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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Tero mohan vadan giridhar laal rasikke munn bhawat lavanya
NityaPad-309
तेरो मोहन वदन गिरिधर लाल रसिकके मन भावत लावण्य सदन ॥ सुन राधे रूपरास तोहि निरखत लाजत मदन ॥१॥ सुरत सुधानिधि अधरसुधारस प्रमुदित करत अदन ॥ कृष्णदासस्वामी संग गावत रतिपति जय को कदन॥ २॥
Kalyan
Vividh basant banaaen chalaun sub dekhan kunwar kanhai ..
Part3-036
विविध बसंत बनाएं चलौं सब देखन कुँवर कन्हाई ॥ गिरिघटीयां द्रमलता सुगंध अलि ठाडे सजि सुखदाई ॥१॥ बागों केसरी चोवा सोहै सुरँग गुलाल उडाई ॥ ब्रजबालक गावति कोलाहल धुनि ब्रजाधीस” मन भाई ॥२॥
Sudhang naachat naval kishori .. theithei karat chaahat preetam
Pustak1-321
सुधंग नाचत नवल किशोरी ॥ थेईथेई करत चाहत प्रीतम दिश बदन चंद मानों तृषित चकोरी ॥१॥ तान बंधान मानमें भामिनी रीज्े श्याम कहत हो होरी ॥ हित हरिवंश परस्पर प्रीतम बरवट लियो मोहन चित चोरी ॥२॥
Bhairav
Nand kaho soodhi bhalee diwai.. menton rajkaj manlai ..15..
Part2-066
नंद कह्ो सूधि भली दिवाई॥ मेंतों राजकाज मनलाई ॥१५॥ दिनप्रति करत यहे अधमाई ॥ कुलदेवता सुरत विसराई ॥२॥ कंस दई यह लोक बडाई॥ गामदसक सिरदार कहाई ॥३ ॥ जलधि बूंद ज्यों जलधि समाई ॥ माया जहांकी तहां बिलाई ॥४ ॥ सूरदास यह कहें नंदराई ॥ चरण तुम्हारे सदां सहाई ॥५ ॥
Bilawal
Abaheeten yeh dhota chita chorat aagein aagein
NityaPad-226
अबहीतें यह ढोटा चित चोरत आगें आगें कहा करोगे ॥ नेक बडे बलहोउ बलजाऊं त्रिभुवन युवतिन के मनजु हरोगे ॥ १॥ देखनके नहेनेसे उरमें सप्तद्वीप नव्खंड रानी यशुमतिको दिखायोहै सोई सांची अनसरोगे ॥ गोरविंदप्रभुके जु नवनबैन रस सींचत मेरे जाने मनमथस्से लरोगे ॥२॥।
Saarang
Tumason koo jhagare naindlal .. chalo chalau ghar
Part1-264
तुमसों को झगरे नैंदलाल ॥ चलो चलौ घर जाएँ आपने इनतौ पकरी उलटी चाल ॥१॥ तुम रहौ घर बैठ आपुने हमतौ कहूँ न बैठनहार ॥ तुमरी जीत बहुत याही में बस करि लेत कछू पढ़ि डार॥२॥ बिगरत तुमें कहाबस मेरौ फिर फिर तुम मानौगी हार ॥ श्रीविद्दनगिरिधरनलाल तुम देखो बोली बचन सेँभार ॥३॥
Gori
Laalahi laal key laalahi lochan laalahi key mukh laalahi
NityaPad-067
लालही लाल के लालही लोचन लालही के मुख लालही बीरा॥ लाल बनी कटि काछनी लाल की लाल के शीश मुकेसी चीरा ॥१॥ लालही बागो सोहत सुन्दर लाल खड़े यमुना तट तीरा॥ गोविन्द प्रभु की सोभा निरखत लाल के कंठ विराजतहीरा ॥२॥
Dhanshree
Aaj tunn bahaare aurahi chatak .. shobha deit saras sunder yeh
Part1-355
आज तन बहारे औरही चटक ॥ शोभा देत सरस सुंदर यह चलन हंस गति लटक ॥।१॥ स्याम सरोज नैंन तेरे खटपद पीयरौ रंग टक ॥ बत्रखित भये अंग अंग फूली गई बिरह की खटक ॥२॥ कुंजभवनमें चली निडर तज लोक लाज की अटक ॥ चत्रभुज प्रभु गिरिधर नागरसों मिलवन रति रन कटक ॥३॥
Kedaro
Mangal gaavati hain vrajnari . baahiraten ghar bheetar aavat dekhat
Part1-042
मंगल गावति हैं ब्रजनारी । बाहिरतें घर भीतर आवत देखत बदन उघारी )!१) नाचत ग्वाल गोप रसभीने और नाचत नंदराय । काहू गिनत नहीं उर अंतर ब्रजजन सब सुखपाय ॥२॥ अति उच्छाह बढ्यौ सबहिनके कोऊ कित्तहूँ न समाई ॥ श्रीविड्लगिरिधरन मनोरथ सबके पूजये आई ॥३॥
Sarang
Giridhar yamuna tata kunjanmein khelat faag suhavanon
Part3-320
गिरिधर यमुना तट कुंजनमें खेलत फाग सुहावनों ग्वाल मंडली बल संगलीने आनंद प्रेम बढावनों ॥१॥| परम रुचिर उज्ज्वल वसनन ले अंगअंग भेख बनाबनों ॥ अगर सहित मृगमद गोरासों अरगजा घोर लगावनों ॥२॥ अति सुरंग केसर के रससों हाटक घटभर लावनों ॥ रत्न जटित पिचकाई भरले ब्रज वधु बनवर धावनों ॥३॥ नवसत साज सिंगार राधिका रूप अनूप दिखावनों ॥ ब्रज नारी सब जोर साथले सन्मुख गुलाल उडावनों ॥|४॥ सौरभ अधिक अबीर सेतसों भरभर मुठी चलावनों ॥ हो हो हो हो बोल सखिन संग लाल गुलाल उडावनों ॥ पटह झांझ झालर आवजडफ ताल मृदंग बजावनों || राग कल्याण जमाय सप्तस्वर तान मान सों गावनों ॥६॥ मधुमंगल बोल्यो हलधरसों अब कहामतो उपावनों ब्रजबनि तनकी सयना आगें केसेंक होय बचावन ॥७॥ तब बल दाऊ मतो रच्यो मन ललितानेंक बुलावनों वदिये चतुरजो दाव विचारे चित्तकों यह सिखावनों ॥८॥ सुन मधु मंगल ललिता टेरी नेंक यहां लों आवनों || मेजिय मांज उपाय बनायो करिये तुम मन भावनों ॥९॥ तब हरि हित ही बोली हसकें यह निश्चय ठहरावनों ॥ तुम सब दूर रहो ठाडे ब्हे हमही स्याम पकरावनों ॥१०॥ छल बल कर पकरेजु अचानक कीनों सकल खिलावनों ॥ सुबल श्रीदामा आदि सखा सब याहा को जो मिलावनों ॥१ ६॥ मनमोहन संभ्रम सन्मुख व्हे बोलत बोल सुहावनों ॥ सखा यूथ में देखी ललिता ठाड़ी करत जनाजनों ॥१२॥ प्रीतम कोंपकरन दोरी राधा गद्यो श्याम सुख छाबनों ॥ नयनन नेन मिलत मुसिकानी रहतन नेडदुराबनों ॥१३॥ युवती सब मिल झुंडन गावत भारी छंद मचावनों ॥ सुर ललना सब देख थकित भई कोन पुन्य ब्रज पावनों ।। १ 9॥ प्रमुदित मनसों अष्टयामजुर राधा पति हिलडाबनों ॥ यह रस तजजे और जो चाहे सोतो जन्म गमावनों ॥ १ ५॥ कोकविवरणिसके या सुखकों देखत दुख विसरावनों || शुकपिक मोर मधुप गण बोलत ऋतु वसंत हडुलसावनों ॥ १ ६॥ सुन बिनती सुत नंदरायके फगुवा बहुत मंगावनों ॥ यह जोरी अब चल चिरजीयो ब्रजनित हो हु बधावनों ॥१७॥ राधा कृष्ण अमृत रस सागर क्‍यों घट होय समावनों ॥ गोकुल चंद चरण पंकजरज निशदिन तन लपटावनों ॥१८॥
Kalyan
Aaj badau darbar dekhayo nandrai teree . bhayau sukh sub bhaanti
Part1-127
आज बड़ौ दरबार देखयो नंदराय तेरी । भयौ सुख सब भाँति दुख गयौ मेरे ॥९॥ बजत निशान ढोल ढाढ़िन यश गायौ ।। सोबैहै कहा उठि जसुमति सुत जायौ ॥२॥ केई देखि लिये जात कीरति तिहारी | गायनके ठाट बाट भीर भई भारी ॥३॥ सुफल फूलन फूली जसुमति रानी । जाके सर्वस दीगे वसुधा अघानी ।।४॥ माँगन जो लिये जात भीख जो तिहारी । तिहूँ लोक सुन्यों जस भयौ अतिभारी ॥५॥ अब लगु नेंम लियें रह्मो बरसानें। लैहों भीख जब पूत व्हैहे महरानें ।६॥ अबके महरि मोहि माँगनौ न कीजै लछी दास कहै मोहि दास पदवी दीजै ॥|७॥
Maroo
Bhaav binn maal nafaa nahi paave |
NityaPad-368
भाव बिन माल नफा नहि पावे | भाव बिन भक्तन को सर्वस्व भाव ही हृदय बढावे॥ भाव भक्ति सेवा सुमरन कर पुष्टिपथ में धावे। सूर भाव सबही को कारन भाव ही में हरिभावे ॥
Bihaag
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