top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Jhoolat nand-nandan doll .. kanak khambh, jaraai
Part3-366
झूलत नंद-नंदन डोल ॥ कनक खंभ, जराई पढुली, लगे रत्न अमोल ॥ सुभग सर्ल सुदेश डाँड़ी, रची बिधना गोल ॥ मनौ सुर-पति सुरसभातैं, पठे दियउ हिंडोल || जबह्लि झंपत, तबहि कंपति, बिहँसि लगति उरोल ॥ त्रिक्स-पति सजि चढ़े बिमाननि, निरख दै-दै ओल ॥ थके, मुख कछु कहि न आबै सकल मखकृत झोल || सखी नव- सत साज कीनन्‍्हें, बदतिं मधुरे बोल ॥ थक्‍यौ रति-पति देखि यह छबि, भयौ बहु भ्रम भोल ॥ सूर यह सुख गोप-गोपी, पियत अमृत कलोल ॥
Kalyan
Chaley anat dhokhe aaye merenso tou sakuch rahehi banegi ..
NityaPad-110
चले अनत धोखे आये मेरेंसो तो सकुच रहेही बनेगी ॥ तिहारे मिलेकी फूलपीर आवबे वांकी मोहि अवधि आस तारे भोरलो गनेगी ॥। १॥। तुम बहुनायक सबसुखदायक दोऊधाकों सोचकिये प्रीततो तनेगी ।। जाहीको सुहाग भाग ताहीको लहनो जगन्नाथप्रभु प्यारे रसमेंसनेगी ॥॥२।।
Nayaki
Sub milli aaviau gaadau bajaavau mridang aaj hamaare laljuki
Part1-016
सब मिलि आवीौ गादौ बजावौ मृदंग आज हमारे लालजूकी बरसगांठ ॥ कनक थाल भरभर मुक्ताफल लै नौछावर करवावों ॥१॥ नवनव पललव वंदनमाला द्वारदवार बैँधावन ॥ आनंदधन प्रभुकौ जन्म सुनतही लाग्यौ सुजस सुहावन ॥२)॥
Bhairav
Shrimad‌ bal‍labh roop surange... angang prati bhawanke
Part2-303
श्रीमद्‌ बल्‍लभ रूप सुरंगे।॥ अंगअंग प्रति भावनके भूषण वृन्दावन संपत्ति अंग अंगे॥१॥ दरस परस गिरिधरकी न्यांईं एनमेन ब्रजराज उछंगे॥ पदनाभ देखें बनि आबे सुधिरही रास रसाल प्रुवभंगे ॥२ ॥
Nat
Balkrishna jagahu merey pyaare ..dhru... baithi sez kahati haye janani .
NityaPad-016
बालकृष्ण जागहु मेरे प्यारे ॥ध्रु.॥ बैठी सेज कहती है जननी । बार बार मुखकमल निहारे ॥ १॥ सुन्यो वचन माता को जब ही । तनिक तनिक दोऊ नैन उघारे ॥२॥ लिये उठाय अंक भरि तब ही ॥ उष्णोदक सो वदन पखारे॥।३॥ माखन मिश्री और मलाई | ओट्यो दूध तुम लेहु दुलारे ॥४॥ विविध भांति पकवान मिठाई । आनन मेल अपुनपो बारे ॥५॥ मुख परखारि झगुली पहराई। शिर ऊपर चौतनी जब धारे ॥॥६।। डोलत अजिर मुदित मनमोहन। “ब्रज़जन' ओट भई जु निहारे ॥॥७॥
Bhairav
Phoolan kii kunjan mein
NityaPad-261
फूलन की कुंजन में फूले फूले फिरत ॥ वीनत फूल लाल ललनामिल फूलन फेंटाभरत ।॥॥१॥ पियप्यारीकी बेनीबनावत फूलनके हार शुंगार करत ॥ गोविंदप्रभु पिय प्यारी परस्पर फूले फूले विहरत ॥२॥
Saarang
Mohan raas rachyau vrindaban bhanusuta key koolen juu ..
Pustak1-326
मोहन रास रच्यौ वृंदाबन भानुसुता के कूलें जू ॥ शरद चंद विकसत मनोहर कुंज लता द्रुम फूलें जू ॥१॥ ठौर ठौर कुसुमन के गुच्छा छबि पावत अति झूलें जू ॥ बाजत ताल मृदंग चंग वर बंसीवट के मूलें जू ॥२॥ नाचत गावत मंडल कीयें सखियन मध्य अति दूलें जू ॥ सुनि धुनि अति मन मनोहर शिव विरंचि सुधि भूलें जू ॥३॥| जय जय जय यदुराय मनोहर सुर मुनि बरखत फूलें जू ॥ बूंदावन प्रभुकौ सुख निरखत मिटत सकल तन शूलें जू॥४॥
Khat
Nanda kumar laadile abb kaise chhooti jaido ..
Part3-170
नँद कुमार लाड़िले अब कैसे छूटि जैडो ॥ अब तो परे तियन बस मोहन गहेरे उसासन लैहो ॥१॥ तब छाँड़ेंगी ब्रज नारी जब पाँडन पर हा हा खैहो ॥ 'सूरदास' प्रभु गहैनों दै राधा को फणगुवा दैह्ो ॥२॥
Dhanashri
Ranijukou chhaganmagan jhoolai palana . jhumajhumaati jhoomari
Part1-093
रानीजूकौ छगनमगन झूलै पलना । झुमझुमाति झूमरि मोतिनकी किलकि किलकि हँसे नंदललना ॥१॥ खुलि रही पीत झँगुलिया सामल तन नेह रूप भीज्यौ ललना ! निरखि निरखि गावति ब्रज सुंदरि नैन हियें बसौ लल़ना ॥२॥ भीजी जरूली झलकै सोंधेसों ललकि ललकि मन ललना। जगमगात न समात हियेमें भावरी भावत ललना ॥३॥ घर न सुहाई रहौ परे नहीं काहू देखि देखि यही ललना । श्री विहलगिरिधरनलालकौ गावत भावत ललना ॥४॥
Ramkali
Jasoda pende pende dole ..
NityaPad-032
जसोदा पेंडे पेंडे डोले ॥ इत गृह काज उते सुत को डर दोऊ बात समतोलें ॥ १॥। आवहुं कुंवर तुम करो कलेऊ जननी रोहिनी बोलें।। परमानंद प्रभु फिरिकें चितयो आनंद हृदय कलोलें ॥२॥
Ramkali
Manhu kahyo satya yeh vaani .. joe chaaho vnajaki rajdhani ..1 ..
Part2-070
मानहु कह्यो सत्य यह वानी ॥ जो चाहो व्नजकी रजधानी ॥१ ॥ तबतुम मुहुं मांगे फलपावहु॥ जो तुम अपने करन जिमावहु ॥२॥ भोजन सब खेहें ग ॥ पूजत सुरपति तिनके आगें॥३॥ मेरो कहो सत्य कर मानो॥ गोवर्द्धनकी पूजाठानों ॥४॥ सुरश्याम कहि कहि समुझायो॥ नंदगोप सबके मन आयो ॥५ ॥
Bilawal
Vaake tou nayan maney chaahen pai way pyaari naheen maanat ... driganaten
NityaPad-328
वाके तो नयन मने चाहें पै वे प्यारी नहीं मानत ॥। दृगनतें रसकीहाँसी भोहें करतउदासी बैनन आन आनबानत ॥। १॥ बेतो तिहारे रस रूपकी अधीनताई दरपनले दरबराय आपवश आनत।॥। नंददासप्रभु जाकेतन भेद भयो टूटेगो मानगढ यों जानत ॥२॥
Bihagaro
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page