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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Houn vrajavasinaki magaa. srivalalbharaj gope kull mandan aeye
Part1-118
हों ब्रजवासिनकी मगा। श्रीवललभराज गोप कुल मंडन ए दोउ घरकों जगा ॥१॥ नंदराय एक दियौ पिछौरा तामें कनक तगा । श्रीवृषभान दियौ एक टोडर हीरा जटित नगा ॥२॥ कीरति दे कुँवरकी झगुली जसुमति सुतकौ झगा । किसोरीदासकौ दियो कृपाकरि नील पीतकौ पगा ॥३॥
Dhanashri
Jembat douu rangbhare | chyaar bhantke vyanjan aaney khatras
NityaPad-082
जेंबत दोऊ रंगभरे | च्यार भांतके व्यंजन आने खटरस रुचिर्करे | १॥ गोपीजनके मंडल राजत लोकवेद विसरें।। सकलमनोरथ पूरक नंदनंदन प्रतिप्रति रूपधरें॥। ९ वासरकेलि मुदित गिरिधारी सुखविलसत सगरें।॥ लालदास प्रभु यह विधि क्रीडत भोजन अखिल करें ॥ ३॥
Todi
Adbhut natbhekh dharain yamunatat shyamsunder gunanidhaan girivardhar raas rung naayen ..
Pustak1-352
अद्भुत नटभेख धरैं यमुनातट श्यामसुंदर गुणनिधान गिरिवरधर रास रंग नायें ॥ युवतीयूथ संग लियें गावत केदारों राग अब घर बर वेणु मधुर मधुर सप्त स्वरन साचें ॥१॥ उरप तिरप लागडाट तततत तत थेई थेई उघटत शब्दावली यति भेद कोऊ न बाँचैं | चत्रभुजप्रभु बनबिलास मोहे सब सुर अकाश निरखथक्यो चंदकों रथ पश्चिम नहीं खाँचें ॥२॥
Kedaro
Chhaganmagan baare kanhaiya nenku urr dhon aure laal . banamen khelan
Part1-166
छगनमगन बारे कन्हैया नेंकु उर धों आउरे लाल । बनमें खेलन जात लाल डै रहे सब मलिन गात अपने लालकी लैहँ बलायरे लाल ॥१॥ संगके लरिका सब बनि ठनि आये यों कहेंगे कैसी है तेरी मायरे लाल | यशोदा गहत धाय बैयाँ मोहन करत नहैयाँ न्हैयाँ नंददास बलिजायरे लाल ॥२॥
Iman
Arrie een mohan kii balijaaun ..
NityaPad-074
अरी ईन मोहन की बलिजाऊं ॥ मेरे मन आनंद उठत हें फूली अंग न माऊं ॥ १॥| तन मन धन न्योंछावरि करि हो ईत के चरण गहराऊं ॥ दास गोपाल को यह वर दीजें व्रज॒ तजि अनतन जाऊं ।।२॥
Dhanshree
Yaatein maaee bhawan chhaad bunn jaiye ..| aankharas kanras batras
Part1-293
यातें माई भवन छाॉड़ बन जैये ॥| आँखरस कानरस बातरस सबरस नँदनंदन पै पैये ॥१॥ कल पल्‍लवब कर कंध बाहु धर संग मिले गुन गैयै ॥ रास बिलास बिनोद अनूपम माधौके मन भैयै ॥२॥ यह सुख सखीरी कहत नहिं आबै देखें दुख बिसरैये ॥ परमानंद स्वामीको संगम भाग्य बड़े तें पैये ॥३॥
Hameer
Piyako bean sikhawat pyaari |
Pustak1-336
पियको बीन सिखावत प्यारी | कुंज महलमें बैठी श्री राधा संग लिये ललिता री ॥१॥ पियकी अंगुरी ले अपने कर धरत त्तार पै प्राणआधारी । मध्यम पंचम सुर हि भरावत लाल लकुट कर धारी ॥२॥ रीस करत मनमें मुसुकावतत पलका पे सुंदर सुकुमारी । सखी बूंद खंभ छिप ठाडी जाली कोऊ चढी अटारी ॥३॥ जलकी फूही परत जल भीतर मेघघटा निर्तत नटकारी। मोर चकोर कोकिला गावत तेसीय सावन की अंधियारी ॥४॥ मेरी नई बीन है मोहन बंसी निदुर नाही हितकारी । ताहि ते तुमको यह सिखावत बातें करत विचार विचारी ॥५॥ सुनि प्रिया वचन स्याम जू बोले सुनि हो श्री वृषभान डुलारी । तुमारी क्रपा बिन हम बंसी धरी सो अब ही विसारी ॥६॥ सुनिपिय वचन हरखि के प्यारी सिखवत रिझवत देकर तारी । भक्त सदा करे आस दरसकी तट सोभित है भानसुता री ॥७॥
Sorat
Rasamen rahat gadiho rasikani |
NityaPad-335
रसमें रहत गडीहो रसिकनी | कनकवेलि वृषभाननंदिनी श्यामतमालचढी ।। १॥ विहरत संगलाल गिरिधरके कौनभांति पढी॥ कुंभनदास लालगिरिधर संग रतिरसकेलि बढी ।। २॥।
Kanharo
Ekrang syaam sadaa tum aajbhaye pachrang.. chandan bandan adharan
NityaPad-051
एकरंग स्याम सदा तुम आजभये पचरंग।। चंदन बंदन अधरन अंजन पीककपोल सुरंग ॥।१॥ होंतो तिहारे हाथ बिकानी तुम औरनके संग ॥ श्रीविद्डल गिरिधर बहु नायक सीखे ऐसेढंग ।।२॥
Lalit
Balmohan douu karat biyaru yashumati nirakhjaay balhari ..
NityaPad-299
बलमोहन दोऊ करत बियारू यशुमति निरखजाय बलहारी ॥ प्रेमसहित दोऊ सुनत जिमावत रोहिणी और यशुमति महतारी ॥९॥ दोऊभैया संग मिल बैठे परोस धरीहे कंचन थारी | आलस करकर कोर उठावत नयनन नींद झमक रही भारी ॥ २॥ दोऊ जननी आलस मुख निरखत तनमनधन कीनो बलहारी ॥ वारंबार जुूंभात सूरप्रभु यह छबिको कवि सके विचारी ॥।३।॥।
Kanharo
Jagolal basant badhaavan aavegi vrajnar ..
Part3-022
जागोलाल बसंत बधावन आवेगी ब्रजनार ॥ उठ हो लाल तुम करहो कलेऊ खेलनको होत अवार ॥१॥ माखन मिश्री दघि मलाई भर भर राखे कंचन थार ॥ इतनी सुनत तुरत उठे बैठे जसोमती बदन निहार ॥२॥ दोऊ भैया करत कलेऊ पाछे मैया करत सिंगार || फगुवामें मेवा धर राखे ओर धरे मोतियन के हार ॥|३॥ इतने में ब्रजबाल सबे मिल आई नंदजुके द्वार ॥ करत कुलाहल सुनत ही आतुर आए नंदकुमार ॥४॥ केसर अगर श्यामापर डारत हँसत दे दे करतार ॥ मिसही मिस अंक भरत स्यामको फणुवा दे दे नंदकुमार ॥५॥ फगुवा दिये आनंद मन मानत यह होरी को बड़ो त्योहार ॥ देत असीस सबें ब्रजवनिता हरिदास बलिहार ॥६॥
Basant
Konke bhuraaye bhor aaye hoe bhawan merey oonchi drishti kyon karo
NityaPad-144
कोनके भुराये भोर आये हो भवन मेरे ऊंची दृष्टि क्योंन करो कोनतें लजानेहो।। जाहीको भवन भावे ताहीके सिधारो कान्ह ऐसी कोन चाडपरी कोनगहि आनेहो ॥ १॥ भोरी भोरी बतियन मोहि भुरवन आये तुम गिरिधारी जू निपटसयानेहो ॥ कृष्णदासप्रभु मोहन नागर मैं लालन नीके कर जानेहो ।।२॥
Bibhaas
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