई जु । गोप गोवर्धन भये जु परमसुख सबहिन देत बधाई
जु ॥२॥ देत दान विप्र भाटनको माला मुंदरी चीरा जु । 'चत्रभुज' प्रभु भूतल
पर गोपराज बल बीरा जु ॥३॥ | Saarang |
Praat samai nandlal khelati hoe hoe horry .. sees | Part3-074 | प्रात समै नंदलाल खेलति हो हो होरी ॥ सीस
पाग जु कर हि भरे रंग बोरी ॥१॥ सब नारि जुरि कैं आई नंद जु की
पोरी ॥ हाथन पिचकाई लीये अबीर भरि झोटी ॥२॥ राधा जु खेलति
खेलति साँकरी की पौरी ॥ सूरदास मदन मोहन भली बनी जोरी ॥३॥
| Bhairav |
Yamuna devi cone bhalai .. naam roop guna lahari | Part2-341 | यमुना देवी कोन भलाई ॥ नाम रूप गुन लहरि
जू को न्यारी अपनी चाल चलाई ॥१ ॥ उजर देस कीयो भ्राता को तुम
परसत उत कोउ न जाई॥ जे तन तज तेरे तट तात तरुन पर गेल
चल ाई ॥२ ॥ मुग्ध बधूं कु करे दूतपनो अधम नरू कों आनि मिलाई॥
आपुन स्थाम आन उजल करी तात तपति निज सीतल ताई ॥३ ॥ जल को
छल करी अनल अधम कुं पहे सुनि कें कोऊ न पत्याई ॥ यद्यपि पछिपात
पतितन को तदपी 'गदाधर' पीय मन भाई ॥४ ॥ | Bilawal |
Kaba dekho merrie or naagar nandkishore binati karat bhayo | NityaPad-046 | कब देखो मेरी ओर नागर नंदकिशोर बिनती करत भयो
भोर॥ हम चितव तुम चितवत नाहीं मेरे करम कठोर ॥।१॥ जन्मजन्मकी दासि
तिहारी तापर इतनो जोर ॥ सूरदासप्रभु तुम्हारे रोमपर वारों कंचनखोर ॥२॥ | Lalit |
Atulit prataap paripuran rohininandan biraje maaee surna . | Part1-173 | अतुलित प्रताप परिपूरन रोहिनीनंदन बिराजे माई सूरना ।
अति विसाल अरु करन अरुन ऐती नेन कमल मधु घूरना ॥१॥ नील वसन
परिधान मत्तगजचाल कंपत तालकुल झूरना । गोविन्द प्रभु ब्रजराज वच्छ मुरझनो
गिरिधरनलाल तब थेनुकसुर लायो चूरना ॥२॥ | Saarang |
Aangan mein hari soye gayeri .. | NityaPad-343 | आंगन में हरि सोये गयेरी ॥
हरें हरें दोक जननी मिलिकें सेज सहित तब भवन लहेरी ॥१॥
कहत रोहिणी इन्हे न जगावो खेलत डोलत हार गयेरी ॥
वारंवारजुंभात सांवरो वदन देख विस्मितजु भयेरी | २॥
कहत नंद ये कछू न जानें मायनके संग श्रमित भयेरी ॥
सूरदास बलराम श्याम तब व्रजरानी संग पोढ रहेरी ॥ ३॥॥ | Bihaag |
Palana jhoolat shyam chhabilau . bahu vidhi rangkhilonon curr | Part1-097 | पलना झूलत श्याम छबीलौ । बहु विधि रंगखिलोनों कर
मुख चुंबत द्रगना हठीलौ ॥१॥ ब्रजनारी गुन गावत सुतके कुलदीपक सुजस
सुशीलो । ब्रजाधीश सुख नंदराय मन ब्रजजन नेह नवीलौ ॥२ | Ramkali |
Raine reejhi hoe pyaare harikau raas dekh yaahi tein adhik badh gaee | Part1-349 | रेन रीझी हो प्यारे हरिकौ रास देख याही तें अधिक बढ गई
री गैन ॥ चल न सकत हरि रूप बिमोही रही एकटक आए नक्षत्र नैन )१॥
छबिसों छूटत मानों बिचबिच तारे हीरा के आभूषण पर बार डारों जग ऐन ॥
चंदाहू थकित भयौ देखबेके लालच रह्यौ भयौ देखकें परम चैन ॥२॥ जौ लों
इच्छा भई तौलों नाँचें हैं गोपी गोपाल अद्भुत गति मौ पै कही न परत बैन ॥
नंददासप्रभु को बिलास रास देखबेकुँ मन्ममथहूकौ मन मधथ्यौरी मन ॥३॥ | Kedaro |
Houn yaachk srivallabh tihaaro yachnan tumakon aayoho.. | Part2-288 | हों याच्क श्रीवल्लभ तिहारो याच्नन तुमकों आयोहो॥
महाउदार देत भक्तनकों अपअपनों मनभायोहो ॥१ ॥
हेमग्राम भूषण सुखसंपत्ति सो मोहि मन न सुहायो हो ॥
पयोरहूं नित्य जूठन पार्ऊ यहमेरो चित्तलायोहो ॥२ ॥
प्रफुल्लित भयो निरंतर द्विजवर ब्रह्मवाद तरु
छायोहो ॥ गाउंगुण लावण्य सिंधुके दास चरण रजपायोहो ॥३ ॥ | Aasawari |
Raajat rangbhini bhamini saanvare preetam sange .. | Pustak1-344 | राजत रंगभिनी भामिनी साँवरे प्रीतम संगे ॥
निर्तत चंचल गति कही न परत दुति लहलहान सीखी नवघन जहाँ दामिनी ॥१)।
जुवति मंडल में मध्य रूप गुनकी अवधि तातें कहावै संगीतकी स्वामिनी ॥
राग रंग की रानी ततथेई की कलबानी कछुक सीखी कोकिला की कामिनी ॥
नंददास रीझे तहाँ अपने पौ बास्बौ जहाँ रन रंभा अभिरामिनी ॥२॥ | Bihaag |
Maaran chhaand abb dehu kamal nayan manmohana .. | Part3-302 | मारण छांड अब देहु कमल नयन मनमोहना ॥
कटिपट पीत सुहावनों ओर उपरेना लाल ॥ सीस मोरकी चं द्विका चंचल
नयन विशाल ॥ १॥ कुंचित केश छबिबनी सुंदर चारू कपोल ॥ श्रुति मंडल
कंचन मणी झलकत कुंडल लोल ॥२॥ मोहन भेष भलो बन्यों मृगमदितलक
सुभाल ॥ अलक मधुप समराजही ओर मुक्ता वलिमाल ॥|३॥ कुंज महल
ते हों चली अपने गेह कों जात ॥ बनमें सोर न कीजिये सुंदर सामल
गात ॥४॥ उरअंचल कित गहतहो दूरभये कहो बात।॥ अपने जियही विचारिये
जोपरेकुड्की रात ॥५॥ सांज परी विनआंथयो अरुझाई किंहिं काम ॥
सेंतमेंतक्यों पाइये पाके मीठे आम ॥६॥ नंदराय के लाडिले बोलत मीठे
बोल ॥ रहि होके जाय पुकारिहो नाकंचुकी बंद खोल ॥७॥ परमानंद प्रभु
यों रमी ज्यों दंपति रतिहेत ॥ सुरत समागणम रस रह्यो नदी यमुना केरेत ॥८॥ | Gouri |
Madan mohan kamal nayan nartat raas range .. | Pustak1-320 | मदन मोहन कमल नयन नर्तत रास रंगे ॥
त्तथेई ततथेई थेईथेई गति अनेक लेत मान गान करत रूप सहज सरस अति सुधंगे ॥१॥
विलुलित बनमाल उरसि मोरमुकुट रुचिर सरस युवतिन मनहरन अरूण द्वग तरंगे॥
कानन कुंडल झलमलात पीत बसन फरहरात रुनन झुनन धरत चरण भूकृटी भाव भंगे ॥२॥
मोही सुर ललना भामिनी सिद्ध सकल सुनत श्रवण मुरली नाद ग्राम जात अधर कल उपंगे ॥
गोविंद प्रभु ललितादिक सहचरी मिलि यूथ सहित वार फेर मदन कोटि देत अंग अंगे ॥४॥ | Bhairav |
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