top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Chalchal jahaan srigovardhadhar bahubidhi shobha raajain ree .. | Part1-327 | चलचल जहाँ श्रीगोवर्द्धधर बहुबिधि शोभा राजैं री ॥
नंदकिशोर यशोदानंदन कोटिमदन छबि लाजैं री ॥१॥ मोर मुकुट पीतांबर
सोहै मुख मुरली कलबाजें री ॥ श्रीमदृबल्लभ यह अवसर रसिकन शिर नित्य
गाजै री ॥३॥ | Khat |
Chhail chhabila mohana, (ree) ghoonghar baare cases .. | Part3-134 | छैल छबीला मोहना, (री) घूंघर बारे केस ॥
मोर-मुकुट, कुंडल लसे, (री) कीन््हें नटवर-भेष ॥ राखे भौंह मरोरिकै,
(री) सुँदर नैन बिसाल ॥ निरख्वि हँसनि मुसुकानिकी, (री) अतिष्टि भई
बेहाल ॥ कीर-लजावन नासिका, (री) अधर बिंबतें लाल ॥ दसन चमक
दामिनि हूँ तैं, (री) श्याम हृदय बन-माल ॥ चिबुक चित्तको हरन है, (री)
राजत ललित कपोल ॥ मारण गहि ठाढ़ौ रहै, (री) बोलत मीठे बोल ॥
चंदन खौरि बिराजई, (री) स्यामल भुजा सुचारू ॥ ग्वाल-सखा सब संग
लिये, (री) करत गुलालनि मारु ॥ इक भाजत, इक भरत है, (री) कुसुम
बरन रंग घोरि ॥ सौंधें कीच मची भली, (री) खेलत ब्रज की खोरि ॥
सुनत चलीं सब धाईकैं, (री) देखन नंद कुमार ॥ फागु साँझ-सी है रही,
(री) उड़त गुलाल अपार ॥ मिलीं तरुनि तहेँ जाईकै, (री) जहेँ बिहरत
गोपाल ॥ सूर, स्याम-सुख देखिके, (री) बिसरचौ तनु तिष्ठिं काल ॥८॥
| Goud Malhaar |
Prakat bhaye prabhu shrimad ballabh srilakshamanjuke | Part2-286 | प्रकट भये प्रभु श्रीमद् बल्लभ श्रीलक्षमणजूके
गेहरी॥ मात इलंमा ढोटा जायो रसिक शिरोमणि जेहरी ॥१ ॥ देवन दिव्य
हद बजाई॥ कुसुमन वरषत मेहरी॥ मुनि मन प्रफुल्लित करत
अंतर उपज्यो नेहरी ॥२ ॥ नारद नृत्य करत गुण गाबत श्रीमुख
कर तब गानरी॥ श्रीभागवत वेद उपनिषद बेद व्यास पुराणरी ॥३ |
मागधसूत विमल यश बोलत गंधर्व शब्द सुर तानरी ॥ याचक आय जुरे
सिंघद्वारें सुनत बधाई कानरीं॥४॥ थन्य धन्य माधवमास एकादशी
कृष्णपक्ष शुभरातरी ॥ सात घरी. उपरांत पलचालीस उपज्यो जग
विख्यातरी ॥५ ॥ श्रीलक्षमण भट अति आनंदित मनही मन मुसकातरी ॥
परमकृपाल कृपाकर आये भई अलौकिक बातरी ॥६ ॥ पुत्र उत्साह भयो
सबहिनकों पशु पक्षी त्रजमांझरी ॥ बनठनकें आईं श्नजसुंदरि मानो फूली
सांझरी ॥७ ॥ बजत निसान भेरि सहनाई ताल पखखावज झांझरी॥ तूर
मुरझ पिनाक डफ महुबर उमग उमग मन मांझरी ॥८ ॥ मोतिन चौक
पुराये बहु विध बांधी बंदनवाररी॥ सका पलल्लव पट कुसुमन
मुक्ताफल अतिसाररी ॥९॥ कहाकहों भवनकी कहेत न आवे
पाररी॥ जयजयकार करत नरनारी भक्तनहित अबताररी॥१० ॥
दानदेनकों अति आदर कर बोल सबनकों लेतरी॥ मणिमाणिक कंचन
पट भूषण मन वांछित फलदेतरी ॥११ ॥ चिरजीयो करुणानिधि बल्लभ
प्रेमसिधु-को सेतरी॥ सगुणदास गुण वरण सके को निगम पुकारत
नेतरी ॥१२॥ | Bilawal |
Palana ghar bheetar kai aayo . rattan jatit heera gaj motee | Part1-092 | पलना घर भीतर कै आयो । रतन जटित हीरा गज मोती
कुंदन दिव्य जरायौ ॥१॥ आछे शोभित बने झूमिका दच्छिन चीर बिछायौ ।
सुंदर डोरि बाँधि रेसमकी लाल सुरंग बनायो ॥२)! विप्र बोलि व्रजराज हुलसिके
शुभ मुहूर्त जो धरायो । झूलेंगे गिरिधरन श्रीविहल सबहिनके मन भायौ ॥३॥
| Ramkali |
Aliri bharat mohan jita tita mokon gohan | Part3-337 | आलीरी भरत मोहन जित तित मोकों गोहन
लाग्यो डोले ॥ मांडत बदन अबीर मुठीले औचक आय अनबोले ॥१॥
हों दृष्टि बचाय चलत हटसों पट गहि घुंघट खोले ॥ गिरिधर उर धर
सब रस लीनों बस कीनी बिन मोलें ॥२॥ | Iman |
Ghosh sundari neeke cull gaavai .. baam baahu dhari rasik kunwar | Part1-355 | घोष सुंदरी नीके कल गावै ॥ बाम बाहु धरि रसिक कुँवर
के मुरली बजाबवै नवतान सुनावै ॥१॥ हरि मूरति पद सुरस चाखत चल
अंगुलीदल गति उपजाबै ॥ गौर श्याम जोरी मनमोहन रूप कांति रतिपति
ही लजाबै ॥२॥ कमलसमैंन मृगनैंनी अंचल तरल मानबस प्रेम बढ़ावै ॥
गिरिधर पीय प्यारी की पदरज कृष्णदास न्यौछावर पावै ॥३॥ | Kedaro |
Podhe rangmahal govind .. radhikasang sharad | NityaPad-340 | पोढे रंगमहल गोविंद ॥ राधिकासंग शरद
रजनी उदित पून्योचंद ॥॥१॥| अनेक चित्र विचित्र चित्रित कोटिकोटिक बंद ॥
निरख निरख विलास विलसत दंपति रसफंद ।। २.॥ मलयचंदन अंग लेपन परस्पर
आनंद॥ कुसुम बिजना व्यार ढोरत सजनी परमानंद।॥। ३॥। | Bihaag |
Pichhvaarevhe boll sunaayon gwalin .. kamalanayan pyaaro | NityaPad-029 | पिछवारेव्हे बोल सुनायों ग्वालिन ॥ कमलनयन प्यारो
करत कलेऊ कोरन मुखलों आयो ॥|१॥ अरी मैया एक वन व्याई गैया बछरा
उहां विसरायो ॥ मुरली न लई लकुटिया न लीनी अरबराय कोऊ सखा न
बुलायो ॥२।। चकृत भई नंदजुकी रानी सत्य यह केंधों समनो आयों फूले गातन
मात रसिक बर त्रिभुवनराय शिरछत्र छायो ॥।३॥ बै ठे जाय एकांत कुंजमें कियो
विविध भांत मन भायो ॥ परमानंद सयानी ग्वालिन उलट अंक गिरिधर पिय
पायो ।।४॥। | Ramkali |
Sundervadan sadanshobhako | NityaPad-316 | सुंदरवदन सदनशोभाको
निरख नयनम्नन थाक्यो ॥| हों ठाडी वीथनहवै निकस्यो उच्कलकि झरोखन
झांक्यो ॥१॥ मोहन इक चतुराई कीनी गेंद उछारि गगन मिस ताक्यो ॥ वारोरी
लाज वैरिन भईरी मोकों मैं गमार मुख ढॉक्यो ॥२९॥ चितवन में कछू करगयो
मोतन मन न रहत क्यों राख्यो ॥ सूरदासप्रभु सर्वस्व ले गए हँसत हँसत रथ
हांक्यो ॥ ३।। | Adano |
Maaee naye khilar aaj mein dekhe chanchal chapal | Part3-204 | माई नये खिलर आज में देखे चंचल चपल
चवाई ॥ हसि मुसिकाय नयन सेनदे मोकूं पकर नचाई ॥९१।॥| कोऊ गुलचे
कोऊ करमुख मांडे गोपी करें हँसाई ॥| कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु की
मुरली लेहु छिनाई ॥श॥ | Kaafi |
Aaj nandraayaken anand bhayau. naachat gopi karat kulahal | Part1-046 | आज नंदरायकें आनंद भयौ। नाचत गोपी करत कुलाहल
मंगलचार ठयौ ॥१॥ राती पीरी चोली पहरें नौतन झूमकसारी चोवा चंदन अंग
लगाये सेंदुर माँग सँभारी ॥२॥ माखन दूध दह्मो भरि भाजन सकल ग्वाल ले
आये । बाजत बैन पखावज महुवरि गावति गीत सुहाये ॥३॥ हरद दूब अक्षत
दि कुंकुम आँगन बाढ़ी कीच । हँसत परस्पर प्रेंम मुदित मन लागलाग भुज
बीच ॥४॥ चहुँ ब ेदध्वनि करत महामुनि पंच शब्द ठमढोल । परमानंद बढ़यों
गोकुल में आनंद हदें कलोल ॥५॥ | Sarang |
Kamalanayan pyaari avadhar taana jaane .. | Pustak1-333 | कमलनयन प्यारी अवधर तान जाने ॥
अलाग लाग सुराग रागिणी बहुत अनागत आने ॥१॥
रसिकराय शिर मौर गुणिनमें गुण तुमही पा ॥
कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर हरत लाल सबकौ मन जबही करत हो गा ॥२॥ | Malav |
Page 1 of 1
bottom of page
