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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aeka dinn aapune khirkako jaatari mill gayo saanvaro
NityaPad-140
एक दिन आपुने खिरकको जातरी मिल गयो साँवरो हो अकेली । देख मोहि मंद मुसकाय नेनन हस्यो किंधौरी है तू कनकबेली ॥१॥॥ अतिही जगमग रही चूनरी रंगभरी कंचुकी कुचन पर अति विराजे ॥ शरदके चन्दसों बदन झगमग रहो देख या रूपको कौन ब्राजे ॥२स॥ नासिका नथनि झलमल विराजे रहो ऐसो बड़ो मुक्ता ते कहाँजु पायो ॥ ऐसो न देख्यो सुन्‍्यो कहूँ ना या देसमें लगत ही लपट मन लटक आयो ॥|३॥ चाल गजराजकी लंक मृगराजकी चिबुककी छबि देख चित्त चुरायो ॥ बंक अवलोकनि बडी अँखियनमांझ कौनके ठगन अंजन बनायो ॥४॥ जानती नाहि मैं नाथ तुम कौन हो करत हो जान जाकी बडाईं ॥ या गामकी रीत रसरीत जानों नहीं भये दिन चार गौनें जु आई।॥५॥! या गामकी रीत रसरीत सब हों कहों नेक बैठो चलो कुंज छाँही ॥ जान गई बात मग जा चल्यो साँवरे कुंज तर हमें कछु काज नाहि ॥॥६॥ मुसक ठाडी भई धाय भुज गहि लई अधरन पान दे उर लगाई ॥ दई एक फूलकी माल पहेरायके कही जू मैं हाथ अपुने बनाई ॥७॥ ता दिनतें लाल उरमांझ जगमग रहो रैन दिन कछुहु नाहीं सुहावे ॥ सूर किसोर यह प्रेमरस छाँडिके अंब तज कौनको नींब भावे ॥॥८॥
Bhairav
Phoolanaki mandali manohar baithe jahaan rasik
NityaPad-258
फूलनकी मंडली मनोहर बैठे जहां रसिक गिरिधारी॥ जाई जुई ओर कुन्द केतकि रायवेलि सो सरस संवारी ॥। १ ॥ चंपक बकुल गुलाब निवारी विविध भांत कीनी चित्रसारी ॥ बैठी तहां रसिकनी राधा फूलनकी पहेरें तन सारी ।।२॥ वरणवरण फूलनके आभूषण फूलनपाग बनी अतिभारी॥ गोविंदप्रभु फूले अति शोभित निरख फूली वृषभान दुलारी ॥३ ॥।
Saarang
Hari bhojan karat vinodason..|
NityaPad-078
हरि भोजन करत विनोदसों॥| करकर कोर मुखारविंद में देंत यशोदा मोदसों ॥१॥ मधु मेवा पकवान मिठाई दूध दह्लो वृत ओदसो ॥ परमानंदप्रभु भोजन करतहे भोगलग्यो संखोदकसों ॥। २॥
Aasawari
Arie aaj kamal mukh dekhyon ree jaba tain ghar
Part3-092
अरि आज कमल मुख देख्यों री जब तैं घर अंगना न सोहाई ॥ हों जमुना जल भरन गई री बिसरी भरन जल माई ॥१॥ छोरी डॉडो रोपत देख्यों मूरति रही उर छाई ॥| तब तैं खान पॉन सुधि बिसरी मिलिवे कों अकुलाई ॥२॥ मेरे जान कछू परी ठगोरी मुरली तान सुनाई ॥ “सूर स्याम” सोई हितू हमारी जो कोऊ मोहि मिलाई ॥३॥
Bilawal
Kachhu kaheen naan jaay teree unaki vikat baat .. aana aana
NityaPad-146
कछु कहीं न जाय तेरी उनकी विकट बात ॥ आन आन प्रकृत केसे बनि आवें जो तू डार डार तो हों पात पात ॥ १॥ अब कहा कहत सो कहों प्रीतमसों छांड देहों इत उतकी पांच सात ॥ अब तो एतेपर गोविंदप्रभु पिय सुमुख मनाय लेहों बातन बातन भयो प्रात ॥२॥॥
Ramkali
Dekhe kunj bhawan tey aavat . swet paradani chandan charchit raag hameer hii gawat ..1..
NityaPad-290
देखे कुंज भवन ते आवत । स्वेत परदनी चंदन चरचित राग हमीर ही गावत ॥१॥ नंद रोहिनी देखत ठाडे बाल गोविंद बुलावत ॥ आय मिले तब स्थाम मनोहर देखत उनको धावत ॥॥२॥ ठाडे खिरकमें गाय दुहावतसेननहीं में नेह जनावत । सूरदास प्रभु वेग चलो किन उर आनंदनसमावत ॥३॥
Hameer
Panghat rokenhin rahat kanhai ..
NityaPad-268
पनघट रोकेंहीं रहत कन्हाई ॥ यमुनाजल कोऊ भरन पावत देखतही फिर आई ॥॥१॥ तबही श्याम एक बुद्धिउपाई आपन रहे छिपाई ॥ तट ठाढे जेसखा संग केतिनकों 'लियोबुलाई ॥२॥ बैठारे ग्वालिन को द्रमतर आपन फिरफिर देखत ।। बडीबारभई कोई न आई सूरस्याम मनलेखत ॥३॥
Bilawal
Nandanand kunjchand kamalnen madan mohan kambukanth mandahasya badan
NityaPad-173
नंदनंद कुंजचंद कमलनेन मदन मोहन कंबुकंठ मंदहास्य बदन चारु देख री। चलत कुंतल मधुपमाल श्रुकुटि कुटिल अति रसाल लोल लोचन तिलक भाल मुकुट सरस बेस री ॥१॥ बिंबाधर मुरली राजे मधुरे सारंग बाजे खग मृग नग नाग सुन रीझत सुर शेष री। अबनि कंपे कृष्णो कहे जमुना धकित नाही बहे गिरिवरधर भेट वाम जनम सुफल लेख री ॥ २।।
Saarang
Khelan abb merrie jaay balaiya ..
NityaPad-197
खेलन अब मेरी जाय बलैया ॥ जबही मोहि देखत लरिकनसंग तबही खीजत है बलभैया ॥ १॥ मोसों कहे तात बसुदेवको देवकी तेरी मैया ।॥। मोललियो कछूदे बसुदेवहिं करकर यतन बढैया ॥ २॥ अब बाबा कहत नंदसों यशुमतिसों कहि मैया ॥| ऐसे कहि तब मोहि खिजाबत तब उठ चलल्‍्यो खिसेया ॥३॥। पाछे नंदसुनत हैं ठाडे हँसत हँसत उरलैया ॥ सूरनंद बलरामहि खीजत योसुनहरखबढैया ।।४॥।
Saarang
Abaken raakhi lehu gopal . duss dishaten pragatyau davanal
Part1-170
अबकें राखि लेहु गोपाल । दस दिशतें प्रगट्यौ दावानल उपज्यो है तिहिंकाल ॥१॥ पटकत वंश कंस तृण चटकत झपट लपट कर नाल | उड़त अँगार फूल फल पटकत झपटठत लपट कराल ॥३॥ धूम घुँध बाढ़ी घर अंबर चमकत उर मुख जाल । हरिन बराह करि पीक सारस जरत जीव बेहाल ॥३॥ तुम जिन डरौ नैन सब मूँदौ हँसि बोले नंदलाल । सूर अनल सब बदन समानौ निरमे किये व्रजलाल ॥४॥
Kedaro
Mill joo dandaa russ khelahin nandrai juu kii pore ..
Part3-326
मिल जु डंडा रस खेलहीं नंदराय जू की पोर ॥ आनंदसों मनभर रह्यौ नवल किशोरी किशोर ॥१॥ लटकत फिरत रणमगरे इत गोपी उत ग्वाल ॥ मानो छुटी मदन की मत्तगजन की ढाल ॥।२॥ गारीदेत सुहावनी इत सब गोपिका नार ॥ उत सब होलें बोलें बालक नंदकुमार ॥३॥ बाजे बहुविध बाजें ताल भृदंग उपंग ॥ झांझ झालर किन्नरी मुरली डफ मुखचंग ।|४॥ चोवा चंदन छिरकहीं अबीर ग्रुलाल सुरंग ॥ खेलत खेल गह् गद्यो लाडली लालन संग ॥५॥ मृगमद केसर घोर कें लीने कर लपटाय ॥ ओचका आवत दूरतें भाजत मुखहि लगाय ॥६।| तब वृषभान दुलारी पकरे मदन गोपाल ॥ मानो कंचन वेली लपटी स्याम तमाल ॥७॥ झूमरही चड्ुंदिशते नेंक न राखत लाज ॥ मानो भूतल उदयो नक्षत्र सहित उड़राज ॥८॥ काजरलोचन आंजके कटिपट लेंडि उतार || आलिंगन पियदेत हैं ये सब ब्रजकी नार ॥९॥ गिरिधर अधर सुधा कों कोऊ पीवत न अघाय ॥ हा हा खाउतो छांडें प्यारी कों सिरनाय ॥१०॥ झटकत गहि मोतिन लर बूझत चिबुक उठय | मन मान्यों फगुवा लियो पीतांबर दियो आय ॥£९ १॥ श्रीगोकुलगाम सुहावनों कीनी बहुविध केलि ॥ चिरजीयो दूल्हे दुलहनि मिल मन्मथ दलपेलि |॥ १ २॥| सिमिट सकल ब्रजवासी सूरसुता चले न्हान।| विमल वसन तन पहरे देत बिप्र न बहुदान ॥१३॥ कुसुम वृश्टि सुरपति करें लीला देखें आय ॥ श्रीवल्लभ चरण प्रतापते कृष्णदास मुखगाय ॥ १ ४॥।
Raayaso
Kahat pyaari radhika aheer. aaj gopal paahune aaye parosi
NityaPad-083
कहत प्यारी राधिका अहीर। आज गोपाल पाहुने आये परोसि जिमाऊं खीर ॥१॥ बहुतप्रीति अंतरगतिमेरें पलक ओट दुःख पाऊं ॥ जानत जाउ संगगिरिधरके संग मिले गुणगाऊं ॥२॥ तिहारो कोऊ बविलगनमाने लरकाईकी बात ॥ परमानंदप्रभु भवनहमारे नित उठ आवो प्रात ॥३॥
Saarang
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