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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Maat jasoda dadmon bilovai pramudit baal gopal yash gaavai. . | Part1-106 | मात जसोदा दद्मों बिलोवै प्रमुदित बाल गोपाल यश गावै। .
मंदमंद अँबर घनघारे रई घमरके लावै ॥१॥ नूपुर कंकन छुद्रघंटिका रजु
आकरखत बाजै । मिश्रित ध्वनि उपजत तिहिं औसर देखि सचीपति लाजै ॥२॥
मंगलघोष सदा कुतूहल अजन जन्म हरि लीनौ | नंद जसोदाकौ सुकृत फल वपु
दिखाय सुख दीनों ॥३॥ शिव विरंचि जाके पद वंदत्त सो गोकुलके व ासी ।
परमानंददासकौ ठाकुर पलना झूले सुखरासी ॥४॥ | Aasawari |
Baishnavajan mero anga. | NityaPad-370 | बैष्णवजन मेरो अंग।
छांड कुटुंब ओर सकल पदारथ सेवाकरे फिर करे सतसंग।॥
ध्यानधरे मेरो गुण गावे नई उपजावे तान तरंग ।
निश्चय चित्त होय दृढकर बेठे कथा सुने मन अतही उमंग ।।
मम गुण सुन सुख सिंधु बढ उर प्रेमनीर बहे मानो
गंग। प्रेम पुंजमें मगन होयके निशदिनही बरसावत रंग ।।
मीन न छांडे जलकुं जेसे उनके मेरे ऐसे प्रसंग ।
सूरदास मलीन महाजल गंगा मिलि होय जात हे | Kanharo |
Pratham vilas kiau shyamaju keeno bipin biharju .. unake | Part1-306 | प्रथम विलास कियौ श्यामाजू कीनो बिपिन बिहारजू ॥ उनके
बिधकी शोभा बरनों कहत न आबै पारजू ॥१॥ बाके यूथकी गणना नाहीं
निर्गुण भक्त कहावें ॥ ताकी संख्या कहत न आवै शेषहू पार न.पावें ॥२॥
घोषघोष प्रति गलिनगलिन प्रति रंगरंग अंबर साजें ॥ कियौ शृंगार नखसिख अंग
युवती ज्यों करनी गण राजें ॥३॥ बहु पूजा लै चली वृंदावन. पान फूल
पकवानै॥ ताके यूथ मुख्य चंद्रावलि चंद्रकलासी बानै ॥४॥ पोहौंची जाय
निकुंज भवन में दरसी ब्रृंदादेवी ॥ ताके पद बदन कर माँग्यो श्यामसुंदर बर
एवी ॥५॥ तिहिंछिन प्रभुजी आप पधारे कोटिक मन्मथ मोहै ॥ अंगअंग
प्रति रूपरूप प्रति उपमा रवि शशि कोहै ॥६॥ दैजुग जाम श्याम श्यामा संग
केलि बिबिध रंग कीने ॥ उठत तरंग रंगरस उछलित दास रसिक रस पीने॥७॥ | Malav |
Aho bhatu peak leak kitt laagi.. moso kahaa durawat aalee | NityaPad-152 | अहो भटु पीक लीक कित लागी॥ मोसो कहा दुरावत आली
स्याम रंग रस पागी ॥१॥
कहें देत नैना रतनारे विरह बेदना जागी ॥
कृष्णदासप्रभु संग मिली री देखियत तू बड़भागी ।।२।। | Bilawal |
Chakrit bhayo bj vaat sunai .. punpun poochhat megh bulaai ..1.. | Part2-088 | चक्रित भयो ब्ज वात सुनाई ॥ पुनपुन पूछत मेघ बुलाई ॥१॥
कहां गयो जल प्रलय कालको॥ कहा कहे सबतन विहालको ॥२ ॥
कहा करें अपनों बलकीनो॥ व्याकुल होय रोय तब दीनों ॥३॥
दंड एक बरसे मनलाई॥ पूरण होत गगनलों आई॥४॥
पर्वतमें कोउहे अवतार॥ सुरपति मन यह करत विचार ॥५ ॥
सूर इंद्र सुरगण हंकराये।॥ आज्ञा सुनत तुरत उठधाये ॥६ ॥ | Bilawal |
Myrie kahat haye godohan... | NityaPad-297 | माईरी कहत है गोदोहन॥।
कहा करूं घर आयो न जाई देखन कान्ह मनमोहन ।॥।१॥। संध्यासमें खिरकते
निकसी देखो गोधन ठाट॥ विचही और भयो कछु संभ्रम विसराई बह वाट ॥। २॥॥
चितवत रूप चटपटी लागी घरमें रहयो नजाय ॥ परमानंद स्वामी नंदनंदन सर्वस्व॒
लियो चुराय ॥ ३॥ | Gori |
Nirakh mukh raghon dharat naan dheer .. karunawant vishal kamaldal | Part1-304 | निरख मुख राघों धरत न धीर ॥ करुणावंत विशाल कमलदल
लोचन मोचत नीर ॥१॥ बोलत कैसें न रहे मौन छ्वे विपति कटावन बीर ॥
बारह बरस नींद बन त्यागी मेरे प्रानन पीर ॥२॥ सीता हरन मरन दशरथकौ
रण बैरिन की भीर ॥ अब तो सूर सुमित्रा सुत बिन कौन लगाबै तीर ॥३॥ | Maru |
Gwalini aapnechirlehon .. | NityaPad-033 | ग्वालिनि आपनेचीरलेहों ॥
जलतेनिकसनिहारनेकव्हैदोऊककरजोर आसीसलेहो ॥ १॥।
कितहुंसीतसहत ब्रजसुंदरिहोत असित-कुशगात सबे ॥
मेरे कहें पहेरो पटअंगनव्रतविधिहीन अबे ॥।२॥
हौं अंतरयामीजानतचितकी कितदुरावत लाजकें ॥
करहों पूरणकाम कृपाकर शरदसमेंशशिरातकें ॥ ३॥
संततसूर स्वभावहमारों कित डरपतहो काममये ||
कैसी भांतिभजेकोउमोकूंतेहूंसब संसार जये ।॥४॥। | Bibhaas |
Vraj ghargai sub gopkumar .. | NityaPad-036 | ब्रज घरगई सब गोपकुमार ॥
नेकहूकहूं नहींमनलागत कामधामबिसार ॥१॥
मातपिताको डर नमानत बदतनाहिनगार ॥
हठकरत बिरझाततबजिय जननीजानतबार ॥१३॥
प्रातही सब चली उठ मिल यमुनातटसुकुमार ॥
सूरप्रभुव्रत करन पूरन आये इनकी संभार ॥। ३॥ | Ramkali |
Doll vichitra banyo nandanandan guhi guddi laaee phool .. | Part3-376 | डोल विचित्र बन्यो नंदनंदन गुहि गुद्दि लाई फूल ॥
ब्रजनारी सिमिट सब आंई अपने अपने टूल ॥ १॥ ललिता कहे सुनों मममोहन
प्रीतम प्यारी की बात || संग सहित वृषभान नंदिनी दोऊ मिल झूलो साथ
॥२॥ कोऊ एक झांझ मृदंग बजाबत कोऊ अलापत राग ॥ कोऊ मुक्तामाल
खगवारो वारत मानत भाग ॥ ३॥ छबीली छटन सुर नर मुनि मोहे गंधर्व मोहे
गान।। मगन भई व्रजनारी गावें मणन भये अति मान ॥ ४॥ इतनी कहों यथामति
मेरी प्रभु मुकुंद विलास || राधा नंद सुबन दोऊ पर बल-बल जाये दास ॥५॥ | Basant |
Begg chali saaji dall chatur chandrawati | kasab kanchuki bund raakhi | Part1-318 | बेग चलि साजि दल चतुर चंद्रावती | कसब कंचुकी बंद राखि
आनन््दकन्द नंदनंदनकुंदर मिलन को दावरी ॥१॥ नैन पंकज लोल मधुर मोहन
बोल राजत भोंह. कपोल उदधि को भावरी । चंद्रावली करत केलि मानो मन्मथ
पेलि सुरत सागर झेल सहज चढ़ि रावरी ॥२॥ चले गयंद गति नूपुर किंकिनी
बजति देख ग जवर लजित चलन को भावरी । “दास मुरारी” प्रभु कर कमल मेलि
उर जीत गिरिधरन अब प्रेम लडबावरी ॥३॥ | Kedaro |
Atee anandaras sindhu agadha . bhakti marag udyot karanko | Part1-176 | अति आनंदरस सिंधु अगाधा । भक्ति मारग उद्योत करनको
या कारन प्रगटी श्री राधा ॥१॥ राधा नाम सुक हि नहीं पायो नाम लेत मेटी
जग बाधा । 'रामदास! प्रभु श्यामसुंदरकों रासादिक लीला श्रुति साधा ॥२॥
| Bhairav |
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